कक्षा 11 भौतिकी: गुरुत्वाकर्षण NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 8, 'गुरुत्वाकर्षण' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें गुरुत्वाकर्षण के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे कि विद्युत बलों से गुरुत्वाकर्षण बलों का परिरक्षण, अंतरिक्ष यान में गुरुत्वाकर्षण की अनुभूति, और ज्वारीय प्रभाव। समाधान गुरुत्वीय त्वरण पर ऊंचाई और गहराई के प्रभाव, और विभिन्न खगोलीय पिंडों की कक्षीय गतियों के बारे में भी बताते हैं। ये समाधान छात्रों को गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भौतिकी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 8. गुरुत्वाकर्षण |
Chapter summary
कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 8 'गुरुत्वाकर्षण' के लिए ये NCERT समाधान छात्रों को गुरुत्वाकर्षण के मूल सिद्धांतों को समझने में मदद करते हैं। इसमें गुरुत्वाकर्षण बलों के परिरक्षण, अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा गुरुत्वाकर्षण की अनुभूति, ज्वारीय प्रभावों के कारण और गुरुत्वीय त्वरण पर ऊंचाई व गहराई के प्रभाव जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को विभिन्न परिदृश्यों में गुरुत्वाकर्षण के व्यवहार का विश्लेषण करने के लिए आवश्यक ज्ञान और उपकरण प्रदान करते हैं।
Learning outcomes
- गुरुत्वाकर्षण बलों के परिरक्षण की संभावना को समझना।
- अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की अनुभूति का विश्लेषण करना।
- ज्वारीय प्रभावों के कारणों और सूर्य व चंद्रमा के प्रभावों की तुलना करना।
- ऊंचाई और गहराई के साथ गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तन की व्याख्या करना।
- ग्रहों की कक्षीय गति और केप्लर के नियमों के निहितार्थों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- गुरुत्वाकर्षण का परिरक्षण
- अंतरिक्ष यान में गुरुत्वाकर्षण की अनुभूति
- ज्वारीय प्रभाव
- गुरुत्वीय त्वरण
- ऊंचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण
- गहराई के साथ गुरुत्वीय त्वरण
- गुरुत्वीय त्वरण का द्रव्यमान पर निर्भरता
- स्थितिज ऊर्जा-अंतर
- कक्षीय गति
- अभिकेन्द्रीय बल
- गुरुत्वाकर्षण बल
Important topics
- गुरुत्वाकर्षण का परिरक्षण और विद्युत बलों से तुलना
- ज्वारीय प्रभाव: कारण और सूर्य/चंद्रमा की तुलना
- ऊंचाई और गहराई के साथ गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तन
- कक्षीय गति और अभिकेन्द्रीय बल
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?
(b) पृथ्वी के परित: परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परित: परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है?
(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएंगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अध्यासों में दिए गए आंकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रमाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
(a) नहीं, किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर नहीं किया जा सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, जबकि विद्युत बल माध्यम पर निर्भर करता है। विद्युत शील्डिंग (shielding) के लिए खोखले चालक का उपयोग किया जाता है क्योंकि चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य हो जाता है। गुरुत्वाकर्षण के मामले में ऐसा कोई प्रभाव नहीं होता है।
(b) हाँ, यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बहुत बड़ा है, तो अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है। यद्यपि पूरा स्टेशन मुक्त पतन में है, स्टेशन के विभिन्न भागों पर गुरुत्वाकर्षण बल में सूक्ष्म अंतर हो सकता है। एक बड़े स्टेशन के लिए, इन अंतरों को मापा जा सकता है, जिससे गुरुत्वीय त्वरण में भिन्नता का पता चल सकता है, जो गुरुत्व बल के संसूचन के समान है। छोटे अंतरिक्ष यान में, ये अंतर इतने कम होते हैं कि उनका पता लगाना मुश्किल होता है।
(c) ज्वारीय प्रमाव (tidal effect) गुरुत्वाकर्षण के व्युत्क्रम वर्ग नियम ($1/r^2$) द्वारा पूरी तरह से नहीं समझाया जाता है, बल्कि यह दूरी के तृतीय घात के व्युत्क्रमानुपाती ($1/r^3$) होता है। चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी (लगभग $3.84 \times 10^8$ मीटर) पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी (लगभग $1.5 \times 10^{11}$ मीटर) की तुलना में बहुत कम है। दूरी के तृतीय घात के व्युत्क्रमानुपाती होने के कारण, कम दूरी के कारण चंद्रमा का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक होता है, भले ही सूर्य का कुल गुरुत्वाकर्षण बल अधिक हो।
प्रश्न 2
सही विकल्प का चयन कीजिए:
- बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
- बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व को गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढता/घटता है।
- गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
- पृथ्वी के केन्द्र से $r_2$ तथा $r_1$ दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र $-GMm\left(\frac{1}{r_0}-\frac{1}{r_0}\right)$, सूत्र $mg\left(r_2-r_1\right)$ से अधिक/कम यथार्थ है।
(a) बढ़ती तुंगता (ऊंचाई) के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है। पृथ्वी की सतह से $h$ ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण $g'$ का सूत्र है:
जहाँ $R_0$ पृथ्वी की त्रिज्या है। इस सूत्र से स्पष्ट है कि $h$ बढ़ने पर $g'$ का मान घटता जाता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण घटता है। पृथ्वी तल से $h$ गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण $g'$ का सूत्र है:
जहाँ $R_0$ पृथ्वी की त्रिज्या है। इस सूत्र से स्पष्ट है कि $h$ बढ़ने पर $g'$ का मान घटता जाता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है, लेकिन उस पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता जिस पर यह कार्य कर रहा है। इसलिए, गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है, पिण्ड के द्रव्यमान पर नहीं।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से $r_2$ तथा $r_1$ दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र $-GMm\left(\frac{1}{r_2}-\frac{1}{r_1}\right)$ (यहाँ स्रोत में $r_0$ का प्रयोग हुआ है, जो संभवतः $r_1$ और $r_2$ का प्रतिनिधित्व करता है) सूत्र $mg\left(r_2-r_1\right)$ से अधिक यथार्थ है। सूत्र $mg\left(r_2-r_1\right)$ केवल पृथ्वी की सतह के पास की छोटी दूरियों के लिए एक सन्निकटन (approximation) है, जहाँ $g$ को स्थिर माना जा सकता है। दूर के बिन्दुओं के लिए, जहाँ $g$ बदलता है, स्थितिज ऊर्जा-अंतर के लिए सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम से प्राप्त सूत्र अधिक यथार्थ होता है।
प्रश्न 3
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परित: पृथ्वी की तुलना में दोगुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?
माना सूर्य का द्रव्यमान $M_s$ है, ग्रह का द्रव्यमान $M$ है, और ग्रह की कक्षीय त्रिज्या $r$ है। ग्रह की कक्षीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल सूर्य तथा ग्रह के बीच गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है।
अभिकेन्द्रीय बल =
गुरुत्वाकर्षण बल =
इन दोनों बलों को बराबर रखने पर:
इससे हमें प्राप्त होता है:
यह समीकरण दर्शाता है कि कक्षीय वेग $v$ कक्षीय त्रिज्या $r$ के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात $v \propto \frac{1}{\sqrt{r}}$।
प्रश्न के अनुसार, एक ग्रह सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दोगुनी चाल से गति करता है। मान लीजिए पृथ्वी की चाल $v_e$ और कक्षीय त्रिज्या $r_e$ है, और ग्रह की चाल $v$ और कक्षीय त्रिज्या $r$ है। हमें दिया गया है कि $v = 2v_e$।
हम जानते हैं कि $v_e \propto \frac{1}{\sqrt{r_e}}$ और $v \propto \frac{1}{\sqrt{r}}$।
इसलिए,
चूंकि $v = 2v_e$, तो $\frac{v}{v_e} = 2$।
अतः, $2 = \sqrt{\frac{r_e}{r}}$
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
$4 = \frac{r_e}{r}$
इससे हमें प्राप्त होता है:
$r = \frac{r_e}{4}$
इसका अर्थ है कि ग्रह की कक्षीय त्रिज्या पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या की एक-चौथाई है।
उत्तर: ग्रह का कक्षीय आमाप पृथ्वी की कक्षा की तुलना में एक-चौथाई है।
Common mistakes
- गुरुत्वाकर्षण और विद्युत बलों के परिरक्षण के बीच अंतर करने में भ्रम।
- ज्वारीय प्रभाव को केवल व्युत्क्रम वर्ग नियम से जोड़ने की गलती।
- गुरुत्वीय त्वरण के सूत्र में ऊंचाई और गहराई के प्रभावों को गलत समझना।
- कक्षीय गति की गणना में अभिकेन्द्रीय बल और गुरुत्वाकर्षण बल के बीच संबंध को गलत लागू करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के समाधान में दिए गए सूत्रों को ध्यान से समझें।
- गुरुत्वाकर्षण के परिरक्षण और ज्वारीय प्रभाव जैसे वैचारिक प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें।
- गुरुत्वीय त्वरण पर ऊंचाई और गहराई के प्रभाव से संबंधित गणनाओं का अभ्यास करें।
- केप्लर के नियमों और कक्षीय गति से संबंधित प्रश्नों को हल करने के तरीकों को दोहराएं।
Practice MCQs
Q1. किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण खोखले चालक के भीतर रखकर किया जा सकता है। क्या किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर किया जा सकता है?
