CBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 1: Mata ka Aanchal NCERT Solutions
CBSE कक्षा 10 हिंदी कृतिका के पाठ 'माता का आँचल' का यह परिचय लेखक के बचपन की एक मार्मिक झलक प्रस्तुत करता है। यह पाठ बच्चों और माता-पिता के बीच गहरे भावनात्मक संबंधों, विशेषकर माँ के आँचल में मिलने वाले सुकून और सुरक्षा पर केंद्रित है। इसमें बचपन के खेल, दोस्तों के साथ बिताए पल और बीसवीं सदी के शुरुआती ग्रामीण जीवन की सादगी का भी चित्रण है। विस्तृत व्याख्याओं और सटीक उत्तरों के माध्यम से, ये समाधान छात्रों को माता-पिता के स्नेह, ग्रामीण जीवन के बदलावों और बचपन की मासूमियत जैसे सार्वभौमिक विषयों को समझने में मदद करते हैं। यह छात्रों के लिए पाठ के सार को समझने और परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन है, जो उन्हें बचपन के अनुभवों और सामाजिक परिवर्तनों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. माता का आँचल |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1, 'Mata ka Aanchal', focuses on understanding the deep emotional connection between a child and his mother, particularly during times of fear or distress, even when the child shares a strong bond with his father. It also explores the playful nature of children, their games, the use of everyday objects as toys, and the contrast between past and present rural lifestyles. The solutions provide insights into the author's childhood memories and the portrayal of parental love and affection.
Learning outcomes
- Understand the deep emotional bond between a child and his mother during times of distress.
- Analyze the reasons behind a child seeking comfort from his mother over his father.
- Describe the nature of childhood games and play in the early 20th century.
- Compare and contrast rural life and culture of the past with the present.
- Identify and appreciate instances of parental affection and 'Vatsalya Ras' in the text.
- Reflect on personal childhood memories and parental love.
Topics covered
Paper topics
- Childhood attachment and maternal comfort
- Parental affection (Vatsalya Ras)
- Children's games and play
- Childhood innocence
- Rural life and culture (past vs. present)
- Social changes in villages
- Nostalgia and childhood memories
- Literary analysis of prose
Important topics
- Maternal comfort during distress
- Evolution of rural culture
- Childhood games and their materials
- Parental Vatsalya
- Contrast between past and present lifestyles
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
यह सच है कि भोलानाथ का अपने पिता से गहरा लगाव था और वह उनके साथ कई खेल खेलता था। लेकिन, जब वह किसी विपदा या डर का अनुभव करता था, तो वह स्वाभाविक रूप से अपनी माँ की ओर भागता था। इसका मुख्य कारण यह है कि माँ की गोद में बच्चे को जो असीम ममता, स्नेह और सुरक्षा का अनुभव होता है, वह शायद पिता के स्नेह से थोड़ा भिन्न होता है। माँ का आँचल बच्चे के लिए एक ऐसी सुरक्षित पनाहगाह होता है जहाँ वह अपने सारे भय और दुख भूल जाता है। माँ का स्पर्श और उसकी लोरी बच्चे को तुरंत शांत कर देती है। इसलिए, विपदा के समय, जहाँ पिता का स्नेह उसे हिम्मत देता है, वहीं माँ की ममता उसे पूर्ण सुरक्षा का अहसास कराती है, जिसके लिए वह माँ की शरण लेता है।
प्रश्न 2
भोलानाथ, अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तरह ही, अपने साथियों के साथ खेलने में अत्यधिक आनंद महसूस करता है। जब वह अपने मित्रों को खेलते हुए, हँसते-खेलते और विभिन्न प्रकार की शरारतें करते हुए देखता है, तो उसका ध्यान अपने दुख या रोने से हट जाता है। बच्चों का स्वाभाविक स्वभाव होता है कि वे खेल और मौज-मस्ती में इतने मग्न हो जाते हैं कि वे अपनी तकलीफें या रोना भी भूल जाते हैं। अपने दोस्तों के साथ घुलमिल जाने पर वह खेल की दुनिया में खो जाता है और इसी मग्नता में वह सिसकना भी भूल जाता है और पुनः खेल का आनंद लेने लगता है।
