कक्षा 12 भौतिकी: अध्याय 15 संचार व्यवस्था NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 15, 'संचार व्यवस्था' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें व्योम तरंगों के उपयोग, UHF आवृत्तियों के प्रसारण, अंकीय संकेतों की प्रकृति, दृष्टिरेखीय संचार की आवश्यकताओं और आयाम मॉड्यूलेशन की गणना जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण दिया गया है, जिसमें आवश्यक सूत्र और गणनाएँ शामिल हैं। यह संसाधन छात्रों को संचार प्रणालियों की मूलभूत अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका प्रदान करने में मदद करेगा।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. संचार व्यवस्था

Chapter summary

अध्याय 15 'संचार व्यवस्था' के ये NCERT समाधान छात्रों को संचार के विभिन्न तरीकों और संबंधित भौतिकी की गहरी समझ प्रदान करते हैं। इसमें व्योम तरंगों और आकाश तरंगों द्वारा प्रसारण, अंकीय संकेतों की विशेषताएँ, दृष्टिरेखीय संचार की सीमाएँ और आयाम मॉड्यूलेशन की गणना जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। समाधानों को स्पष्टता और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को अभ्यास करने और अवधारणाओं को मजबूत करने में सहायता मिलती है।

Learning outcomes

  • व्योम तरंगों के उपयोग के लिए उपयुक्त आवृत्तियों की पहचान करना।
  • विभिन्न आवृत्ति बैंडों के लिए उपयुक्त प्रसारण विधियों को समझना।
  • अंकीय संकेतों की विशेषताओं और द्विआधारी पद्धति के उपयोग का विश्लेषण करना।
  • दृष्टिरेखीय संचार की सीमाओं और सेवा क्षेत्र की गणना करना।
  • आयाम मॉड्यूलेशन के लिए मॉड्यूलेशन सूचकांक और शिखर वोल्टेज की गणना करना।
  • आयाम मॉड्यूलेटेड तरंग रूप को आलेखित करना और मॉड्यूलेशन सूचकांक ज्ञात करना।

Topics covered

Paper topics

  • संचार व्यवस्था का परिचय
  • व्योम तरंगें (Sky Waves)
  • UHF आवृत्तियों का प्रसारण
  • अंकीय सिग्नल
  • दृष्टिरेखीय संचार (Line-of-Sight Communication)
  • प्रेषक और अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई
  • सेवा क्षेत्र की गणना
  • आयाम मॉड्यूलेशन (Amplitude Modulation)
  • मॉड्यूलन सूचकांक
  • वाहक तरंग
  • संदेश सिग्नल
  • आयाम मॉड्यूलेटेड तरंग रूप

Important topics

  • व्योम तरंगें और उनकी आवृत्ति सीमा
  • दृष्टिरेखीय संचार की सीमाएँ और सेवा क्षेत्र की गणना
  • आयाम मॉड्यूलेशन की अवधारणा और मॉड्यूलन सूचकांक
  • अंकीय संकेतों की विशेषताएँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

व्योम तरंगों के उपयोग द्वारा विवासन के पार संचार के लिए निम्नलिखित आवृत्तियों में से कौन-सी आवृत्ति उपयुक्त रहेगी?
  1. 10 kHz
  2. 10 MHz
  3. 1 GHz
  4. 1000 GHz
Solution: व्योम तरंगों का उपयोग करके लंबी दूरी के संचार के लिए, आवृत्तियाँ आमतौर पर 3 MHz से 30 MHz की सीमा में होती हैं। ये आवृत्तियाँ आयनमंडल से परावर्तित हो सकती हैं, जिससे वे पृथ्वी की वक्रता की बाधा को पार कर पाती हैं।

दिए गए विकल्पों में:

  • 10 kHz बहुत कम आवृत्ति है और इसके लिए बहुत बड़े ऐन्टेना की आवश्यकता होगी, जो अव्यावहारिक है।
  • 10 MHz इस सीमा के भीतर आती है और व्योम तरंग संचार के लिए उपयुक्त है।
  • 1 GHz और 1000 GHz (या 1 THz) बहुत उच्च आवृत्तियाँ हैं जो आयनमंडल को भेदकर अंतरिक्ष में चली जाती हैं और व्योम तरंग संचार के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
इसलिए, 10 MHz आवृत्ति व्योम तरंगों द्वारा संचार के लिए सबसे उपयुक्त है।

