CBSE Class 12 Hindi Aroh Chapter 13: काले मेघा पानी दे NCERT Solutions
This section provides NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh, Chapter 13, titled 'Kale Megh Pani De'. The chapter delves into the conflict between traditional beliefs and scientific reasoning, particularly concerning rain and water scarcity. It explores how Indian society, faced with challenges like drought, relies on age-old customs and rituals, such as the 'Indra Sena' or 'Megh Mandali' seeking rain. The solutions explain the author's perspective on these practices, questioning the logic of wasting precious water on rituals when scarcity is a reality. This chapter encourages critical thinking about faith, science, and societal responses to natural phenomena, offering valuable insights for exam preparation and a deeper understanding of cultural practices.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Hindi Aroh |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 13 |
Chapter summary
Chapter 13, 'Kale Megh Pani De' from CBSE Class 12 Hindi Aroh, focuses on the interplay between popular beliefs and scientific understanding, using the context of rain. It describes the traditional 'Indra Sena' ritual performed during dry spells and examines the author's critical view on such practices, highlighting the dilemma faced by educated individuals. These NCERT Solutions break down the chapter's essence, emphasizing the cultural significance and the debate between faith and reason.
Learning outcomes
- Understand the conflict between faith and science as depicted in the chapter.
- Analyze the societal practices related to rain-seeking rituals.
- Evaluate the author's perspective on blind faith and its consequences.
- Appreciate the cultural context of traditional beliefs in India.
- Develop critical thinking skills regarding societal rituals and scientific explanations.
Topics covered
Paper topics
- Faith vs. Science
- Rain and Water Scarcity
- Traditional Rituals and Beliefs
- The 'Indra Sena' Ritual
- Author's Critical Perspective
- Societal Practices in Rural India
- Blind Faith and its Consequences
- Post-Independence Indian Society
- Literary Style of Dharamvir Bharati
- Themes in 'Kale Megh Pani De'
Important topics
- Conflict between Faith and Science
- Author's Critical Analysis of Rituals
- The 'Indra Sena' and its Significance
- Water Scarcity and Societal Response
- Critique of Blind Faith
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Questions and Solutions
लेखक परिचय
धर्मवीर भारती का जन्म सन 1926 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कायस्थ पाठशाला से इंटरमीडिएट (1942) और प्रयाग विश्वविद्यालय से बी.ए. (1943) व एम.ए. (हिंदी, 1947) की डिग्री प्राप्त की। डॉ. धीरेंद्र वर्मा के निर्देशन में उन्होंने 'सिद्ध-साहित्य' पर शोध कार्य किया। उन्होंने 'अभ्युदय' व 'संगम' जैसे पत्रों में काम किया और बाद में प्रयाग विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्राध्यापक बने। 1960 में, उन्होंने नौकरी छोड़कर 'धर्मयुग' पत्रिका का संपादन संभाला, जिसे उन्होंने एक प्रतिष्ठित पत्रिका के रूप में स्थापित किया।
भारती जी एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, जिन्होंने कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक और आलोचना सहित विभिन्न साहित्यिक विधाओं में अमूल्य योगदान दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'कनुप्रिया', 'गुनाहों का देवता', 'सूरज का सातवाँ घोड़ा', और 'अंधा युग' शामिल हैं। उन्हें पद्मश्री, व्यास सम्मान जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1997 में उनका निधन हो गया।
रचनाएँ
धर्मवीर भारती की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
- कविता-संग्रह: कनुप्रिया, सात-गीत वर्ष, ठंडा लोहा
- कहानी-संग्रह: बंद गली का आखिरी मकान, मुर्दों का गाँव, चाँद और टूटे हुए लोग
- उपन्यास: सूरज का सातवाँ घोड़ा, गुनाहों का देवता
- गीतिनाट्य: अंधा युग