प्रश्न 3
बच्चों के खेल में तुकबंदी का प्रयोग एक आम बात है, जो खेलों को और अधिक मनोरंजक बनाता है। भोलानाथ और उसके साथियों की तरह, मेरे बचपन के खेलों से जुड़ी कुछ तुकबंदियाँ मुझे भी याद हैं:
१. अटकन-मटकन, दही चटाके,
बनफूल बंगाले।
२. अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो,
अस्सी नब्बे पूरे सौ।
३. लंगड़ी टांग, पकड़ के भाग।
इस तरह की तुकबंदियाँ बच्चों के खेल को लय और उत्साह प्रदान करती हैं और उनकी कल्पनाशीलता को भी बढ़ावा देती हैं।
प्रश्न 4
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल तथा खेलने की सामग्री आज के बच्चों के खेलों से काफी भिन्न है। भोलानाथ के समय में बच्चे अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक और घरेलू वस्तुओं का उपयोग करके खेलते थे। जैसे - मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के टूटे-फूटे सामान आदि। उनके खेल अक्सर खुले मैदानों, आँगन या खेतों में होते थे और वे पूरी तरह स्वच्छंद होते थे।
इसके विपरीत, आज के बच्चों के खेल काफी बदल गए हैं। आज के खेल अधिकतर बाज़ार से खरीदी गई सामग्री पर आधारित होते हैं, जैसे - क्रिकेट का सामान, फुटबॉल, बैडमिंटन, विभिन्न प्रकार के खिलौने, वीडियो गेम्स और कंप्यूटर गेम्स। आज के माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं, इसलिए वे बच्चों को खेलने के लिए उतनी स्वच्छंदता नहीं देते जितनी पहले दी जाती थी। आज के खेलों में अक्सर समय-सीमा तय होती है और ये घर के अंदर या विशेष खेल के मैदानों में खेले जाते हैं। इस प्रकार, आज के खेल अधिक आधुनिक, संगठित और व्यावसायिक हो गए हैं, जबकि भोलानाथ के समय के खेल अधिक सरल, प्राकृतिक और स्वच्छंद थे।
प्रश्न 5
पाठ 'माता का आँचल' में कई ऐसे प्रसंग हैं जो पाठक के हृदय को गहराई से छूते हैं और बचपन की स्मृतियों को ताजा कर देते हैं। कुछ प्रमुख प्रसंग इस प्रकार हैं:
- पिता के साथ भोलानाथ का आईने में स्वयं को देखना: जब भोलानाथ अपने पिता के पास बैठकर रामायण पाठ सुन रहा होता है और आईने में अपना श्रृंगार देखकर खुश होता है, तो यह दृश्य बहुत ही मनमोहक लगता है। जब उसके पिता उसे देखते हैं और वह शरमाकर आईना रख देता है, तो यह भोलानाथ की बचकानी अदाओं को दर्शाता है जो दिल को छू जाती है।
- पिता के साथ कुश्ती और मूंछ खींचना: पिता का अपने पुत्र के साथ कुश्ती खेलना, जानबूझकर हार जाना और बच्चे का पिता की मूंछ खींचना, यह प्रसंग पिता-पुत्र के स्नेहपूर्ण और अनौपचारिक रिश्ते को दर्शाता है। इसमें पिता का बच्चे के प्रति वात्सल्य और बच्चे का निर्भीक प्रेम झलकता है।
- बच्चों द्वारा बारात का स्वांग रचना: बच्चों का बारात का स्वांग रचकर खेलना, जिसमें वे समाज के विभिन्न रूपों का अनुकरण करते हैं, यह उनकी कल्पनाशीलता और नाटकीयता को दिखाता है। बकरे पर सवार होकर समधी बनना और दुल्हन को लाना, यह सब उनकी बचकानी शरारतों का हिस्सा है जो मनोरंजक होने के साथ-साथ मार्मिक भी है।
- माँ के आँचल में शरण लेना: कहानी के अंत में, जब भोलानाथ डरकर अपनी माँ की गोद में छिप जाता है और रोता रहता है, तब माँ का उसे हल्दी लगाना और पिता के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना, यह दृश्य माँ के वात्सल्य और बच्चे की माँ के प्रति अटूट निर्भरता को दर्शाता है। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक है और माँ की ममता का गहरा अहसास कराता है।
प्रश्न 6
तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्रामीण संस्कृति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। पाठ में वर्णित तत्कालीन ग्रामीण जीवन की झलक आज के ग्रामीण जीवन से काफी भिन्न है:
- आवास: पहले गाँवों में अधिकतर कच्चे मकान, खपरैल की छतें और वृक्षों की छाया वाले घर होते थे। आज के गाँवों में पक्के मकानों का चलन बढ़ गया है और आधुनिक निर्माण सामग्री का प्रयोग होता है।