सही विकल्प है: (b) 10 MHz

प्रश्न 2

UHF (अति उच्च आवृत्ति) परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण प्रायः किसके द्वारा होता है?
  1. भू-तरंगें
  2. व्योम तरंगें
  3. पृष्ठीय तरंगें
  4. आकाश तरंगें
Solution: UHF (Ultra High Frequency) परिसर में आवृत्तियाँ 300 MHz से 3 GHz तक होती हैं। इन उच्च आवृत्तियों पर, तरंगें आयनमंडल से परावर्तित नहीं होती हैं और पृथ्वी की वक्रता के कारण सीधी रेखा में यात्रा करती हैं। इस प्रकार के प्रसारण को आकाश तरंग (Sky Wave) या दृष्टिरेखीय तरंग (Line-of-Sight Wave) प्रसारण कहा जाता है। भू-तरंगें कम आवृत्तियों (लगभग 2 MHz तक) के लिए उपयुक्त होती हैं, और व्योम तरंगें मध्यम आवृत्तियों (3-30 MHz) के लिए। पृष्ठीय तरंगें भी निम्न आवृत्तियों के लिए होती हैं।

अतः, UHF आवृत्तियों का प्रसारण मुख्य रूप से आकाश तरंगों द्वारा होता है।

सही विकल्प है: (d) आकाश तरंगें

प्रश्न 3

अंकीय सिगनल:
  1. मानों का संतत समुच्चय प्रदान नहीं करते।
  2. मानों को विविक्त चरणों के रूप में निरूपित करते हैं।
  3. द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं।
  4. दशमलव के साथ द्विआधारी पद्धति का भी उपयोग करते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से सत्य हैं?
  1. केवल (i) तथा (ii)
  2. केवल (ii) तथा (iii)
  3. (i), (ii) तथा (iii) परन्तु (iv) नहीं
  4. (i), (ii), (iii) तथा (iv) सभी
Solution: अंकीय सिग्नल (Digital Signals) जानकारी को असतत (discrete) मानों के रूप में निरूपित करते हैं, न कि निरंतर (continuous) मानों के रूप में।
  • (i) यह कथन सत्य है क्योंकि अंकीय सिग्नल मानों का एक संतत समुच्चय प्रदान नहीं करते हैं।
  • (ii) यह कथन सत्य है क्योंकि अंकीय सिग्नल मानों को असतत चरणों या स्तरों में निरूपित करते हैं।
  • (iii) यह कथन सत्य है क्योंकि अंकीय प्रणालियों में सबसे आम प्रतिनिधित्व द्विआधारी पद्धति (binary system) है, जिसमें केवल दो मान (0 और 1) होते हैं।
  • (iv) यह कथन सत्य नहीं है। जबकि अंकीय सिग्नल द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं, वे सीधे दशमलव पद्धति का उपयोग नहीं करते हैं। दशमलव संख्याओं को द्विआधारी में परिवर्तित किया जाता है। इसलिए, यह कहना कि वे 'दशमलव के साथ द्विआधारी पद्धति का भी उपयोग करते हैं' भ्रामक है, क्योंकि मूल प्रतिनिधित्व द्विआधारी ही होता है।
अतः, कथन (i), (ii), और (iii) सत्य हैं, जबकि (iv) सत्य नहीं है।

सही विकल्प है: (c) (i), (ii) तथा (iii) परन्तु (iv) नहीं

प्रश्न 4

दृष्टिरेखीय संचार के लिए क्या यह आवश्यक है कि प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई के बराबर हो? कोई TV प्रेषक ऐन्टीना 81 m ऊँचा है। यदि अभिग्राही ऐन्टीना भू-स्तर पर है तो यह कितने क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करेगा? (पृथ्वी की त्रिज्या लगभग R_e = 6.4 \times 10^6 m लीजिए)
Solution:

नहीं, दृष्टिरेखीय संचार के लिए यह आवश्यक नहीं है कि प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई के बराबर हो। वास्तव में, अधिकतम कवरेज प्राप्त करने के लिए, दोनों ऐन्टेना को यथासंभव ऊँचा रखा जाता है।

प्रेषक ऐन्टीना द्वारा सेवा प्रदान किया जाने वाला अधिकतम क्षितिज (d_T) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:

d_T = \sqrt{2R_e h_T}

जहाँ R_e पृथ्वी की त्रिज्या है और h_T प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई है।

दिया गया है:

h_T = 81 \text{ m}

R_e = 6.4 \times 10^6 \text{ m}

प्रेषक ऐन्टीना से अधिकतम दूरी की गणना:

d_T = \sqrt{2 \times (6.4 \times 10^6 \text{ m}) \times (81 \text{ m})}

d_T = \sqrt{1036.8 \times 10^6 \text{ m}^2}

d_T \approx 3220 \text{ m} = 3.22 \text{ km}

यह वह अधिकतम दूरी है जहाँ तक प्रेषक सिग्नल भेज सकता है। यदि अभिग्राही ऐन्टीना भू-स्तर पर है, तो यह प्रेषक से अधिकतम d_T दूरी पर स्थित हो सकता है। सेवा क्षेत्र एक वृत्त होता है जिसका केंद्र प्रेषक ऐन्टीना के नीचे पृथ्वी पर स्थित होता है और जिसकी त्रिज्या d_T होती है।

