कक्षा 12 संस्कृत: उत्तिष्ठत जाग्रत - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 संस्कृत के "उत्तिष्ठत जाग्रत" पाठ के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ सत्य, अहिंसा, अतिथि सत्कार और आत्म-ज्ञान जैसे महत्वपूर्ण भारतीय मूल्यों पर केंद्रित है। समाधानों में श्लोकों का अन्वय, भावार्थ और सरलार्थ शामिल हैं, जो छात्रों को श्लोकों के गहन अर्थ को समझने में मदद करते हैं। इसमें शरीर, बुद्धि, आत्मा और मन की शुद्धि के विभिन्न साधनों का भी वर्णन किया गया है, जैसे जल, ज्ञान, अहिंसा और सत्य। यह खंड छात्रों को इन शाश्वत जीवन मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने और मानव कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो छात्रों को पाठ की अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectसंस्कृत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. उत्तिष्ठत जाग्रत

Chapter summary

कक्षा 12 संस्कृत के पाठ "उत्तिष्ठत जाग्रत" के ये NCERT समाधान छात्रों को भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों से परिचित कराते हैं। इसमें अतिथि सत्कार, सत्य और अहिंसा के महत्व पर जोर दिया गया है। समाधान श्लोकों के पदच्छेद, अन्वय, भावार्थ और सरलार्थ प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को श्लोकों की व्याख्या समझने में आसानी होती है। यह पाठ शरीर, बुद्धि, आत्मा और मन की शुद्धि के विभिन्न तरीकों को भी स्पष्ट करता है, जो छात्रों को नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • श्लोकों का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ समझने में सक्षम होना।
  • सत्य, अहिंसा और अतिथि सत्कार जैसे जीवन मूल्यों के महत्व को समझना।
  • शरीर, बुद्धि, आत्मा और मन की शुद्धि के साधनों का ज्ञान प्राप्त करना।
  • भारतीय संस्कृति के शाश्वत संदेशों को आत्मसात करना।
  • श्लोकों के सरलार्थ के माध्यम से पाठ के अर्थ को स्पष्ट करना।

Topics covered

Paper topics

  • अतिथि सत्कार
  • सत्य का महत्व
  • अहिंसा परमो धर्मः
  • जीवन मूल्य
  • शरीर की शुद्धि
  • बुद्धि की शुद्धि
  • आत्मा की शुद्धि
  • मन की शुद्धि
  • ज्ञान का महत्व
  • सत्य का मार्ग (देवयान)
  • आत्म-ज्ञान
  • सर्वभूतेषु आत्मभाव

Important topics

  • सत्य और अहिंसा का महत्व
  • अतिथियों का सत्कार
  • शरीर, बुद्धि, आत्मा और मन की शुद्धि के साधन
  • सत्य का मार्ग और उसका महत्व
  • सर्वभूतेषु आत्मभाव की अवधारणा

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Questions and Solutions

पाठ 1: उत्तिष्ठत जाग्रत

प्रिय छात्रों, हमारे भारत देश में विश्व को एक परिवार के समान माना जाता है। हम अतिथियों का देवता के समान सम्मान करते हैं। सत्य और अहिंसा भारत के दो विशेष गुण हैं। सत्य ही हमारा आदर्श है। हम भारतीय सभी प्राणियों को अपने समान समझते हैं। अहिंसा परम धर्म है। आज यह आवश्यक है कि हम अज्ञान की निद्रा को त्याग कर इन जीवन मूल्यों को अपने जीवन में धारण करें और निरंतर मानव कल्याण के लिए तत्पर रहें। यही धर्मसूत्रों, स्मृतियों और उपनिषदों का संदेश है जो इस पाठ में संकलित किया गया है।

समाधान:

यह पाठ भारतीय संस्कृति के महान आदर्शों और जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालता है। यह बताता है कि कैसे भारत विश्व को एक परिवार मानता है और अतिथियों का देवतुल्य सत्कार करता है। सत्य और अहिंसा को भारत के दो प्रमुख गुण बताया गया है, जिनमें सत्य को सर्वोच्च आदर्श माना गया है। पाठ इस बात पर जोर देता है कि सभी भारतीयों को सभी प्राणियों को आत्मवत् (अपने समान) समझना चाहिए और अहिंसा को अपना परम धर्म मानना चाहिए। आज के समय की आवश्यकता है कि हम अज्ञानता की नींद से जागें और इन शाश्वत जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारें, जिससे निरंतर मानव मात्र का कल्याण हो सके। यह संदेश धर्मसूत्रों, स्मृतियों और उपनिषदों से लिया गया है, जो हमारे प्राचीन ग्रंथों का सार है।

