CBSE Class 11 Hindi A Chapter 19: Syed Raza Haider NCERT Solutions

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This chapter delves into the life and artistic journey of the renowned artist Syed Raza Haider, offering comprehensive NCERT Solutions for Class 11 Hindi A students. The solutions cover key aspects of Raza's early life, his struggles in Mumbai for art education, and the significant personal and national events that shaped his perspective. It explores his interactions with influential figures like Henri Cartier-Bresson and Jaleel Saheb, highlighting the importance of passion over profession in art. The solutions also touch upon the broader implications for the future of art in a commercialized world and the empowering feeling of being able to effect change. These detailed explanations are designed to aid students in understanding the nuances of the chapter and preparing effectively for their examinations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 19

Chapter summary

Chapter 19 of Class 11 Hindi A focuses on the life and artistic evolution of Syed Raza Haider. The NCERT Solutions provide in-depth answers to questions about his early career choices, the challenges he faced pursuing art in Mumbai, and the personal and historical events that influenced him. It examines the impact of mentorship and the philosophical debate between art as a profession versus a calling, offering insights into the contemporary art scene. The solutions aim to equip students with a thorough understanding of Raza's journey and the broader context of art.

Learning outcomes

  • Understand the early career choices and aspirations of artist Syed Raza Haider.
  • Analyze the struggles faced by Raza in Mumbai for art education and career.
  • Explain the impact of personal tragedies and national events on Raza's life and art.
  • Evaluate the influence of mentors and critics on an artist's development.
  • Discuss the philosophy of art as an inner calling versus a commercial profession.
  • Reflect on the current state and future of art in a commercialized world.

Topics covered

Paper topics

  • Syed Raza Haider's early life and career choices
  • Artistic struggles in Mumbai
  • Impact of personal and national events
  • Influence of French artists and photographers
  • Henri Cartier-Bresson's critique
  • Art as an inner calling vs. profession
  • Commercialization of art
  • The feeling of empowerment and change
  • Language and sentence construction

Important topics

  • Raza's decision to stay in Mumbai for art studies
  • Challenges faced during art education in Mumbai
  • Impact of 1947-48 events on Raza
  • The significance of Henri Cartier-Bresson's advice
  • Art as an 'inner calling'
  • The future of art in a commercial world

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

रज़ा ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी की पेशकश क्यों नहीं स्वीकार की?
Solution: मध्य प्रदेश सरकार ने लेखक रज़ा को मुंबई के 'जे. जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट्स' में दाखिला लेने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की थी। जब रज़ा वहाँ पहुँचे, तो दाखिला प्रक्रिया बंद हो चुकी थी, जिसके कारण उनकी छात्रवृत्ति वापस ले ली गई। इसके बाद उन्हें अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया। हालाँकि, रज़ा को मुंबई शहर, वहाँ का वातावरण, कला दीर्घाएँ, लोग और मित्र बहुत पसंद आ गए थे। उन्होंने मुंबई में ही रहकर अपनी कला का अध्ययन जारी रखने का मन बना लिया था। इसी कारणवश, रज़ा ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी की पेशकश स्वीकार नहीं की।

प्रश्न 2

मुंबई में रहकर कला के अध्ययन के लिए रज़ा ने क्या-क्या संघर्ष किए?
Solution: मुंबई पहुँचने पर रज़ा को सबसे पहले एक्सप्रेस ब्लॉक स्टूडियो में एक डिज़ाइनर के रूप में नौकरी मिली, लेकिन उन्हें रहने के लिए कोई उचित स्थान नहीं मिला। वे रातें अक्सर किसी परिचित ड्राइवर के ठिकाने पर बिताते थे। उनकी दिनचर्या अत्यंत कठिन थी: सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक नौकरी करने के बाद, वे मोहन आर्ट क्लब में जाकर पढ़ाई करते थे। कुछ समय बाद उन्हें स्टूडियो के आर्ट डिपार्टमेंट में एक कमरा मिला, लेकिन उन्हें ज़मीन पर ही सोना पड़ता था। वे रात में ग्यारह-बारह बजे तक गलियों के चित्र बनाते या विभिन्न प्रकार के स्केच तैयार करते रहते थे। इस प्रकार, मुंबई में रहकर कला के अध्ययन के लिए रज़ा ने अनेक संघर्षों का सामना किया।

प्रश्न 3

भले 1947 और 1948 में महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटी हों, मेरे लिए वे कठिन बरस थे - रज़ा ने ऐसा क्यों कहा?
Solution: रज़ा ने वर्ष 1947 और 1948 को कठिन बरस इसलिए कहा क्योंकि इसी दौरान उनके जीवन में कई व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर की दुखद घटनाएँ घटीं। व्यक्तिगत रूप से, इसी अवधि में उनकी माँ का निधन हो गया था। उनके पिता को मंडला लौटना पड़ा और अगले ही वर्ष उनका भी देहांत हो गया। राष्ट्रीय स्तर पर, 1947 में भारत को स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन साथ ही देश को विभाजन की त्रासदी भी झेलनी पड़ी। इसके अतिरिक्त, महात्मा गांधी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस समय रज़ा केवल 25 वर्ष के थे, और इन सभी घटनाओं का उन पर गहरा भावनात्मक प्रभाव पड़ा। इन्हीं कारणों से उन्होंने इन वर्षों को अपने लिए कठिन बरस बताया है।

