CBSE Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 'Namak' NCERT Solutions
This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 16, 'Namak', from the CBSE Class 12 Hindi Aroh textbook. The chapter delves into the poignant themes of identity, displacement, and the enduring human connections that transcend national borders in the aftermath of the India-Pakistan partition. Through the narrative, it explores how emotional ties to one's homeland remain strong despite geographical and political divisions. The solutions aim to clarify the story's central message, highlighting the emotional journey of the characters and the symbolic significance of 'namak' (salt) as a representation of belonging and memory. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the story, analyze its characters, and prepare effectively for their examinations by offering clear explanations and insights into the text.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Hindi Aroh |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 16 |
Chapter summary
Chapter 16, 'Namak', of the CBSE Class 12 Hindi Aroh textbook focuses on the emotional and psychological impact of the India-Pakistan partition. The NCERT Solutions provided here break down the story's core themes, including the concept of 'watan' (homeland) as a deeply personal and emotional connection rather than just a political boundary. It examines how characters grapple with displacement and the longing for their native places. The solutions elucidate the symbolic meaning of salt and its journey across borders, representing shared humanity and the persistence of memory.
Learning outcomes
- Understand the themes of partition, identity, and homeland in the story 'Namak'.
- Analyze the emotional impact of displacement on individuals.
- Interpret the symbolic significance of 'namak' (salt) in the narrative.
- Recognize how human emotions and relationships transcend political borders.
- Appreciate the author's portrayal of post-partition societal dynamics.
Topics covered
Paper topics
- Partition and its aftermath
- Identity and belonging
- Emotional connections to homeland
- Symbolism of 'Namak' (Salt)
- Human relationships across borders
- Post-partition displacement
- Author's narrative style
Important topics
- Themes of Partition and Identity
- Symbolic meaning of 'Namak'
- Emotional impact of displacement
- Human connections transcending borders
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
नमक
लेखिका परिचय
जीवन परिचय- रजिया सज्जाद जहीर का जन्म 15 फरवरी, 1917 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था। इन्होंने बी॰ए॰ तक की शिक्षा घर पर रहकर ही प्राप्त की। शादी के बाद इन्होंने इलाहाबाद से उर्दू में एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। सन 1947 में ये अजमेर से लखनऊ आई और वहाँ करामत हुसैन गल्ज कॉलेज में पढ़ाने लगीं। सन 1965 में इनकी नियुक्ति सोवियत सूचना विभाग में हुई। इन्हें सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार, उर्दू अकादमी उ०प्र०, अखिल भारतीय लेखिका संघ अवार्ड से नवाजा गया। इनका देहावसान 18 दिसंबर, सन 1979 को हुआ।
रचनाएँ- ये मूलत: उर्दू की कहानी लेखिका हैं। इनकी उर्दू कहानियों के संग्रह का नाम ‘जर्द गुलाब’ है। साहित्यक विशेषताएँ- आधुनिक उर्दू कथा-साहित्य में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने कहानी, उपन्यास व बाल-साहित्य भी लिखा है। इन्होंने मौलिक लेखन तो किया ही है, साथ ही अन्य भाषाओं के साहित्य का भी उर्दू में अनुवाद किया है। इनकी कहानियों में सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और आधुनिक संदर्भों में बदलते हुए पारिवारिक मूल्यों को उभारने का सफल प्रयास हुआ है। सामाजिक यथार्थ व मानवीय गुणों का सहज सामंजस्य इनकी कहानियों की विशेषता है।
भाषा-शैली-उर्दू लेखिका रजिया जी की भाषा सहज, सरल और मुहावरेदार है। इनकी कुछ कहानियाँ हिंदी में भी रूपांतरित हो चुकी हैं।
पाठ का प्रतिपाद्य एवं सारांश
