कक्षा 11 भौतिकी NCERT समाधान: तरलों के यांत्रिक गुण

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यह पृष्ठ कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 10, 'तरलों के यांत्रिक गुण' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें द्रव दाब, उत्प्लावन बल, पृष्ठ तनाव, श्यानता और बर्नोली के सिद्धांत से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण शामिल हैं, जो छात्रों को इन जटिल विषयों को समझने में मदद करते हैं। यह संसाधन छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है, जिससे वे तरलों के व्यवहार से संबंधित विभिन्न समस्याओं को हल करने में सक्षम होते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. तरलों के यांत्रिक गुण

Chapter summary

कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 10, 'तरलों के यांत्रिक गुण' के लिए NCERT समाधानों का यह संग्रह तरलों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले मूलभूत सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें द्रव दाब की गहराई पर निर्भरता, उत्प्लावन बल, आर्किमिडीज का सिद्धांत, पृष्ठ तनाव, केशिकात्व और श्यानता जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्टता और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को इन अवधारणाओं को गहराई से समझने और संबंधित प्रश्नों को हल करने में सहायता मिलती है।

Learning outcomes

  • द्रव दाब के सूत्र और गहराई के साथ इसके परिवर्तन को समझना।
  • उत्प्लावन बल और आर्किमिडीज के सिद्धांत को लागू करना।
  • पृष्ठ तनाव और स्पर्श कोण की अवधारणाओं को स्पष्ट करना।
  • केशिकात्व की घटना के कारणों का विश्लेषण करना।
  • श्यानता और बर्नोली के सिद्धांत के अनुप्रयोगों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • द्रव दाब
  • दाब की गहराई पर निर्भरता
  • द्रवस्थैतिक दाब की अदिश प्रकृति
  • पृष्ठ तनाव
  • स्पर्श कोण
  • केशिकात्व
  • द्रव बूँद की आकृति
  • श्यानता
  • आर्किमिडीज का सिद्धांत
  • उत्प्लावन बल
  • बर्नोली का सिद्धांत
  • सतह ऊर्जा

Important topics

  • द्रव दाब और उसकी गहराई पर निर्भरता
  • पृष्ठ तनाव और स्पर्श कोण
  • आर्किमिडीज का सिद्धांत और उत्प्लावन बल
  • श्यानता और श्यान बल
  • बर्नोली का सिद्धांत

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

स्पष्ट कीजिए क्यों? (a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव के पैरों पर रक्त चाप अधिक होता है। (b) 6 km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमण्डल का विस्तार 100 km से भी अधिक ऊँचाई तक है। (c) यद्यपि दाब, प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल होता है तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।
Solution:

(a) द्रव का दाब p = h\rho g सूत्र द्वारा दिया जाता है, जहाँ h गहराई, \rho घनत्व और g गुरुत्वीय त्वरण है। इसका अर्थ है कि द्रव स्तंभ का दाब गहराई के साथ बढ़ता है। चूँकि मानव शरीर में, पैरों की स्थिति मस्तिष्क की तुलना में अधिक नीचे होती है, इसलिए पैरों पर रक्त स्तंभ की ऊँचाई अधिक होती है। परिणामस्वरूप, मनुष्य के पैरों में रक्त दाब मस्तिष्क की अपेक्षा अधिक होता है।

(b) पृथ्वी की सतह के निकट हवा का घनत्व अधिकतम होता है और ऊँचाई बढ़ने के साथ घनत्व घटता जाता है। लगभग 6 km की ऊँचाई पर, हवा का घनत्व घटकर लगभग आधा रह जाता है। यद्यपि वायुमंडल 100 km से अधिक ऊँचाई तक फैला हुआ है, लेकिन 6 km से ऊपर हवा का घनत्व बहुत तेज़ी से और अधिक मात्रा में घटता है, जिसके कारण दाब में कमी आती है।

(c) जब किसी द्रव पर बल लगाया जाता है, तो द्रव के भीतर दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचारित हो जाता है (पास्कल का नियम)। इस कारण द्रवस्थैतिक दाब की कोई एक निश्चित दिशा नहीं होती है; यह सभी दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है। इसलिए, द्रवस्थैतिक दाब को एक अदिश राशि माना जाता है।

प्रश्न 2

स्पष्ट कीजिए क्यों? (a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है। (b) काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूँदें बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है।) (c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है। (d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए। (e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।
Solution:

(a) जब किसी द्रव की अल्प मात्रा किसी ठोस सतह पर डाली जाती है, तो तीन प्रकार के अंतरापृष्ठ (द्रव-वायु, ठोस-वायु और ठोस-द्रव) बनते हैं। इन पृष्ठों के संगत पृष्ठ तनाव क्रमशः S_{LA}, S_{SA} और S_{SL} होते हैं। यदि ठोस और द्रव के बीच स्पर्श कोण \theta है, तो संतुलन की स्थिति में S_{SL} + S_{LA}\cos\theta = S_{SA} होता है। इससे \cos\theta = \frac{S_{SA} - S_{SL}}{S_{LA}} प्राप्त होता है।

पारे और काँच के लिए, ठोस-द्रव अंतरापृष्ठ का पृष्ठ तनाव (S_{SL}) द्रव-वायु अंतरापृष्ठ के पृष्ठ तनाव (S_{LA}) से अधिक होता है, और ठोस-वायु अंतरापृष्ठ का पृष्ठ तनाव (S_{SA}) पारे के ससंजक बल से कम होता है। इसलिए, S_{SA} < S_{SL} होता है, जिससे \cos\theta ऋणात्मक हो जाता है और \theta > 90^\circ (अधिक कोण) होता है।