प्रश्न 4

रज़ा के पसंदीदा फ्रेंच कलाकार कौन थे?
Solution: रज़ा के पसंदीदा फ्रेंच कलाकारों में सेजाँ, वॉन, गोगॉ, पिकासो, मातीस, शागील और ब्रॉक जैसे प्रसिद्ध कलाकार शामिल थे। ये कलाकार अपनी अनूठी शैलियों और कलात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे, और उन्होंने रज़ा की कलात्मक सोच को प्रभावित किया।

प्रश्न 5

क. "तुम्हारे चित्रों में रंग है, भावना है, लेकिन रचना नहीं है। तुम्हें मालूम होना चाहिए कि चित्र इमारत की तरह बनाया जाता है - आधार, नींव, दीवारें, बीम, छत; और तब जाकर वह टिकता है - यह बात" किसने, किस संदर्भ में कही? ख. रज़ा पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
Solution:

क. उपर्युक्त कथन प्रसिद्ध फ्रेंच फोटोग्राफर 'हेनरी कार्तिए ब्रेसॉ' ने लेखक रज़ा के चित्रों के संदर्भ में कहा था। उस समय रज़ा श्रीनगर में थे, और ब्रेसॉ ने उनकी कला में रंग और भावना की उपस्थिति को स्वीकार करते हुए, रचना की कमी पर प्रकाश डाला था। उन्होंने चित्र को एक इमारत के समान संरचनात्मक आधार देने की सलाह दी थी।

ख. फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्तिए ब्रेसॉ की इस टिप्पणी का रज़ा पर बहुत गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इस आलोचना को सुनकर, रज़ा तुरंत मुंबई लौट आए और फ्रेंच सीखने के लिए 'अलयांस फ़्रांस' में दाखिला लिया। उन्होंने अपना ध्यान पेंटिंग की बारीकियों और संरचनात्मक पहलुओं पर केंद्रित करना शुरू कर दिया, जिससे उनकी कलात्मक समझ और अभिव्यक्ति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

प्रश्न 6

रज़ा को जलील साहब जैसे लोगों का सहारा न मिला होता तो क्या तब भी वे एक जाने-माने चित्रकार होते? तर्क सहित लिखिए।
Solution: यदि रज़ा को जलील साहब जैसे लोगों का सहारा न मिला होता, तब भी वे संभवतः एक जाने-माने चित्रकार अवश्य बनते। इसका मुख्य कारण यह है कि रज़ा में चित्रकार बनने की अदम्य इच्छाशक्ति और प्रतिभा थी। प्रतिभाशाली व्यक्तियों की कला और लगन अंततः सामने आ ही जाती है, भले ही उसमें अधिक समय लगे। जलील साहब के समर्थन से रज़ा को आर्थिक कठिनाइयों से निश्चित रूप से मुक्ति मिली और शायद उनके करियर को गति मिली, लेकिन उनकी अपनी मेहनत, संघर्ष और कला के प्रति समर्पण ही उनकी प्रसिद्धि का मूल आधार थे। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि बिना बाहरी सहारे के भी उनकी प्रतिभा उन्हें देर-सवेर प्रसिद्धि के शिखर तक ले जाती।

प्रश्न 7

चित्रकला व्यवसाय नहीं, अंतरात्मा की पुकार है - इस कथन के आलोक में कला के वर्तमान और भविष्य पर विचार कीजिए।
Solution: यह कथन कि 'चित्रकला व्यवसाय नहीं, अंतरात्मा की पुकार है' पूर्णतः सत्य है। आज के व्यावसायिक युग में, कला को अक्सर केवल एक व्यवसाय के रूप में देखा जाने लगा है, जहाँ कलाकार का मुख्य लक्ष्य अधिक से अधिक लाभ कमाना होता है। इस व्यावसायिकता के कारण कला की मौलिकता और गहराई प्रभावित हो रही है। कलाकार अपनी कला को अंतरात्मा से जोड़ने के बजाय बाज़ार की माँगों के अनुसार ढालने लगे हैं। हालाँकि, आज भी ऐसे कलाकार मौजूद हैं जो अपनी कला को अपनी आंतरिक भावनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति मानते हैं। यदि कलाकार अपनी कला को अपनी अंतरात्मा से जोड़कर बनाए रखता है, तो वह आज भी कालजयी कृतियों का निर्माण कर सकता है और कला के भविष्य को समृद्ध बना सकता है। कला का सच्चा मूल्य व्यावसायिक लाभ में नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति में निहित है।

