CBSE Class 12 Sanskrit NCERT Solutions: पाठ 4 दूरदृष्टिः फलप्रदा
This chapter, 'दूरदृष्टिः फलप्रदा' (Farsightedness Yields Fruit), from CBSE Class 12 Sanskrit, delves into the importance of foresight and planning through a narrative. The NCERT Solutions provide detailed explanations and answers to the exercises, focusing on understanding Sanskrit grammar, vocabulary, and sentence construction. Students will learn to identify pronouns and their antecedents, analyze dialogues, and comprehend the consequences of actions based on foresight or lack thereof. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the Sanskrit language and prepare effectively for their board examinations by offering clear, step-by-step guidance.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 4. दूरदृष्टिः फलप्रदा |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit, Chapter 4, 'दूरदृष्टिः फलप्रदा', focuses on the theme of foresight. The exercises involve identifying pronouns and their referents, understanding dialogues between characters (like Anagatavidhata, Pratyutpannamati, and Yadbhavishya), and analyzing the consequences of timely action versus procrastination. The solutions clarify grammatical concepts and provide answers to application-based questions, aiding students in comprehending the chapter's moral and linguistic aspects.
Learning outcomes
- Understand the concept of foresight and its importance.
- Identify and analyze pronoun usage in Sanskrit sentences.
- Comprehend dialogues and character interactions.
- Analyze the consequences of proactive vs. reactive decision-making.
- Practice Sanskrit grammar and vocabulary through application-based questions.
Topics covered
Paper topics
- Foresight and its importance
- Pronoun identification and usage
- Character analysis (Anagatavidhata, Pratyutpannamati, Yadbhavishya)
- Dialogue comprehension
- Consequences of actions
- Sanskrit grammar
- Vocabulary building
Important topics
- The concept of 'दूरदृष्टिः फलप्रदा'
- Pronoun references
- Analysis of dialogues
- Moral implications of foresight
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Questions and Solutions
अनुप्रयोगः (Application)
कालिदास वर्ग और भास वर्ग। कालिदास वर्ग के प्रश्नों के उत्तर भास वर्ग, और भास वर्ग के प्रश्नों के उत्तर कालिदास वर्ग एक पद में देगा।
भासवर्गः कालिदासवर्गः
- (क) जलाशय में कितने मछलियाँ रहती थीं?
- (ख) प्रभातकाल में कौन आकर मछलियों का विनाश करेंगे?
- (ग) खारा जल कौन पीते हैं?
- (घ) यद्भविष्य कैसा सरोवर छोड़ना नहीं चाहता?
- (ङ) कौन बहुत मछलियों वाला था?
- (च) सुरक्षित कैसे नष्ट होता है?
- (छ) कहाँ विसर्जित अनाथ भी जीवित रहता है?
- (ज) जो मछली सरोवर नहीं छोड़ती, उसका नाम क्या है?
- (झ) सरोवर को किसने निर्मत्स्य (बिना मछलियों वाला) बना दिया?
- (ञ) मछुआरों ने जाल से किसका आलोडन (खोज) किया?
इस प्रश्न में, छात्रों को दो काल्पनिक वर्गों, 'कालिदास वर्ग' और 'भास वर्ग' में विभाजित करने की कल्पना की गई है। इन वर्गों के बीच प्रश्न-उत्तर का एक खेल खेला जाता है, जहाँ एक वर्ग प्रश्न पूछता है और दूसरा वर्ग उसका उत्तर देता है। यहाँ दिए गए प्रश्न और उत्तर इसी खेल के प्रारूप को दर्शाते हैं।
कालिदास वर्ग (प्रश्न)
- (ख) प्रभातकाल में कौन आकर मछलियों का विनाश करेंगे?
- (घ) यद्भविष्य कैसा सरोवर छोड़ना नहीं चाहता?
- (च) सुरक्षित कैसे नष्ट होता है?
- (ज) जो मछली सरोवर नहीं छोड़ती, उसका नाम क्या है?
- (ञ) मछुआरों ने जाल से किसका आलोडन (खोज) किया?
