CBSE Class 12 Sanskrit NCERT Solutions: Chapter 6 सुधामुचः वाचः
This set of NCERT Solutions for CBSE Class 12 Sanskrit, Chapter 6, titled 'सुधामुचः वाचः' (Sweet-Speaking Words), provides detailed answers and explanations for the exercises in the chapter. The chapter focuses on understanding Sanskrit grammar, vocabulary, and literary concepts through various exercises. Students will find explanations for matching related lines, answering questions in a single word, and performing sandhi (joining words) with explanations of the rules. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the Sanskrit language, improve their comprehension skills, and prepare effectively for their board examinations by offering clear and step-by-step guidance.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. सुधामुचः वाचः |
Chapter summary
Chapter 6, 'सुधामुचः वाचः', of the CBSE Class 12 Sanskrit textbook focuses on the importance of virtuous speech and conduct. The NCERT Solutions cover exercises that involve matching related verses, answering specific questions concisely in Sanskrit, and understanding the rules of sandhi (word joining). These solutions aim to enhance students' understanding of Sanskrit grammar and literary appreciation, providing a clear path to mastering the chapter's content for academic success.
Learning outcomes
- Understand the concept of virtuous speech ('सुधामुचः वाचः').
- Practice matching related Sanskrit verses and phrases.
- Develop the ability to answer Sanskrit questions with single words.
- Learn and apply the rules of Sandhi in Sanskrit.
- Enhance vocabulary and comprehension of Sanskrit literature.
Topics covered
Paper topics
- Virtuous Speech
- Moral Conduct
- Testing of Character
- Value of Knowledge
- Importance of Good Counsel
- Sandhi Rules
- Sanskrit Grammar
- Verse Comprehension
- Vocabulary Building
Important topics
- Understanding 'सुधामुचः वाचः'
- Application of Sandhi rules
- Interpreting verses for single-word answers
- Moral values presented in the chapter
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
'अ' स्तम्भः 'ब' स्तम्भः
- करणं परोपकरणं येषां
- तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते
- जलं जलस्थानगतं च शुष्यति
- सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो
- वदनं प्रसादसदनं सदयं हृदयं
- शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात् ।
- सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिम्
- व्रजन्ति ते मूढिधयः पराभवं
'अ' स्तम्भः 'ब' स्तम्भः
- करणं परोपकरणं येषां
- तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते
- जलं जलस्थानगतं च शुष्यति
- सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो
- वदनं प्रसादसदनं सदयं हृदयं
- शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात् ।
- सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिम्
- व्रजन्ति ते मूढिधयः पराभवं
यहाँ 'अ' स्तम्भ की पंक्तियों का 'ब' स्तम्भ की पंक्तियों के साथ उचित मिलान प्रस्तुत है:
'अ' स्तम्भः 'ब' स्तम्भः
- करणं परोपकरणं येषां - (घ) केषां न ते वन्द्याः? (अर्थात् जो परोपकार करते हैं, वे वन्दनीय क्यों नहीं हैं?)
- तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते - (ज) त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा। (अर्थात् पुरुष की परीक्षा त्याग, शील, गुण और कर्म से चार प्रकार से होती है।)
- जलं जलस्थानगतं च शुष्यति - (क) हुतं च दत्तं च सदैव तिष्ठति। (यह पंक्ति जल के सूखने के संदर्भ में नहीं है, बल्कि दान और आहुति के महत्व को दर्शाती है। मूल पाठ में यह पंक्ति जल के सूखने से संबंधित हो सकती है, परन्तु दिए गए विकल्पों में यह सबसे कम असंगत है। जल अपने स्थान पर होने पर भी सूख जाता है।)
- सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो - (ख) यद्यस्ति किं मृत्युना? (अर्थात् यदि उत्तम विद्या है, तो धन से क्या प्रयोजन है? और यदि अपयश है, तो मृत्यु से क्या भय?)
- वदनं प्रसादसदनं सदयं हृदयं - (छ) सुधामुचो वाचः। (अर्थात् जिसका मुख प्रसन्नता का घर है, हृदय दयालु है, उसकी वाणी अमृत के समान होती है।)
- शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात् । - (ग) सुबद्धमूलाः निपतन्ति पादपाः। (अर्थात् समय के साथ शिक्षा क्षीण हो जाती है, जैसे जड़ें मजबूत होने पर भी वृक्ष गिर जाते हैं। यह पंक्ति शिक्षा के क्षरण को दर्शाती है।)
- सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिम् - (च) नृपेष्वमात्येषु च सर्वसम्पदः। (अर्थात् जो सदा अनुकूल रहते हैं, वे राजाओं और मंत्रियों में सभी सम्पदाओं को प्रिय बनाते हैं।)
- व्रजन्ति ते मूढधियः पराभवं - (ङ) भवन्ति मायाविषु ये न मायिनः। (अर्थात् जो मायावी लोगों के बीच मायावी नहीं बनते, वे बुद्धिमान होते हैं। मूर्ख बुद्धि वाले लोग पराजित होते हैं।)
संशोधित मिलान:
- करणं परोपकरणं येषां - (घ) केषां न ते वन्द्याः?
- तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते - (ज) त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।
- जलं जलस्थानगतं च शुष्यति - (ग) सुबद्धमूलाः निपतन्ति पादपाः। (यह जल के सूखने के संदर्भ में अधिक उपयुक्त है, क्योंकि मजबूत जड़ों वाले वृक्ष भी गिर जाते हैं, उसी प्रकार जल भी सूख जाता है।)
- सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो - (ख) यद्यस्ति किं मृत्युना?
- वदनं प्रसादसदनं सदयं हृदयं - (छ) सुधामुचो वाचः।
- शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात् । - (क) हुतं च दत्तं च सदैव तिष्ठति। (यह पंक्ति शिक्षा के क्षरण के संदर्भ में कम उपयुक्त है, परन्तु दिए गए विकल्पों में से यह सबसे कम असंगत है। इसका अर्थ है कि जो दिया और दान किया गया है, वह सदा रहता है।)
- सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिम् - (च) नृपेष्वमात्येषु च सर्वसम्पदः।
- व्रजन्ति ते मूढधियः पराभवं - (ङ) भवन्ति मायाविषु ये न मायिनः।
प्रश्न 2
i. वन्द्यानां जनानां मुखं कीदृशं भवति?
ii. केषां वाणी सुधामयी कथिता?
iii. कालपर्ययात् का क्षयं गच्छति?
iv. कीदृशाः पादपाः अपि निपतन्ति?
v. सुवर्णस्य परीक्षणं कतिभिः प्रकारैः भवति?
vi. पवित्रे मनसि केषाम् आवश्यकता न भवति?
vii. मृत्योः अपि कष्टतरं किम् भवति?
viii. कस्यां सत्याम् अन्यैः धनैः प्रयोजनं न भवति?
ix. केषु मायिनः इति भवितव्यम्?
x. यः अधिपं साधु न उपदिशति स कः उच्यते?
यहाँ दिए गए प्रश्नों के एक-एक शब्द में उत्तर प्रस्तुत हैं:
- i. वन्द्यानां जनानां मुखं प्रसादसदनम् भवति। (वन्दनीय लोगों का मुख प्रसन्नता से युक्त होता है।)
- ii. वन्द्यानाम् वाणी सुधामयी कथिता। (वन्दनीय लोगों की वाणी अमृत के समान कही गई है।)
- iii. कालपर्ययात् शिक्षा क्षयं गच्छति। (समय बीतने के साथ शिक्षा का क्षय होता है।)
- iv. सुबद्धमूलाः पादपाः अपि निपतन्ति। (मजबूत जड़ों वाले वृक्ष भी गिर जाते हैं।)
- v. सुवर्णस्य परीक्षणं चतुर्भिः प्रकारैः भवति। (सोने की परीक्षा चार प्रकार से होती है।)
- vi. पवित्रे मनसि तीर्थानाम् आवश्यकता न भवति। (पवित्र मन में तीर्थों की आवश्यकता नहीं होती।)
- vii. मृत्योः अपि कष्टतरं अपयशः भवति। (मृत्यु से भी अधिक कष्टदायक अपयश होता है।)
- viii. सद्विद्यायाम् सत्याम् अन्यैः धनैः प्रयोजनं न भवति। (उत्तम विद्या के होने पर अन्य धन की आवश्यकता नहीं होती।)
- ix. मायाविषु मायिनः इति भवितव्यम्। (मायावी लोगों के बीच मायावी होना चाहिए।)
- x. यः अधिपं साधु न उपदिशति सः किंसखा उच्यते। (जो राजा को ठीक से उपदेश नहीं देता, वह किंसखा (व्यर्थ मित्र) कहलाता है।)
प्रश्न 3
i. लोभश्चेत्
लोभः + चेत्
: श्
ii. सत् + विद्या
iii. इव + इषवः
यहाँ दिए गए शब्दों में संधि कार्य और संबंधित नियमों का विवरण है:
- i. लोभश्चेत् विग्रह: लोभः + चेत् संधि: विसर्ग संधि (व्यञ्जन संधि का एक भेद)। जब विसर्ग के बाद 'श्' या 'ष' हो, तो विसर्ग 'श्' या 'ष' में बदल जाता है। यहाँ 'चेत्' का 'च्' होने पर विसर्ग 'श्' में परिवर्तित हो गया है। नियम: यदि विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में 'श्', 'ष्', 'स्' हो, तो विसर्ग उसी वर्ण में बदल जाता है। यदि विसर्ग के बाद 'च' या 'छ' हो तो विसर्ग 'श्' में बदल जाता है। परिणाम: लोभः + चेत् लोभश् + चेत् लोभश्चेत् (यहाँ 'श्' का 'श्च' में परिवर्तन हुआ है, जो कि एक विशिष्ट नियम है जहाँ विसर्ग के बाद 'च' होने पर 'श्' हो जाता है।)
- ii. सत् + विद्या संधि: व्यञ्जन संधि। जब 'त्' के बाद 'व' या 'य' जैसे व्यञ्जन आते हैं, तो 'त्' उसी वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है या कुछ विशिष्ट नियम लागू होते हैं। यहाँ 'त्' के बाद 'व' है। नियम: यदि 'त्' के बाद 'व' आता है, तो 'त्' का 'द्' हो जाता है। परिणाम: सत् + विद्या सद् + विद्या सद्विद्या
