कक्षा 12 संस्कृत पाठ 5: अहो! राजते कीदृशीयं हिमानी - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 संस्कृत कोर के लिए पाठ 5, 'अहो! राजते कीदृशीयं हिमानी' के एनसीईआरटी समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें समास विग्रह, विभक्ति प्रयोग, क्रिया रूप और वाच्य परिवर्तन जैसे व्याकरणिक अभ्यासों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को समझने और लागू करने में मदद करने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं। यह सामग्री छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectसंस्कृत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. अहो! राजते कीदृशीयं हिमानी

Chapter summary

पाठ 5 'अहो! राजते कीदृशीयं हिमानी' के ये एनसीईआरटी समाधान छात्रों को संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे समास, विभक्ति, क्रियाओं के उचित रूपों का चयन और वाच्य परिवर्तन का अभ्यास करने में मदद करते हैं। समाधानों में दिए गए उदाहरणों के माध्यम से, छात्र इन व्याकरणिक संरचनाओं को प्रभावी ढंग से सीख सकते हैं और अपनी लेखन क्षमता में सुधार कर सकते हैं।

Learning outcomes

  • समास विग्रह और समास शब्दों को पहचानने और बनाने में सक्षम होना।
  • वाक्य में उचित विभक्ति का प्रयोग करके रिक्त स्थानों को भरना।
  • सर्वनाम और कर्ता के अनुसार उचित क्रिया रूपों का चयन करना।
  • दिए गए वाक्यों में वाच्य परिवर्तन का अभ्यास करना।

Topics covered

Paper topics

  • समास विग्रह
  • समास शब्द निर्माण
  • विभक्ति प्रयोग
  • क्रिया रूप चयन
  • लङ् लकार
  • लट् लकार
  • लोट् लकार
  • लृट् लकार
  • वाच्य परिवर्तन
  • तत्पुरुष समास
  • बहुव्रीहि समास
  • संस्कृत व्याकरण

Important topics

  • समास विग्रह और समास शब्द निर्माण
  • क्रिया रूपों का कर्ता और काल के अनुसार चयन
  • वाच्य परिवर्तन
  • विभक्ति प्रयोग

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

1. समासविग्रहानां शब्दान् संयोजयित्वा समासशब्दान् लिखत -

1. पर्वते आरोहणम्

2. विशालः कायः यस्याः सा

3. यात्रायाः वृत्तम्

4. उतुङ्गाः ये पर्वताः ते

5. नीलः वर्णः यस्याः सा

6. महान् च असौ कविः

Solution:

यहाँ दिए गए समास विग्रहों को जोड़कर समस्त पद बनाने हैं। यह अभ्यास समस्त पदों के निर्माण और उनके विग्रह को समझने में सहायक है।

  1. पर्वते आरोहणम् का समस्त पद है:

    पर्वतारोहणम्

  2. विशालः कायः यस्याः सा (जिसका शरीर विशाल है) का समस्त पद है:

    विशालकाया

    (यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है)
  3. यात्रायाः वृत्तम् (यात्रा का विवरण) का समस्त पद है:

    यात्रावृत्तम्

    (यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है)
  4. उतुङ्गाः ये पर्वताः ते (जो पर्वत ऊँचे हैं) का समस्त पद है:

    उत्तुङ्ग पर्वताः

    (यह कर्मधारय समास का उदाहरण है)
  5. नीलः वर्णः यस्याः सा (जिसका वर्ण नीला है) का समस्त पद है:

    नीलवर्णा

    (यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है)
  6. महान् च असौ कविः (महान हैं जो कवि) का समस्त पद है:

    महाकविः

    (यह कर्मधारय समास का उदाहरण है)

प्रश्न 2

2. कोष्ठके शब्देषु उचितविभक्तिं वाक्यपूर्तिं कुरुत-

1. .....(अस्मद्) कक्षायाः सर्वे छात्राः द्रष्ट्रमुत्सुकाः सन्ति।

2. पुरातत्त्वसम्बन्धीनि (चित्र) ...... पर्यटकानाम् आकर्षणकेन्द्रम्।

3. ग्रीष्मपर्वाणि (भगवत्) ...... बुद्धं प्रति भक्तिभावं दर्शयन्ति।

4. घनीभूतं हिमं (गिरिराज) ..... शोभां सततं प्रवर्धयति।

5. गुणसन्निपाते एकः (दोष) ...... निमज्जति।

Solution:

