कक्षा 10 विज्ञान: कार्बन एवं उसके यौगिक NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 4, 'कार्बन एवं उसके यौगिक' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर के अणुओं की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं को समझना, पेंटेन के संरचनात्मक समावयवों का चित्रण करना, और साइक्लोपेंटेन की संरचना और इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना की व्याख्या करना शामिल है। समाधान कार्बन के उन दो महत्वपूर्ण गुणों पर भी प्रकाश डालते हैं जो यौगिकों की विशाल संख्या के लिए जिम्मेदार हैं: चतुःसंयोजकता और श्रृंखलन। इसके अतिरिक्त, यह एथेनॉल से एथेनोइक एसिड में ऑक्सीकरण अभिक्रिया, ऑक्सीकारक की परिभाषा, और एल्कोहल व कार्बोक्सिलिक एसिड के बीच अंतर करने की विधियों को स्पष्ट करता है। यह खंड वेल्डिंग में एथाइन के उपयोग और कठोर जल का पता लगाने में डिटर्जेंट की सीमाओं जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर भी चर्चा करता है। अंत में, यह एथेन और ब्यूटेनोन जैसे यौगिकों के नामकरण और संरचनात्मक चित्रण पर केंद्रित है, जो छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रदान करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. कार्बन एवं उसके यौगिक

Chapter summary

कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 4 'कार्बन एवं उसके यौगिक' के ये NCERT समाधान छात्रों को कार्बन के अद्वितीय गुणों, जैसे कि चतुःसंयोजकता और श्रृंखलन, को समझने में मदद करते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं का निर्माण, संरचनात्मक समावयवता की अवधारणा, और विभिन्न कार्बनिक यौगिकों का नामकरण और चित्रण शामिल है। समाधान ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं, ऑक्सीकारकों की पहचान, और एल्कोहल व कार्बोक्सिलिक एसिड के बीच अंतर करने की प्रायोगिक विधियों को भी कवर करते हैं।

Learning outcomes

  • कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर के अणुओं की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाएँ बनाना सीखें।
  • कार्बन के दो प्रमुख गुणधर्मों (चतुःसंयोजकता और श्रृंखलन) को समझें जो यौगिकों की विशाल संख्या के लिए उत्तरदायी हैं।
  • संरचनात्मक समावयवों का चित्रण करें और उनकी पहचान करें।
  • एल्कोहल और कार्बोक्सिलिक एसिड के बीच अंतर करने की प्रायोगिक विधि को समझें।
  • ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं और ऑक्सीकारकों की अवधारणा को स्पष्ट करें।
  • कार्बनिक यौगिकों का नामकरण करना सीखें।

Topics covered

Paper topics

  • कार्बन की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
  • सल्फर के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
  • संरचनात्मक समावयवता
  • कार्बन के गुणधर्म (चतुःसंयोजकता, श्रृंखलन)
  • साइक्लोपेंटेन की संरचना
  • कार्बनिक यौगिकों का नामकरण
  • एथेनॉइक अम्ल का चित्रण
  • ब्रोमोपेंटेन का चित्रण
  • ब्यूटेनोन का चित्रण
  • हेक्सेनैल का चित्रण
  • ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ
  • ऑक्सीकारक
  • एल्कोहल और कार्बोक्सिलिक एसिड में अंतर
  • डिटर्जेंट और कठोर जल
  • साबुन और सफाई क्रिया

Important topics

  • कार्बन के गुणधर्म (चतुःसंयोजकता और श्रृंखलन)
  • इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाएँ
  • संरचनात्मक समावयवता
  • ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ
  • एल्कोहल और कार्बोक्सिलिक एसिड में अंतर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

