CBSE Class 10 Hindi NCERT Solutions: Tulsidas - Ram-Lakshman-Parshuram Samvad
This chapter delves into the intense dialogue between Lord Rama, Lakshman, and Parshuram from Tulsidas's Ramcharitmanas. The NCERT Solutions for Class 10 Hindi, Chapter 2, focus on the 'Ram-Lakshman-Parshuram Samvad'. These solutions provide detailed explanations and answers to the questions based on the text. Students will explore the reasons behind Parshuram's anger, the contrasting personalities and arguments of Rama and Lakshman, and the characteristics of a true warrior as described by Lakshman. The solutions also offer insights into the significance of humility alongside courage and power. By studying these solutions, students can gain a deeper understanding of the epic poem, its characters, and the moral lessons embedded within the narrative, aiding in their exam preparation.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद |
Chapter summary
This chapter's NCERT Solutions for Class 10 Hindi cover the 'Ram-Lakshman-Parshuram Samvad' from Tulsidas's Ramcharitmanas. It focuses on analyzing the characters of Rama and Lakshman, understanding Parshuram's fury, and interpreting the dialogue. The solutions explain the reasons for the broken bow, the qualities of a warrior, and the importance of humility. This section helps students grasp the nuances of the poetic text and its underlying themes.
Learning outcomes
- Understand the context and reasons for Parshuram's anger.
- Analyze the contrasting personalities and dialogue styles of Rama and Lakshman.
- Identify and explain the characteristics of a brave warrior as presented by Lakshman.
- Interpret the significance of humility when combined with courage and power.
- Explain the meaning and context of specific verses from the 'Ram-Lakshman-Parshuram Samvad'.
Topics covered
Paper topics
- Ram-Lakshman-Parshuram Samvad
- Character analysis of Rama
- Character analysis of Lakshman
- Parshuram's anger and dialogue
- Qualities of a warrior
- Humility and power
- Tulsidas's Ramcharitmanas
- Poetic interpretation
- Hindi literature
- Character contrasts
Important topics
- Character analysis of Rama and Lakshman
- Parshuram's anger and justifications
- Lakshman's description of a warrior
- The role of humility alongside strength
- Interpretation of key verses
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- उन्होंने परशुराम से पूछा कि बचपन में तोड़े गए अनगिनत धनुषों पर उन्होंने कभी क्रोध क्यों नहीं किया, जबकि इस विशेष धनुष से उन्हें इतना लगाव क्यों है।
- लक्ष्मण ने बताया कि यह शिव का धनुष उन्हें किसी साधारण धनुष के समान ही प्रतीत हुआ था।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री राम ने इसे तोड़ा नहीं, बल्कि उनके मात्र स्पर्श से ही यह स्वतः टूट गया।
- लक्ष्मण ने यह भी तर्क दिया कि इस धनुष को तोड़ते समय राम ने किसी के लाभ या हानि के बारे में नहीं सोचा था, इसलिए इस धनुष को तोड़ने में राम का कोई दोष नहीं है।
प्रश्न 2
श्री राम: श्री राम स्वभाव से अत्यंत कोमल, विनयी और शांत हैं। परशुराम के क्रोध को देखकर उन्होंने धैर्य बनाए रखा और स्वयं को उनका दास बताकर विनम्रतापूर्वक बात करते हुए परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास किया। उनकी प्रतिक्रिया उनकी बुद्धिमत्ता और मृदुभाषी स्वभाव को दर्शाती है।
लक्ष्मण: लक्ष्मण का स्वभाव राम से बिल्कुल विपरीत है। वे क्रोधी, उग्र, निडर और वाचाल हैं। वे परशुराम के साथ व्यंग्यात्मक और तीखे वचनों का प्रयोग करते हैं, इस बात की परवाह किए बिना कि इससे परशुराम और अधिक क्रोधित हो सकते हैं। वे साहसी हैं और अपनी बात दृढ़ता से रखते हैं।
संक्षेप में, राम विनम्र, धैर्यवान और बुद्धिमान हैं, जबकि लक्ष्मण निडर, वाचाल, साहसी और कुछ हद तक क्रोधी स्वभाव के हैं।
प्रश्न 3
लक्ष्मण: हे मुनिराज! बचपन में तो हमने न जाने कितने ही धनुष तोड़ दिए, पर आपने कभी क्रोध नहीं किया। भला इस धनुष से आपको इतना विशेष लगाव क्यों है?