प्रतिपादय-‘नमक’ कहानी भारत-पाक विभाजन के बाद सरहद के दोनों तरफ के विस्थापित पुनर्वासित जनों के दिलों को टटोलती एक मार्मिक कहानी है। दिलों को टटोलने की इस कोशिश में अपने-पराये, देस-परदेस की कई प्रचलित धारणाओं पर सवाल खड़े किए गए हैं। विस्थापित होकर आई सिख बीवी आज भी लाहौर को ही अपना वतन मानती हैं और सौगात के तौर पर वहाँ का नमक लाए जाने की फ़रमाइश करती हैं। कस्टम अधिकारी नमक ले जाने की इजाजत देते हुए देहली को अपना वतन बताता है। इसी तरह भारतीय कस्टम अधिकारी सुनील दास गुप्ता का कहना हैं, "मेरा वतन ढाका है। राष्ट्र-राज्यों की नयी सीमा-रेखाएँ खींची जा चुकी हैं और मजहबी आधार पर लोग इन रेखाओं के इधर-उधर अपनी जगहें मुकर्रर कर चुके हैं, इसके बावजूद जमीन पर खींची गई रेखाएँ उनके अंतर्मन तक नहीं पहुँच पाई हैं। एक अनचाही, अप्रीतिकर बाहरी बाध्यता ने उन्हें अपने-अपने जन्म-स्थानों से विस्थापित तो कर दिया है, पर वह उनके दिलों पर कब्जा नहीं कर पाई है। नमक जैसी छोटी-सी चीज का सफ़र पहचान के इस मार्मिक पहलू को परत-दर-परत उघाड़ देता है। यह पहलू जब तक सरहद के आर-पार जीवित है, तब तक यह उम्मीद की जा सकती है कि राजनीतिक सरहदें एक दिन बेमानी हो जाएँगी।" लाहौर के कस्टम अधिकारी का यह कथन बहुत सारगर्भित है-"उनको यह नमक देते वक्त मेरी तरफ से कहिएगा कि लाहौर अभी तक उनका वतन हैं और देहली मेरा, तो बाकी सब रफ्ता-रफ्ता ठीक हो जाएगा।”
सारांश-सफ़िया अपने पड़ोसी सिख-परिवार के यहाँ कीर्तन में गई थी। वहाँ एक सिख बीवी को देखकर वह हैरान हो गई क्योंकि उसकी आँखें, भारी भरकम जिस्म, वस्त्र आदि सब सफ़िया
की माँ की तरह थे। सफ़िया की प्रेम-दृष्टि से प्रभावित होकर सिख बीवी ने उसके बारे में अपनी बहू से पूछा। जब उसे पता चला कि वह सुबह लाहौर जा रही है तो वह लेखिका के पास आकर लाहौर की बातें करने लगी। उसने बताया कि वह विभाजन के बाद भारत आई थी। उनका वतन तो जी लाहौर ही है। कीर्तन समाप्त होने के समय सफ़िया ने लाहौर से कुछ लाने के लिए पूछा। उसने हिचकिचाहट के साथ लाहौरी नमक लाने के लिए कहा।
वह लाहौर में पंद्रह दिन रुकी। उसके भाइयों ने खूब खातिरदारी की। मिलने वाले अनेक उपहार लेकर आए। उसके सामने सेर भर लाहौरी नमक की पुड़िया ले जाने की समस्या थी। पुलिस अफ़सर भाई ने इसे गैर-कानूनी बताया तथा व्यंग्य किया कि भारत के हिस्से में अधिक नमक आया था। लेखिका इस पर झुंझला गई तथा नमक ले जाने की जिद की। भाई ने कस्टम की जाँच का हवाला दिया तथा बेइज्जती होने का डर दिखाया। लेखिका उसे चोरी से नहीं ले जाना चाहती थी। वह प्रेम की चीज को शालीनता से ले जाना चाहती थी, परंतु भाई ने कानून की सख्ती के विषय में बताया। अंत में वह रोने लगी तथा भाई सिर हिलाकर चुप हो गया।
अगले दिन दो बजे दिन को उसे रवाना होना था। उसने सारी रात पैकिंग की। सारा सामान सूटकेस व बिस्तरबंद में आ गया। अब कीनू की टोकरी तथा नमक की पुड़िया ही शेष रह गई थीं। गुस्सा उतरने पर भावना के स्थान पर बुद्ध धीरे-धीरें हावी हो रही थी। उसने कीनुओं के ढेर के नीचे नमक की पोटली छिपा दी। आते समय उसने देखा था कि भारत से केले जा रहे थे तथा पाकिस्तान से कीनू आ रहे थे। कोई जाँच नहीं हो रही थी। इस तरह नमक सुरक्षित पहुँच जाएगा। फिर वह सो गई। वह लाहौर के सौंदर्य, माहौल व सगे-संबंधियों के बारे में स्वप्न देख रही थी। यहाँ उसके तीन सगे भाई, चाहने वाले दोस्त, नन्हे-नन्हे भतीजे- भतीजियाँ-सब याद आ रहे थे। कल वह लाहौर से जा रही थी। शायद फिर वह न आ सके। फिर उसे इकबाल का मकबरा, लाहौर का किला, सूरज की डूबती किरणें आदि दिखाई दीं।
अचानक उसकी आँखें खुल गई क्योंकि उसका हाथ कीनुओं की टोकरी पर जा पड़ा था। उसके दोस्त ने कहा था कि यह हिंदुस्तान व पाकिस्तान की एकता का मेवा है। वह फस्ट क्लास के वेटिंग रूम में बैठी थी। उसके भाई ने उसे दिल्ली तक का टिकट खरीद दिया था। वह सोच रही थी कि आस-पास टहल रहे लोगों में सिर्फ़ वही जानती थी कि टोकरी की तह में कीनुओं के नीचे नमक की पुड़िया है।
जब सामान कस्टम जाँच के लिए जाने लगा तो उसने फैसला किया कि मुहब्बत का यह तोहफ़ा वह चोरी से नहीं ले जाएगी। उसने जल्दी से पुड़िया निकाली और हैंडबैग में रख ली। जब सामान जाँच के बाद रेल की तरफ़ चला तो वह एक कस्टम अफ़सर की तरफ बढ़ी। वह लंबा, पतला, खिचड़ी बालों वाला था। उसने उसके वतन के बारे में पूछा। उसने हैरान होकर अपना वतन दिल्ली बताया। लेखिका ने हैंडबैग मेज पर रख दिया और नमक की पुँड़िया निकालकर उसके सामने रख दी तथा उसे सब कुछ बता दिया। सारी बातें सुनकर उसने पुड़िया को अच्छी तरह लपेटकर स्वयं सफ़िया के बैग में रख दिया तथा कहा कि मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है। उसने जामा मस्जिद की सीढ़ियों को सलाम देने को कहा तथा सिख बीवी को भी संदेश देने को कहा-"लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा, तो बाकी सब रफ्ता-रफ़्ता ठीक हो जाएगा।"
