कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: जॉर्ज पंचम की नाक

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी (कृतिका) के अध्याय 2, 'जॉर्ज पंचम की नाक' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह समाधान सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता, रानी एलिजाबेथ के दर्जी की चिंता, नई दिल्ली के सौंदर्यीकरण के प्रयासों और समकालीन पत्रकारिता के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालता है। इसमें मूर्तिकार द्वारा जॉर्ज पंचम की नाक को फिर से लगाने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों और व्यवस्था पर व्यंग्य करने वाले कथनों का भी विश्लेषण किया गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. जॉर्ज पंचम की नाक

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी (कृतिका) के अध्याय 2 'जॉर्ज पंचम की नाक' के ये NCERT समाधान पाठ के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करते हैं। इनमें सरकारी तंत्र की गुलामी की मानसिकता, रानी के दर्जी की पोशाक संबंधी चिंता, महारानी के आगमन हेतु दिल्ली का कायापलट, और चर्चित हस्तियों पर केंद्रित पत्रकारिता के प्रभाव का विश्लेषण शामिल है। समाधान मूर्तिकार द्वारा जॉर्ज पंचम की नाक लगाने के लिए किए गए प्रयासों और व्यवस्था पर कटाक्ष करने वाले कथनों को भी उजागर करते हैं।

Learning outcomes

  • सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता को समझना।
  • रानी के दर्जी की चिंताओं के कारणों का विश्लेषण करना।
  • नई दिल्ली के सौंदर्यीकरण के लिए किए गए प्रयासों की पहचान करना।
  • चर्चित हस्तियों पर केंद्रित पत्रकारिता के प्रभाव का मूल्यांकन करना।
  • मूर्तिकार द्वारा नाक लगाने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों को सूचीबद्ध करना।
  • पाठ में निहित व्यवस्था पर व्यंग्य करने वाले कथनों को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • जॉर्ज पंचम की नाक का प्रतीकात्मक अर्थ
  • सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता
  • रानी एलिजाबेथ की भारत यात्रा
  • नई दिल्ली का सौंदर्यीकरण
  • समकालीन पत्रकारिता का विश्लेषण
  • चर्चित हस्तियों पर केंद्रित मीडिया
  • युवा पीढ़ी पर मीडिया का प्रभाव
  • मूर्तिकार के प्रयास
  • व्यवस्था पर व्यंग्य
  • नाक का महत्व और प्रतीकवाद

Important topics

  • सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता
  • समकालीन पत्रकारिता का विश्लेषण और प्रभाव
  • जॉर्ज पंचम की नाक का प्रतीकात्मक अर्थ
  • मूर्तिकार द्वारा किए गए यत्न
  • पाठ में निहित व्यवस्था पर व्यंग्य

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?
Solution: सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर दिखाई गई चिंता और बदहवासी उनकी गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता को प्रकट करती है। यह दर्शाता है कि वे अभी भी उस शासक के प्रति अत्यधिक सम्मान और चिंता व्यक्त कर रहे हैं, जिसने भारत पर अत्याचार किए थे। यह सरकारी अधिकारियों की अपनी अयोग्यता, दूरदर्शिता की कमी और चाटुकारिता को भी उजागर करता है, क्योंकि वे अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से गुलामी की भावना से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं।

प्रश्न 2

रानी एलिजाबेथ के दर्जी की परेशानी का क्या कारण था? उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?
Solution: रानी एलिजाबेथ के दर्जी की मुख्य परेशानी यह थी कि उसे रानी की भारत, पाकिस्तान और नेपाल की यात्रा के लिए पोशाकें तैयार करनी थीं, लेकिन उसे वहाँ के पहनावे, मौसम और अवसरों की कोई जानकारी नहीं थी। दर्जी यह सोचकर परेशान था कि रानी किस अवसर पर क्या पहनेंगी और उनकी पोशाकें उनके व्यक्तित्व और देश के प्रतिनिधित्व के अनुरूप होनी चाहिए। यह परेशानी तर्कसंगत है क्योंकि रानी की वेशभूषा उनके शाही रुतबे और देश की गरिमा से जुड़ी थी, और इसमें कोई चूक होने पर उसे रानी के क्रोध का सामना करना पड़ सकता था।

