कक्षा 11 जीव विज्ञान NCERT समाधान: अध्याय 20 गमन एवं संचलन
यह पृष्ठ कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 20, 'गमन एवं संचलन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कंकाल पेशी के सार्कोमियर की संरचना का चित्रमय वर्णन और पेशी संकुचन के सर्पी तन्तु सिद्धान्त (sliding filament theory) की कार्य-विधि का गहन विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को पेशी संकुचन के दौरान एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट्स की भूमिका, कैल्सियम आयनों का महत्व, और ऊर्जा की आपूर्ति के तंत्र को समझने में मदद करते हैं। यह विस्तृत व्याख्या छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करती है, जिससे वे इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से सीख सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 20. गमन एवं संचलन |
Chapter summary
अध्याय 20 'गमन एवं संचलन' के ये NCERT समाधान कंकाल पेशी की मूल संरचनात्मक इकाई, सार्कोमियर, के आरेखण और उसके विभिन्न भागों की पहचान पर केंद्रित हैं। यह पेशी संकुचन की क्रियाविधि को समझाने वाले सर्पी तन्तु सिद्धान्त की विस्तृत व्याख्या भी प्रदान करता है, जिसमें एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट्स की परस्पर क्रिया, कैल्सियम आयनों की भूमिका और संकुचन के लिए आवश्यक ऊर्जा की आपूर्ति का वर्णन किया गया है। ये समाधान छात्रों को पेशी संकुचन की प्रक्रिया को चरण-दर-चरण समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- कंकाल पेशी के सार्कोमियर की संरचना को चित्रित करना और उसके विभिन्न भागों को पहचानना।
- पेशी संकुचन के सर्पी तन्तु सिद्धान्त (sliding filament theory) को परिभाषित करना।
- पेशी संकुचन की क्रियाविधि में एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट्स की भूमिका को समझना।
- पेशी संकुचन के लिए कैल्सियम आयनों (Ca++) के महत्व का वर्णन करना।
- पेशी संकुचन के दौरान ऊर्जा की आपूर्ति के स्रोत को समझना।
Topics covered
Paper topics
- कंकाल पेशी
- सार्कोमियर
- एक्टिन फिलामेंट
- मायोसिन फिलामेंट
- पेशी संकुचन
- सर्पी तन्तु सिद्धान्त
- कैल्सियम आयन
- ATP
- ऊर्जा आपूर्ति
- तन्त्रिका उद्दीपन
Important topics
- सार्कोमियर की संरचना और उसके घटक
- पेशी संकुचन का सर्पी तन्तु सिद्धान्त
- कैल्सियम आयनों की भूमिका
- ATP की भूमिका और ऊर्जा उत्पादन
- संकुचन और शिथिलन की क्रियाविधि
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
कंकाल पेशी की मूल संकुचनशील इकाई को सार्कोमियर कहा जाता है। यह दो Z-रेखाओं (या Z-डिस्क) के बीच का क्षेत्र होता है। सार्कोमियर में दो प्रकार के प्रोटीन तन्तु (filaments) होते हैं: एक्टिन (पतले तन्तु) और मायोसिन (मोटे तन्तु)।
सार्कोमियर के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- A-बैंड (A-Band): यह मायोसिन तन्तुओं की पूरी लंबाई के बराबर होता है और इसमें एक्टिन तन्तुओं का वह भाग भी शामिल होता है जो मायोसिन के ऊपर ओवरलैप करता है। यह बैंड एनिसोट्रोपिक (anisotropic) होता है।