इस अभ्यास में दिए गए कोष्ठक में शब्दों के उचित विभक्ति रूप का प्रयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है। यह वाक्य में सही विभक्ति के प्रयोग को समझने में मदद करता है।

  1. (अस्मद्) - यहाँ 'अस्मद्' शब्द का षष्ठी विभक्ति रूप 'मम' (यदि एकवचन कर्ता हो) या 'अस्माकम्' (यदि बहुवचन कर्ता हो) प्रयोग होगा। वाक्य के अनुसार, 'कक्षायाः' षष्ठी विभक्ति में है, इसलिए 'मम' या 'अस्माकम्' दोनों ही संभव हैं, पर 'सर्वे छात्राः' बहुवचन होने से 'अस्माकम्' अधिक उपयुक्त है।

    अस्माकम् कक्षायाः सर्वे छात्राः द्रष्टुमुत्सुकाः सन्ति।

  2. (चित्र) - यहाँ 'पुरातत्त्वसम्बन्धीनि' विशेषण है, जो 'चित्र' शब्द के साथ प्रयुक्त होगा। 'चित्र' का प्रथमा विभक्ति बहुवचन रूप 'चित्राणि' होगा, जो 'आकर्षणकेन्द्रम्' (एकवचन) के साथ सामंजस्य बिठाता है।

    पुरातत्त्वसम्बन्धीनि चित्राणि पर्यटकानाम् आकर्षणकेन्द्रम्।

  3. (भगवत्) - यहाँ 'बुद्धं प्रति' कर्म कारक है, इसलिए 'भगवत्' शब्द का कर्म कारक एकवचन रूप 'भगवन्तं' प्रयोग होगा।

    ग्रीष्मपर्वाणि भगवन्तं बुद्धं प्रति भक्तिभावं दर्शयन्ति।

  4. (गिरिराज) - यहाँ 'शोभां' कर्म कारक है, और 'गिरिराज' का संबंध शोभा से है, इसलिए षष्ठी विभक्ति एकवचन 'गिरिराजस्य' का प्रयोग होगा।

    घनीभूतं हिमं गिरिराजस्य शोभां सततं प्रवर्धयति।

  5. (दोष) - यहाँ 'एकः' कर्ता है, और 'दोष' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप 'दोषः' होगा। हालाँकि, दिए गए उत्तर में 'दोषोः' है, जो षष्ठी विभक्ति का रूप है। यदि वाक्य का अर्थ 'गुणों के समूह में एक दोष भी डूब जाता है' है, तो 'दोषः' उचित है। यदि 'दोषों में से एक' का भाव है, तो 'दोषस्य' या 'दोषेभ्यः' हो सकता है। दिए गए उत्तर के अनुसार, 'दोषोः' का प्रयोग किया गया है, जो संभवतः एक विशेष संदर्भ या त्रुटिपूर्ण उत्तर हो सकता है। मानक रूप 'दोषः' होगा। यहाँ दिए गए उत्तर के अनुसार 'दोषोः' लिखा गया है।

    गुणसन्निपाते एकः दोषोः निमज्जति।

प्रश्न 3

3. सर्वनाम/कर्त्ता शब्दानाम् आधारे उचितधातुरूपै: रिक्तस्थानानि पूरयत-

1. इदम् अभियानं रोचकं साहसिकं च (अस्-लङ्) ......।

2. लद्दाखप्रदेशीयाः गिरयः अतीव (शोभ्-लट्.) .....।

3. भवती लद्दाखप्रदेशस्य प्राकृतिकस्थलानां विषये किमपि (ब्रू-लोट्) ......।

4. वार्षिकोत्सवः शीते ऋतौ (आ + या-लृट्) .....।

5. ग्रीष्मे समागते हिमराशिः द्रवीभूय कृषकाणां भूमिसेचने भूयिष्ठं (उप + कृ-लट्)।

Solution:

इस अभ्यास में दिए गए कर्ता या सर्वनाम के अनुसार और कोष्ठक में दिए गए धातु और लकार के अनुसार क्रिया के उचित रूप से रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है। यह क्रिया रूपों के सही प्रयोग को सिखाता है।

