कक्षा 11 भौतिकी: भौतिक जगत NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 11 भौतिकी के पहले अध्याय, 'भौतिक जगत' के लिए व्यापक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह भौतिकी के मूल सिद्धांतों, विज्ञान की प्रकृति और इसके दायरे की पड़ताल करता है। समाधान अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारों से लेकर वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास तक की जटिलताओं को स्पष्ट करते हैं। इसमें भौतिकी के विभिन्न क्षेत्रों में भारत के विकास में आने वाली बाधाओं और औद्योगिक क्रांति में योगदान देने वाली प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को भौतिकी की मूलभूत अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. भौतिक जगत

Chapter summary

कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 'भौतिक जगत' के लिए ये NCERT समाधान विज्ञान की प्रकृति, भौतिकी के दायरे और इसके मूल सिद्धांतों की पड़ताल करते हैं। इसमें वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास, आइंस्टीन के विचारों और भारत में विज्ञान के विकास में बाधा डालने वाले कारकों पर चर्चा की गई है। समाधान औद्योगिक क्रांति में योगदान देने वाली प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को भी रेखांकित करते हैं। यह अध्याय छात्रों को भौतिकी की नींव और इसके महत्व को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • विज्ञान की प्रकृति और भौतिकी के दायरे को समझना।
  • वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास की प्रक्रिया का विश्लेषण करना।
  • भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों और उनकी प्रासंगिकता को पहचानना।
  • भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में बाधाओं का मूल्यांकन करना।
  • औद्योगिक क्रांति में योगदान देने वाली प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों को सूचीबद्ध करना।

Topics covered

Paper topics

  • भौतिकी का दायरा और रोमांच
  • विज्ञान की प्रकृति
  • वैज्ञानिक सिद्धांत का विकास
  • भौतिकी के मूल सिद्धांत
  • द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण
  • भारत में विज्ञान का विकास
  • वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
  • औद्योगिक क्रांति
  • वैज्ञानिक तर्क
  • प्रेक्षण और सिद्धांत
  • विविधता में एकता

Important topics

  • विज्ञान की प्रकृति और भौतिकी का दायरा
  • वैज्ञानिक सिद्धांतों का विकास (अपसिद्धान्त से धर्मसिद्धान्त)
  • भौतिकी के मूलभूत सिद्धांत
  • भारत में विज्ञान के विकास में बाधाएं
  • औद्योगिक क्रांति में वैज्ञानिक उपलब्धियों का योगदान

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Questions and Solutions

प्रश्न 1.1. पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था "संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है।"

आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रदान किए गए पारंगत प्रकथन के संबंध में, आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था "संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है।"
Solution: हमारे चारों ओर का विश्व अनेक जटिल परिघटनाओं से भरा है, जो कभी-कभी इसे समझना कठिन बना देता है। जीव विज्ञान की अपनी जटिल समस्याएँ हैं, और ब्रह्मांड की विशालता भी इसे अबोधगम्य प्रतीत करा सकती है। अल्बर्ट आइंस्टीन का यह कथन कि "संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है," इस आश्चर्य को व्यक्त करता है कि इतनी जटिलताओं के बावजूद, हम विज्ञान के कुछ साधारण और मौलिक नियमों का उपयोग करके इन प्राकृतिक परिघटनाओं को समझ सकते हैं। यह संतोष की बात है कि प्रकृति के नियम सुसंगत हैं और उन्हें खोजा जा सकता है, जिससे संसार बोधगम्य बन जाता है।

प्रश्न 1.2. "प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धान्त से आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त के रूप में समाप्त होता है"। इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैद्यता के लिए विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए।

विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए जो इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैद्यता को सिद्ध करते हों कि "प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धान्त से आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त के रूप में समाप्त होता है"।
Solution: यह टिप्पणी वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास की प्रक्रिया को दर्शाती है। एक 'अपसिद्धान्त' या किंवदंती एक प्रारंभिक, अक्सर अप्रमाणित विचार होता है, जो धीरे-धीरे परीक्षण और सत्यापन के बाद एक स्थापित 'धर्मसिद्धान्त' (स्थापित सत्य) बन जाता है। विज्ञान के इतिहास से इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. प्रकाश का तरंग सिद्धांत: थॉमस यंग द्वारा प्रस्तुत प्रकाश का तरंग सिद्धांत, जो प्रारंभ में एक किंवदंती के रूप में देखा गया था, बाद में प्रयोगों द्वारा समर्थित होकर एक स्थापित सिद्धांत बन गया।
  2. भू-केंद्रीय सिद्धांत से सूर्य-केंद्रीय सिद्धांत: प्राचीन काल में, प्टोलमी ने भू-केंद्रीय सिद्धांत दिया था, जिसमें पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना गया था। गैलीलियो ने सूर्य-केंद्रीय सिद्धांत का समर्थन किया, जिसे शुरू में विरोध का सामना करना पड़ा। बाद में न्यूटन और केप्लर ने इसे सिद्ध किया और यह आज एक धर्मसिद्धान्त है।
  3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता: आइंस्टीन का प्रसिद्ध समीकरण E = mc^2 द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच संबंध स्थापित करता है। यह विचार कि किसी वस्तु का जड़त्व उसकी ऊर्जा पर निर्भर करता है, एक अपसिद्धान्त के रूप में शुरू हुआ, लेकिन अब यह भौतिकी में एक स्थापित धर्मसिद्धान्त है।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कैसे वैज्ञानिक विचार प्रारंभिक अवस्था से विकसित होकर सुस्थापित सिद्धांतों का रूप लेते हैं।

प्रश्न 1.3. "संभव की कला ही राजनीति है"। इसी प्रकार "समाधान की कला ही विज्ञान है"। विज्ञान की प्रकृति तथा व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।

"संभव की कला ही राजनीति है" इस सूक्ति के समान ही, "समाधान की कला ही विज्ञान है"। विज्ञान की प्रकृति और व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।
Solution: यह सूक्ति विज्ञान की प्रकृति और उसके कार्य करने के तरीके को खूबसूरती से दर्शाती है। जिस प्रकार एक राजनेता असंभव लगने वाली बातों को भी संभव बताकर मत प्राप्त करने का प्रयास करता है, उसी प्रकार विज्ञान विभिन्न जटिल और बिखरी हुई घटनाओं को समझने और समझाने के लिए समाधान खोजने की कला है।

विज्ञान की प्रकृति प्रेक्षणों के व्यवस्थित अध्ययन पर आधारित है। एक वैज्ञानिक धैर्यपूर्वक इन प्रेक्षणों का विश्लेषण करता है और उनसे कुछ मूलभूत नियमों या सिद्धांतों को निकालने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, टाइको ब्राहे ने ग्रहों की गति के प्रेक्षणों का बीस वर्षों तक अध्ययन किया, और उसके बाद जे. केप्लर ने उन प्रेक्षणों का अध्ययन करके ग्रहों की गति के तीन नियम प्रतिपादित किए।

"समाधान की कला ही विज्ञान है" का तात्पर्य है कि विज्ञान का लक्ष्य विभिन्न प्रतीत होने वाली भौतिक प्रक्रियाओं को कुछ ही मूलभूत संकल्पनाओं या नियमों के माध्यम से समझाना है। यह विविधता में एकता खोजने का प्रयास है। अनेक भिन्न-भिन्न प्रकार की वैज्ञानिक घटनाओं का समाधान कुछ मूल नियमों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है, जो विज्ञान की शक्ति और सुंदरता को दर्शाता है।

प्रश्न 1.4. यद्यपि अब भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विस्तृत आधार है तथा यह तीव्रता से फैल भी रहा है, परन्तु फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्वनेता बनने की अपनी क्षमता को कार्यान्वित करने में काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक लिखिए, जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं।

