CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 3 Dev NCERT Solutions

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This comprehensive set of NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi (Kshitij) Chapter 3, 'Dev', delves into the rich poetry of the renowned poet Dev. The solutions meticulously explain two of his famous poems, focusing on the depiction of Lord Krishna and the celebration of the spring season. Students will find detailed analyses of the poetic devices used, such as anupraas (alliteration) and roopak (metaphor), along with explanations of the imagery and themes presented. The solutions break down complex verses into simpler terms, clarifying the poet's intent and the nuances of the Braj Bhasha. This resource is designed to aid students in understanding the depth of Dev's work, enhancing their comprehension and analytical skills for effective exam revision.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. देव

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 3, 'Dev', provides in-depth explanations of two key poems by the poet Dev. It focuses on understanding the portrayal of Lord Krishna as 'Shri Brijdulah' and the unique, unconventional depiction of Spring as a child prince. The solutions also highlight the use of poetic devices like alliteration and metaphor, and explain the aesthetic beauty of the moonlit night as described by the poet. This chapter's solutions aim to enhance students' appreciation for classical Hindi poetry.

Learning outcomes

  • Understand the depiction of Lord Krishna in Dev's poetry.
  • Analyze the use of alliteration and metaphor in the given verses.
  • Explain the poet's unique portrayal of the Spring season.
  • Appreciate the aesthetic beauty of a moonlit night as described by Dev.
  • Clarify the meaning and poetic devices in specific lines from the poems.

Topics covered

Paper topics

  • श्री कृष्ण का वर्णन
  • अनुप्रास अलंकार
  • रूपक अलंकार
  • वसंत ऋतु का वर्णन
  • चाँदनी रात का सौंदर्य
  • काव्य-सौंदर्य
  • ब्रज भाषा
  • सवैया छंद
  • कवित्त छंद
  • पारंपरिक वर्णन से भिन्नता

Important topics

  • श्री कृष्ण का वर्णन ('श्रीब्रजदूलह')
  • अनुप्रास और रूपक अलंकारों की पहचान
  • वसंत का बाल-रूप चित्रण
  • चाँदनी रात के सौंदर्य का वर्णन
  • काव्य पंक्तियों का भाव स्पष्टीकरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवि ने 'श्रीब्रजदूलह' किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?
Solution: कवि देव ने 'श्रीब्रजदूलह' शब्द का प्रयोग श्री कृष्ण के लिए किया है। उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा गया है क्योंकि श्री कृष्ण समस्त संसार में सबसे अधिक सुंदर, सजीले, उज्ज्वल और महिमावान हैं। जिस प्रकार एक दीपक मंदिर में प्रकाश फैलाकर उसे पवित्र और पूजनीय बनाता है, उसी प्रकार श्री कृष्ण भी इस संसार रूपी मंदिर में अपने ईश्वरीय सौंदर्य और आभा से प्रकाश एवं पवित्रता का संचार करते हैं, जिससे सारा संसार मोहित हो जाता है।

प्रश्न 2

पहले सवैये में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?
Solution:

पहले सवैये में अनुप्रास और रूपक अलंकार के प्रयोग वाली पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

1. अनुप्रास अलंकार:

  • 'कटि किंकिनि के धुनि की मधुराई।' - इस पंक्ति में 'क' वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।
  • 'साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।' - इस पंक्ति में 'प', 'व', और 'ह' वर्णों की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।

2. रूपक अलंकार:

  • 'मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।' - यहाँ श्री कृष्ण के मुख की तुलना चंद्रमा से की गई है और मुख (उपमेय) पर चंद्रमा (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है।
  • 'जै जग-मंदिर-दीपक-सुंदर' - यहाँ संसार की तुलना मंदिर से की गई है और संसार (उपमेय) पर मंदिर (उपमान) का अभेद आरोप है।

प्रश्न 3

निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई। साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
Solution:

प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि देव द्वारा रचित सवैया से ली गई हैं, जिनमें श्री कृष्ण के मनमोहक सौंदर्य का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया है।

कवि वर्णन करते हैं कि श्री कृष्ण के पैरों में पायल (नूपुर) मधुर ध्वनि के साथ बज रहे हैं, और उनकी कमर में बंधी किंकणी (करधनी) से भी मधुर ध्वनि उत्पन्न हो रही है। इन ध्वनियों से उनकी चाल संगीतमय और अत्यंत आकर्षक लग रही है।