CO2 सूत्र वाले कार्बन डाइऑक्साइड की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?
Solution: कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में, केंद्रीय कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं से दोहरे बंधों द्वारा जुड़ा होता है। कार्बन के 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और प्रत्येक ऑक्सीजन के 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रत्येक कार्बन-ऑक्सीजन दोहरा बंधन 4 इलेक्ट्रॉनों (2 कार्बन से, 2 ऑक्सीजन से) से बनता है। इस प्रकार, केंद्रीय कार्बन परमाणु के चारों ओर कुल 8 इलेक्ट्रॉन (4 बंधन जोड़ी) होते हैं, जो अष्टक नियम को संतुष्ट करते हैं। प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु के पास 2 बंधन जोड़ी और 2 एकाकी जोड़ी इलेक्ट्रॉन होते हैं।

: ·· O :: C :: O ··

प्रश्न 2

सल्फर के आठ परमाणुओं से बने सल्फर के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी? (संकेत : सल्फर के आठ परमाणु एक अँगूठी के रूप में आपस में जुड़े होते हैं।)
Solution: सल्फर के आठ परमाणु (S_8) एक वलय (अँगूठी) संरचना में व्यवस्थित होते हैं। प्रत्येक सल्फर परमाणु दो अन्य सल्फर परमाणुओं से एकल सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है। सल्फर के प्रत्येक परमाणु के 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। वलय संरचना में, प्रत्येक सल्फर परमाणु दो बंध बनाता है और उसके पास 2 एकाकी जोड़ी इलेक्ट्रॉन होते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक सल्फर परमाणु के चारों ओर कुल 8 इलेक्ट्रॉन (2 बंधन जोड़ी + 2 एकाकी जोड़ी) होते हैं, जो अष्टक नियम को संतुष्ट करते हैं।

S_8 अणु की संरचना एक वलय के समान होती है, जहाँ प्रत्येक S परमाणु दो अन्य S परमाणुओं से जुड़ा होता है।

प्रश्न 3

पेन्टेन के लिए आप कितने संरचनात्मक समावयवों का चित्रण कर सकते हैं?
Solution: पेंटेन (C_5H_{12}) के तीन संरचनात्मक समावयव संभव हैं। ये समावयव कार्बन परमाणुओं की व्यवस्था में भिन्न होते हैं:
  1. n-पेंटेन: यह एक सीधी श्रृंखला है जिसमें पांच कार्बन परमाणु एक पंक्ति में जुड़े होते हैं।
  2. आइसोपेंटेन (2-मिथाइल ब्यूटेन): इसमें चार कार्बन परमाणुओं की एक श्रृंखला होती है, जिसके दूसरे कार्बन परमाणु पर एक मिथाइल (-CH_3) समूह जुड़ा होता है।
  3. नियोपेंटेन (2,2-डाइमिथाइल प्रोपेन): इसमें तीन कार्बन परमाणुओं की एक श्रृंखला होती है, जिसके केंद्रीय कार्बन परमाणु पर दो मिथाइल समूह जुड़े होते हैं।

प्रश्न 4

कार्बन के दो गुणधर्म कौन से हैं जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है?
Solution: कार्बन के दो प्रमुख गुणधर्म जो कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या के लिए उत्तरदायी हैं, वे हैं:
  1. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता चार होती है, जिसका अर्थ है कि यह चार अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है। यह इसे विभिन्न प्रकार के अणुओं के निर्माण की अनुमति देता है।
  2. श्रृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में जुड़कर लंबी, शाखित या चक्रीय श्रृंखलाएँ बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है। यह गुण कार्बन को अत्यंत जटिल और बड़े अणु बनाने में सक्षम बनाता है।

प्रश्न 5

साइक्लोपेंटेन का सूत्र तथा इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होंगे?
Solution: साइक्लोपेंटेन एक चक्रीय हाइड्रोकार्बन है जिसका आण्विक सूत्र C_5H_{10} है। इसकी संरचना में पांच कार्बन परमाणु एक पंचभुज (pentagon) के रूप में एक बंद वलय बनाते हैं। प्रत्येक कार्बन परमाणु दो अन्य कार्बन परमाणुओं से एकल सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है और दो हाइड्रोजन परमाणुओं से भी जुड़ा होता है।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में, प्रत्येक कार्बन परमाणु के 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु का 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है। कार्बन-कार्बन बंधों और कार्बन-हाइड्रोजन बंधों में इलेक्ट्रॉनों को दर्शाया जाता है। प्रत्येक कार्बन परमाणु के चारों ओर 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) और प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु के चारों ओर 2 इलेक्ट्रॉन (द्विक) होते हैं।