- निबंध-संग्रह: पश्यंती, कहनी-अनकहनी, ठेले पर हिमालय
- आलोचना: प्रगतिवाद : एक समीक्षा, मानव-मूल्य और साहित्य
- एकांकी-संग्रह: नदी प्यासी थी
साहित्यिक विशेषताएँ
धर्मवीर भारती के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी रचनाएँ हर उम्र और वर्ग के पाठकों के बीच लोकप्रिय रही हैं। वे मूल रूप से व्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवीय संबंधों और रोमानी चेतना के रचनाकार थे। अपनी रचनाओं में, सामाजिक जिम्मेदारियों के बावजूद, उन्होंने व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखा। उनकी कविताओं और गद्य में एक संगीतमय लय और रुमानियत मौजूद है।
उनके उपन्यास 'गुनाहों का देवता' एक भावुक प्रेम-कथा है, जबकि 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' मध्यवर्ग की हताशा, आर्थिक संघर्ष और नैतिक विचलन को दर्शाता है। 'अंधा युग' स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के मोहभंग, अनास्था और युद्ध-जनित भय को अभिव्यक्त करता है। 'मानव-मूल्य और साहित्य' पुस्तक साहित्य में समाज-सापेक्षिता के महत्व पर प्रकाश डालती है।
भाषा-शैली
धर्मवीर भारती की गद्य लेखन शैली अत्यंत सहज, सरल और आत्मीय है। वे जटिल से जटिल विषय को भी बातचीत की शैली में प्रस्तुत करते हैं, जिससे पाठक सीधे जुड़ जाते हैं। 'धर्मयुग' पत्रिका के संपादक के रूप में, उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को एक नई दिशा दी और उसे गंभीरता व मानक प्रदान किया। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के हिंदी साहित्यकारों में उनका एक विशिष्ट स्थान है।
पाठ का प्रतिपाद्य एवं सारांश
प्रतिपाद्य: 'काले मेघा पानी दे' संस्मरण लोक प्रचलित विश्वास और विज्ञान के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है। लेखक पानी की कमी के संदर्भ में इस दुविधा को प्रस्तुत करते हैं कि जब विज्ञान इन चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाता, तो भारतीय समाज किस प्रकार अपनी उत्सवधर्मी प्रवृत्ति और जुगाड़ से जीवित रहने के उपाय खोजता है, भले ही वह अशिक्षा और बेबसी से उपजे हों।
सारांश: यह पाठ उस समय का वर्णन करता है जब वर्षा की अत्यधिक प्रतीक्षा के कारण जीवन कठिन हो जाता है। ऐसे में, गाँवों में नंग-धड़ंग किशोर, जिन्हें 'इंदर सेना' या 'मेढक मंडली' कहा जाता था, 'गंगा मैया की जय' का नारा लगाते हुए गलियों में घूमते थे। स्त्रियाँ और लड़कियाँ छज्जों से झाँकतीं और जब यह मंडली किसी घर के सामने रुकती, तो घर की सहेजी हुई पानी से उन्हें नहला दिया जाता था। यह सब तब होता था जब गर्मी से लोग बेहाल होते, कुएँ सूख जाते, नलों में पानी कम आता, और खेतों की जमीन फटने लगती थी। लेखक को यह प्रथा समझ नहीं आती थी कि पानी की कमी के बावजूद लोग उसे इन बच्चों पर क्यों फेंकते थे। वे इसे अंधविश्वास मानते थे और तर्क देते थे कि ऐसे पाखंडों के कारण ही भारत अंग्रेजों से पिछड़ गया और गुलाम बन गया।
प्रश्न 1
लेखक के अनुसार, आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किकता और विवेक का अभाव चिंता का विषय है। लोग पुरानी रूढ़ियों और अंधविश्वासों से चिपके हुए हैं, जबकि उन्हें वैज्ञानिक सोच अपनानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, वे मानते हैं कि आज समाज में त्याग और सेवा की भावना की भी कमी है, जो कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 2
'इंदर सेना' का मुख्य उद्देश्य वर्षा के देवता इंद्र को प्रसन्न करके वर्षा करवाना था। यह मंडली विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु के अंतिम दिनों में, जब वर्षा की अत्यधिक कमी हो जाती थी और लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसते थे, तब गलियों में घूमकर पानी की याचना करती थी। उनका मानना था कि इस प्रकार की क्रिया से इंद्र देवता प्रसन्न होंगे और वर्षा होगी।
प्रश्न 3
लेखक को 'इंदर सेना' पर पानी फेंकना अनुचित लगा क्योंकि उस समय पानी की अत्यधिक कमी थी। कुएँ सूख रहे थे, नलों में पानी कम आ रहा था और खेतों की मिट्टी फट रही थी। ऐसे में, घरों में बड़ी मुश्किल से सहेजा गया पानी इन बच्चों पर फेंकना, लेखक की दृष्टि में, पानी की बर्बादी और अंधविश्वास का प्रतीक था। वे मानते थे कि इस तरह के अंधविश्वासों ने ही देश को प्रगति से रोका है।
प्रश्न 4