सेवा-क्षेत्रफल (A) की गणना निम्न सूत्र से की जाती है:

A = \pi d_T^2

A = \pi \times (3.22 \text{ km})^2

A \approx 3.14 \times 10.37 \text{ km}^2

A \approx 32.58 \text{ km}^2

वैकल्पिक रूप से, यदि हम सीधे सूत्र A = \pi \cdot 2Rh_T का उपयोग करें (जो A = \pi d_T^2 = \pi (2Rh_T) से आता है):

A = \pi \times 2 \times (6.4 \times 10^6 \text{ m}) \times (81 \text{ m})

A = 3.14 \times 1036.8 \times 10^6 \text{ m}^2

A = 3258 \times 10^6 \text{ m}^2

इसे वर्ग किलोमीटर में बदलने के लिए, 1 \text{ km} = 1000 \text{ m}, इसलिए 1 \text{ km}^2 = (1000 \text{ m})^2 = 10^6 \text{ m}^2.

A = 3258 \text{ km}^2

उत्तर: नहीं, यह आवश्यक नहीं है। प्रेषक ऐन्टीना 81 m ऊँचाई के साथ लगभग 3258 \text{ km}^2 के क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करेगा।

प्रश्न 5

12V शिखर वोल्टता की वाहक तरंग का उपयोग किसी संदेश सिगनल के प्रेषण के लिए किया गया है। मॉड्यूलन सूचकांक 75% के लिए मॉड्यूलक सिगनल की शिखर वोल्टता कितनी होनी चाहिए?
Solution:

आयाम मॉड्यूलेशन (Amplitude Modulation) में, मॉड्यूलन सूचकांक (m_a) को वाहक तरंग के आयाम (E_c) और संदेश सिग्नल के आयाम (E_m) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:

m_a = \frac{E_m}{E_c}

यहाँ, हमें मॉड्यूलेटेड सिग्नल की शिखर वोल्टता (E_m) ज्ञात करनी है।

दिया गया है:

  • वाहक तरंग की शिखर वोल्टता, E_c = 12 \text{ V}
  • मॉड्यूलन सूचकांक, m_a = 75\% = 0.75

मॉड्यूलक सिग्नल का शिखर मान (E_m) ज्ञात करने के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर:

E_m = m_a \times E_c

मान रखने पर:

E_m = 0.75 \times 12 \text{ V}

E_m = 9 \text{ V}

उत्तर: मॉड्यूलक सिग्नल की शिखर वोल्टता 9 V होनी चाहिए।

प्रश्न 6

चित्र 15.1 में दर्शाए अनुसार कोई मॉड्यूलक सिगनल वर्ग तरंग है। दिया गया है कि वाहक तरंग c(t) = 2\sin(8\pi t) V है।
  1. आयाम माडुलित तरंग रूप आलेखित कीजिए।
  2. मॉडुलेशन सूचकांक क्या है?
Solution:

दिया गया मॉड्यूलक सिग्नल एक वर्ग तरंग है जिसका आयाम 1 V है (चित्र 15.1 से)। वाहक तरंग c(t) = 2\sin(8\pi t) V है।

वाहक तरंग की कोणीय आवृत्ति \omega = 8\pi \text{ rad/s} है।

वाहक तरंग की आवृत्ति f_c = \frac{\omega}{2\pi} = \frac{8\pi}{2\pi} = 4 \text{ Hz} है।

वाहक तरंग का आयाम E_c = 2 \text{ V} है।

मॉड्यूलक सिग्नल (वर्ग तरंग) का आयाम m_0 = 1 \text{ V} है।

  1. आयाम माडुलित तरंग रूप आलेखित कीजिए:

    आयाम मॉड्यूलेशन में, वाहक तरंग के आयाम को संदेश सिग्नल के अनुसार बदला जाता है। चूँकि संदेश सिग्नल एक वर्ग तरंग है, वाहक तरंग का आयाम दो मानों के बीच बदलेगा: E_c + m_0 और E_c - m_0

    अधिकतम आयाम = E_c + m_0 = 2 \text{ V} + 1 \text{ V} = 3 \text{ V}

    न्यूनतम आयाम = E_c - m_0 = 2 \text{ V} - 1 \text{ V} = 1 \text{ V}

    चूंकि संदेश सिग्नल का आयाम (1 V) वाहक तरंग के आयाम (2 V) से कम है, इसलिए नकारात्मक मॉड्यूलेशन नहीं होगा। आयाम मॉड्यूलेटेड तरंग का ऊपरी एनवेलप संदेश सिग्नल का अनुसरण करेगा। वाहक तरंग की आवृत्ति (4 Hz) संदेश सिग्नल की आवृत्ति (मान लीजिए 1 Hz, क्योंकि यह एक वर्ग तरंग है जो 0.5 सेकंड के अंतराल पर बदलती है) से बहुत अधिक है।

    आलेखित तरंग में, वाहक तरंग की उच्च आवृत्ति (4 Hz) दिखाई देगी, लेकिन उसका आयाम संदेश सिग्नल (वर्ग तरंग) के अनुसार 3 V और 1 V के बीच बदलेगा। चित्र 15.2 में यही दर्शाया गया है।

  2. मॉडुलेशन सूचकांक क्या है?