प्रश्न 6

निम्न यौगिकों की संरचनाएँ चित्रित कीजिएः (a) एथेनॉइक अम्ल (b) ब्रोमोपेंटेन (c) ब्यूटेनोन (d) हेक्सेनैल
Solution:

(a) एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic acid): यह एक कार्बोक्सिलिक एसिड है जिसका सूत्र CH_3COOH है। इसमें एक मिथाइल समूह (-CH_3) एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH) से जुड़ा होता है।

संरचना: CH_3-C(=O)-OH

(b) ब्रोमोपेंटेन (Bromopentane): यह एक हैलोएल्केन है जिसका सूत्र C_5H_{11}Br है। इसमें पेंटेन श्रृंखला के एक कार्बन परमाणु पर एक ब्रोमीन परमाणु जुड़ा होता है। इसके कई समावयव संभव हैं, जैसे 1-ब्रोमोपेंटेन, 2-ब्रोमोपेंटेन, आदि। यहाँ 1-ब्रोमोपेंटेन की संरचना चित्रित की गई है:

संरचना: Br-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3

(c) ब्यूटेनोन (Butanone): यह एक कीटोन है जिसका सूत्र C_4H_8O है। इसमें चार कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला होती है और दूसरे कार्बन परमाणु पर एक कीटोन समूह (-C=O) जुड़ा होता है।

संरचना: CH_3-C(=O)-CH_2-CH_3

(d) हेक्सेनैल (Hexanal): यह एक एल्डिहाइड है जिसका सूत्र C_6H_{12}O है। इसमें छह कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला होती है और पहले कार्बन परमाणु पर एक एल्डिहाइड समूह (-CHO) जुड़ा होता है।

संरचना: CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CHO

प्रश्न 7

क्या ब्रोमोपेंटेन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं?
Solution: हाँ, ब्रोमोपेंटेन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं। ब्रोमीन परमाणु को पेंटेन श्रृंखला के विभिन्न कार्बन परमाणुओं से जोड़ा जा सकता है, जिससे विभिन्न समावयव बनते हैं। उदाहरण के लिए:
  • 1-ब्रोमोपेंटेन: ब्रोमीन पहले कार्बन पर जुड़ा होता है।
  • 2-ब्रोमोपेंटेन: ब्रोमीन दूसरे कार्बन पर जुड़ा होता है।
  • 3-ब्रोमोपेंटेन: ब्रोमीन तीसरे कार्बन पर जुड़ा होता है।
इसके अतिरिक्त, पेंटेन श्रृंखला स्वयं भी शाखित हो सकती है (जैसे आइसो-पेंटेन या नियो-पेंटेन), और इन पर ब्रोमीन जोड़ने से और भी समावयव बन सकते हैं, हालांकि प्रश्न केवल 'ब्रोमोपेंटेन' के लिए पूछ रहा है, जो आमतौर पर सीधी श्रृंखला को संदर्भित करता है जब तक कि अन्यथा निर्दिष्ट न हो।

प्रश्न 8

निम्न यौगिकों का नामकरण कैसे करेंगे?
Solution: प्रश्न में यौगिकों की संरचनाएँ नहीं दी गई हैं, केवल उनके नामकरण के बारे में पूछा गया है। यदि संरचनाएँ दी जातीं, तो IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) नामकरण प्रणाली का उपयोग करके उनका नामकरण किया जाता। इस प्रणाली में, मूल श्रृंखला की पहचान की जाती है, और उस पर लगे क्रियात्मक समूहों और प्रतिस्थापियों के आधार पर नाम दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि संरचना CH_3-CH_2-OH दी गई होती, तो इसका नाम 'एथेनॉल' होता। यदि संरचना CH_3-COOH दी गई होती, तो इसका नाम 'एथेनोइक अम्ल' होता।