लेखक का 'ढंग के पाखंड' से तात्पर्य उन सामाजिक और धार्मिक कर्मकांडों से है जो बिना किसी तार्किक आधार के, केवल परंपरा या अंधविश्वास के कारण किए जाते हैं। 'इंदर सेना' द्वारा पानी की याचना और उस पर पानी फेंकना, लेखक की दृष्टि में, ऐसा ही एक पाखंड था। यह एक ऐसा दिखावा था जो समस्या का समाधान करने के बजाय उसे और बढ़ा रहा था, क्योंकि यह कीमती संसाधनों की बर्बादी थी।
प्रश्न 5
यह कथन लेखक की उस आलोचना को दर्शाता है कि लोग पानी की कमी के बावजूद उसे व्यर्थ में बर्बाद कर रहे थे। जिस प्रकार कुएँ और बाल्टी से पानी निकालकर फेंकना एक मूर्खतापूर्ण कार्य है, उसी प्रकार 'इंदर सेना' पर पानी फेंकना भी लेखक को अनुचित लगा। वे इस बात पर जोर देना चाहते थे कि जब पानी इतना कीमती और दुर्लभ हो, तो उसे इस तरह बर्बाद नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
प्रश्न 6
लेखक ने 'पांडेय पुरोहितों' के बारे में कहा है कि वे अपनी कर्मकांडीय विधियों से इंद्र को प्रसन्न करने का दावा करते हैं, लेकिन जब वर्षा नहीं होती तो वे भी चुप हो जाते हैं। दूसरी ओर, लेखक वैज्ञानिकों के बारे में कहते हैं कि वे भी पानी की कमी की समस्या का कोई समाधान नहीं दे पाते। इस प्रकार, लेखक दोनों पक्षों की सीमाओं को उजागर करते हैं, यह दर्शाते हुए कि न तो पारंपरिक कर्मकांड और न ही तत्कालीन विज्ञान, वर्षा की कमी की समस्या का संतोषजनक हल प्रस्तुत कर पा रहे थे।
प्रश्न 7
'गंगा मैया की जय' का नारा विशेषकर ग्रीष्म ऋतु के अंत में, जब वर्षा की अत्यधिक कमी होती थी और पूरा जनजीवन त्रस्त हो जाता था, तब 'इंदर सेना' या 'मेढक मंडली' द्वारा लगाया जाता था। यह नारा वर्षा के देवता इंद्र को संबोधित करने और उनसे वर्षा की याचना करने का एक तरीका था। यह उस समय की सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक था, जहाँ लोग प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए ईश्वर से गुहार लगाते थे।
प्रश्न 8
लेखक ने यह कहा कि 'हम अंग्रेजों से पिछड़ गए' क्योंकि उनका मानना था कि भारतीय समाज में अंधविश्वास, पाखंड और अवैज्ञानिक सोच का बोलबाला था। जब देश को वैज्ञानिक प्रगति और तार्किक सोच की आवश्यकता थी, तब लोग पुरानी रूढ़ियों और व्यर्थ के कर्मकांडों में उलझे हुए थे। इस पिछड़ी सोच के कारण ही भारत अंग्रेजों का गुलाम बना, क्योंकि वे अपनी प्रगतिशील सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर आगे बढ़ रहे थे।
प्रश्न 9
लेखक ने 'ग्लोबल वार्मिंग' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया है कि यह पृथ्वी के तापमान में वृद्धि की समस्या है। उन्होंने इसे एक ऐसी स्थिति के रूप में वर्णित किया है जहाँ पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसम में अप्रत्याशित परिवर्तन हो रहे हैं और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। यह समस्या मानवीय गतिविधियों और पर्यावरण के प्रति लापरवाही का परिणाम है।
प्रश्न 10
'पानी दे, गुड़धानी दे' का नारा 'इंदर सेना' द्वारा वर्षा की याचना के रूप में लगाया जाता था। 'पानी दे' का अर्थ था कि वर्षा हो, जिससे धरती की प्यास बुझे और जीवन का आधार बने। 'गुड़धानी दे' का अर्थ था कि वर्षा के बाद अच्छी फसल हो, जिससे खेतों में गुड़ (जो गन्ने से बनता है) और अन्य अनाज पैदा हों, और लोगों का जीवन सुखी हो। यह नारा अच्छी वर्षा और समृद्धि की कामना का प्रतीक था।
प्रश्न 11
लेखक ने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए उस समय का वर्णन किया है जब वर्षा की कमी के कारण लोग परेशान होते थे। उन्होंने 'इंदर सेना' या 'मेढक मंडली' के बच्चों का उल्लेख किया है जो गलियों में घूमकर वर्षा के लिए प्रार्थना करते थे। उन्होंने यह भी याद किया कि कैसे बड़े-बुजुर्ग, विशेषकर महिलाएँ, इन बच्चों पर पानी डालकर उन्हें भीगने देती थीं, और कैसे लेखक स्वयं इस प्रथा को अंधविश्वास मानकर दुखी होते थे। ये स्मृतियाँ पाठ के केंद्रीय भाव को समझने में मदद करती हैं।
प्रश्न 12
लेखक ने उस समाज को 'अंधविश्वासी' कहा है जो वैज्ञानिक तर्क और विवेक को छोड़कर केवल पुरानी परंपराओं, पाखंडों और व्यर्थ के कर्मकांडों पर विश्वास करता है। ऐसे समाज में लोग समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय, उन्हें ईश्वर या भाग्य पर छोड़ देते हैं और प्रतीकात्मक या अवैज्ञानिक तरीकों से उन्हें दूर करने का प्रयास करते हैं। 'इंदर सेना' पर पानी फेंकने की प्रथा को लेखक इसी अंधविश्वास का उदाहरण मानते हैं।
Common mistakes
- Confusing the author's critical stance with endorsement of blind faith.