उनके साँवले सलोने शरीर पर पीला वस्त्र (पट पीत) बहुत शोभायमान हो रहा है, और उनके हृदय पर धारण की हुई वनमाला (वन के फूलों की माला) अत्यंत सुंदर लग रही है। इन आभूषणों और परिधानों से श्री कृष्ण का सौंदर्य और भी निखर गया है।

काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से, 'पाँयनि नूपुर मंजु बजैं' में नाद-सौंदर्य और अनुप्रास का प्रभाव है। 'कटि किंकिनि', 'पट पीत', 'हिये हुलसै' जैसी पंक्तियों में 'क', 'प', 'ह' वर्णों की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है। ब्रज भाषा का प्रयोग और सवैया छंद की मधुरता इन पंक्तियों को और भी कर्णप्रिय बनाती है।

प्रश्न 4

दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।
Solution:

कवि देव ने अपने दूसरे कवित्त में ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से बिल्कुल भिन्न तरीके से किया है।

परंपरागत वर्णन: अन्य कवियों ने वसंत को प्रायः कामदेव का रूप माना है, जो मादकता फैलाता है और प्रकृति को प्रभावित करता है। परंपरागत वर्णनों में फूलों का खिलना, शीतल हवाएँ चलना, नायक-नायिका का मिलन और झूले झूलना जैसी बातें प्रमुख होती हैं।

देव का भिन्न वर्णन: देव ने वसंत को कामदेव का पुत्र मानकर उसे एक बालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने प्रकृति को वसंत के लिए एक ममतामयी माँ के रूप में प्रस्तुत किया है, जो उसका लालन-पालन कर रही है। जहाँ अन्य कवि वसंत के मादक रूप का वर्णन करते हैं, वहीं देव ने उसे एक शिशु के रूप में दिखाकर प्रकृति को उसके प्रति आसक्त दिखाया है। कवि ने समस्त प्राकृतिक उपादानों (जैसे डाल, फूल, हवा) को बालक वसंत के पालन-पोषण में सहायक के रूप में दर्शाया है, जो कि परंपरागत वर्णन से एक अनूठा और भिन्न दृष्टिकोण है।

प्रश्न 5

'प्रातिह जगावत गुलाब चटकारी दै' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Solution:

यह पंक्ति कवि देव के दूसरे कवित्त से ली गई है, जिसमें वसंत ऋतु के बाल-रूप का मनोहारी चित्रण है। इस पंक्ति का भाव यह है कि वसंत ऋतु के आगमन पर, भोर (प्रातःकाल) के समय, गुलाब का फूल मानो चुटकी बजाकर (चटकारी दै) उस बालक रूपी वसंत को जगा रहा है।

कवि यहाँ प्रकृति के मानवीकरण का सुंदर प्रयोग करते हैं। वसंत को एक शिशु के रूप में कल्पित किया गया है जो डाल रूपी पालने में सो रहा है। प्रातःकाल होते ही, खिलते हुए गुलाब के फूल अपनी पंखुड़ियों को खोलकर और शायद अपनी सुगंध बिखेरकर, मानो चुटकी बजाने की क्रिया द्वारा, उस नवजात वसंत को नींद से जगा रहे हैं। यह पंक्ति वसंत ऋतु की सुबह के प्राकृतिक सौंदर्य और नवजीवन के संचार को अत्यंत सजीवता से प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 6

चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?
Solution:

कवि देव ने चाँदनी रात की सुंदरता को अपनी कल्पना के माध्यम से कई रूपों में देखा है, जो निम्नलिखित हैं:

  1. स्फटिक शिला से निकली दूधिया रोशनी: कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्णिमा की रात में फैली चाँदनी की आभा किसी स्फटिक (क्रिस्टल) नामक शिला से निकलने वाली दूधिया रोशनी की तरह है, जो पूरे संसार रूपी मंदिर को प्रकाशित कर रही है।
  2. दही का समुद्र: जहाँ तक कवि की दृष्टि जाती है, उन्हें केवल चाँदनी ही चाँदनी दिखाई देती है। यह दृश्य ऐसा लगता है मानो धरती पर दही का एक विशाल समुद्र हिलोरे ले रहा हो, जो आकाश में चारों ओर उमड़ता हुआ सा प्रतीत हो रहा है।
  3. दूध के झाग के समान: धरती पर फैली चाँदनी की सफेदी और चमक दूध के झाग के समान उज्ज्वल है। उसकी स्वच्छता और स्पष्टता दूध के बुलबुले की तरह झीनी और पारदर्शी भी लगती है।
  4. तारों का नायिका रूप: कवि को चाँदनी रात में आकाश को निहारते हुए यह भ्रम होता है कि आकाश के तारे मानो सुंदर नायिकाओं का वेश धारण कर अपनी सुंदरता की आभा को पूरे आकाश में बिखेर रहे हैं।