प्रश्न 3

'और देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा' - नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?
Solution: इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के आगमन की सूचना मिलते ही नई दिल्ली का कायापलट करने के लिए अनेक प्रयत्न किए गए होंगे, जिनमें प्रमुख हैं:
  1. पूरे शहर की विशेष साफ-सफाई का अभियान चलाया गया होगा।
  2. सभी सरकारी और महत्वपूर्ण इमारतों की रंगाई-पुताई और मरम्मत की गई होगी।
  3. महारानी के आवागमन के मार्गों को सजाया गया होगा, जिसमें प्रकाश की व्यवस्था और सजावटी सामान शामिल होंगे।
  4. सड़कों की मरम्मत की गई होगी, रेलिंग को रंगा गया होगा और स्वागत द्वार बनाए गए होंगे।
  5. राजपथ के दोनों ओर सुंदर फूल-पौधे लगाए गए होंगे।
  6. सुरक्षा के लिए जगह-जगह फौजी टुकड़ियाँ तैनात की गई होंगी।
  7. मार्ग पर दोनों देशों के झंडे लहराए गए होंगे।

प्रश्न 4.1

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है - इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?
Solution: आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के व्यक्तिगत जीवन, जैसे पहनावे और खान-पान की आदतों पर अत्यधिक ध्यान देना, लेखक के अनुसार, अनावश्यक और सस्ती पत्रकारिता है। यह पत्रकारिता राष्ट्र हित के अनुकूल नहीं है क्योंकि यह युवा पीढ़ी को भ्रमित करती है और उन्हें व्यर्थ की बातों में उलझाती है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य समाज को सही दिशा दिखाना और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना होना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन या सनसनी फैलाना।

प्रश्न 4.2

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है - इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?
Solution: इस प्रकार की पत्रकारिता आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह उन्हें दिग्भ्रमित करती है और नकल करने के लिए प्रेरित करती है। युवा पीढ़ी इसे फैशन के रूप में अपनाकर अपने वास्तविक लक्ष्यों और सामाजिक व्यवहार को भूल जाती है, तथा अपना समय और धन व्यर्थ की सजावट में खर्च करने लगती है। यह पत्रकारिता समाज को सही दिशा देने के बजाय पथभ्रष्ट करने का कार्य करती है।

प्रश्न 5

जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?
Solution: जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने निम्नलिखित यत्न किए:
  • सबसे पहले, उसने यह पता लगाने की कोशिश की कि वह नाक किस पत्थर की बनी है। जब यह पता नहीं चला, तो उसने स्वयं ही नाक लगाने की जिम्मेदारी ली और देश भर के पहाड़ों और पत्थर की खानों का तूफानी दौरा किया।
  • इसके बाद, उसने देश में लगीं अन्य छोटे-बड़े नेताओं की मूर्तियों की नाक से जॉर्ज पंचम की लाट की नाक का मिलान किया, इस उम्मीद में कि शायद किसी मूर्ति से नाक काटकर यहाँ लगाई जा सके। दुर्भाग्यवश, सभी की नाकें जॉर्ज पंचम की नाक से बड़ी निकलीं।
  • अंत में, जब उसे कोई उपयुक्त नाक नहीं मिली, तो हताश मूर्तिकार की सलाह पर अधिकारियों ने जीवित इंसान की नाक काटकर लगाने का परामर्श दिया और इस पर विचार किया।