प्रश्न 9

एथनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
Solution: एथेनॉल (C_2H_5OH) से एथेनोइक अम्ल (CH_3COOH) में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहा जाता है क्योंकि इस प्रक्रिया में अणु में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है और/या हाइड्रोजन की कमी होती है।

एथेनॉल की संरचना CH_3CH_2OH है और एथेनोइक अम्ल की संरचना CH_3COOH है। इस परिवर्तन में, -CH_2OH समूह -COOH समूह में ऑक्सीकृत हो जाता है। यह एक ऑक्सीजन परमाणु के जुड़ने और दो हाइड्रोजन परमाणुओं के हटने के बराबर है। इस प्रकार की अभिक्रियाएँ, जिनमें ऑक्सीजन जुड़ती है या हाइड्रोजन हटती है, ऑक्सीकरण कहलाती हैं।

यह अभिक्रिया आमतौर पर एक प्रबल ऑक्सीकारक जैसे पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO_4) या पोटेशियम डाइक्रोमेट (K_2Cr_2O_7) की उपस्थिति में की जाती है।

प्रश्न 10

ऑक्सीजन तथा एथाइन के मिश्रण का दहन वेल्डिंग के लिए किया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन तथा वायु के मिश्रण का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?
Solution: एथाइन (C_2H_2) और ऑक्सीजन (O_2) के मिश्रण का उपयोग वेल्डिंग के लिए किया जाता है क्योंकि यह एक अत्यंत उच्च तापमान पर जलता है, जिससे धातुएँ पिघल जाती हैं। इस मिश्रण को ऑक्सीएसिटिलीन गैस कहा जाता है।

एथाइन और वायु के मिश्रण का उपयोग वेल्डिंग के लिए नहीं किया जाता क्योंकि वायु में केवल लगभग 21% ऑक्सीजन होती है, बाकी मुख्य रूप से नाइट्रोजन होती है। वेल्डिंग के लिए आवश्यक उच्च तापमान प्राप्त करने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वायु में नाइट्रोजन की उपस्थिति दहन के तापमान को कम कर देती है और पूर्ण दहन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं करती है, जिससे वेल्डिंग प्रक्रिया अप्रभावी हो जाती है। इसलिए, वेल्डिंग के लिए शुद्ध ऑक्सीजन और एथाइन का नियंत्रित मिश्रण आवश्यक है।

प्रश्न 11

प्रयोग द्वारा आप ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल में कैसे अंतर कर सकते हैं?
Solution: ऐल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल के बीच अंतर करने के लिए एक सरल प्रयोग सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO_3) के साथ उनकी अभिक्रिया का उपयोग करना है।

विधि:

  1. एक परखनली में थोड़ी मात्रा में ऐल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) लें और उसमें सोडियम बाइकार्बोनेट का चूर्ण डालें।
  2. दूसरी परखनली में थोड़ी मात्रा में कार्बोक्सिलिक अम्ल (जैसे एथेनोइक अम्ल) लें और उसमें सोडियम बाइकार्बोनेट का चूर्ण डालें।

अवलोकन:

  • जब सोडियम बाइकार्बोनेट को ऐल्कोहॉल में मिलाया जाता है, तो कोई अभिक्रिया नहीं होती है और कोई गैस उत्सर्जित नहीं होती है।
  • जब सोडियम बाइकार्बोनेट को कार्बोक्सिलिक अम्ल में मिलाया जाता है, तो बुदबुदाहट के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) गैस उत्सर्जित होती है।

निष्कर्ष: कार्बोक्सिलिक अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके CO_2 गैस देते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल ऐसा नहीं करते। इस प्रकार, CO_2 गैस का उत्सर्जन कार्बोक्सिलिक अम्ल की उपस्थिति का संकेत देता है।