प्रश्न 7

'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है ?
Solution:

इस पंक्ति का भाव यह है कि कवि देव राधिका की सुंदरता की तुलना चंद्रमा से करते हुए कहते हैं कि चंद्रमा तो सौंदर्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, परन्तु राधिका की सुंदरता के सामने चंद्रमा भी फीका लगता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो चंद्रमा, प्यारी राधिका का ही प्रतिबिंब (छवि) मात्र है, जो उसकी सुंदरता की बराबरी नहीं कर सकता। यहाँ कवि ने राधिका की सुंदरता को चंद्रमा से भी श्रेष्ठतर बताया है।

इस पंक्ति में **उपमा अलंकार** का प्रयोग हुआ है। यहाँ राधिका के मुख (उपमेय) की तुलना चंद्रमा (उपमान) से की गई है, और 'सो' (समान) शब्द का प्रयोग करके दोनों की समानता दिखाई गई है, लेकिन साथ ही यह भी इंगित किया गया है कि राधिका की सुंदरता चंद्रमा से अधिक है।

Common mistakes

  • Confusing the poet's unique depiction of Spring with traditional descriptions.
  • Misidentifying or failing to explain the instances of alliteration and metaphor.
  • Not fully grasping the symbolic meaning of 'Shri Brijdulah' and the 'temple lamp'.
  • Overlooking the detailed imagery used to describe the moonlit night.

Revision tips

  • Focus on identifying and explaining the figures of speech (alliteration, metaphor) in each question.
  • Pay close attention to the poet's unique interpretations, especially for the Spring season.
  • Understand the symbolic meanings attributed to Krishna and the moonlit night.
  • Practice rewriting the explanations of poetic lines in your own words to ensure comprehension.

Practice MCQs

Q1. कवि देव ने 'श्रीब्रजदूलह' किसके लिए प्रयोग किया है?

Q2. पहले सवैये में 'मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई' में कौन सा अलंकार है?

Q3. दूसरे कवित्त में देव ने वसंत को किसका पुत्र माना है?

Q4. चाँदनी रात के वर्णन में कवि ने चाँदनी की तुलना किससे की है?

Q5. 'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' पंक्ति में कवि क्या कहना चाहता है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के क्षितिज पाठ 3 'देव' में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

पाठ 3 'देव' में कवि देव द्वारा रचित दो प्रमुख सवैये और कवित्त शामिल हैं, जिनमें श्री कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन, वसंत ऋतु का बाल-रूप में चित्रण और चाँदनी रात की सुंदरता का काव्यात्मक वर्णन किया गया है।

इन NCERT समाधानों से छात्रों को क्या लाभ होगा?

ये समाधान छात्रों को देव की कविताओं के भावार्थ, अलंकारों (जैसे अनुप्रास, रूपक) के प्रयोग और काव्य-सौंदर्य को समझने में मदद करेंगे, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी बेहतर होगी।

प्रश्न 1 में 'श्रीब्रजदूलह' और 'संसार रूपी मंदिर दीपक' का क्या अर्थ है?

'श्रीब्रजदूलह' श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुआ है। उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा गया है क्योंकि वे अपने ईश्वरीय प्रकाश और पवित्रता से पूरे संसार को प्रकाशित करते हैं।

वसंत के परंपरागत वर्णन से देव का वर्णन किस प्रकार भिन्न है?

परंपरागत रूप से वसंत को कामदेव के रूप में चित्रित किया जाता है, जबकि देव ने उसे कामदेव का पुत्र और एक बालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है, जिसकी प्रकृति माँ की तरह देखभाल करती है।

चाँदनी रात के वर्णन में कवि देव ने किन उपमाओं का प्रयोग किया है?

कवि ने चाँदनी की तुलना स्फटिक शिला से निकलने वाली दूधिया रोशनी, दही के समुद्र और दूध के झाग से की है, जो रात की सुंदरता और व्यापकता को दर्शाती हैं।

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