- पारिवारिक संरचना: पहले गाँवों में बड़े, संयुक्त परिवार होते थे जहाँ कई पीढ़ियाँ एक साथ रहती थीं। आज एकल परिवार की संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है, जहाँ माता-पिता और बच्चे अलग रहते हैं।
- तकनीक और आधुनिकीकरण: तत्कालीन ग्रामीण जीवन में लालटेन, बैलगाड़ी, हाथ से बनी खाद जैसे पारंपरिक साधनों का प्रयोग होता था। आज गाँवों में बिजली, ट्रैक्टर, रासायनिक खाद, आधुनिक दवाइयाँ और अन्य तकनीकी उपकरणों का प्रयोग आम हो गया है।
- कृषि और व्यवसाय: पहले खेतीहर मजदूरों की संख्या अधिक होती थी और जीवन सरल था। आज कृषि का व्यवसायीकरण बढ़ा है और कई लोग पारंपरिक खेती छोड़कर अन्य व्यवसायों की ओर बढ़ रहे हैं।
- जीवन शैली: पहले गाँव के लोग सादा जीवन जीते थे और उनमें आपसी मेलजोल अधिक था। आज के ग्रामीण जीवन में बनावटीपन और भौतिकता का प्रभाव बढ़ा है, और लोगों की जीवन शैली अधिक जटिल हो गई है।
संक्षेप में, आज की ग्रामीण संस्कृति अधिक आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और भौतिकवादी हो गई है, जबकि तीस के दशक की संस्कृति अधिक सरल, प्रकृति के करीब और पारंपरिक मूल्यों पर आधारित थी।
प्रश्न 7
डायरी प्रविष्टि
दिनांक: [आज की तारीख]
प्रिय डायरी,
आज 'माता का आँचल' पाठ पढ़ा और पढ़ते-पढ़ते माँ-पिता के लाड़-प्यार की अनगिनत यादें मन में उमड़ पड़ीं। पाठ में भोलानाथ के पिता के साथ उसके खेल और माँ के आँचल में उसकी सुरक्षा की भावना ने मुझे अपने बचपन के दिनों में पहुँचा दिया।
मुझे याद है, एक बार मैं आँगन में खेलते हुए गिर गया था और मेरे घुटने में चोट लग गई थी। मैं ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। माँ दौड़कर आई, मुझे गोद में उठाया, मेरे आँसू पोंछे और प्यार से सहलाया। पिता जी भी तुरंत मेरे पास आ गए, उन्होंने मेरी चोट देखी और मुझे दिलासा दिया। माँ ने तुरंत हल्दी-चंदन का लेप लगाया और पिता जी मुझे डॉक्टर के पास ले गए। उस समय उनकी चिंता और मेरे प्रति उनका प्यार देखकर मुझे लगा कि दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह उनकी गोद ही है।
आज भी जब मैं किसी मुश्किल में होता हूँ, तो सबसे पहले माँ-पिता की याद आती है। उनका स्नेह और विश्वास मुझे हमेशा हिम्मत देता है। यह पाठ पढ़कर अहसास हुआ कि माता-पिता का वात्सल्य अनमोल है और बचपन की ये स्मृतियाँ जीवन की सबसे बड़ी धरोहर हैं।
तुम्हारा,
[आपका नाम]
प्रश्न 8
'माता का आँचल' पाठ में माता-पिता के वात्सल्य का अत्यंत सरस और हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है। यहाँ वात्सल्य केवल एकतरफा नहीं है, बल्कि पिता और माँ दोनों के स्नेह की झलक मिलती है, जो बच्चे के प्रति उनके गहरे प्रेम और चिंता को दर्शाती है।
पिता का वात्सल्य भोलानाथ के साथ खेलने में झलकता है। वे उसके साथ कुश्ती खेलते हैं, उसे जानबूझकर हार जाते हैं और उसकी शरारतों, जैसे मूंछ खींचना, पर भी प्रसन्न होते हैं। यह दर्शाता है कि वे अपने पुत्र को एक मित्र की तरह मानते हैं और उसके बचपन की निर्भीकता का आनंद लेते हैं। जब भोलानाथ डरकर रोता है, तो पिता भी चिंतित होते हैं और उसे बुलाते हैं, जो उनके प्रेम और सुरक्षा प्रदान करने की इच्छा को दिखाता है।
माँ का वात्सल्य अत्यंत ममतामयी और सुरक्षात्मक है। जब भोलानाथ डरकर माँ की गोद में छिप जाता है, तो माँ उसे प्यार से सहलाती है, उसकी चोट पर हल्दी लगाती है और उसे दिलासा देती है। पिता के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना, यह दर्शाता है कि माँ की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और आरामदायक स्थान है, जहाँ वह अपनी माँ के स्नेह की छाँव में पूर्णतः सुरक्षित महसूस करता है।
कुल मिलाकर, पाठ में माता-पिता का वात्सल्य बच्चे के प्रति उनके गहरे प्रेम, उसकी सुरक्षा की चिंता, उसके बचपन का आनंद लेने और उसे हर विपदा से बचाने की उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति के रूप में व्यक्त हुआ है। यह चित्रण पाठक को अपने माता-पिता के स्नेह की याद दिलाता है और वात्सल्य रस का गहरा अनुभव कराता है।
Common mistakes
- Confusing the child's primary attachment figure.