प्रश्न 8

हमें लगता था कि हम पहाड़ हिला सकते हैं - आप किन क्षणों में ऐसा सोचते हैं?
Solution: जब हम किसी बड़े सामाजिक उद्देश्य या बदलाव की बात करते हैं, या जब हम किसी असंभव लगने वाले कार्य को पूरा करने का दृढ़ संकल्प लेते हैं, तब हमें ऐसा महसूस होता है कि हम पहाड़ हिला सकते हैं। ऐसे क्षणों में हमारा आत्मविश्वास चरम पर होता है और हमें लगता है कि हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और किसी भी असंभव कार्य को संभव बना सकते हैं। यह भावना तब उत्पन्न होती है जब हम किसी नेक काम के लिए एकजुट होते हैं या जब हमें अपनी क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास होता है।

प्रश्न 9 (भाषा की बात)

जब तक मैं बंबई पहुँचा, तब तक जे.जे.स्कूल में दाखिला बंद हो चुका था - इस वाक्य को हम दूसरे तरीके से भी कह सकते हैं। नीचे दिए वाक्यों को दूसरे तरीके से लिखिए: क. जब तक मैं प्लेटफ़ॉर्म पहुँचती तब तक गाड़ी जा चुकी थी। ख. जब तक डॉक्टर हवेली पहुँचता तब तक सेठ की मृत्यु हो चुकी थी। ग. जब तक रोहित दरवाज़ा बंद करता तब तक उसके साथी होली का रंग लेकर अंदर आ चुके थे। घ. जब तक रूचि कैनवास हटाती तब तक बारिश शुरू हो चुकी थी।
Solution:

दिए गए वाक्यों को 'पहले' या 'पूर्व' जैसे शब्दों का प्रयोग करके पुनः लिखा जा सकता है, जो घटना के क्रम को स्पष्ट करते हैं:

क. मेरे प्लेटफ़ॉर्म पहुँचने से पहले गाड़ी जा चुकी थी।

ख. डॉक्टर के हवेली पहुँचने से पहले सेठ की मृत्यु हो चुकी थी।

ग. रोहित के दरवाज़ा बंद करने से पहले उसके साथी होली का रंग लेकर अंदर आ चुके थे।

घ. रूचि के कैनवास हटाने से पहले बारिश शुरू हो चुकी थी।

Common mistakes

  • Confusing personal struggles with artistic talent as the sole reason for success.
  • Underestimating the impact of external support systems on an artist's career.
  • Viewing art purely as a commercial venture rather than an expression of the soul.
  • Failing to connect historical and personal events to an artist's creative output.

Revision tips

  • Focus on understanding the chronological progression of Raza's life and career.
  • Pay attention to the specific challenges Raza faced and how he overcame them.
  • Analyze the quotes and their impact on Raza's artistic decisions.
  • Consider the broader philosophical questions raised about art and its commercialization.
  • Relate the personal experiences of Raza to the historical context of India in the mid-20th century.

Practice MCQs

Q1. Syed Raza Haider ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी की पेशकश क्यों स्वीकार नहीं की?

Q2. बंबई में कला के अध्ययन के लिए रज़ा ने किन कठिनाइयों का सामना किया?

Q3. रज़ा ने 1947 और 1948 को 'कठिन बरस' क्यों कहा?

Q4. फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्तिए ब्रेसॉ की टिप्पणी का रज़ा पर क्या प्रभाव पड़ा?

Q5. रज़ा के अनुसार, चित्रकला क्या है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

ये समाधान CBSE कक्षा 11 हिंदी (आरोह भाग-1) के छात्रों के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 19 पर केंद्रित हैं।

अध्याय 19 में मुख्य रूप से किस कलाकार के बारे में बताया गया है?

अध्याय 19 प्रसिद्ध भारतीय कलाकार सैयद रज़ा हैदर के जीवन, संघर्षों और कलात्मक यात्रा पर केंद्रित है।

रज़ा ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी क्यों नहीं स्वीकार की?

रज़ा को बंबई का वातावरण, कला दीर्घाएँ और वहाँ के लोग बहुत पसंद आए थे, और वह वहीं रहकर अपनी कला का अध्ययन जारी रखना चाहते थे।

हेनरी कार्तिए ब्रेसॉ की टिप्पणी का रज़ा पर क्या प्रभाव पड़ा?

ब्रेसॉ की टिप्पणी के बाद रज़ा ने फ्रेंच सीखना शुरू किया और पेंटिंग की बारीकियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया, जिससे उनकी कला में सुधार हुआ।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट करते हैं और विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए सहायक हैं।

कला को 'अंतरात्मा की पुकार' कहने का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि कला केवल पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह कलाकार की आंतरिक भावनाओं और आत्मा की अभिव्यक्ति है।

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