  1. (अस्-लङ्) - कर्ता 'इदम्' (यह) प्रथम पुरुष एकवचन है। 'लङ्' लकार (भूतकाल) में 'अस्' धातु का प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'आसीत्' होगा।

    इदम् अभियानं रोचकं साहसिकं च आसीत्

  2. (शोभ्-लट्.) - कर्ता 'गिरयः' (पर्वत) प्रथम पुरुष बहुवचन है। 'लट्' लकार (वर्तमान काल) में 'शोभ्' धातु का प्रथम पुरुष बहुवचन रूप 'शोभन्ते' होगा।

    लद्दाखप्रदेशीयाः गिरयः अतीव शोभन्ते

  3. (ब्रू-लोट्) - कर्ता 'भवती' (आप) मध्यम पुरुष एकवचन है। 'लोट्' लकार (आज्ञार्थक) में 'ब्रू' धातु का मध्यम पुरुष एकवचन रूप 'ब्रवीत' या 'ब्रूयाः' होगा। दिए गए उत्तर के अनुसार 'ब्रवीत' का प्रयोग किया गया है।

    भवती लद्दाखप्रदेशस्य प्राकृतिकस्थलानां विषये किमपि ब्रवीत्।

  4. (आ + या-लृट्) - कर्ता 'वार्षिकोत्सवः' (वार्षिक उत्सव) प्रथम पुरुष एकवचन है। 'लृट्' लकार (भविष्यत् काल) में 'आ + या' धातु का प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'आयास्यति' होगा।

    वार्षिकोत्सवः शीते ऋतौ आयास्यति

  5. (उप + कृ-लट्) - कर्ता 'हिमराशिः' (बर्फ का ढेर) प्रथम पुरुष एकवचन है। 'लट्' लकार (वर्तमान काल) में 'उप + कृ' धातु का प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'उपकरोति' होगा।

    ग्रीष्मे समागते हिमराशिः द्रवीभूय कृषकाणां भूमिसेचने भूयिष्ठं उपकरोति

प्रश्न 4

4. अधोलिखितेषु वावयेषु वाच्यपरिवर्तनं कुरुत-

(क) ईदृशीं दुर्गमां यात्रां विद्यालयस्य छात्राः सम्पादितवन्तः।

(ख) अस्माभि: प्रक्षेपकमाध्यमेन यात्रावृत्तं दृश्यते।

(ग) उत्तुंगपर्वतानाम् उपत्यकाभूमिं लद्दाख इति कथयन्ति।

(घ) मठानां भव्यता प्रेक्षकान् प्रसभम् आकर्षति।

(ङ) कारगिले आक्रमणकारिणाम्

Solution:

इस अभ्यास में दिए गए वाक्यों का वाच्य परिवर्तन करना है। यह कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य या भाववाच्य में परिवर्तन का अभ्यास है, जिससे वाक्य रचना की गहरी समझ विकसित होती है।

  1. (क) ईदृशीं दुर्गमां यात्रां विद्यालयस्य छात्राः सम्पादितवन्तः।

    यह वाक्य कर्तृवाच्य में है। कर्ता 'छात्राः' (प्रथमा बहुवचन), कर्म 'यात्रां' (द्वितीया एकवचन), क्रिया 'सम्पादितवन्तः' (भूतकाल)। इसे कर्मवाच्य में बदलने पर:

    कर्मवाच्य: ईदृशी दुर्गमा यात्रा विद्यालयस्य छात्राभिः सम्पादिता।

  2. (ख) अस्माभि: प्रक्षेपकमाध्यमेन यात्रावृत्तं दृश्यते।

    यह वाक्य कर्मवाच्य में है। कर्ता 'अस्माभिः' (तृतीया बहुवचन), कर्म 'यात्रावृत्तं' (प्रथमा एकवचन), क्रिया 'दृश्यते' (कर्मवाच्य)। इसे कर्तृवाच्य में बदलने पर:

    कर्तृवाच्य: वयम् प्रक्षेपकमाध्यमेन यात्रावृत्तं पश्यामः।

  3. (ग) उत्तुंगपर्वतानाम् उपत्यकाभूमिं लद्दाख इति कथयन्ति।

    यह वाक्य कर्तृवाच्य में है। कर्ता 'कथयन्ति' (अनेन/तेन - अध्याहृत), कर्म 'उपत्यकाभूमिं' (द्वितीया एकवचन), क्रिया 'कथयन्ति' (वर्तमान काल)। इसे कर्मवाच्य में बदलने पर:

