CBSE Class 11 Hindi Chapter 13: अपू के साथ ढाई साल NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi, Chapter 13, 'Apu Ke Saath Dhaai Saal' (Two and a Half Years with Apu). This chapter delves into the experiences of filmmaker Satyajit Ray during the making of his iconic film 'Pather Panchali'. The solutions explain the challenges faced, such as the prolonged shooting schedule of two and a half years, the search for the perfect actors, and the difficulties encountered due to resource limitations. It highlights the dedication and artistic vision required to bring a cinematic masterpiece to life, offering insights into the realities of filmmaking beyond its glamour. These solutions are designed to help students understand the narrative, the author's perspective, and the technical aspects of filmmaking discussed in the chapter, aiding in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter13. अपू के साथ ढाई साल

Chapter summary

Chapter 13, 'Apu Ke Saath Dhaai Saal', offers a glimpse into the arduous yet rewarding journey of making the film 'Pather Panchali'. The NCERT Solutions cover Satyajit Ray's personal experiences, the extended shooting period, the casting process for the lead roles of Apu and Durga, and the logistical hurdles like the seasonal disappearance of 'kash' flowers. It emphasizes the blend of artistic struggle and creative fulfillment in filmmaking, providing students with a deeper appreciation for the craft.

Learning outcomes

  • Understand the challenges and realities of filmmaking as depicted in 'Apu Ke Saath Dhaai Saal'.
  • Analyze Satyajit Ray's experiences and dedication during the production of 'Pather Panchali'.
  • Identify the significance of resourcefulness and perseverance in achieving artistic goals.
  • Appreciate the narrative structure and thematic elements of the chapter.
  • Develop a deeper understanding of the Indian cinema's historical context through the chapter's narrative.

Topics covered

Paper topics

  • सत्यजित राय का जीवन परिचय
  • सत्यजित राय की रचनाएँ
  • साहित्यिक विशेषताएँ
  • पथेर पांचाली फिल्म का निर्माण
  • फिल्म निर्माण की प्रक्रिया
  • कलाकार चयन की चुनौतियाँ
  • शूटिंग के दौरान आने वाली कठिनाइयाँ
  • संस्मरण लेखन
  • भारतीय सिनेमा का इतिहास
  • साधनहीनता में कला का संघर्ष

Important topics

  • पथेर पांचाली फिल्म के निर्माण का विस्तृत वर्णन
  • अप्पू और दुर्गा के किरदारों का चयन
  • शूटिंग में देरी के कारण और प्रभाव
  • सत्यजित राय के व्यक्तिगत अनुभव और संघर्ष
  • फिल्म निर्माण में आने वाली व्यावहारिक समस्याएँ

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Questions and Solutions

लेखक परिचय

लेखक परिचय: सत्यजित राय का जीवन परिचय, उनकी रचनाएँ और साहित्यिक विशेषताएँ।

Solution:

जीवन परिचय: सत्यजित राय का जन्म वर्ष 1921 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने भारतीय सिनेमा को कलात्मक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी पहली फीचर फिल्म 'पथेर पांचाली' (बांग्ला) 1955 में प्रदर्शित हुई, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। उन्होंने फिल्मों के माध्यम से न केवल भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया, बल्कि निर्देशकों और आलोचकों के बीच फिल्म विधा की समझ विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें फ्रांस का लेजन डी ऑनर, जीवन की उपलब्धियों पर ऑस्कर और भारत रत्न जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1992 में उनका निधन हो गया।

रचनाएँ: सत्यजित राय एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, जो फिल्म निर्देशन के साथ-साथ बाल और किशोर साहित्य भी लिखते थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'प्रो. शंक् के कारनामे', 'सोने का किला', 'जहाँगीर की स्वर्ण मुद्रा', 'बादशाही अँगूठी' (बांग्ला) और 'शतरंज के खिलाड़ी', 'सद्गति' (हिंदी) शामिल हैं।

साहित्यिक विशेषताएँ: सत्यजित राय ने लगभग तीस फीचर फिल्में निर्देशित कीं, जिनमें से अधिकांश साहित्यिक कृतियों पर आधारित थीं। वे विभूति भूषण बंद्योपाध्याय से लेकर प्रेमचंद तक के साहित्यकारों से प्रेरित थे। फिल्मों के पटकथा लेखन, संगीत संयोजन और निर्देशन के अलावा, उन्होंने बांग्ला में बच्चों और किशोरों के लिए भी संजीदगी से लेखन कार्य किया। उनकी कहानियों में जासूसी रोमांच के साथ-साथ प्रकृति और पशु-पक्षियों का सहज चित्रण भी मिलता है।

पाठ का सारांश

पाठ का सारांश: 'अप्पू के साथ ढाई साल' पाठ का विस्तृत सारांश प्रस्तुत करें।

Solution:

'अप्पू के साथ ढाई साल' नामक संस्मरण, भारतीय फिल्म इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना 'पथेर पांचाली' के निर्माण से जुड़े अनुभवों पर आधारित है। यह पाठ फिल्म निर्माण की बारीकियों और साधनहीनता के बीच कलात्मक दृष्टि को साकार करने के संघर्ष को दर्शाता है। मूल रूप से बांग्ला में लिखित इस पाठ का अनुवाद विलास गिते ने किया है।