- I-बैंड (I-Band): यह क्षेत्र केवल एक्टिन तन्तुओं से बना होता है और दो आसन्न सार्कोमियर के A-बैंड के बीच स्थित होता है। यह आइसोट्रोपिक (isotropic) होता है। I-बैंड के मध्य में एक पतली, सघन रेखा होती है जिसे Z-डिस्क कहते हैं।
- Z-डिस्क (Z-Disc): यह एक सघन प्रोटीन संरचना होती है जो I-बैंड के मध्य में स्थित होती है और सार्कोमियर की सीमा को परिभाषित करती है। एक्टिन तन्तु Z-डिस्क से जुड़े होते हैं।
- H-ज़ोन (H-Zone): यह A-बैंड के मध्य में स्थित एक क्षेत्र है जहाँ एक्टिन तन्तु मायोसिन के ऊपर ओवरलैप नहीं करते। यह क्षेत्र केवल मायोसिन तन्तुओं से बना होता है।
- M-लाइन (M-Line): यह H-ज़ोन के ठीक मध्य में स्थित एक पतली रेखा होती है, जो मायोसिन तन्तुओं को एक साथ बांधे रखती है।
चित्र: (यहाँ एक सार्कोमियर का आरेखित चित्र प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें उपरोक्त सभी भागों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया हो। चित्र में Z-डिस्क, I-बैंड, A-बैंड, H-ज़ोन और M-लाइन को दर्शाया जाएगा, साथ ही एक्टिन और मायोसिन तन्तुओं की स्थिति भी दिखाई जाएगी।)
प्रश्न 2
पेशी संकुचन का सर्पी तन्तु सिद्धान्त (Sliding Filament Theory) हक्सले (Huxley) द्वारा 1954 में प्रस्तावित किया गया था। इस सिद्धान्त के अनुसार, पेशी संकुचन के दौरान एक्टिन (पतले) तन्तु मायोसिन (मोटे) तन्तुओं के ऊपर फिसलते हैं, जिससे सार्कोमियर की लंबाई कम हो जाती है। इस प्रक्रिया में न तो एक्टिन और न ही मायोसिन तन्तुओं की लंबाई में कोई परिवर्तन होता है, बल्कि वे एक-दूसरे पर सरकते हैं।
इस सिद्धान्त की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- उद्दीपन (Stimulation): जब एक तन्त्रिका आवेग पेशी तन्तु तक पहुँचता है, तो यह पेशी कोशिका झिल्ली (sarcolemma) को उत्तेजित करता है।
- कैल्सियम आयनों का विमोचन (Release of Calcium Ions): पेशी कोशिका के अंतर्द्रव्यीय जाल (sarcoplasmic reticulum) से कैल्सियम आयन (Ca++) सार्कोमियर में मुक्त होते हैं।
- एक्टिन-मायोसिन बंध का निर्माण (Formation of Actin-Myosin Cross-bridges): कैल्सियम आयन ट्रॉपोमायोसिन से बंध जाते हैं, जिससे एक्टिन पर मायोसिन के लिए बंधन स्थल (binding sites) खुल जाते हैं। ATP के जल-अपघटन से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग करके मायोसिन के 'हेड' एक्टिन से जुड़कर क्रॉस-ब्रिज बनाते हैं।
- फिलामेंट का फिसलना (Sliding of Filaments): मायोसिन हेड अपनी स्थिति बदलते हैं, जिससे एक्टिन फिलामेंट्स मायोसिन फिलामेंट्स पर सार्कोमियर के केंद्र की ओर खिंचते हैं। इस क्रिया को 'पावर स्ट्रोक' कहते हैं।
- संकुचन (Contraction): एक्टिन फिलामेंट्स के अंदर की ओर फिसलने से सार्कोमियर की लंबाई कम हो जाती है, जिससे पेशी संकुचित हो जाती है। A-बैंड की लंबाई अपरिवर्तित रहती है, जबकि I-बैंड और H-ज़ोन की लंबाई कम हो जाती है।
- शिथिलन (Relaxation): जब उद्दीपन समाप्त हो जाता है, तो कैल्सियम आयनों को वापस अंतर्द्रव्यीय जाल में पम्प कर दिया जाता है। क्रॉस-ब्रिज टूट जाते हैं और एक्टिन फिलामेंट्स अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं, जिससे पेशी शिथिल हो जाती है।
यह सिद्धान्त पेशी संकुचन की क्रियाविधि को सफलतापूर्वक समझाता है।
