CBSE Class 10 Hindi स्पर्श NCERT Solutions: Chapter 5 - पर्वत प्रदेश में प्रवास

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) के पाठ 5, 'पर्वत प्रदेश में प्रवास' के लिए ये विस्तृत समाधान सुमित्रानंदन पंत की कविता पर केंद्रित हैं। यह कविता पर्वतीय क्षेत्र में मानसून के दौरान प्रकृति के जीवंत चित्रण को प्रस्तुत करती है। समाधानों में प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों, 'मेखलाकार' और 'सहस्र दृग-सुमन' जैसे काव्यात्मक शब्दों के अर्थ, और झील की तुलना दर्पण से तथा वृक्षों की तुलना महत्वाकांक्षी प्राणियों से करने जैसे कवि के बिम्बों और रूपकों की गहन व्याख्या शामिल है। इन समाधानों का उद्देश्य कविता की विषय-वस्तु, बिम्बों और साहित्यिक युक्तियों की समझ को बढ़ाना है, जिससे परीक्षा की तैयारी के लिए एक मजबूत आधार मिले और पंत की काव्य कला की गहरी सराहना हो सके।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. सुमित्रानंदऩ पंतः पर्वत प्रदेश मे प्रवास

Chapter summary

This chapter's NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) focus on Sumitranandan Pant's poem 'पर्वत प्रदेश में प्रवास'. The solutions explain the poem's depiction of nature's transformations during the monsoon in a hilly area. Key aspects covered include the dynamic changes in the landscape, the interpretation of poetic phrases, and the poet's use of similes and metaphors to portray the grandeur and dynamism of the mountains and their surroundings. These solutions are designed to help students grasp the essence of the poem and answer related questions effectively.

Learning outcomes

  • Understand the natural changes during the monsoon season in mountainous regions as described in the poem.
  • Interpret the meaning and significance of poetic terms like 'मेखलाकार' and 'सहस्र दृग-सुमन'.
  • Analyze the poet's use of imagery and comparisons to describe natural elements.
  • Explain the symbolism behind the poet's portrayal of trees and waterfalls.
  • Appreciate the poetic style and descriptive language of Sumitranandan Pant.

Topics covered

Paper topics

  • Monsoon in mountainous regions
  • Nature's transformations
  • Poetic imagery and description
  • Interpretation of poetic terms
  • Metaphors and similes in poetry
  • Sumitranandan Pant's poetry
  • Symbolism in nature
  • Descriptive language

Important topics

  • Changes in nature during monsoon
  • Meaning of 'मेखलाकार'
  • Meaning of 'सहस्र दृग-सुमन'
  • Comparison of lake to a mirror
  • Symbolism of trees reaching for the sky
  • Poet's depiction of heavy rainfall

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Solution: पावस ऋतु (वर्षा ऋतु) में पर्वतीय प्रदेश में प्रकृति प्रतिपल अपना रूप बदलती हुई अत्यंत मनमोहक लगती है। कविता के अनुसार, इस ऋतु में निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई देते हैं:
  1. पर्वत अक्सर बादलों में छिप जाते हैं, जिससे वे ऐसे प्रतीत होते हैं मानो पंख लगाकर उड़ गए हों।
  2. तालाबों से उठता हुआ कोहरा धुएँ के समान दिखाई देता है, जिससे भ्रम उत्पन्न होता है कि मानो आग लग गई हो।
  3. पर्वतों से बहने वाले झरने मोतियों की लड़ियों के समान सुंदर लगते हैं।
  4. पर्वत पर असंख्य रंग-बिरंगे फूल खिल जाते हैं, जो प्रकृति की सुंदरता को बढ़ाते हैं।
  5. ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर एकटक देखते हुए प्रतीत होते हैं, मानो वे अपनी उच्चाकांक्षाओं को व्यक्त कर रहे हों।
  6. तेज और मूसलाधार वर्षा के कारण ऐसा लगता है मानो आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
  7. आकाश में तेजी से इधर-उधर घूमते हुए बादल अत्यंत आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
ये सभी परिवर्तन मिलकर पर्वतीय क्षेत्र में वर्षा ऋतु के दौरान एक जीवंत और गतिशील वातावरण का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 2

'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
Solution: 'मेखलाकार' शब्द का अर्थ है 'करधनी के आकार के समान'। मेखला या करधनी कमर में पहनी जाने वाली एक आभूषण होती है, जो गोल या अर्ध-गोलाकार होती है।

कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत के लिए किया है। पर्वत का विस्तार और उसकी गोलाईदार आकृति उसे करधनी के समान दर्शाती है, जैसे उसने पूरी पृथ्वी को अपने घेरे में ले लिया हो। कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत की विशालता, भव्यता और उसके विस्तृत फैलाव को दर्शाने के लिए किया है। यह उपमा प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाने और पाठक के मन में पर्वत के प्रति एक विस्मय का भाव जगाने में सहायक है।

प्रश्न 3

'सहस्र दृग-सुमन' से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
Solution: 'सहस्र दृग-सुमन' का शाब्दिक अर्थ है 'हजारों आँख रूपी फूल'।

कवि ने इस पद का प्रयोग पर्वत पर वर्षा ऋतु में खिले हुए असंख्य फूलों के लिए किया है। कवि की कल्पना है कि ये फूल पर्वत की आँखें हैं, जो हजारों की संख्या में खिले हुए हैं। इन फूलों रूपी आँखों से पर्वत मानो प्रकृति की सुंदरता को निहार रहा है। इस पद के प्रयोग से कवि ने सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है, जिससे पर्वत को एक सजीव इकाई के रूप में महसूस किया जा सके, जो अपने आसपास के सौंदर्य का अवलोकन कर रहा है।

प्रश्न 4

कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
Solution: कवि ने तालाब की समानता दर्पण के साथ दिखाई है।

इसका कारण यह है कि तालाब का जल वर्षा ऋतु में अत्यंत स्वच्छ, निर्मल और स्थिर है। इस स्वच्छ जल में पर्वत और उस पर खिले हुए फूलों का प्रतिबिंब बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है, ठीक वैसे ही जैसे एक दर्पण में किसी वस्तु का प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है। कवि ने इस समानता का प्रयोग करके तालाब की निर्मलता और उसमें प्रतिबिंबित हो रहे प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। यह उपमा काव्य के सौंदर्य को बढ़ाती है।

प्रश्न 5

पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
Solution: पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर अपनी उच्चाकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हुए देख रहे थे।

वे मौन रहकर भी यह संदेश देते प्रतीत होते हैं कि किसी भी बड़े उद्देश्य या लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ निश्चय, स्थिर दृष्टि और एकाग्रता आवश्यक है। जिस प्रकार ये वृक्ष बिना हिले-डुले आकाश की ओर देख रहे हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और शांत मन से, बिना किसी संदेह के, अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए। यह दृश्य जीवन में महत्वाकांक्षा और एकाग्रता के महत्व को दर्शाता है।

प्रश्न 6

शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
Solution: कवि के अनुसार, वर्षा इतनी तेज और मूसलाधार थी कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा आकाश ही धरती पर टूट पड़ा हो। चारों ओर कोहरा छा जाने से पर्वत, झरने आदि सब अदृश्य हो गए थे। तालाब से उठते धुएँ जैसे कोहरे को देखकर ऐसा लग रहा था मानो आग लग गई हो। वर्षा के इस अत्यंत भयंकर और डरावने रूप को देखकर, विशाल और ऊँची आकांक्षाओं वाले शाल के वृक्ष भी भयभीत होकर धरती में धँसे हुए प्रतीत हो रहे थे। यह वर्णन वर्षा की प्रचंडता को दर्शाता है।

प्रश्न 7

झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
Solution: बहते हुए झरने पर्वतों की उच्चता, महानता और उनके गौरव का गान कर रहे हैं। वे निरंतर बहते हुए पर्वतों की महिमा का बखान करते प्रतीत होते हैं।

कवि ने बहते हुए झरनों की तुलना मोतियों की लड़ियों से की है। जिस प्रकार मोतियों की लड़ियाँ सुंदर और चमकीली होती हैं, उसी प्रकार झरने का गिरता हुआ जल भी मोतियों की लड़ियों के समान प्रतीत होता है, जो पर्वतों की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

प्रश्न 8

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए -
Solution:
  1. 1. है टूट पड़ा भू पर अंबर