प्रश्न 6

प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए हैं जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं। उदाहरण के लिए 'फाईलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं।' 'सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ़ ताका।' पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।
Solution: मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करने वाले कुछ अन्य कथन निम्नलिखित हैं:
  • शंख इंग्लैण्ड में बज रहा था, गूँज हिन्दुस्तान में आ रही थी। (यह कथन ब्रिटिश शासन के प्रभाव को दर्शाता है।)
  • गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई। (यह व्यवस्था की लापरवाही और निष्क्रियता पर व्यंग्य है।)
  • सड़कें जवान हो गईं, बुढ़ापे की धूल साफ़ हो गई। (यह केवल बाहरी दिखावे के लिए किए गए ऊपरी बदलावों पर कटाक्ष है।)
  • रानी आए और नाक न हो, तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी। (यह सरकारी अधिकारियों की अपनी इज्जत बचाने की चिंता को दर्शाता है, न कि देश की।)
  • एक ख़ास कमेटी बनाई गई और उसके जिम्मे यह काम दिया गया। (यह समस्या को टालने और जिम्मेदारी से बचने की सरकारी प्रवृत्ति को दिखाता है।)
  • चालीस करोड़ में से कोई एक ज़िंदा नाक काटकर लगा दी जाए। (यह व्यवस्था की अमानवीयता और संवेदनहीनता को उजागर करता है।)

Common mistakes

  • सरकारी तंत्र की मानसिकता को केवल सतही तौर पर समझना।
  • पत्रकारिता के नकारात्मक प्रभावों को कम आंकना।
  • मूर्तिकार के प्रयासों की जटिलता को अनदेखा करना।
  • पाठ में निहित व्यंग्य को न समझ पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों और विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित करें।
  • सरकारी तंत्र और पत्रकारिता पर पाठ के विचारों को सारांशित करें।
  • मूर्तिकार द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों को क्रमबद्ध तरीके से याद करें।
  • पाठ में व्यवस्था पर किए गए व्यंग्यों को पहचानें और उनका अर्थ समझें।

Practice MCQs

Q1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर चिंता किस मानसिकता को दर्शाती है?

Q2. रानी एलिजाबेथ के दर्जी की मुख्य परेशानी क्या थी?

Q3. नई दिल्ली का कायापलट किस घटना के संदर्भ में किया गया था?

Q4. आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान पर चर्चा को लेखक कैसा मानता है?

Q5. जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या प्रयास किया?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के अध्याय 'जॉर्ज पंचम की नाक' में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

इस अध्याय में सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता, रानी एलिजाबेथ के आगमन की तैयारियों, नई दिल्ली के सौंदर्यीकरण, समकालीन पत्रकारिता के प्रभाव और मूर्तिकार द्वारा जॉर्ज पंचम की नाक लगाने के प्रयासों पर चर्चा की गई है।

जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर सरकारी तंत्र की चिंता क्या दर्शाती है?

यह चिंता सरकारी तंत्र की गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाती है, जो अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश शासन के प्रति समर्पण की भावना से मुक्त नहीं हो पाई है।

रानी के दर्जी की मुख्य समस्या क्या थी?

रानी के दर्जी की मुख्य समस्या यह थी कि उसे भारत, पाकिस्तान और नेपाल की यात्रा के दौरान रानी के लिए उपयुक्त पोशाकों का चयन करने में कठिनाई हो रही थी, क्योंकि उसे वहाँ के पहनावे और मौसम की जानकारी नहीं थी।

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों पर केंद्रित सामग्री के बारे में लेखक के क्या विचार हैं?

लेखक के अनुसार, यह पत्रकारिता अनावश्यक, भ्रामक और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली है, जो राष्ट्र हित के अनुकूल नहीं है।

मूर्तिकार ने जॉर्ज पंचम की नाक को फिर से लगाने के लिए क्या-क्या किया?

मूर्तिकार ने देश भर के पहाड़ों और खानों का दौरा किया, अन्य नेताओं की मूर्तियों की नाक से मिलान किया, और अंततः जीवित इंसान की नाक लगाने का परामर्श दिया।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

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