कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 6: महादेवी वर्मा - NCERT सॉल्यूशंस
यह पृष्ठ कक्षा 10 की हिंदी (स्पर्श भाग 2) के पाठ 6, महादेवी वर्मा द्वारा रचित कविता के लिए विस्तृत NCERT सॉल्यूशंस प्रदान करता है। इसमें कविता के केंद्रीय भाव, प्रतीकों और काव्य-पंक्तियों के गहन विश्लेषण को शामिल किया गया है। समाधानों में 'दीपक' और 'प्रियतम' के प्रतीकात्मक अर्थ, दीपक से किए गए आग्रह का कारण, 'विश्व-शलभ' की दीपक के साथ जलने की इच्छा, और 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' कविता के सौंदर्य के आधार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है। यह छात्रों को कविता की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. महादेवी वर्मा |
Chapter summary
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श के पाठ 6 में महादेवी वर्मा की कविता 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' के NCERT सॉल्यूशंस दिए गए हैं। ये समाधान कविता में प्रयुक्त प्रतीकों जैसे दीपक (आस्था, ज्ञान) और प्रियतम (परमात्मा) की व्याख्या करते हैं। इसमें दीपक से निरंतर जलते रहने के आग्रह, विश्व-शलभ की समर्पण भावना, और काव्य-पंक्तियों के अर्थ को स्पष्ट किया गया है। ये उत्तर छात्रों को कविता के भावार्थ और काव्य-सौंदर्य को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- कविता में प्रयुक्त प्रतीकों (दीपक, प्रियतम, विश्व-शलभ) के अर्थ को समझना।
- कवयित्री द्वारा दीपक से निरंतर जलते रहने के आग्रह के कारणों का विश्लेषण करना।
- कविता की काव्य-पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट करना।
- कविता के सौंदर्य तत्वों, जैसे बिंब अंकन और शब्द आवृत्ति, की पहचान करना।
- सांसारिक मोह-माया और अहंकार के त्याग के महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- महादेवी वर्मा की कविता
- प्रतीकवाद (दीपक, प्रियतम)
- आस्था और ईश्वर भक्ति
- आत्मसमर्पण का भाव
- बिंब अंकन
- शब्दों की आवृत्ति का प्रभाव
- सांसारिक मोह-माया
- अहंकार का त्याग
- काव्य-पंक्तियों का विश्लेषण
- कवयित्री का दृष्टिकोण
Important topics
- दीपक और प्रियतम के प्रतीक
- निरंतर जलते रहने का आग्रह और उसका कारण
- विश्व-शलभ की समर्पण भावना
- कविता का सौंदर्य (बिंब, लय)
- स्नेहहीन तारों का प्रतीकात्मक अर्थ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रस्तुत कविता में, 'दीपक' आस्था, ज्ञान और उस आंतरिक प्रकाश का प्रतीक है जो अंधकार को दूर करता है। यह कवयित्री की उस लौ का प्रतिनिधित्व करता है जो निरंतर जलती रहती है। 'प्रियतम' कवयित्री के आराध्य देव, अर्थात परमात्मा का प्रतीक है, जिसे वे पाना चाहती हैं।
प्रश्न 2
कवयित्री महादेवी वर्मा दीपक से यह आग्रह कर रही हैं कि वह हर अच्छी-बुरी परिस्थिति में, चाहे वह सुख हो या दुख, निरंतर जलता रहे। यह आग्रह इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कवयित्री ईश्वर को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मानती हैं। ईश्वर को पाने के लिए ज्ञान, स्नेह और अटूट आस्था रूपी दीपक का लगातार प्रज्वलित रहना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वह मार्ग प्रकाशित कर सके।
प्रश्न 3