    मॉड्यूलेशन सूचकांक (m_a) को वाहक तरंग के आयाम (E_c) और संदेश सिग्नल के आयाम (m_0) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:

    m_a = \frac{m_0}{E_c}

    दिए गए मानों के अनुसार:

    m_0 = 1 \text{ V}

    E_c = 2 \text{ V}

    m_a = \frac{1 \text{ V}}{2 \text{ V}} = 0.5

उत्तर: मॉड्यूलेशन सूचकांक 0.5 है।

Common mistakes

  • आवृत्तियों और तरंग प्रसार विधियों के बीच संबंध को गलत समझना।
  • अंकीय और एनालॉग संकेतों के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • दृष्टिरेखीय संचार की दूरी की गणना में पृथ्वी की त्रिज्या का सही उपयोग न करना।
  • आयाम मॉड्यूलेशन में मॉड्यूलेशन सूचकांक की गणना में त्रुटियाँ करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के हल में प्रयुक्त सूत्रों को ध्यान से समझें और उन्हें अपनी नोटबुक में लिखें।
  • आवृत्तियों (kHz, MHz, GHz) और उनके उपयोगों के बीच संबंध को याद करें।
  • दृष्टिरेखीय संचार के लिए सेवा क्षेत्र की गणना के सूत्र का अभ्यास करें।
  • आयाम मॉड्यूलेशन से संबंधित गणनाओं को हल करने के लिए दिए गए उदाहरणों का अनुसरण करें।

Practice MCQs

Q1. व्योम तरंगों के उपयोग द्वारा संचार के लिए कौन सी आवृत्ति उपयुक्त है?

Q2. UHF (अति उच्च आवृत्ति) परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण सामान्यतः किस विधि द्वारा होता है?

Q3. अंकीय सिग्नल की मुख्य विशेषता क्या है?

Q4. यदि एक TV प्रेषक ऐन्टीना 81 m ऊँचा है और अभिग्राही ऐन्टीना भू-स्तर पर है, तो प्रेषक का सेवा क्षेत्र लगभग कितना होगा? (R_e = 6.4 x 10^6 m)

Q5. किसी संदेश सिग्नल के प्रेषण के लिए 12V शिखर वोल्टता वाली वाहक तरंग का उपयोग किया जाता है। यदि मॉड्यूलन सूचकांक 75% है, तो मॉड्यूलेटेड सिग्नल की शिखर वोल्टता क्या होगी?

Frequently asked questions

संचार व्यवस्था में व्योम तरंगों का क्या महत्व है?

व्योम तरंगें (3 MHz से 30 MHz) आयनमंडल से परावर्तित होती हैं, जिससे लंबी दूरी के रेडियो संचार संभव हो पाते हैं। ये तरंगें पृथ्वी की वक्रता की सीमा से परे संचार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

दृष्टिरेखीय संचार की मुख्य सीमा क्या है?

दृष्टिरेखीय संचार की मुख्य सीमा पृथ्वी की वक्रता है। ट्रांसमिशन और रिसेप्शन के बीच सीधी रेखा पथ आवश्यक है, जो एक सीमित दूरी तक ही संभव है। ऐन्टीना की ऊँचाई इस सीमा को बढ़ा सकती है।

अंकीय सिग्नल और एनालॉग सिग्नल में क्या अंतर है?

एनालॉग सिग्नल समय के साथ निरंतर बदलते रहते हैं, जबकि अंकीय सिग्नल असतत मानों (आमतौर पर 0 और 1) का उपयोग करके जानकारी को निरूपित करते हैं।

आयाम मॉड्यूलेशन (AM) क्या है?

आयाम मॉड्यूलेशन में, संदेश सिग्नल के अनुसार वाहक तरंग के आयाम को बदला जाता है। मॉड्यूलन सूचकांक यह बताता है कि वाहक तरंग का आयाम कितना बदला गया है।

कक्षा 12 भौतिकी के लिए ये NCERT समाधान कैसे सहायक हैं?

ये समाधान छात्रों को 'संचार व्यवस्था' अध्याय के प्रत्येक प्रश्न को समझने और हल करने में मदद करते हैं। इनमें स्पष्टीकरण, सूत्र और गणनाएँ शामिल हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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