कक्षा 10 विज्ञान: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 11, 'मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें मानव नेत्र की समंजन क्षमता, विभिन्न दृष्टि दोषों जैसे निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष और जरा दूरदर्शिता की व्याख्या की गई है। समाधानों में यह भी बताया गया है कि इन दोषों को अवतल लेंस, उत्तल लेंस या बाइफोकल लेंस का उपयोग करके कैसे ठीक किया जा सकता है। प्रश्नों में नेत्र के विभिन्न भागों जैसे दृष्टिपटल और पक्ष्माभी पेशियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को मानव नेत्र की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका प्रदान करने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

Chapter summary

कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 11 'मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार' के ये NCERT समाधान मानव नेत्र की संरचना और कार्यप्रणाली पर केंद्रित हैं। इसमें समंजन क्षमता, निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष, जरा दूरदर्शिता और वर्ण विक्षेपण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को दृष्टि दोषों के कारणों, प्रभावों और उन्हें ठीक करने के लिए आवश्यक लेंसों की पहचान करने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • मानव नेत्र की समंजन क्षमता को परिभाषित करना।
  • निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष के कारणों और सुधारों को समझना।
  • जरा दूरदर्शिता के बारे में जानना।
  • नेत्र के विभिन्न भागों की भूमिका को पहचानना।
  • लेंस की क्षमता और फोकस दूरी के बीच संबंध को समझना।
  • दृष्टि दोषों के निवारण के लिए उपयुक्त लेंसों का चयन करना।

Topics covered

Paper topics

  • मानव नेत्र की संरचना
  • समंजन क्षमता
  • निकट दृष्टि दोष (मायोपिया)
  • दूर दृष्टि दोष (हाइपरोपिया)
  • जरा दूरदर्शिता (प्रेसबायोपिया)
  • दृष्टि दोषों का निवारण
  • लेंस की क्षमता
  • फोकस दूरी
  • दृष्टिपटल (रेटिना)
  • पक्ष्माभी पेशियाँ
  • प्रकाश का अपवर्तन
  • रंगबिरंगा संसार

Important topics

  • समंजन क्षमता की परिभाषा और कार्यप्रणाली
  • निकट दृष्टि दोष: कारण, लक्षण और अवतल लेंस द्वारा निवारण
  • दूर दृष्टि दोष: कारण, लक्षण और उत्तल लेंस द्वारा निवारण
  • जरा दूरदर्शिता और बाइफोकल लेंस का उपयोग
  • लेंस की क्षमता की गणना (D = 1/f)

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?
Solution: मानव नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके दूर तथा पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है। यह क्षमता नेत्र लेंस की वक्रता में परिवर्तन द्वारा प्राप्त होती है, जिसे पक्ष्माभी पेशियाँ नियंत्रित करती हैं।

प्रश्न 2

निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए?
Solution: निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। इस दोष को दूर करने के लिए ऐसे लेंस की आवश्यकता होती है जो दूर से आने वाली प्रकाश किरणों को थोड़ा अपसरित (फैला दे) करके नेत्र के अंदर प्रवेश कराए, ताकि वे रेटिना पर सही ढंग से केंद्रित हो सकें। इसके लिए **अवतल लेंस** का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 3

मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु तथा निकट बिंदु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं?
Solution: सामान्य दृष्टि वाले स्वस्थ मानव नेत्र के लिए:
  • दूर बिंदु: यह नेत्र से अनंत दूरी पर होता है। इसका अर्थ है कि सामान्य नेत्र अनंत पर स्थित वस्तुओं को भी स्पष्ट देख सकता है।
  • निकट बिंदु: यह नेत्र से लगभग 25 सेंटीमीटर की दूरी पर होता है। यह वह न्यूनतम दूरी है जिस पर रखी वस्तु को नेत्र बिना किसी तनाव के स्पष्ट देख सकता है।