Common mistakes
- सार्कोमियर के विभिन्न भागों के नामकरण में भ्रम।
- सर्पी तन्तु सिद्धान्त के चरणों को क्रम से याद रखने में कठिनाई।
- कैल्सियम आयनों और ATP की भूमिका को ठीक से न समझना।
- संकुचन और शिथिलन (relaxation) की प्रक्रियाओं के बीच अंतर स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- सार्कोमियर का चित्र बार-बार बनाकर विभिन्न भागों को चिह्नित करने का अभ्यास करें।
- सर्पी तन्तु सिद्धान्त के प्रत्येक चरण को एक प्रवाह चार्ट के रूप में लिखें।
- कैल्सियम आयनों और ATP की भूमिका को समझने के लिए मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
- संकुचन और शिथिलन की प्रक्रिया की तुलनात्मक तालिका बनाएं।
Practice MCQs
Q1. पेशी संकुचन के सर्पी तन्तु सिद्धान्त के अनुसार, संकुचन के दौरान कौन से तन्तु एक-दूसरे पर फिसलते हैं?
Explanation: सर्पी तन्तु सिद्धान्त के अनुसार, पेशी संकुचन के दौरान एक्टिन तन्तु मायोसिन तन्तुओं पर फिसलते हैं, जिससे सार्कोमियर की लंबाई कम हो जाती है।
Q2. सार्कोमियर में पेशी संकुचन के लिए कैल्सियम आयनों (Ca++) का मुख्य स्रोत क्या है?
Explanation: जब पेशी तन्तु को उद्दीपन मिलता है, तो अंतर्द्रव्यीय जाल (ER) से Ca++ आयन सार्कोमियर में मुक्त होते हैं, जो पेशी संकुचन को शुरू करते हैं।
Q3. पेशी संकुचन के लिए आवश्यक ऊर्जा किस अणु से प्राप्त होती है?
Explanation: पेशी संकुचन के लिए आवश्यक ऊर्जा ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के जल-अपघटन से प्राप्त होती है।
Q4. सार्कोमियर का वह क्षेत्र जो केवल मायोसिन फिलामेंट्स से बना होता है, क्या कहलाता है?
Explanation: H-ज़ोन सार्कोमियर का वह केंद्रीय क्षेत्र है जहाँ केवल मायोसिन फिलामेंट्स होते हैं और एक्टिन फिलामेंट्स नहीं पहुँचते।
Frequently asked questions
कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 20 में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से कंकाल पेशी की संरचना, विशेष रूप से सार्कोमियर की बनावट, और पेशी संकुचन की क्रियाविधि, जिसे सर्पी तन्तु सिद्धान्त (sliding filament theory) कहा जाता है, का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
पेशी संकुचन के सर्पी तन्तु सिद्धान्त का क्या अर्थ है?
सर्पी तन्तु सिद्धान्त के अनुसार, पेशी संकुचन तब होता है जब एक्टिन फिलामेंट्स मायोसिन फिलामेंट्स पर फिसलते हैं, जिससे सार्कोमियर की लंबाई कम हो जाती है, न कि फिलामेंट्स की लंबाई में कमी आती है।
पेशी संकुचन में कैल्सियम आयनों (Ca++) की क्या भूमिका है?
कैल्सियम आयन पेशी संकुचन को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये ट्रॉपोमायोसिन से बंधकर एक्टिन फिलामेंट्स को मायोसिन से जुड़ने के लिए मुक्त करते हैं।
पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा कहाँ से आती है?
पेशी संकुचन के लिए आवश्यक ऊर्जा ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के जल-अपघटन से प्राप्त होती है। पेशियों में ATP का निर्माण ग्लाइकोजन के चयापचय से होता है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलती है।
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