'विश्व-शलभ' का अर्थ है सारा संसार। जिस प्रकार एक पतंगा दीपक की लौ के प्रति प्रेम के कारण उसमें जलकर अपने जीवन का अंत कर देता है, उसी प्रकार संसार के लोग भी अपने अहंकार, मोह, लोभ और अन्य सांसारिक विकारों को समाप्त करके, आस्था रूपी दीपक की लौ के समक्ष अपना पूर्ण समर्पण करना चाहते हैं। वे इस समर्पण के माध्यम से प्रभु को पाना चाहते हैं, अर्थात् अपने अहंकार को पिघलाकर ईश्वर में विलीन हो जाना चाहते हैं।
प्रश्न 4
इस कविता का सौंदर्य शब्दों की आवृत्ति और सफल बिंब अंकन, दोनों पर ही निर्भर करता है।
शब्दों की आवृत्ति: कविता में 'मधुर-मधुर', 'युग-युग', 'सिहर-सिहर', 'विहँस-विहँस' जैसे शब्दों का बार-बार प्रयोग किया गया है। यह पुनरुक्ति कविता को एक विशेष लय प्रदान करती है और उसे अधिक प्रभावी एवं संगीतात्मक बनाती है।
सफल बिंब अंकन: कविता में बिंबों का अत्यंत सफल चित्रण किया गया है। ये बिंब सर्वस्व समर्पण की भावना को व्यक्त करते हैं और आराध्य के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, दीपक का निरंतर जलते रहना समर्पण और प्रकाश फैलाने का बिंब प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 5
कवयित्री अपने मन में प्रज्वलित आस्था रूपी दीपक के प्रकाश से अपने परमात्मा रूपी प्रियतम का पथ आलोकित करना चाहती हैं। उनका उद्देश्य यह है कि इस प्रकाश से उनके प्रियतम तक पहुँचने का मार्ग सुगम और स्पष्ट हो जाए।
प्रश्न 6
आकाश में अनगिनत तारे होते हैं, परंतु वे संसार भर में अपना प्रकाश या स्नेह नहीं फैलाते। कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन इसलिए प्रतीत होते हैं क्योंकि उनमें कोई भाव या संवेदनशीलता नहीं होती; वे केवल यंत्रवत होकर अपना कार्य करते हैं। इसी प्रकार, कवयित्री को संसार के प्राणियों में भी प्रभु-भक्ति, परोपकार और स्नेह जैसी भावनाएं समाप्त होती हुई प्रतीत होती हैं, जिसके कारण उन्हें तारे स्नेहहीन लगते हैं।
प्रश्न 7
पतंगा दीपक की लौ में जलकर अपने अस्तित्व को समाप्त करना चाहता है, परंतु वह ऐसा कर नहीं पाता। इसी प्रकार, मनुष्य भी परमात्मा रूपी लौ में जलकर अपने अहंकार और अस्तित्व को विलीन करना चाहता है, लेकिन वह अपने अहंकार को छोड़ने में असमर्थ रहता है। इस असमर्थता के कारण वह पछतावा या क्षोभ व्यक्त करता है, क्योंकि वह पूर्ण समर्पण नहीं कर पा रहा है।
प्रश्न 8
कवयित्री अपने आत्म-दीपक को विभिन्न भावों से जलने का निर्देश देती हैं, जैसे मधुरता से, प्रेम से, खुशी से (पुलक-पुलक), कंपित होकर (सिहर-सिहर), और उत्साह व प्रसन्नता से (विहँस-विहँस)। यह इसलिए कहा गया है क्योंकि परमात्मा को पाने के लिए भक्त को जीवन की अनेक अवस्थाओं और परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इन विभिन्न भावों को अपनाकर ही भक्त अपने अस्तित्व को मिटाकर, ज्ञान रूपी अंधकार को दूर करते हुए, आलोक फैलाने में सफल हो सकता है। यह विभिन्न भावों के माध्यम से ईश्वर के प्रति समर्पण की गहराई को दर्शाता है।
प्रश्न 9
जलते नभ में देख असंख्यक,
स्नेहहीन नित कितने दीपक;
जलमय सागर का उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल!
विहँस विहँस मेरे दीपक जल!
क . 'स्नेहहीन दीपक' से क्या तात्पर्य है?
ख . सागर को 'जलमय' कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है?