परशुराम: (क्रोधित होकर) अरे राजपुत्र! तू काल के वश में होकर ऐसी बातें कर रहा है। तू अपने माता-पिता को चिंता में क्यों डालना चाहता है? यह साधारण धनुष नहीं, महादेव शिव का धनुष है। चुप हो जा और मेरे इस भयंकर फरसे को देख ले, जो गर्भस्थ शिशुओं को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है।
लक्ष्मण: (मुस्कुराते हुए) हे मुनि! आप स्वयं को महान योद्धा मानते हैं और मुझे बार-बार अपना फरसा दिखाकर डरा रहे हैं। जैसे कोई फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहे, वैसे ही मुझे बालक समझकर डराने का आपका प्रयास व्यर्थ है। हम कोई ऐसे-वैसे कुम्हड़े की बतिया नहीं हैं जो तर्जनी उंगली देखते ही मुरझा जाएँ।
प्रश्न 4
- वे बाल ब्रह्मचारी हैं और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं।
- वे समस्त विश्व में क्षत्रिय कुल के संहारक (द्रोही) के रूप में विख्यात हैं।
- उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर पृथ्वी को अनेक बार राजाओं से विहीन कर दिया और उस जीती हुई भूमि को कई बार ब्राह्मणों को दान में दे दिया।
- उन्होंने अपने फरसे से सहस्त्रबाहु की भुजाओं को काट डाला है।
- उन्होंने राजकुमार को चेतावनी दी कि वह मेरे इस भयंकर फरसे को देखे, जो गर्भ में पल रहे शिशुओं को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है, इसलिए वह अपने माता-पिता को चिंता में न डाले।
प्रश्न 5
- शूरवीर युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करके ही अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं, न कि केवल बातों से अपनी प्रशंसा करते हैं।
- जो वीरता का व्रत धारण करते हैं, वे धैर्यवान होते हैं और आसानी से क्रोधित या विचलित नहीं होते।
- वीर पुरुष कभी भी अपने पराक्रम का स्वयं अभिमान नहीं करते।
- वे किसी के प्रति भी अनुचित या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं करते।
- वीर पुरुष दीन-हीन, ब्राह्मणों, गायों या कमजोर व्यक्तियों पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करते। वे अन्याय के विरुद्ध हमेशा निडरता से खड़े रहते हैं।
- जब कोई उन्हें ललकारता है, तो वीर पुरुष परिणाम की चिंता किए बिना निडरतापूर्वक उसका सामना करते हैं।
प्रश्न 6
जब किसी व्यक्ति के पास साहस और शक्ति होती है, लेकिन विनम्रता नहीं होती, तो वह अक्सर अभिमानी, उद्दंड और दूसरों को नीचा दिखाने वाला बन जाता है। ये गुण व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाते हैं, परन्तु यदि इनमें विनम्रता का समावेश न हो, तो व्यक्ति का अहंकार बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि साहस और शक्ति के साथ विनम्रता भी हो, तो वह व्यक्ति न केवल श्रेष्ठ बनता है, बल्कि श्रेष्ठतम की श्रेणी में आ जाता है। विनम्रता व्यक्ति के व्यवहार में सदाचार और मधुरता लाती है। एक विनम्र व्यक्ति किसी भी कठिन परिस्थिति को सरलता और समझदारी से संभाल सकता है।
इस प्रसंग में, परशुराम जी साहस और शक्ति का प्रतीक हैं, परन्तु उनमें अहंकार भी है। वहीं, श्री राम साहस, शक्ति और विनम्रता का अद्भुत संगम हैं। राम की विनम्रता के सामने परशुराम जैसे क्रोधी मुनि का अहंकार भी अंततः नतमस्तक हो जाता है, जो विनम्रता की शक्ति को दर्शाता है।
प्रश्न 7
प्रसंग: ये पंक्तियाँ महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' से ली गई हैं। इन पंक्तियों में लक्ष्मण जी, परशुराम जी के क्रोध और अहंकार का प्रत्युत्तर देते हुए उनके वचन-बाणों का जवाब दे रहे हैं।
भावार्थ: लक्ष्मण जी मुस्कुराते हुए, अत्यंत कोमल वाणी में परशुराम जी पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि हे मुनिराज! आप स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं। आप बार-बार मुझे अपना फरसा दिखाकर डरा रहे हैं, मानो आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देना चाहते हों। लक्ष्मण का कहने का तात्पर्य यह था कि वे परशुराम जी को कोई साधारण बालक नहीं समझते जो उनके फरसे को देखकर डर जाएँ। वे परशुराम के अहंकार को चुनौती दे रहे थे और यह जता रहे थे कि वे उनके डराने-धमकाने से भयभीत होने वाले नहीं हैं।
प्रश्न 7 (जारी)
प्रसंग: यह पंक्तियाँ भी 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' से ली गई हैं, जहाँ लक्ष्मण परशुराम के क्रोध और उनके फरसे को देखकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।
भावार्थ: लक्ष्मण जी परशुराम जी से कहते हैं कि यहाँ सभा में कोई ऐसा कमजोर व्यक्ति (कुम्हड़े की बतिया) नहीं है जो केवल तर्जनी उंगली (अंगूठे के पास वाली उंगली) को देखकर ही डरकर मर जाए या मुरझा जाए। वे आगे कहते हैं कि मैंने आपके कुठार (फरसा), धनुष और बाणों को देखकर जो कुछ भी कहा, वह कुछ अभिमान सहित ही कहा था। इसका भाव यह है कि लक्ष्मण परशुराम को यह बताना चाहते थे कि वे उनके शस्त्रों और बल-प्रदर्शन से भयभीत नहीं हैं और वे स्वयं भी योद्धा हैं जो अपनी बात अभिमान के साथ रख सकते हैं। वे परशुराम के बल प्रदर्शन को व्यर्थ मानते हैं।
Common mistakes
- Confusing the distinct personalities and speaking styles of Rama and Lakshman.