- iii. इव + इषवः संधि: दीर्घ स्वर संधि। जब दो समान स्वर एक साथ आते हैं, तो वे मिलकर दीर्घ स्वर बनाते हैं। यहाँ 'व' का 'अ' और 'इ' का 'इ' मिलकर 'ए' (गुण संधि) या 'ऐ' (वृद्धि संधि) नहीं बनाते, बल्कि यह एक अपवाद या विशिष्ट संयोजन हो सकता है। दिए गए संदर्भ में, यह संभवतः दो शब्दों का संयोजन है जहाँ संधि नियम स्पष्ट नहीं है या यह एक विशेष प्रयोग है। यदि हम सामान्य नियमों को देखें, तो 'इव' का अंतिम 'अ' और 'इषवः' का 'इ' मिलकर 'ए' (गुण संधि) बनना चाहिए, जिससे 'इवेषवः' बने। परन्तु यदि यह 'इव' (जैसे) और 'इषवः' (बाण) का संयोजन है, तो यह एक अलग अर्थ दे सकता है। दिए गए स्रोत के अनुसार, यह संभवतः 'इव' + 'इषवः' 'इवेषवः' होगा, जो गुण संधि का उदाहरण है। हालाँकि, यदि प्रश्न का आशय कुछ और है, तो स्पष्टीकरण आवश्यक है। दिए गए उत्तर के अनुसार, यह संभवतः 'इवेषवः' है। नियम: गुण संधि - अ/आ के बाद इ/ई आने पर 'ए' होता है। परिणाम: इव + इषवः इवेषवः
Common mistakes
- Incorrectly matching related verses due to misinterpretation.
- Errors in forming single-word answers from longer sentences.
- Misapplication of Sandhi rules, leading to incorrect word formation.
- Difficulty in understanding the context of verses to answer questions.
Revision tips
- Review the meaning of each verse before attempting the matching exercise.
- Practice writing single-word answers by identifying the key noun or adjective.
- Memorize the Sandhi rules and practice them with the given examples.
- Read the chapter summary and key takeaways to reinforce understanding.
Practice MCQs
Q1. वन्द्यानां जनानां मुखं कीदृशं भवति?
Explanation: The solution states that the face of venerable people is 'प्रसादसदनम्' (full of grace/pleasantness).
Q2. कालपर्ययात् का क्षयं गच्छति?
Explanation: According to the text, 'शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात्', meaning education diminishes with the passage of time.
Q3. सुवर्णस्य परीक्षणं कतिभिः प्रकारैः भवति?
Explanation: The text mentions that a person is tested in four ways ('चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते'), which implies the testing of gold or character.
Q4. सद्विद्यायां सत्यां अन्यैः धनैः प्रयोजनं न भवति। इत्यत्र 'सद्विद्या' इति पदस्य अर्थः अस्ति:
Explanation: 'सद्विद्या' refers to good or excellent knowledge/education, implying that with it, other forms of wealth are not as crucial.
Q5. यः अधिपं साधु न उपदिशति स कः उच्यते?
Explanation: The text states that one who does not advise the king properly is called 'किंसखा' (a useless friend).
Frequently asked questions
What is the main theme of Chapter 6, 'सुधामुचः वाचः'?
The main theme of 'सुधामुचः वाचः' is the importance of virtuous and pleasant speech, along with righteous conduct and the true values in life, such as knowledge over wealth and good counsel.
How do the NCERT Solutions for this chapter help students?
These solutions provide clear, step-by-step answers to all exercises, including matching, single-word answers, and Sandhi rules, helping students understand the concepts and prepare for exams.
What are the key grammatical concepts covered in the exercises?
The primary grammatical concept covered is Sandhi (joining of words), with explanations of the rules applied in specific examples.
Are the questions in the NCERT Solutions exactly the same as in the textbook?
Yes, the questions are preserved exactly as in the textbook, with expanded wording for clarity where needed, and the solutions are rewritten to be more comprehensive.
What is the significance of 'चतुर्भिः' in the context of testing?
'चतुर्भिः' (by four) refers to the four ways in which a person or substance, like gold, is tested for its true quality or worth.
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