- Overlooking the socio-economic context of the rituals described.
- Failing to connect the ritualistic practices with the theme of water scarcity.
- Interpreting the 'Indra Sena' solely as a children's game without deeper meaning.
Revision tips
- Focus on the author's arguments against blind faith and the wastage of resources.
- Understand the symbolism of the 'Indra Sena' and its role in the community.
- Compare and contrast the perspectives of traditional beliefs and scientific logic.
- Note down key phrases and examples used by the author to illustrate his points.
- Practice summarizing the chapter's central theme in your own words.
Practice MCQs
Q1. पाठ 'काले मेघा पानी दे' में लेखक किस द्वंद्व का चित्रण करते हैं?
Explanation: लेखक पाठ में लोक प्रचलित विश्वास (अंधविश्वास) और विज्ञान के बीच के द्वंद्व को दर्शाते हैं, विशेषकर वर्षा के संदर्भ में।
Q2. गाँवों में वर्षा के लिए निकलने वाली किशोरों की टोली को क्या कहा जाता था?
Explanation: पाठ के अनुसार, वर्षा के लिए निकलने वाली किशोरों की टोली को इंदर सेना या मेढक मंडली कहा जाता था।
Q3. लेखक के अनुसार, इंदर सेना पर घर का सहेजा हुआ पानी क्यों फेंका जाता था?
Explanation: लेखक इस प्रथा को अंधविश्वास मानते हैं और सवाल उठाते हैं कि पानी की कमी के बावजूद लोग उसे व्यर्थ क्यों बहाते थे।
Q4. लेखक किस कारण से अंग्रेजों से पिछड़ने और गुलाम बनने का तर्क देते हैं?
Explanation: लेखक का मानना है कि ऐसे पाखंडों और अंधविश्वासों के कारण ही भारतीय समाज पिछड़ गया और अंग्रेजों का गुलाम बना।
Q5. पाठ में 'काले मेघा पानी दे' का नारा किस संदर्भ में लगाया जाता है?
Explanation: यह नारा गर्मी के मौसम में जब वर्षा की अत्यधिक कमी हो जाती थी और लोग त्राहि-त्राहि करने लगते थे, तब वर्षा के लिए लगाया जाता था।
Frequently asked questions
What is the main theme of the chapter 'Kale Megh Pani De'?
The main theme of 'Kale Megh Pani De' is the conflict between traditional beliefs (faith) and scientific reasoning, particularly in the context of rain and water scarcity. It explores how society grapples with natural challenges through rituals and scientific approaches.
Who were the 'Indra Sena' or 'Megh Mandali' mentioned in the chapter?
The 'Indra Sena' or 'Megh Mandali' were groups of young boys, typically aged ten to twelve, who would roam the streets during dry spells, chanting slogans and asking for water, often drenching themselves and playing in the mud as a ritual to invoke the rain god, Indra.
What is the author's perspective on the 'Indra Sena' ritual?
The author views the ritual critically. While acknowledging the societal need to find solutions during hardship, he questions the logic of wasting precious water on such rituals when scarcity is a real problem. He sees it as a form of blind faith that hindered progress.
How does the chapter relate faith and science?
The chapter presents faith and science as two different approaches to understanding and dealing with the world. It highlights the dilemma faced by educated individuals who are caught between the logic of science and the deeply ingrained practices of faith, especially when science cannot immediately provide solutions.
Why is this chapter important for Class 12 Hindi students?
This chapter is important as it encourages critical thinking about societal practices, the role of faith versus reason, and the historical context of India's development. It also introduces students to the literary style and thought process of the author, Dharamvir Bharati.
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