- Misinterpreting Lakshman's satirical or boastful remarks as mere disrespect.
- Failing to connect the described warrior traits to the actual dialogue.
- Overlooking the underlying moral lessons about humility and power.
Revision tips
- Read the 'Ram-Lakshman-Parshuram Samvad' aloud to better understand the tone and rhythm.
- Compare and contrast the arguments presented by Lakshman and Rama.
- Focus on the specific qualities of a warrior mentioned by Lakshman and find examples in the text.
- Reflect on the situations where humility is shown to be more effective than aggression.
Practice MCQs
Q1. लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध पर क्या तर्क दिया कि बचपन में तोड़े गए धनुषों पर उन्होंने कभी क्रोध नहीं किया?
Explanation: लक्ष्मण ने परशुराम के विशेष लगाव को इंगित करते हुए यह तर्क दिया कि बचपन में तोड़े गए अन्य धनुषों पर उन्होंने कभी क्रोध नहीं किया, तो इस विशेष धनुष पर क्यों।
Q2. राम के स्वभाव की मुख्य विशेषता क्या बताई गई है?
Explanation: समाधान के अनुसार, राम स्वभाव से कोमल और विनयी हैं, जिन्होंने परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास किया।
Q3. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की कौन सी विशेषता बताई?
Explanation: लक्ष्मण के अनुसार, शूरवीर युद्ध में वीरता का प्रदर्शन करके ही अपनी शूरवीरता का परिचय देते हैं, न कि व्यर्थ में बखान करके।
Q4. परशुराम ने अपने फरसे की भयानकता का वर्णन करते हुए क्या कहा?
Explanation: परशुराम ने अपने फरसे की भयानकता का वर्णन करते हुए कहा कि यह गर्भ में पल रहे शिशुओं को भी नष्ट कर सकता है।
Q5. साहस और शक्ति के साथ विनम्रता होने पर व्यक्ति कैसा बन जाता है?
Explanation: समाधान के अनुसार, साहस और शक्ति के साथ विनम्रता मिलने पर व्यक्ति श्रेष्ठतम वीर की श्रेणी में आ जाता है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान CBSE कक्षा 10 हिंदी विषय के लिए है, विशेष रूप से तुलसीदास द्वारा रचित 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' पाठ पर आधारित है।
समाधान में किन मुख्य पात्रों के स्वभाव की तुलना की गई है?
समाधान में राम और लक्ष्मण के स्वभाव की तुलना की गई है। राम को कोमल, विनयी और धैर्यवान बताया गया है, जबकि लक्ष्मण को क्रोधी, उग्र और वाचाल कहा गया है।
लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
लक्ष्मण के अनुसार, वीर योद्धा युद्ध में वीरता का प्रदर्शन करते हैं, व्यर्थ बखान नहीं करते, धैर्यवान होते हैं, स्वयं पर अभिमान नहीं करते और दीन-दुखियों पर अपनी वीरता नहीं दिखाते।
इस पाठ के समाधानों से छात्रों को क्या सीखने को मिलेगा?
छात्र परशुराम के क्रोध का कारण, राम और लक्ष्मण के चरित्र की भिन्नता, वीर योद्धा के गुण और साहस-शक्ति के साथ विनम्रता के महत्व को समझेंगे।
क्या समाधानों में मूल पाठ के प्रश्न जस के तस रखे गए हैं?
हाँ, सभी प्रश्न मूल पाठ के अनुसार ही रखे गए हैं, केवल उनके उत्तरों को स्पष्ट और विस्तृत रूप से समझाया गया है।
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