Explanation: गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, जबकि विद्युत बल माध्यम पर निर्भर करता है। इसलिए, गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को खोखले गोले से परिरक्षित नहीं किया जा सकता है।
Q2. पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि अन्तरिक्ष स्टेशन बड़ा है, तो क्या वह गुरुत्व बल का संसूचन कर सकता है?
Explanation: हालांकि अंतरिक्ष यान और स्टेशन दोनों मुक्त पतन में हैं, एक बड़े स्टेशन के मामले में, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण में सूक्ष्म अंतर को मापा जा सकता है, जिससे गुरुत्व बल का संसूचन संभव हो सकता है।
Q3. चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रमाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक क्यों है, जबकि सूर्य का गुरुत्वीय खिंचाव अधिक है?
Explanation: ज्वारीय प्रभाव दूरी के तृतीय घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है, न कि व्युत्क्रम वर्ग नियम के अनुसार। चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब है, इसलिए इसका ज्वारीय प्रभाव सूर्य की तुलना में अधिक होता है।
Q4. बढ़ती तुंगता (ऊंचाई) के साथ गुरुत्वीय त्वरण का मान:
Explanation: पृथ्वी की सतह से ऊंचाई बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता है, क्योंकि यह सूत्र $g' = $ द्वारा दिया जाता है।
Q5. बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण का मान:
Explanation: पृथ्वी की सतह से गहराई बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता है, जो सूत्र $g' = g(1 - )$ द्वारा दर्शाया गया है।
Frequently asked questions
क्या गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को विद्युत प्रभाव की तरह परिरक्षित किया जा सकता है?
नहीं, गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को विद्युत प्रभाव की तरह खोखले गोले या अन्य साधनों से परिरक्षित नहीं किया जा सकता क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान में गुरुत्वाकर्षण का अनुभव क्यों नहीं करते?
अंतरिक्ष यान और उसमें सवार यात्री पृथ्वी के चारों ओर मुक्त पतन (free fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे भारहीनता का अनुभव होता है और वे गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर पाते।
ज्वारीय प्रभाव क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ज्वारीय प्रभाव किसी पिंड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के अंतर के कारण उत्पन्न होता है, जो पिंड के विभिन्न भागों पर अलग-अलग होता है। यह प्रभाव चंद्रमा और सूर्य के कारण पृथ्वी पर ज्वार-भाटा का कारण बनता है।
ऊंचाई बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण क्यों घटता है?
ऊंचाई बढ़ने पर, पिंड पृथ्वी के केंद्र से दूर हो जाता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण बल कम हो जाता है। सूत्र $g' = \frac{g}{\left(1 + \frac{h}{R_0}\right)^2}$ के अनुसार, गुरुत्वीय त्वरण घटता है।
क्या गुरुत्वीय त्वरण किसी वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है?
नहीं, गुरुत्वीय त्वरण (g) पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है, लेकिन यह उस वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता जिस पर यह कार्य कर रहा है।
कक्षीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल कहाँ से आता है?
किसी ग्रह या उपग्रह की कक्षीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल सूर्य या ग्रह के साथ उसके गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से प्राप्त होता है।
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