प्रश्न 4

अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?
Solution: यदि किसी विद्यार्थी को अंतिम पंक्ति में बैठकर श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई हो रही है, तो इसका अर्थ है कि उसे दूर की वस्तुएँ (श्यामपट्ट) स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही हैं। यह **निकट दृष्टि दोष (मायोपिया)** का लक्षण है। इस दोष को संशोधित करने के लिए **उपयुक्त क्षमता वाले अवतल लेंस** का प्रयोग किया जाता है। अवतल लेंस दूर से आने वाली प्रकाश किरणों को रेटिना पर सही ढंग से केंद्रित करने में मदद करता है।

प्रश्न 5

मानव नेत्र अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है
  1. जरा-दूरदृष्टिता
  2. समंजन
  3. निकट-दृष्टि
  4. दीर्घ-दृष्टि
Solution: मानव नेत्र की वह क्षमता जिसके द्वारा वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है, **समंजन (Accommodation)** कहलाती है। इसलिए, सही विकल्प (b) समंजन है।

प्रश्न 6

मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाते हैं वह है:
  1. कॉर्निया
  2. परितारिका
  3. पुतली
  4. दृष्टिपटल
Solution: मानव नेत्र में प्रकाश किरणों का अंतिम फोकस दृष्टिपटल (रेटिना) पर होता है, जहाँ वस्तु का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बनता है। तंत्रिकाएँ इस प्रतिबिंब से प्राप्त संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं, जहाँ उन्हें सीधा करके देखा जाता है। इसलिए, सही विकल्प (d) दृष्टिपटल है।

प्रश्न 7

सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग-
  1. 25 m
  2. 2.5 cm
  3. 25 cm
  4. 2.5m
Solution: सामान्य दृष्टि वाले स्वस्थ वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर होती है। इससे कम दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए नेत्र को अधिक समंजन करना पड़ता है, जिससे धुंधलापन आ सकता है। इसलिए, सही विकल्प (c) 25 cm है।

प्रश्न 8

अभिनेत्रा लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है:
  1. पुतली द्वारा
  2. दृष्टिपटल द्वारा
  3. पक्ष्माभी द्वारा
  4. परितारिका द्वारा
Solution: अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन पक्ष्माभी पेशियों (Ciliary muscles) के सिकुड़ने या शिथिल होने से होता है। ये पेशियाँ लेंस के आकार को बदलकर उसकी फोकस दूरी को समायोजित करती हैं, जिससे विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं का स्पष्ट प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर बन सके। इसलिए, सही विकल्प (c) पक्ष्माभी द्वारा है।

प्रश्न 9

किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। संशोधिन करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी क्या होगी -
  1. दूर की दृष्टि के लिए
  2. निकट की दृष्टि के लिए।
Solution: लेंस की क्षमता (P) और फोकस दूरी (f, मीटर में) के बीच संबंध P = \frac{1}{f} है, या f = \frac{1}{P}(a) दूर की दृष्टि के लिए: व्यक्ति को दूर की दृष्टि के लिए -5.5 D क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। यह निकट दृष्टि दोष को इंगित करता है। f_{\text{दूर}} = \frac{1}{P_{\text{दूर}}} = \frac{1}{-5.5 \text{ D}} f_{\text{दूर}} \approx -0.1818 \text{ m} फोकस दूरी लगभग -0.18 मीटर या -18.18 सेंटीमीटर है। ऋणात्मक चिन्ह अवतल लेंस को दर्शाता है। (b) निकट की दृष्टि के लिए: व्यक्ति को निकट की दृष्टि के लिए +1.5 D क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। यह दूर दृष्टि दोष को इंगित करता है। f_{\text{निकट}} = \frac{1}{P_{\text{निकट}}} = \frac{1}{+1.5 \text{ D}} f_{\text{निकट}} \approx +0.6667 \text{ m} फोकस दूरी लगभग +0.67 मीटर या +66.67 सेंटीमीटर है। धनात्मक चिन्ह उत्तल लेंस को दर्शाता है। इस प्रकार, दूर की दृष्टि के लिए लेंस की फोकस दूरी लगभग -18.18 cm (अवतल लेंस) और निकट की दृष्टि के लिए लगभग +66.67 cm (उत्तल लेंस) होगी।