जल और काँच के लिए, S_{SA} > S_{SL} होता है, जिससे \cos\theta धनात्मक हो जाता है और \theta < 90^\circ (न्यूनकोण) होता है।

(b) द्रव बूँद के ठोस सतह पर संतुलन के लिए S_{SL} + S_{LA}\cos\theta = S_{SA} आवश्यक है।

पारे और काँच के लिए, S_{SL} > S_{SA} होता है। संतुलन के लिए \cos\theta का ऋणात्मक होना आवश्यक है, जिसका अर्थ है कि स्पर्श कोण अधिक कोण (\theta > 90^\circ) होना चाहिए। इस स्थिति में, पारा काँच पर फैलने के बजाय बूँदें बनाने का प्रयास करता है क्योंकि यह न्यूनतम ऊर्जा अवस्था है।

जल और काँच के लिए, S_{SA} > S_{SL} होता है। संतुलन के लिए \cos\theta का धनात्मक होना आवश्यक है, जिसका अर्थ है कि स्पर्श कोण न्यूनकोण (\theta < 90^\circ) होना चाहिए। इस स्थिति में, जल काँच पर फैलने का प्रयास करता है क्योंकि यह न्यूनतम ऊर्जा अवस्था है, और काँच को गीला करता है।

(c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ पर खींची गई एकांक लम्बाई की काल्पनिक रेखा पर लगने वाला अभिलम्बवत् बल है। यह द्रव के अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बलों का परिणाम है। पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह द्रव की प्रकृति, तापमान और उसमें घुली अशुद्धियों पर निर्भर करता है।

(d) जल में अपमार्जक मिलाने पर, अपमार्जक के अणु जल और सतह के बीच आसंजक बल को बढ़ाते हैं। जब आसंजक बल ससंजक बल से अधिक हो जाते हैं, तो द्रव सतह पर अधिक फैलता है और स्पर्श कोण का मान कम हो जाता है। यह जल को सतह को बेहतर ढंग से गीला करने में मदद करता है।

(e) यदि किसी बाह्य बल (जैसे गुरुत्वाकर्षण या वायुमंडलीय दाब का प्रभाव नगण्य हो) का प्रभाव न हो, तो द्रव की बूँद अपनी सतह के क्षेत्रफल को न्यूनतम करने का प्रयास करती है। दिए गए आयतन के लिए, गोले का पृष्ठ क्षेत्रफल न्यूनतम होता है। इसलिए, पृष्ठ तनाव के कारण द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।

Common mistakes

  • द्रव दाब की गणना में गहराई और घनत्व के प्रभाव को गलत समझना।
  • पृष्ठ तनाव और सतह ऊर्जा के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • स्पर्श कोण की परिभाषा और उसके अनुप्रयोगों में भ्रमित होना।
  • श्यानता गुणांक और श्यान बल के बीच संबंध को गलत समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के हल में दिए गए सूत्रों को अच्छी तरह याद करें।
  • द्रव दाब और उत्प्लावन बल से संबंधित उदाहरणों का अभ्यास करें।
  • पृष्ठ तनाव और स्पर्श कोण के बीच संबंध को समझने के लिए आरेखों का उपयोग करें।
  • श्यानता और बर्नोली के सिद्धांत के अनुप्रयोगों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. द्रवस्थैतिक दाब का सूत्र क्या है, जहाँ h गहराई, ρ घनत्व और g गुरुत्वीय त्वरण है?

Q2. पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण (90° से अधिक) क्यों होता है?

Q3. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव किस पर निर्भर नहीं करता है?

Q4. जल में अपमार्जक मिलाने पर स्पर्श कोण का मान क्यों कम हो जाता है?

Q5. यदि बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव की बूँद की आकृति सदैव गोलाकार क्यों होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 10, 'तरलों के यांत्रिक गुण' में कौन सी मुख्य अवधारणाएँ शामिल हैं?

इस अध्याय में द्रव दाब, उत्प्लावन बल, आर्किमिडीज का सिद्धांत, पृष्ठ तनाव, स्पर्श कोण, केशिकात्व, श्यानता और बर्नोली के सिद्धांत जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं।

द्रवस्थैतिक दाब का सूत्र क्या है और यह किस पर निर्भर करता है?

द्रवस्थैतिक दाब का सूत्र p = ρgh है, जहाँ ρ द्रव का घनत्व, g गुरुत्वीय त्वरण और h गहराई है। यह गहराई के साथ बढ़ता है।

पृष्ठ तनाव क्या है और यह द्रव की बूँद को गोलाकार क्यों बनाता है?

पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ की वह विशेषता है जिसके कारण वह न्यूनतम संभव पृष्ठ क्षेत्रफल प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखता है। इसी प्रवृत्ति के कारण द्रव की बूँदें गोलाकार होती हैं।

स्पर्श कोण क्या है और यह काँच के साथ जल और पारे के व्यवहार को कैसे समझाता है?

स्पर्श कोण द्रव और ठोस सतह के बीच संपर्क बिंदु पर द्रव की सतह और ठोस सतह के बीच बनने वाला कोण है। जल का काँच के साथ न्यूनकोण होता है (फैलता है), जबकि पारे का अधिक कोण होता है (बूंद बनाता है)।

ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को 'तरलों के यांत्रिक गुण' से संबंधित अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने का आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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