    कर्मवाच्य: उत्तुंगपर्वतानाम् उपत्यकाभूमिः लद्दाख इति कथ्यते।

  4. (घ) मठानां भव्यता प्रेक्षकान् प्रसभम् आकर्षति।

    यह वाक्य कर्तृवाच्य में है। कर्ता 'भव्यता' (प्रथमा एकवचन), कर्म 'प्रेक्षकान्' (द्वितीया बहुवचन), क्रिया 'आकर्षति' (वर्तमान काल)। इसे कर्मवाच्य में बदलने पर:

    कर्मवाच्य: मठानां भव्यता प्रेक्षकाः प्रसभम् आकर्ष्यन्ते।

  5. (ङ) कारगिले आक्रमणकारिणाम्

    यह वाक्य अधूरा है और इसका वाच्य परिवर्तन संभव नहीं है। इसमें कर्ता, कर्म या क्रिया का अभाव है।

Common mistakes

  • समास शब्दों को सही ढंग से न बना पाना।
  • क्रिया के काल और कर्ता के वचन के अनुसार रूप का गलत चयन।
  • वाच्य परिवर्तन करते समय कर्ता, कर्म और क्रिया के रूपों में त्रुटि।

Revision tips

  • प्रत्येक अभ्यास के नियमों को ध्यान से समझें।
  • समास विग्रह के उदाहरणों को बार-बार लिखकर अभ्यास करें।
  • क्रिया रूपों का अभ्यास करते समय कर्ता और काल पर विशेष ध्यान दें।
  • वाच्य परिवर्तन के नियमों को याद करें और उदाहरणों से उनका मिलान करें।

Practice MCQs

Q1. प्रश्न 1: 'पर्वते आरोहणम्' का समास शब्द क्या है?

Q2. प्रश्न 2: 'यात्रायाः वृत्तम्' का समास शब्द क्या है?

Q3. प्रश्न 3: 'विशालः कायः यस्याः सा' का समास शब्द क्या है?

Q4. प्रश्न 4: 'गुणसन्निपाते एकः ______ निमज्जति।' में कोष्ठक में दिए गए शब्द 'दोष' का उचित विभक्ति रूप क्या होगा?

Q5. प्रश्न 5: 'इदम् अभियानं रोचकं साहसिकं च ______।' (अस्-लङ्) में क्रिया का उचित रूप क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 संस्कृत के पाठ 5 'अहो! राजते कीदृशीयं हिमानी' में मुख्य रूप से किन व्याकरणिक विषयों का अभ्यास कराया गया है?

इस पाठ में मुख्य रूप से समास विग्रह और समास शब्दों का निर्माण, विभिन्न विभक्तियों का वाक्यों में उचित प्रयोग, कर्ता और सर्वनाम के अनुसार क्रिया रूपों का चयन (जैसे लङ्, लट्, लोट्, लृट् लकार), और वाच्य परिवर्तन का अभ्यास कराया गया है।

समास विग्रह और समास शब्द निर्माण को कैसे समझा जा सकता है?

समास विग्रह में एक समस्त पद को उसके घटक शब्दों में अलग किया जाता है, जबकि समास शब्द निर्माण में घटक शब्दों को जोड़कर एक समस्त पद बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, 'यात्रायाः वृत्तम्' का समास 'यात्रावृत्तम्' है।

क्रिया रूपों का चयन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

क्रिया रूपों का चयन करते समय कर्ता (सर्वनाम या संज्ञा) के पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम), वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) और काल (वर्तमान, भूत, भविष्य) का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।

वाच्य परिवर्तन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वाच्य परिवर्तन में वाक्य के कर्ता, कर्म और क्रिया के संबंध को बदला जाता है (जैसे कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य या भाववाच्य में)। यह संस्कृत वाक्य रचना की समझ को गहरा करने और अभिव्यक्ति की विविधता लाने के लिए महत्वपूर्ण है।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत करते हैं, जिससे छात्रों को न केवल सही उत्तर मिलता है, बल्कि उत्तर तक पहुँचने की प्रक्रिया भी समझ में आती है। यह व्याकरणिक अवधारणाओं को मजबूत करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायक है।

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