सफ़िया कस्टम के जैगले से निकलकर दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर आ गई। यहाँ सभी ने उसे भावपूर्ण विदाई दी। अटारी में भारतीय पुलिस रेल में चढ़ी। एक जैसी भाषा, सूरत, वस्त्र, लहजा, अंदाज व गालियों आदि के कारण लाहौर खत्म होने व अमृतसर शुरू होने का पता नहीं चला। अमृतसर में कस्टम की जाँच शुरू हुई तो वह कस्टम अफ़सर के पास पहुँची तथा अपने पास नमक होने की पूरी बात कह सुनाई। अफ़सर ने उसे साथ चलने को कहा। एक कमरे में जाकर उसने उसे बैठाया तथा दो चाय लाने का ऑर्डर दिया। उसने मेज की दराज से एक किताब निकाली। उसके पहले पन्ने पर लिखा था-"शमसुल इसलाम की तरफ से सुनील दास गुप्ता को प्यार के साथ, ढाका 1946।"
Common mistakes
- Confusing the literal meaning of 'namak' with its symbolic representation.
- Overlooking the emotional depth of characters' connections to their homelands.
- Failing to grasp the nuances of identity in the context of partition.
Revision tips
- Reread the story, paying close attention to the characters' feelings about their homelands.
- Focus on the symbolic meaning of salt and how it drives the plot.
- Discuss the themes of identity and displacement with classmates to deepen understanding.
- Analyze the dialogues between characters, especially the customs officers, for their underlying messages.
Practice MCQs
Q1. 'नमक' कहानी में 'वतन' की अवधारणा को कैसे दर्शाया गया है?
Explanation: कहानी में 'वतन' को केवल एक राजनीतिक सीमा के बजाय एक गहरे भावनात्मक और व्यक्तिगत जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विभाजन के बाद भी लोगों के दिलों में बना रहता है।
Q2. सिख बीवी लाहौर से क्या लाने का अनुरोध करती है?
Explanation: विभाजन के बाद भारत आई सिख बीवी, जिसका वतन लाहौर था, सफ़िया से लाहौर से नमक लाने का अनुरोध करती है, जो उसकी जड़ों और पुरानी यादों का प्रतीक है।
Q3. कस्टम अधिकारी नमक ले जाने की इजाजत देते हुए क्या कहता है?
Explanation: भारतीय कस्टम अधिकारी, सुनील दास गुप्ता, जो स्वयं ढाका से विस्थापित हैं, नमक ले जाने की इजाजत देते हुए एक मार्मिक संदेश देता है कि भावनात्मक जुड़ाव राजनीतिक सीमाओं से परे है।
Q4. 'नमक' कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
Explanation: कहानी का मुख्य संदेश यह है कि प्रेम, अपनेपन और मानवीय भावनाएँ राजनीतिक सीमाओं और राष्ट्रीयताओं से परे होती हैं, और ये भावनाएँ लोगों को उनकी जड़ों से जोड़े रखती हैं।
Q5. सुनील दास गुप्ता का वतन क्या था?
Explanation: सुनील दास गुप्ता, जो एक कस्टम अधिकारी है, बताता है कि उसका वतन ढाका है, जो विभाजन के कारण उससे बिछड़ गया था।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान CBSE कक्षा 12 के हिंदी आरोह (Aroh) पाठ्यपुस्तक के अध्याय 16, 'नमक' के लिए है।
'नमक' कहानी का मुख्य विषय क्या है?
'नमक' कहानी का मुख्य विषय भारत-पाक विभाजन के बाद लोगों के दिलों में बसी अपने वतन की यादें, पहचान का संकट और मानवीय भावनाओं का सीमाओं से परे होना है।
कहानी में 'नमक' का क्या महत्व है?
कहानी में 'नमक' केवल एक वस्तु नहीं है, बल्कि यह अपने वतन, जड़ों और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। यह उन अनकही भावनाओं को व्यक्त करता है जो विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों के मन में होती हैं।
कस्टम अधिकारियों की भूमिका क्या है?
कहानी में कस्टम अधिकारी केवल नियमों का पालन करने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय भावनाओं और व्यक्तिगत कहानियों को भी समझते हैं। वे विभाजन की त्रासदी के बीच भी मानवीयता और अपनेपन का संदेश देते हैं।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान छात्रों को कहानी के मुख्य विषयों, पात्रों के भावनात्मक संघर्षों और 'नमक' के प्रतीकात्मक अर्थ को गहराई से समझने में मदद करेगा, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर प्रभावी ढंग से दे सकेंगे।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.