अभिक्रिया: RCOOH + NaHCO_3 \rightarrow RCOONa + H_2O + CO_2 \uparrow

प्रश्न 12

ऑक्सीकारक क्या हैं?
Solution: ऑक्सीकारक (Oxidizing agents) वे पदार्थ होते हैं जो किसी अन्य पदार्थ को ऑक्सीकृत करते हैं (अर्थात, उसमें ऑक्सीजन जोड़ते हैं या उससे हाइड्रोजन हटाते हैं) और स्वयं अपचयित हो जाते हैं (अर्थात, वे ऑक्सीजन खो देते हैं या हाइड्रोजन प्राप्त करते हैं)।

सरल शब्दों में, ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जो दूसरे पदार्थ से इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है।

उदाहरण के लिए, पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO_4) और पोटेशियम डाइक्रोमेट (K_2Cr_2O_7) प्रबल ऑक्सीकारक हैं जिनका उपयोग कार्बनिक संश्लेषण में किया जाता है।

प्रश्न 13

क्या आप डिटर्जेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?
Solution: नहीं, हम केवल डिटर्जेंट का उपयोग करके यह निश्चित रूप से नहीं बता सकते कि जल कठोर है या मृदु। इसका कारण यह है कि डिटर्जेंट कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में झाग (मिसेल) उत्पन्न करते हैं।

साबुन, दूसरी ओर, कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील अवक्षेप (स्कम) बनाते हैं, जिससे झाग कम बनता है। इस प्रकार, साबुन का उपयोग करके जल की कठोरता का पता लगाया जा सकता है (कम झाग = कठोर जल)। लेकिन डिटर्जेंट की यह विशेषता नहीं होती है, इसलिए वे कठोरता का परीक्षण करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

प्रश्न 14

लोग विभिन्न प्रकार से कपड़े धोते हैं। सामान्यतः साबुन लगाने के बाद लोग कपड़े को पत्थर पर पटकते हैं, डंडे से पीटते हैं, ब्रश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन में कपड़े रगड़े जाते हैं। कपड़ा साफ करने के लिए उसे रगड़ने की क्यों आवश्यकता होती है?
Solution: कपड़े साफ करने के लिए रगड़ने की आवश्यकता होती है क्योंकि यह मैल (चिकनाई और गंदगी) को हटाने में मदद करता है। साबुन मैल के साथ मिलकर मिसेल (micelles) नामक संरचनाएँ बनाता है। ये मिसेल तैलीय मैल को अपने केंद्र में घेर लेते हैं और उसे पानी में घुलनशील बनाकर कपड़े से अलग करने में मदद करते हैं।

रगड़ने की क्रिया (चाहे वह हाथ से हो, ब्रश से हो या वाशिंग मशीन से) इन मिसेलों को कपड़े से प्रभावी ढंग से हटाने और मैल को पानी में निलंबित रखने के लिए आवश्यक यांत्रिक बल प्रदान करती है। यह क्रिया मैल को ढीला करने और उसे पानी के प्रवाह के साथ बहा ले जाने में सहायता करती है, जिससे कपड़ा साफ हो जाता है।

प्रश्न 15

एथेन का आण्विक सूत्र - C_2H_6 है। इसमें:

1. 6 सहसंयोजक आबंध हैं

2. 7 सहसंयोजक आबंध हैं

3. 8 सहसंयोजक आबंध हैं

4. 9 सहसंयोजक आबंध हैं

Solution: एथेन का आण्विक सूत्र C_2H_6 है। इसकी संरचना में दो कार्बन परमाणु एकल बंध (C-C) द्वारा जुड़े होते हैं, और प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं (C-H) से जुड़ा होता है।

संरचना इस प्रकार है: CH_3-CH_3

इसमें कुल सहसंयोजक बंधों की संख्या है:

  • 1 कार्बन-कार्बन एकल बंध (C-C)
  • 6 कार्बन-हाइड्रोजन एकल बंध (C-H) (प्रत्येक कार्बन पर 3)