प्रश्न 10

किसी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?
Solution: निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु सामान्य अनंत दूरी के बजाय नेत्र के सामने 80 cm पर होता है। इसका मतलब है कि वह 80 cm से अधिक दूरी की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए एक ऐसे लेंस की आवश्यकता है जो 80 cm दूर स्थित वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणों को इस प्रकार अपसरित करे कि वे नेत्र के लिए अनंत से आती हुई प्रतीत हों। इसके लिए एक अवतल लेंस का उपयोग किया जाएगा। लेंस की फोकस दूरी उस अधिकतम दूरी के बराबर होगी जिसे व्यक्ति स्पष्ट देख सकता है, अर्थात 80 cm। फोकस दूरी, f = -80 \text{ cm} = -0.80 \text{ m} (ऋणात्मक चिन्ह अवतल लेंस को दर्शाता है)। लेंस की क्षमता (P) की गणना सूत्र P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}} से की जाती है। P = \frac{1}{-0.80 \text{ m}} = -1.25 \text{ D} अतः, इस दोष को संशोधित करने के लिए **अवतल लेंस** की आवश्यकता होगी जिसकी क्षमता **-1.25 डायोप्टर** होगी।

प्रश्न 11

चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।
Solution: दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन: दीर्घ-दृष्टि दोष में व्यक्ति को पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं क्योंकि नेत्र लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है या नेत्र की समंजन क्षमता कम हो जाती है, जिससे पास की वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टिपटल के पीछे बनता है। इस दोष को संशोधित करने के लिए **उत्तल लेंस** का प्रयोग किया जाता है। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को इस प्रकार अपवर्तित करता है कि वे रेटिना पर केंद्रित हो जाएँ। (चित्र में, एक दीर्घ-दृष्टि दोष वाले नेत्र का आरेख दिखाया जाएगा जिसमें पास की वस्तु से आने वाली किरणें रेटिना के पीछे फोकस हो रही हैं। फिर एक उत्तल लेंस को नेत्र के सामने रखा जाएगा, और दिखाया जाएगा कि उत्तल लेंस द्वारा अपवर्तित किरणें रेटिना पर फोकस हो रही हैं।) आवश्यक लेंस की क्षमता की गणना: दीर्घ-दृष्टि दोष वाले व्यक्ति का निकट बिंदु 1 m (100 cm) है, जबकि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है। इसका मतलब है कि व्यक्ति 25 cm पर रखी वस्तु को स्पष्ट नहीं देख पाता, बल्कि उसे 100 cm पर रखकर ही स्पष्ट देख पाता है। हमें एक ऐसे उत्तल लेंस की आवश्यकता है जो 25 cm पर रखी वस्तु से आने वाली किरणों को इस प्रकार अपवर्तित करे कि वे व्यक्ति के नेत्र के लिए 100 cm दूर स्थित वस्तु से आती हुई प्रतीत हों। यहाँ, वस्तु की दूरी u = -25 \text{ cm} (क्योंकि वस्तु नेत्र के सामने रखी है)। लेंस द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब व्यक्ति के निकट बिंदु पर बनना चाहिए, इसलिए प्रतिबिंब की दूरी v = -100 \text{ cm} (क्योंकि यह भी नेत्र के सामने ही है, और आभासी प्रतिबिंब है)। लेंस सूत्र का उपयोग करके फोकस दूरी (f) ज्ञात करते हैं: \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \frac{1}{f} = \frac{1}{-100 \text{ cm}} - \frac{1}{-25 \text{ cm}} \frac{1}{f} = \frac{1}{-100} + \frac{1}{25} \frac{1}{f} = \frac{-1 + 4}{100} = \frac{3}{100} f = \frac{100}{3} \text{ cm} \approx +33.33 \text{ cm} अब, लेंस की क्षमता (P) ज्ञात करते हैं। फोकस दूरी को मीटर में बदलना होगा: f = \frac{100}{3} \text{ cm} = \frac{1}{3} \text{ m} P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}} = \frac{1}{1/3 \text{ m}} = +3 \text{ D} अतः, इस दोष को संशोधित करने के लिए **+3 डायोप्टर** क्षमता वाले उत्तल लेंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 12

सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?
Solution: सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट इसलिए नहीं देख पाते क्योंकि नेत्र लेंस की समंजन क्षमता की एक सीमा होती है। जब कोई वस्तु 25 cm से अधिक निकट रखी जाती है, तो नेत्र लेंस को उस वस्तु पर फोकस करने के लिए अत्यधिक वक्रित (मोटी) होना पड़ता है। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस को इतना अधिक वक्रित नहीं कर पातीं कि 25 cm से कम दूरी पर रखी वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर बन सके। इसके परिणामस्वरूप, वस्तु धुंधली दिखाई देती है। 25 cm वह न्यूनतम दूरी है जिस पर नेत्र बिना किसी तनाव के स्पष्ट रूप से देख सकता है।

Common mistakes

  • निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष के सुधार के लिए गलत लेंस (अवतल/उत्तल) का चयन करना।
  • लेंस की क्षमता (D) और फोकस दूरी (m) के बीच संबंध को गलत समझना (P = 1/f)।
  • निकट बिंदु और दूर बिंदु की दूरियों को गलत याद रखना।
  • जरा दूरदर्शिता के कारण और सुधार को समझने में भ्रमित होना।

Revision tips

  • मानव नेत्र के मुख्य भागों और उनके कार्यों को दर्शाने वाला एक आरेख बनाएं।
  • निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष के बीच अंतर को सारणीबद्ध करें, जिसमें कारण, प्रभाव और सुधार शामिल हों।
  • लेंस की क्षमता की गणना के सूत्रों का अभ्यास करें, विशेष रूप से जब फोकस दूरी मीटर में दी गई हो।
  • जरा दूरदर्शिता के लिए बाइफोकल लेंस की आवश्यकता को समझें।
  • प्रत्येक प्रश्न के समाधान में दिए गए तर्कों और विधियों को ध्यान से पढ़ें।

Practice MCQs

Q1. मानव नेत्र की समंजन क्षमता से क्या तात्पर्य है?

Q2. निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के लिए कौन सा लेंस उपयुक्त होता है?

Q3. सामान्य दृष्टि वाले वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी कितनी होती है?

Q4. अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किसके द्वारा किया जाता है?

Q5. दूर दृष्टि दोष को संशोधित करने के लिए किस प्रकार के लेंस का उपयोग किया जाता है?

Frequently asked questions

मानव नेत्र की समंजन क्षमता क्या है?

समंजन क्षमता नेत्र लेंस की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके दूर और पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है।

निकट दृष्टि दोष को कैसे ठीक किया जाता है?

निकट दृष्टि दोष को उपयुक्त क्षमता वाले अवतल लेंस का उपयोग करके ठीक किया जाता है। यह लेंस दूर से आने वाली प्रकाश किरणों को रेटिना पर केंद्रित करने में मदद करता है।

दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को क्या कठिनाई होती है?

दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं, जबकि दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिख सकती हैं।

जरा दूरदर्शिता क्यों होती है और इसका निवारण कैसे होता है?

जरा दूरदर्शिता बढ़ती उम्र के साथ नेत्र लेंस की लचीलापन कम होने के कारण होती है। इसका निवारण बाइफोकल लेंस (जिसमें उत्तल और अवतल दोनों लेंस होते हैं) द्वारा किया जाता है।

लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है?

लेंस की क्षमता का मात्रक 'डायोप्टर' (D) है। यह लेंस की फोकस दूरी (मीटर में) के व्युत्क्रम के बराबर होती है (P = 1/f)।

मानव नेत्र किस भाग पर प्रतिबिंब बनाता है?

मानव नेत्र दृष्टिपटल (रेटिना) पर प्रतिबिंब बनाता है।

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