यद्यपि भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का एक विस्तृत आधार है और यह तीव्रता से फैल भी रहा है, फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्वनेता बनने की अपनी क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए अभी काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक लिखिए, जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं।
Solution: भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और उसके पास एक विस्तृत आधार है, जिसमें मानव संसाधन, सूचना प्रौद्योगिकी, आयुर्विज्ञान, परिवहन, रक्षा यंत्र, न्यूक्लीय विज्ञान, अनुसंधान और बायोटेक्नोलॉजी तथा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। तथापि, कुछ कारक ऐसे हैं जो भारत को विश्व में एक अग्रणी वैज्ञानिक शक्ति बनने में बाधा डालते हैं:
  1. रोजगार के सीमित अवसर: वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए रोजगार के अवसरों की उपलब्धता सीमित है, जिससे प्रतिभा पलायन हो सकता है।
  2. उधार की तकनीक: हमारी अधिकांश तकनीकें आयातित या उधार ली हुई हैं, जिससे स्वदेशी नवाचार और विकास की गति धीमी हो जाती है।
  3. अनुसंधान के लिए अपर्याप्त धन: प्रारंभिक अनुसंधान के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता अक्सर एक समस्या होती है, जिससे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में बाधा आती है।
  4. अनुसंधान पत्रों के प्रकाशन में देरी: अनुसंधान पत्रों के शीघ्र प्रकाशन की व्यवस्था सुस्त है, जो वैज्ञानिक प्रगति की गति को धीमा कर सकती है।
  5. विज्ञान शिक्षा का स्तर: स्कूल और कॉलेज स्तर पर विज्ञान की शिक्षा का स्तर हमेशा संतोषजनक नहीं होता है, जिससे मजबूत नींव बनाने में कमी रह जाती है।
  6. प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों के लिए संसाधनों की कमी: हमारे प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को अक्सर पर्याप्त धन, सही पद और काम के उपयुक्त अवसर नहीं मिल पाते हैं, जिससे उनके विकास में बाधा आती है।
  7. बुनियादी सुविधाओं का अभाव: भारत में कुछ मूलभूत वैज्ञानिक और अनुसंधान सुविधाएँ अभी भी पर्याप्त नहीं हैं।
  8. नौकरशाही का हस्तक्षेप: विज्ञान प्रबंधन पर नौकरशाहों का अत्यधिक नियंत्रण वैज्ञानिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को जटिल बना सकता है और नवाचार को बाधित कर सकता है।
इन कारकों पर ध्यान देकर भारत विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकता है।

प्रश्न 1.5. किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन के कभी भी दर्शन नहीं किए हैं। परन्तु फिर भी सभी भौतिक वैज्ञानिकों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। कोई बुद्धिमान परन्तु अन्धविश्वासी व्यक्ति इसी तुल्यरूपता को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाता है कि यद्यपि किसी ने "देखा" नहीं है, परन्तु 'भूतों' का अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?

किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन को कभी भी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है, फिर भी सभी भौतिक वैज्ञानिक इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास करते हैं। एक बुद्धिमान परन्तु अंधविश्वासी व्यक्ति इसी प्रकार के तर्क का उपयोग करते हुए कहता है कि यद्यपि किसी ने 'भूतों' को नहीं देखा है, फिर भी उनका अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?
Solution: इस तर्क का खंडन वैज्ञानिक पद्धति और साक्ष्य के आधार पर किया जा सकता है। इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास और भूतों के अस्तित्व में विश्वास के बीच एक मौलिक अंतर है:
  1. वैज्ञानिक साक्ष्य बनाम अंधविश्वास: इलेक्ट्रॉन का अस्तित्व एक वैज्ञानिक सत्य है क्योंकि इसके अस्तित्व के पक्ष में भारी मात्रा में अप्रत्यक्ष लेकिन सुसंगत प्रमाण हैं। इलेक्ट्रॉन के व्यवहार के कारण होने वाली अनेक परिघटनाएँ (जैसे विद्युत धारा, परमाणु संरचना, प्रकाश का उत्सर्जन/अवशोषण) प्रेक्षित और मापी जा सकती हैं। इन परिघटनाओं को केवल इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व से ही समझाया जा सकता है। दूसरी ओर, भूतों के अस्तित्व का समर्थन करने वाला कोई भी विश्वसनीय, दोहराया जा सकने वाला या वैज्ञानिक रूप से सत्यापन योग्य प्रमाण नहीं है।
  2. व्याख्यात्मक शक्ति: इलेक्ट्रॉन के सिद्धांत में विभिन्न भौतिक घटनाओं को समझाने की जबरदस्त व्याख्यात्मक शक्ति है। इसके विपरीत, भूतों के अस्तित्व का कोई भी दावा किसी भी ज्ञात प्राकृतिक घटना की व्याख्या नहीं करता है।
  3. पुनरुत्पादनीयता: वैज्ञानिक प्रयोगों और प्रेक्षणों को दोहराया जा सकता है, जिससे प्राप्त परिणाम सुसंगत होते हैं। भूतों से संबंधित दावों को वैज्ञानिक विधि से सत्यापित या पुनरुत्पादित नहीं किया जा सकता है।
अतः, इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास वैज्ञानिक प्रेक्षणों और तार्किक निष्कर्षों पर आधारित है, जबकि भूतों के अस्तित्व में विश्वास अंधविश्वास और बिना प्रमाण की मान्यताओं पर आधारित है। दोनों स्थितियों की तुलना करना वैज्ञानिक तर्कसंगतता के विरुद्ध है।

प्रश्न 1.6. जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़े के कवचों (खोल ) में से अधिकांश समुरई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं। नीचे इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगता है?

जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़ों के कवचों (खोल) में से अधिकांश समुरई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं। इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ नीचे दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सी वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगती है?
Solution: इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं:
  1. व्याख्या 1: कई शताब्दियों पूर्व किसी भयानक समुद्री दुर्घटना में एक युवा समुरई डूब गया। उसकी बहादुरी के लिए श्रद्धांजलि के रूप में प्रकृति ने अबोधगम्य ढंगों द्वारा उसके चेहरे को केकड़े के कवचों पर अंकित करके उसे उस क्षेत्र में अमर बना दिया।
  2. व्याख्या 2: समुद्री दुर्घटना के पश्चात् उस क्षेत्र में मछुआरे अपने मृत नेता के सम्मान में सद्भावना प्रदर्शन करने के लिए, उस हर केकड़े के कवच को जिसकी आकृति संयोगवश समुरई से मिलती-जुलती प्रतीत होती है, वापस समुद्र में फेंक देते थे। परिणामस्वरूप केकड़े के कवचों की इस प्रकार की विशेष आकृतियाँ अधिक समय तक विद्यमान रहीं और इसीलिए कालान्तर में इसी आकृति का अनुवंशतः जनन हुआ। यह कृत्रिम वरण द्वारा विकास का एक उदाहरण है।
इन दोनों व्याख्याओं में से, **व्याख्या 2** वैज्ञानिक स्पष्टीकरण है। यह प्राकृतिक चयन (Natural Selection) और कृत्रिम चयन (Artificial Selection) के सिद्धांतों पर आधारित है। मछुआरों द्वारा समुरई जैसे दिखने वाले केकड़ों को वापस समुद्र में फेंकने की क्रिया ने उन केकड़ों को जीवित रहने और प्रजनन करने का अधिक अवसर दिया, जिनकी आकृति संयोगवश समुरई जैसी थी। समय के साथ, यह विशेषता अगली पीढ़ियों में अधिक प्रबल हो गई, जिससे इस प्रकार के कवचों वाले केकड़ों की संख्या बढ़ गई। व्याख्या 1 एक अलौकिक और अवैज्ञानिक धारणा पर आधारित है, जिसमें प्रकृति द्वारा किसी व्यक्ति को अमर बनाने की बात कही गई है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

(नोट: यह उदाहरण कार्ल सागन की पुस्तक "दि कॉस्मॉस" से लिया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे प्रथम दृष्टि में अलौकिक लगने वाले तथ्य साधारण वैज्ञानिक व्याख्याओं द्वारा स्पष्ट किए जा सकते हैं।)

प्रश्न 1.7. दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैंड तथा पश्चिमी यूरोप में जो औद्योगिक क्रांति हुई थी, उसकी चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ थीं। ये उपलब्धियाँ क्या थीं?

दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैंड तथा पश्चिमी यूरोप में हुई औद्योगिक क्रांति की चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ क्या थीं?
Solution: लगभग दो शताब्दी पूर्व इंग्लैंड और पश्चिमी यूरोप में हुई औद्योगिक क्रांति कई प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों का परिणाम थी, जिन्होंने उत्पादन, परिवहन और संचार के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए। इन उपलब्धियों में से कुछ प्रमुख निम्नलिखित थीं:
  1. विद्युत की खोज और अनुप्रयोग: विद्युत की खोज से ऊर्जा प्राप्ति के नए स्रोत मिले। डाइनमो (जनरेटर) और मोटर (मोटर) जैसी मशीनों की रूपरेखा तैयार की गई, जिन्होंने कारखानों और परिवहन में क्रांति ला दी।
  2. लोहे और इस्पात उत्पादन में सुधार: ब्लास्ट फर्नेस (धमन भट्टी) जैसी तकनीकों के विकास से लोहे को उच्च श्रेणी के स्टील में बदलने की प्रक्रिया में सुधार हुआ, जिससे मजबूत मशीनरी और औजारों का निर्माण संभव हुआ।
  3. विस्फोटकों की खोज: विस्फोटकों की खोज ने न केवल सैन्य क्षमताओं को बढ़ाया, बल्कि खनिज दोहन और निर्माण कार्यों में भी आशातीत सफलता दिलाई।
  4. गुरुत्वाकर्षण का अध्ययन और तोपखाने का विकास: गुरुत्वाकर्षण के अध्ययन से गोलों/तोपों/बंदूकों से गोली की गति के अध्ययन में प्रगति हुई, जिससे सैन्य प्रौद्योगिकी में सुधार हुआ।
  5. कपास की ओटाई मशीन (Gin): हाथ की अपेक्षा कपास से 300 गुना अधिक गति से बिनौले अलग करने वाली सूती मशीन (जैसे कॉटन जिन) के आविष्कार ने वस्त्र उद्योग में क्रांति ला दी।
  6. ऊष्मा इंजन का आविष्कार: ऊष्मा और ऊष्मागतिकी के सिद्धांतों पर आधारित ऊष्मा इंजन (जैसे स्टीम इंजन) का आविष्कार औद्योगिक क्रांति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ था, जिसने कारखानों और परिवहन (रेलगाड़ी, जहाज) को शक्ति प्रदान की।
ये उपलब्धियाँ न केवल तकनीकी नवाचार का प्रतीक थीं, बल्कि इन्होंने बड़े पैमाने पर उत्पादन, बेहतर परिवहन और नए उद्योगों के उदय को संभव बनाया, जिसने औद्योगिक क्रांति को गति दी।

Common mistakes

  • वैज्ञानिक तर्क और अंधविश्वास के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास की प्रक्रिया को सतही तौर पर समझना।
  • भारत में विज्ञान के विकास में बाधाओं के कारणों का अपूर्ण विश्लेषण।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास के उदाहरणों को ध्यान से पढ़ें।
  • विज्ञान की प्रकृति से संबंधित सूक्तियों की व्याख्या को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • भारत में विज्ञान के विकास में बाधक कारकों की सूची बनाएं और उनके समाधान पर विचार करें।
  • औद्योगिक क्रांति से जुड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार, संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय क्या है?

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा एक वैज्ञानिक सिद्धांत का उदाहरण है जो 'अपसिद्धान्त' से शुरू होकर 'धर्मसिद्धान्त' बना?

Q3. विज्ञान को 'समाधान की कला' क्यों कहा गया है?

Q4. भारत में विज्ञान के विकास में बाधक कारकों में से एक कौन सा है?

Q5. औद्योगिक क्रांति में योगदान देने वाली प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक कौन सी थी?

Frequently asked questions

कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 'भौतिक जगत' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में भौतिकी के दायरे और रोमांच, विज्ञान की प्रकृति, वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास की प्रक्रिया, भौतिकी के मूल सिद्धांतों और भारत में विज्ञान के विकास में आने वाली बाधाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

अल्बर्ट आइंस्टीन के 'संसार बोधगम्य है' कथन का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि यद्यपि संसार अत्यंत जटिल है, फिर भी इसे विज्ञान के कुछ साधारण नियमों और सिद्धांतों द्वारा समझा जा सकता है।

वैज्ञानिक तर्क और अंधविश्वास के बीच क्या अंतर है?

वैज्ञानिक तर्क प्रेक्षणों, प्रयोगों और तार्किक विश्लेषण पर आधारित होता है, जबकि अंधविश्वास बिना किसी प्रमाण के मान्यताओं पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉन का अस्तित्व वैज्ञानिक तर्क पर आधारित है, जबकि भूतों का अस्तित्व अंधविश्वास पर।

भारत में विज्ञान के विकास में किन प्रमुख बाधाओं का उल्लेख किया गया है?

भारत में विज्ञान के विकास में बाधाओं में वैज्ञानिकों के लिए सीमित रोजगार के अवसर, उधार ली गई तकनीक, अनुसंधान के लिए अपर्याप्त धन, धीमी प्रकाशन प्रक्रिया, विज्ञान की शिक्षा का स्तर और नौकरशाही का हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये NCERT समाधान कक्षा 11 के छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने, महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकारों का अभ्यास करने में मदद मिलती है।

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