लेखक बताते हैं कि पहली फिल्म का निर्माण एक फिल्मकार के लिए अत्यंत रोमांचकारी और यादगार अनुभव होता है। 'पथेर पांचाली' की शूटिंग ढाई साल तक चली, क्योंकि उस समय लेखक एक विज्ञापन कंपनी में काम करते थे और फुर्सत मिलने पर ही शूटिंग संभव हो पाती थी।

फिल्म के लिए अपू की भूमिका निभाने हेतु छह साल का लड़का नहीं मिल रहा था, जिसके लिए अखबार में विज्ञापन दिया गया। कई बच्चों के इंटरव्यू के बाद, लेखक की पत्नी ने पड़ोस में रहने वाले सुबीर बनर्जी को देखा, जो अंततः अप्पू बने।

शूटिंग के दौरान, जब फिल्म में अधिक समय लगने लगा, तो लेखक को चिंता हुई कि कहीं अप्पू और दुर्गा बड़े न हो जाएँ। सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ। पालसिट गाँव में रेल-लाइन के पास काशफूलों से भरे मैदान में शूटिंग शुरू हुई। एक दिन में आधी शूटिंग हो पाई। सात दिन बाद जब वे उसी स्थान पर दोबारा पहुँचे, तो काशफूल जानवरों द्वारा खाए जा चुके थे। इस कारण, बाकी के सीन की शूटिंग के लिए अगली शरद ऋतु का इंतजार करना पड़ा, जिससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और लंबी हो गई। यह अनुभव साधनहीनता के बीच कला को साकार करने के संघर्ष को उजागर करता है।

Common mistakes

  • Confusing the film's narrative with the author's personal life without distinction.
  • Underestimating the logistical and financial challenges in filmmaking.
  • Overlooking the importance of seasonal elements in outdoor shooting.
  • Failing to grasp the emotional journey of the filmmaker as described in the text.

Revision tips

  • Read the chapter summary carefully to grasp the main events and challenges.
  • Focus on Satyajit Ray's personal anecdotes and how they illustrate filmmaking difficulties.
  • Pay attention to the details about the casting process and the 'kash' flower incident.
  • Discuss the chapter's themes of perseverance and artistic integrity with peers.

Practice MCQs

Q1. फिल्म 'पथेर पांचाली' की शूटिंग कितने समय तक चली?

Q2. अप्पू की भूमिका के लिए किस आयु के लड़के की तलाश थी?

Q3. फिल्म में अपू का किरदार किसने निभाया?

Q4. शूटिंग के दौरान काशफूलों के गायब होने से क्या समस्या हुई?

Q5. यह पाठ किस फिल्म के निर्माण के अनुभवों पर आधारित है?

Frequently asked questions

यह पाठ 'अप्पू के साथ ढाई साल' किस बारे में है?

यह पाठ प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजित राय के अपने पहले फिल्म 'पथेर पांचाली' के निर्माण के दौरान के अनुभवों का वर्णन करता है। इसमें फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, उसमें आने वाली कठिनाइयाँ और निर्देशक के संघर्ष को दर्शाया गया है।

फिल्म 'पथेर पांचाली' की शूटिंग में ढाई साल क्यों लगे?

फिल्म की शूटिंग में ढाई साल लगने के कई कारण थे, जैसे कि विज्ञापन कंपनी में काम करने के कारण फुर्सत मिलने पर ही शूटिंग हो पाती थी, कलाकारों को खोजने में समय लगा, और कुछ प्राकृतिक कारणों (जैसे काशफूलों का गायब होना) से भी शूटिंग में देरी हुई।

अप्पू और दुर्गा के किरदारों के लिए कलाकारों का चयन कैसे हुआ?

अप्पू की भूमिका के लिए छह साल के लड़के की तलाश थी, जिसके लिए अखबार में विज्ञापन दिया गया। कई बच्चे इंटरव्यू के लिए आए, लेकिन अंततः पड़ोस के एक लड़के सुबीर बनर्जी को अप्पू के लिए चुना गया। दुर्गा का किरदार भी इसी तरह चुना गया।

इस पाठ से फिल्म निर्माण के बारे में क्या सीखने को मिलता है?

यह पाठ सिखाता है कि फिल्म निर्माण एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है जिसमें साधनहीनता के बावजूद अपनी कलात्मक दृष्टि को साकार करने के लिए बहुत संघर्ष और धैर्य की आवश्यकता होती है। यह ग्लैमर के पीछे की वास्तविकता को भी उजागर करता है।

सत्यजित राय को 'पथेर पांचाली' के लिए क्या पुरस्कार मिले?

पाठ में सत्यजित राय को मिले पुरस्कारों का उल्लेख है, जिनमें फ्रांस का लेजन डी ऑनर, जीवन की उपलब्धियों पर ऑस्कर और भारत रत्न शामिल हैं। 'पथेर पांचाली' की सफलता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई।

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