श्लोक 1

तृणानि भूमिरुदकं वाक्चतुर्थी च सूनृता। एतान्यपि सतां गेहे नोच्छिद्यन्ते कदाचन।।

समाधान:

पदच्छेदः – तृणानि, भूमिः, उदकम्, वाक् चतुर्थी च, सूनृता। एतानि अपि, सताम्, गेहे, न, उच्छिद्यन्ते, कदाचन।।

अन्वयः – तृणानि, भूमिः, उदकम्, चतुर्थी च सूनृता वाक्। सताम् गेहे एतानि कदाचन अपि न उच्छिद्यन्ते।

भावार्थ – सज्जनों के घरों में अतिथियों के लिए आसन (तृण), रहने के लिए स्थान (भूमि), पीने के लिए जल (उदक) और चौथी वस्तु के रूप में सत्य व मधुर वाणी (सूनृता वाक्) की कभी भी कमी नहीं होती है। वे सदा अतिथियों के सत्कार के लिए तत्पर रहते हैं।

सरलार्थ – सज्जन व्यक्तियों के घरों में अतिथियों के लिए बैठने के लिए तिनकों का आसन, रहने के लिए स्थान, पीने के लिए पानी और सत्य तथा मधुर वाणी से उनका स्वागत – ये चार चीजें कभी भी समाप्त नहीं होतीं। वे हमेशा अतिथियों का सत्कार करने के लिए तैयार रहते हैं।

श्लोक 2

अदुभिः शुध्यन्ति गात्राणि, बुद्धिः ज्ञानेन शुध्यति। अहिंसया च भूतात्मा मनः सत्येन शुध्यति।।

समाधान:

पदच्छेदः— अद्भिः शुध्यन्ति गात्राणि, बुद्धिः ज्ञानेन शुध्यति। अहिंसया च भूतात्मा, मनः सत्येन शुध्यति।।

अन्वयः— गात्राणि अद्भिः शुध्यन्ति, बुद्धिः ज्ञानेन शुध्यति, भूतात्मा च अहिंसया (शुध्यति), मनः सत्येन शुध्यति।

भावार्थ— हमारे शरीर जल से स्वच्छ और पवित्र होते हैं। हमारी बुद्धि ज्ञान प्राप्त करने से शुद्ध होती है। जैसे-जैसे हम ज्ञान प्राप्त करते हैं, हमारी बुद्धि और अधिक पवित्र होती जाती है। जीवात्मा अहिंसा के आचरण से शुद्ध होता है, और मन सत्य के व्यवहार से पवित्र होता है।

सरलार्थ— हमारे शरीर जल से शुद्ध होते हैं, बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है, और आत्मा अहिंसा के द्वारा शुद्ध होती है। इसी प्रकार, मन सत्य के आचरण से पवित्र होता है।

श्लोक 3

सत्यमेव जयति नानृतम्, सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामाः, यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्।।

समाधान:

पदच्छेदः— सत्यम् एव जयति न अनृतम्, सत्येन पन्थाः विततः देवयानः। येन आक्रमन्ति ऋषयः हि आप्तकामाः, यत्र तत् सत्यस्य परमम् निधानम्।।

अन्वयः— सत्यम् एव जयति, अनृतम् न। देवयानः पन्थाः सत्येन विततः। आप्तकामाः ऋषयः येन (मार्गेण) अत्र आक्रमन्ति तत् हि सत्यस्य परमम् निधानम्।।

भावार्थ— सत्य की ही सदा विजय होती है, असत्य की कभी नहीं। देवयान (अर्थात् महापुरुषों का मार्ग) सत्य से ही विस्तृत है। जिन (महापुरुषों) ने अपनी कामनाओं को पूर्ण कर लिया है, वे ऋषि जिस मार्ग से जाते हैं और जहाँ पहुँचते हैं, वही सत्य का परम आश्रय (स्थान) है।