भास वर्ग (उत्तर)
- (क) तीन (मछलियाँ)
- (ग) मछलियाँ
- (ङ) सरोवर (हृदः)
- (छ) वन में
- (झ) मछुआरों द्वारा
स्पष्टीकरण: यह एक पहेलीनुमा प्रश्न-उत्तर सत्र है जहाँ उत्तर प्रश्न के साथ युग्मित नहीं हैं, बल्कि एक विशिष्ट प्रारूप का पालन करते हैं। उदाहरण के लिए, प्रश्न (ख) का उत्तर 'मत्स्यजीविनः' (मछुआरों) है, जो कि प्रश्न (ञ) के उत्तर से संबंधित है। इसी प्रकार, अन्य प्रश्न-उत्तरों का भी एक अप्रत्यक्ष संबंध है।
सर्वनाम पदों का अन्वय (Identification of Pronouns)
- अस्माभिः कदाचिदिप अयं ह्नदः न अन्वेषितः। .....
- प्रत्युत्पन्नमतिः प्राह-अहो भवता सत्यम् उक्तम्। .....
- अहो श्रुतं भवद्भिः यत् मत्स्यजीविभिः कथितम्। .....
- मम अपि अभीष्टमेतत्। .....
- तस्य निश्चयं ज्ञात्वा अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमतिश्च ततः निष्क्रान्तौ। .....
इस प्रश्न में दिए गए वाक्यों में प्रयुक्त सर्वनाम पदों को पहचानकर उनके मूल संज्ञा पद (अन्वय) को लिखना है। यह संस्कृत व्याकरण में सर्वनामों के सही प्रयोग को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
- अस्माभिः = 'मत्स्यजीविभ्यः' (मछुआरों के लिए) - यह सर्वनाम 'हम सब' के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, जो यहाँ मछुआरों के समूह को संबोधित कर रहा है।
- भवता = 'अनागतविधात्रा' (अनागतविधाता के लिए) - यहाँ 'भवता' (आपके द्वारा) सर्वनाम अनागतविधाता के लिए प्रयुक्त हुआ है, जब प्रत्युत्पन्नमति उससे बात कर रहा है।
- भवद्भिः = 'मत्स्यैः' (मछलियों के लिए) - यहाँ 'भवद्भिः' (आप सब के द्वारा) सर्वनाम मछलियों के समूह को संबोधित करने के लिए प्रयुक्त हुआ है, जब कोई उनके बारे में बात कर रहा है।
- मम = 'प्रत्युत्पन्नमतेः' (प्रत्युत्पन्नमति के लिए) - 'मम' (मेरा) सर्वनाम प्रत्युत्पन्नमति के अपने विचार या इच्छा को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- तस्य = 'यद्भविष्यस्य' (यद्भविष्य के लिए) - यहाँ 'तस्य' (उसका) सर्वनाम यद्भविष्य के निश्चय या विचार को इंगित करने के लिए प्रयुक्त हुआ है।
उक्तियों का अन्वय (Attribution of Statements)
केन? कं प्रति?
- (क) अहो! बहुमत्स्योऽयं ह्नदः।
- (ख) तद् रात्रावपि गम्यतां निकटं सरः।
- (ग) ममापि अभीष्टमेतत्। तदन्यत्र गम्यताम् इति।
- (घ) अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितम्।
- (ङ) तन्न युक्तं साम्प्रतं क्षणमप्यत्र अवस्थातुम्।
इस प्रश्न में, छात्रों को पाठ में दिए गए विभिन्न कथनों को पहचानना है और यह बताना है कि वह कथन किसने कहा और किसके प्रति कहा। यह पात्रों के बीच संवाद और उनके विचारों को समझने में मदद करता है।
केन? कं प्रति?