    इस पंक्ति का भाव यह है कि वर्षा इतनी अधिक और मूसलाधार हो रही है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरा आकाश ही धरती पर आ गिरा हो। चारों ओर घने बादल छाए हुए हैं, जिनके कारण पर्वत पूरी तरह से अदृश्य हो गए हैं। पृथ्वी और आकाश के बीच का भेद समाप्त हो गया है, और केवल वर्षा के शोर के अतिरिक्त कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा। यह वर्षा की प्रचंडता और उसके प्रभाव को दर्शाता है।

  2. 2. -यों जलद-यान में विचर-विचर था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

    इस पंक्ति का भाव यह है कि वर्षा के समय पर्वतीय प्रदेश में क्षण-क्षण होने वाले अलौकिक और जादुई प्राकृतिक परिवर्तनों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो वर्षा के देवता इंद्र अपने बादल रूपी यान पर बैठकर कोई जादू का खेल खेल रहे हों। आकाश में उड़ते हुए बादल, चारों ओर धुएँ जैसा कोहरा छा जाना, और मूसलाधार वर्षा का होना - ये सभी दृश्य इतने अद्भुत और चमत्कारी लगते हैं कि वे किसी जादू के खेल के समान प्रतीत होते हैं।

  3. 3. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर उच्चाकांक्षाओं से तरुवर हैं झाँक रहे नीरव नभ पर

    इस पंक्ति का भाव यह है कि ऊँचे पर्वत के हृदय (मध्य भाग) से निकलकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर देख रहे हैं। वे अपनी ऊँचाई और आकाश की ओर उन्मुखता के माध्यम से अपनी उच्चाकांक्षाओं को व्यक्त कर रहे हैं। वे मौन रहकर भी यह दर्शाते हैं कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ता, एकाग्रता और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। यह दृश्य प्रकृति की भव्यता और जीवन के आदर्शों का प्रतीक है।

Common mistakes

  • Misinterpreting the literal meaning of poetic phrases without considering the context.
  • Failing to connect the poet's descriptions to the specific setting of a mountainous region during monsoon.
  • Overlooking the symbolic meanings intended by the poet in his comparisons.
  • Confusing the literal description of natural phenomena with their deeper poetic significance.

Revision tips

  • Read the poem carefully to visualize the described scenes.
  • Focus on understanding the meaning of each question and how the solution directly addresses it.
  • Pay attention to the poet's use of figurative language (metaphors, similes) and its effect.
  • Practice explaining the poetic terms and imagery in your own words.
  • Review the solutions to ensure you can articulate the natural changes during monsoon in the mountains.

Practice MCQs

Q1. पावस ऋतु में पर्वतीय प्रदेश में प्रकृति में क्या परिवर्तन आते हैं?

Q2. 'मेखलाकार' शब्द का प्रयोग कवि ने किसके लिए किया है?

Q3. 'सहस्र दृग-सुमन' से कवि का क्या तात्पर्य है?

Q4. कवि ने तालाब की तुलना किससे की है और क्यों?

Q5. ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 10 के हिंदी (स्पर्श) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 5: 'पर्वत प्रदेश में प्रवास' पर केंद्रित हैं।

कविता 'पर्वत प्रदेश में प्रवास' में प्रकृति का वर्णन कैसे किया गया है?

कविता में पावस ऋतु (वर्षा ऋतु) के दौरान पर्वतीय प्रदेश में प्रकृति के बदलते और मनमोहक दृश्यों का सजीव चित्रण किया गया है, जैसे बादलों में छिपे पर्वत, मोतियों की तरह झरने, और खिले हुए फूल।

'मेखलाकार' और 'सहस्र दृग-सुमन' जैसे शब्दों का क्या अर्थ है?

'मेखलाकार' का अर्थ है करधनी के आकार का, जिसका प्रयोग कवि ने पर्वत की विशालता बताने के लिए किया है। 'सहस्र दृग-सुमन' का अर्थ है हजारों फूल रूपी आँखें, जिनका प्रयोग पर्वत पर खिले फूलों के लिए किया गया है।

ये समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान छात्रों को कविता की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत उत्तर देते हैं, और काव्यात्मक भाषा व बिंबों को समझने में सहायता करते हैं, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक हैं।

कवि ने तालाब की तुलना दर्पण से क्यों की है?

कवि ने तालाब की तुलना दर्पण से इसलिए की है क्योंकि तालाब का जल अत्यंत स्वच्छ और निर्मल है, जिसमें पर्वत और फूलों का स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है, ठीक वैसे ही जैसे एक दर्पण में दिखाई देता है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.