सरलार्थ— केवल सत्य की ही जीत होती है, झूठ की कभी नहीं। देवयान नामक मार्ग सत्य के द्वारा ही फैला हुआ है। जिन ऋषियों की कामनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, वे जिस मार्ग से (इस लोक में) आते हैं और जहाँ पहुँचते हैं, वही सत्य का सबसे बड़ा निवास स्थान है।

श्लोक 4

यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति, सर्वभूतेषु चात्मानम् ततो न विजुगुप्सते।।

समाधान:

पदच्छेदः- यः तु सर्वाणि भूतानि आत्मनि एव अनुपश्यति, सर्वभूतेषु च आत्मानम् ततः न विजुगुप्सते।।

अन्वयः— यः तु सर्वाणि भूतानि आत्मनि एव अनुपश्यति, सर्वभूतेषु च आत्मानम् (अनुपश्यति) ततः न विजुगुप्सते।

भावार्थ— जो मनुष्य सभी प्राणियों को अपने भीतर (अपने आत्मा में) देखता है और सभी प्राणियों में अपने आत्मा को देखता है, वह किसी से भी घृणा नहीं करता। वह सभी के प्रति प्रेम और समानता का भाव रखता है और सभी के कल्याण के लिए तत्पर रहता है।

सरलार्थ— जो व्यक्ति सभी प्राणियों को अपने आत्मा में ही देखता है और अपने आत्मा को सभी प्राणियों में देखता है, वह फिर किसी से भी घृणा नहीं करता। इसका अर्थ है कि वह सभी जीवों में एक ही आत्मा का वास देखता है और इसलिए सबके प्रति समान भाव रखता है।

Common mistakes

  • श्लोकों के शाब्दिक अर्थ पर अधिक ध्यान देना और भावार्थ को अनदेखा करना।
  • पदच्छेद और अन्वय को सही ढंग से न समझ पाना।
  • सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को न समझना।
  • श्लोकों में प्रयुक्त संस्कृत व्याकरणिक संरचनाओं को समझने में कठिनाई।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक के पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ को ध्यान से पढ़ें और समझें।
  • सत्य, अहिंसा और अतिथि सत्कार जैसे मुख्य मूल्यों को अपने शब्दों में लिखें।
  • शरीर, बुद्धि, आत्मा और मन की शुद्धि से संबंधित श्लोकों के अर्थ को स्पष्ट करें।
  • पाठ के अंत में दिए गए शब्दार्थों की सूची को दोहराएं।

Practice MCQs

Q1. भारत देश अतिथीन् कथं सम्मानयति?

Q2. भारतीय संस्कृतिस्य विशिष्टगुणद्वयम् किम् अस्ति?

Q3. सज्जनानां गृहेषु अतिथीनां कृते कस्य अभावः न भवति?

Q4. शरीरं केन शुध्यति?

Q5. मनः केन शुध्यति?

Q6. सत्येन पन्थाः कीदृशः विततः?

Frequently asked questions

यह पाठ 'उत्तिष्ठत जाग्रत' किस बारे में है?

यह पाठ भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों जैसे सत्य, अहिंसा, अतिथि सत्कार और आत्म-ज्ञान पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे इन मूल्यों को जीवन में धारण करके मानव कल्याण के लिए कार्य किया जा सकता है।

श्लोक 'अदुभिः शुध्यन्ति गात्राणि...' का क्या अर्थ है?

इस श्लोक का अर्थ है कि शरीर जल से, बुद्धि ज्ञान से, आत्मा अहिंसा से और मन सत्य से शुद्ध होता है। यह शुद्धि के विभिन्न साधनों को दर्शाता है।

सज्जनों के घर में अतिथियों के लिए किन चीजों की कभी कमी नहीं होती?

सज्जनों के घरों में अतिथियों के लिए आसन, रहने का स्थान, जल और मधुर वाणी से सत्कार की कभी कमी नहीं होती।

सत्य की जीत का क्या महत्व है?

पाठ के अनुसार, सत्य की ही सदा जीत होती है और झूठ कभी अंत में विजय प्राप्त नहीं करता। सत्य ही महापुरुषों का मार्ग है और परम स्थान है।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ के श्लोकों के अर्थ को गहराई से समझने, मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए विस्तृत व्याख्या और स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं।

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