कुल बंधों की संख्या = 1 + 6 = 7 सहसंयोजक आबंध।

इसलिए, सही उत्तर विकल्प 2 है।

प्रश्न 16

ब्यूटेनोन चर्तु-कार्बन यौगिक है जिसका प्रकार्यात्मक समूह:
Solution: ब्यूटेनोन एक चार-कार्बन वाला यौगिक है। 'ओन' प्रत्यय इंगित करता है कि यह एक कीटोन है। कीटोन का प्रकार्यात्मक समूह कार्बोनिल समूह (-C=O) होता है, जो दो कार्बन परमाणुओं के बीच स्थित होता है। ब्यूटेनोन में, यह समूह दूसरे कार्बन परमाणु पर स्थित होता है, इसलिए इसका सूत्र CH_3-CO-CH_2-CH_3 है।

अतः, ब्यूटेनोन का प्रकार्यात्मक समूह कीटोन (-CO-) है।

Common mistakes

  • इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं में इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या और व्यवस्था को दर्शाने में त्रुटियाँ।
  • संरचनात्मक समावयवों को बनाते समय सभी संभावित संयोजनों को भूल जाना।
  • ऑक्सीकरण और अपचयन अभिक्रियाओं के बीच भ्रमित होना।
  • कार्बनिक यौगिकों के नामकरण के IUPAC नियमों को गलत लागू करना।

Revision tips

  • प्रत्येक यौगिक के लिए इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं का अभ्यास करें, विशेष रूप से उन यौगिकों के लिए जिनमें दोहरे या तिहरे बंधन होते हैं।
  • कार्बन के श्रृंखलन गुणधर्म को दर्शाने वाले विभिन्न संरचनात्मक समावयवों के उदाहरणों की समीक्षा करें।
  • ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं के उदाहरणों को याद करें और समझें कि वे कैसे कार्य करती हैं।
  • एल्कोहल और कार्बोक्सिलिक एसिड के बीच अंतर करने के लिए सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में केंद्रीय कार्बन परमाणु के चारों ओर कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं?

Q2. कार्बन के किस गुणधर्म के कारण यह लंबी श्रृंखलाएँ बना सकता है?

Q3. एथेनॉल को एथेनोइक एसिड में बदलने वाली अभिक्रिया किस प्रकार की है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके CO2 गैस उत्पन्न करता है?

Frequently asked questions

कार्बन के कौन से दो गुणधर्म इसे इतने सारे यौगिक बनाने में मदद करते हैं?

कार्बन के दो मुख्य गुणधर्म हैं: 1. चतुःसंयोजकता (चार सहसंयोजक बंध बनाने की क्षमता) और 2. श्रृंखलन (कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ बनाने की क्षमता)।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या है?

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना एक अणु में परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंधों को दर्शाने का एक तरीका है, जिसमें संयोजी इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं के रूप में दिखाया जाता है।

संरचनात्मक समावयव क्या होते हैं?

संरचनात्मक समावयव वे यौगिक होते हैं जिनका आण्विक सूत्र समान होता है लेकिन परमाणुओं की व्यवस्था (संरचना) भिन्न होती है।

ऑक्सीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं?

ऑक्सीकरण अभिक्रिया वह है जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है या हाइड्रोजन की कमी होती है। एथेनॉल से एथेनोइक एसिड का बनना इसका एक उदाहरण है।

एल्कोहल और कार्बोक्सिलिक एसिड में अंतर कैसे किया जा सकता है?

सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके एल्कोहल कोई गैस नहीं देते, जबकि कार्बोक्सिलिक एसिड CO2 गैस उत्पन्न करते हैं।

क्या डिटर्जेंट का उपयोग करके जल की कठोरता का पता लगाया जा सकता है?

नहीं, डिटर्जेंट का उपयोग करके जल की कठोरता का पता नहीं लगाया जा सकता क्योंकि वे कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में झाग (मिसेल) बनाते हैं।

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