- Underestimating the importance of maternal comfort during distress.
- Failing to recognize the cultural and lifestyle changes in rural India.
- Not appreciating the nuances of childhood innocence and play.
Revision tips
- Focus on the emotional dynamics between the child, mother, and father.
- List the differences between past and present rural lifestyles as described.
- Recall and write down personal childhood memories related to parental care.
- Pay attention to the descriptions of children's games and their materials.
Practice MCQs
Q1. विपदा के समय भोलानाथ अपनी माँ की शरण क्यों लेता है?
Explanation: माँ के आँचल में बच्चे को अत्यधिक ममता और सुरक्षा का अनुभव होता है, जो विपदा के समय उसे सबसे अधिक सुकून देता है।
Q2. भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
Explanation: बच्चों का स्वाभाविक स्वभाव होता है कि वे अपने मित्रों को देखकर खेलकूद में रम जाते हैं और अपने दुख को भूल जाते हैं।
Q3. पाठ में वर्णित बच्चों के खेल के साधनों में क्या शामिल था?
Explanation: भोलानाथ और उसके साथी अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक और घरेलू वस्तुओं जैसे मिट्टी, पत्थर, पत्तियाँ आदि से खेलते थे।
Q4. आज की ग्रामीण संस्कृति में क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
Explanation: आज के गाँवों में पक्के मकान, बिजली, ट्रैक्टर जैसे आधुनिक साधनों का प्रयोग बढ़ गया है, जो पिछली ग्रामीण संस्कृति से भिन्न है।
Q5. लेखक को अपने पिता के साथ कौन सा प्रसंग सबसे अधिक आनंदमयी लगा?
Explanation: पिता के साथ कुश्ती लड़ना और बच्चे का पिता की मूंछ खींचना, जिसमें पिता भी प्रसन्न होते हैं, एक आनंदमयी प्रसंग है।
Frequently asked questions
यह पाठ 'माता का आँचल' किस कक्षा के हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा है?
यह पाठ CBSE कक्षा 10 की हिंदी कीर्तििका पाठ्यपुस्तक का पहला अध्याय है।
इस पाठ में मुख्य रूप से किस भाव का वर्णन किया गया है?
इस पाठ में मुख्य रूप से वात्सल्य भाव का वर्णन है, विशेषकर माँ के प्रति बच्चे के गहरे लगाव और सुरक्षा की भावना का।
क्या यह पाठ केवल बच्चों के खेलों के बारे में है?
नहीं, यह पाठ बच्चों के खेलों के साथ-साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव, माता-पिता के स्नेह और तत्कालीन ग्रामीण जीवन संस्कृति का भी चित्रण करता है।
पाठ के अनुसार, विपदा के समय बच्चा माँ के पास क्यों जाता है?
पाठ के अनुसार, विपदा के समय बच्चे को माँ की गोद में अत्यधिक ममता, स्नेह और सुरक्षा का अनुभव होता है, जो उसे सुकून देता है।
पुराने और आज के ग्रामीण जीवन में क्या मुख्य अंतर बताए गए हैं?
पुराने ग्रामीण जीवन में कच्चे घर, संयुक्त परिवार और सरल जीवन शैली थी, जबकि आज के ग्रामीण जीवन में पक्के मकान, एकल परिवार, विज्ञान और आधुनिकता का प्रभाव बढ़ा है।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने और पाठ से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करते हैं।
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