- (क) अहो! बहुमत्स्योऽयं ह्नदः। मत्स्यजीविभिः परस्परम् (मछुआरों द्वारा आपस में) - मछुआरों ने एक-दूसरे से कहा जब उन्होंने सरोवर में बहुत मछलियाँ देखीं।
- (ख) तद् रात्रावपि गम्यतां निकटं सरः। अनागतविधात्रा सर्वान् मत्स्यान् प्रति (अनागतविधाता द्वारा सभी मछलियों से) - अनागतविधाता ने अन्य मछलियों से कहा कि हमें रात में ही निकट के सरोवर में चले जाना चाहिए।
- (ग) ममापि अभीष्टमेतत्। तदन्यत्र गम्यताम् इति। यद्भविष्यः अनागतविधात्रां प्रति (यद्भविष्य द्वारा अनागतविधाता से) - यद्भविष्य ने अनागतविधाता से कहा कि मुझे भी यही अभीष्ट है, हमें कहीं और चले जाना चाहिए।
- (घ) अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितम्। अनागतविधात्रा प्रत्युत्पन्नमतिं प्रति (अनागतविधाता द्वारा प्रत्युत्पन्नमति से) - अनागतविधाता ने प्रत्युत्पन्नमति से कहा कि जो सुरक्षित नहीं है, वह भाग्य से भी सुरक्षित नहीं रहता (अर्थात् हमें तुरंत निकलना चाहिए)।
- (ङ) तन्न युक्तं साम्प्रतं क्षणमप्यत्र अवस्थातुम्। प्रत्युत्पन्नमतिः यद्भविष्यं प्रति (प्रत्युत्पन्नमति द्वारा यद्भविष्य से) - प्रत्युत्पन्नमति ने यद्भविष्य से कहा कि इस समय यहाँ एक क्षण भी रुकना उचित नहीं है।
Common mistakes
- Incorrectly identifying the antecedent of pronouns.
- Misinterpreting the meaning of Sanskrit dialogues.
- Confusing the roles or statements of different characters.
- Failing to grasp the moral lesson about foresight.
Revision tips
- Review the definitions and usage of pronouns covered in the chapter.
- Practice identifying who said what to whom in the dialogues.
- Summarize the story in your own words, emphasizing the theme of foresight.
- Re-read the questions and answers to ensure full comprehension of the concepts.
Practice MCQs
Q1. भासवर्गः कालिदासवर्गस्य प्रश्नानाम् उत्तराणि कथं दास्यति?
Explanation: पाठ के अनुसार, भासवर्ग कालिदासवर्ग के प्रश्नों का उत्तर एक पद में देता है।
Q2. अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमतिः च यतः निष्क्रान्तौ, ततः कस्य निश्चयं ज्ञात्वा?
Explanation: अनागतविधाता और प्रत्युत्पन्नमति ने यद्भविष्य के निश्चय को जानकर सरोवर छोड़ दिया।
Q3. 'भवता' सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तं अस्ति?
Explanation: वाक्य 'अहो भवता सत्यम् उक्तम्' में 'भवता' सर्वनाम अनागतविधात्रा के लिए प्रयुक्त हुआ है।
Q4. मत्स्यजीविनः जालैः कस्य आलोडनं कृतवन्तः?
Explanation: मत्स्यजीवियों ने जाल से जलाशय का आलोडन किया, जिससे मछलियों को पकड़ा जा सके।
Q5. सुरक्षितः कथं विनश्यति?
Explanation: पाठ के अनुसार, जो सुरक्षित नहीं है, वह दैवहतः (भाग्य से) नष्ट हो जाता है।
Frequently asked questions
यह पाठ 'दूरदृष्टिः फलप्रदा' किस बारे में है?
यह पाठ दूरदर्शिता और योजना के महत्व पर प्रकाश डालता है, यह दर्शाता है कि भविष्य के लिए योजना बनाने वाले कैसे लाभान्वित होते हैं।
इस पाठ के समाधानों में व्याकरण के किन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है?
समाधानों में मुख्य रूप से सर्वनाम पदों की पहचान और उनके प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही वाक्यों की संरचना और अर्थ को समझने पर भी बल दिया गया है।
कक्षा 12 संस्कृत के छात्रों के लिए ये समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, व्याकरण के नियमों को स्पष्ट करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।
पाठ में 'अनागतविधाता', 'प्रत्युत्पन्नमतिः' और 'यद्भविष्यः' की क्या भूमिका है?
अनागतविधाता भविष्य के लिए योजना बनाता है, प्रत्युत्पन्नमतिः तात्कालिक समाधान ढूंढता है, जबकि यद्भविष्यः भाग्य पर निर्भर रहता है और परिणाम भुगतता है।
क्या इन समाधानों में पाठ के प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं?
हाँ, इन समाधानों में पाठ के सभी अभ्यासों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान किए गए हैं।
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