क . 'स्नेहहीन दीपक' से तात्पर्य:
'स्नेहहीन दीपक' से तात्पर्य ऐसे व्यक्तियों से है जिनमें प्रभु भक्ति या किसी भी प्रकार के भाव की कमी होती है। वे केवल यंत्रवत अपना कर्तव्य निभाते हैं, उनमें कोई वास्तविक स्नेह या संवेदनशीलता नहीं होती।
ख . सागर को 'जलमय' कहने का अभिप्राय और उसके हृदय के जलने का कारण:
कवयित्री ने सागर को 'जलमय' कहा है, जिसका अर्थ है कि वह जल से परिपूर्ण है। यहाँ 'जलमय' का तात्पर्य संसार की सांसारिकता से भी है। जिस प्रकार सागर में अथाह जल होने के बावजूद वह किसी के सीधे उपयोग में नहीं आता, उसी प्रकार बिना ईश्वर-भक्ति के मनुष्य का जीवन भी व्यर्थ माना जा सकता है।
बादल वर्षा करके संसार को हरा-भरा बनाते हैं और बिजली की चमक से उसे प्रकाशित करते हैं। इस परोपकार और प्रकाश को देखकर जैसे सागर का हृदय जलता है (ईर्ष्या या विवशता से), उसी प्रकार संसार के लोग भी सुख-समृद्धि में रहते हुए ईर्ष्या, द्वेष और तृष्णा के कारण जलते रहते हैं। यह पंक्ति संसार की उस स्थिति को दर्शाती है जहाँ भौतिक सुख होने पर भी आंतरिक शांति का अभाव है।
Common mistakes
- प्रतीकों के गहरे अर्थ को न समझ पाना।
- काव्य-पंक्तियों के शाब्दिक अर्थ पर अटक जाना, भावार्थ को न समझना।
- कवयित्री के आग्रह के पीछे के आध्यात्मिक या दार्शनिक कारणों को अनदेखा करना।
- बिंब अंकन और शब्द आवृत्ति के महत्व को कम आंकना।
Revision tips
- कविता को बार-बार पढ़ें और उसके केंद्रीय भाव को समझने का प्रयास करें।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए प्रतीकों और उनके अर्थों को अच्छी तरह याद करें।
- काव्य-पंक्तियों का भावार्थ अपनी भाषा में लिखने का अभ्यास करें।
- कविता के सौंदर्य पक्ष (बिंब, लय) पर ध्यान दें और परीक्षा में इसके महत्व को समझें।
Practice MCQs
Q1. प्रस्तुत कविता में 'दीपक' किसका प्रतीक है?
Explanation: कविता में दीपक को आस्था का प्रतीक माना गया है, जो निरंतर जलकर अंधकार को दूर करता है।
Q2. कवयित्री दीपक से हर परिस्थिति में जलते रहने का आग्रह क्यों करती हैं?
Explanation: कवयित्री ईश्वर को सर्वोपरि मानती हैं और उन्हें पाने के लिए ज्ञान, स्नेह और आस्था रूपी दीपक का निरंतर जलते रहना आवश्यक है।
Q3. 'विश्व-शलभ' दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?
Explanation: विश्व-शलभ (संसार) अपने अहंकार, मोह और विषय-विकारों को समाप्त करके आस्था रूपी दीपक की लौ में समर्पण करना चाहता है ताकि प्रभु को पा सके।
Q4. कविता का सौंदर्य मुख्य रूप से किस पर निर्भर करता है?
Explanation: कविता की सुंदरता शब्दों की पुनरुक्ति (जैसे मधुर-मधुर) से उत्पन्न लय और बिंबों के सफल अंकन (जैसे सर्वस्व समर्पण की भावना) पर निर्भर करती है।
Q5. आकाश के तारे कवयित्री को 'स्नेहहीन' क्यों प्रतीत होते हैं?
Explanation: कवयित्री को तारे स्नेहहीन लगते हैं क्योंकि वे केवल अपना कर्तव्य निभाते हैं, उनमें परोपकार या भक्ति जैसी भावनाएं नहीं दिखतीं, ठीक वैसे ही जैसे संसार में भी ऐसी भावनाएं कम हो गई हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श के पाठ 6 में महादेवी वर्मा की कौन सी कविता शामिल है?
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श के पाठ 6 में महादेवी वर्मा की कविता 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' शामिल है।
इस कविता में 'दीपक' किसका प्रतीक है?
इस कविता में 'दीपक' आस्था, ज्ञान और ईश्वर के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
कवयित्री दीपक से हर परिस्थिति में जलते रहने का आग्रह क्यों करती हैं?
कवयित्री दीपक से हर परिस्थिति में जलते रहने का आग्रह इसलिए करती हैं ताकि वह अपने आराध्य देव (परमात्मा) का पथ आलोकित कर सके और ईश्वर प्राप्ति के लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
कविता में 'विश्व-शलभ' का क्या अर्थ है और वह दीपक के साथ क्यों जलना चाहता है?
'विश्व-शलभ' का अर्थ है सारा संसार। संसार अपने अहंकार और मोह को गलाकर, दीपक की लौ में समर्पण करके प्रभु को पाना चाहता है।
कविता के सौंदर्य में 'मधुर-मधुर' जैसे शब्दों की आवृत्ति का क्या महत्व है?
'मधुर-मधुर', 'युग-युग' जैसे शब्दों की आवृत्ति कविता को लयबद्ध बनाती है और उसके प्रभाव को बढ़ाती है।
आकाश के तारे कवयित्री को 'स्नेहहीन' क्यों लगते हैं?
तारे कवयित्री को स्नेहहीन लगते हैं क्योंकि वे केवल यंत्रवत अपना कर्तव्य निभाते हैं, उनमें परोपकार या भक्ति जैसी भावनाएं नहीं दिखतीं।
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