CBSE Class 10 Hindi B NCERT Solutions: स्पर्श पाठ 12

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CBSE Class 10 Hindi B, Chapter 12, delves into the classic film 'Teesri Kasam' and the celebrated lyricist Shailendra. The solutions explore the film's poetic essence, often described as 'a poem written on celluloid,' and the hurdles it encountered in securing distribution. We examine Shailendra's artistic vision, his approach to filmmaking, and his profound ability to capture complex emotions, particularly for actors like Raj Kapoor. The chapter also touches upon the concept of a 'showman' in cinema and the specific lyrical beauty of the song 'Raaton Dason Dishaon Se.' A key theme is Shailendra's unwavering commitment to artistic integrity, prioritizing creative expression over commercial viability. These solutions aim to provide a comprehensive understanding of Shailendra's unique contribution to cinema and his lyrical genius, aiding students in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 12

Chapter summary

NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi B, Chapter 12, focus on the film 'Teesri Kasam' and the contributions of lyricist Shailendra. The solutions explain the film's artistic merit, its commercial struggles, and Shailendra's artistic vision. Key aspects covered include the definition of a 'showman,' the portrayal of emotions in cinema, and the importance of literary integrity in filmmaking. The exercises encourage students to analyze Shailendra's work and his role as a producer.

Learning outcomes

  • Understand the artistic significance of the film 'Teesri Kasam'.
  • Analyze the challenges faced by artistic films in the commercial market.
  • Explain Shailendra's philosophy as a lyricist and filmmaker.
  • Define the term 'showman' in the context of cinema.
  • Appreciate the literary quality of Shailendra's songs.
  • Analyze the portrayal of emotions and tragedy in films.

Topics covered

Paper topics

  • Teesri Kasam film analysis
  • Shailendra's artistic philosophy
  • Role of a lyricist
  • Filmmaking challenges
  • Concept of 'Showman'
  • Portrayal of tragedy in films
  • Literary integrity in cinema
  • Shailendra's songs
  • Raj Kapoor's persona
  • Film distribution challenges

Important topics

  • Shailendra's artistic vision and integrity
  • The artistic merit vs. commercial viability of 'Teesri Kasam'
  • The definition and significance of a 'Showman'
  • The role of lyrics in conveying emotions and ideas
  • The challenges faced by artistic filmmakers

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?
Solution: 'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह फ़िल्म एक कवि की कोमल और संवेदनशील भावनाओं की प्रस्तुति थी, जिसे फ़िल्म के माध्यम से अत्यंत कलात्मक ढंग से व्यक्त किया गया था। इसमें काव्यात्मक संवेदना और भावुकता का गहरा पुट था, जो इसे एक कविता के समान अनुभव प्रदान करता था।

प्रश्न 2

'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?
Solution: 'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार इसलिए नहीं मिल रहे थे क्योंकि यह एक सामान्य कोटि की मनोरंजक फ़िल्म न होकर एक उच्च कोटि की साहित्यिक फ़िल्म थी। इसमें व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक अनावश्यक मनोरंजक मसाले या मसालेदार दृश्य नहीं थे। फिल्म वितरक इसकी करुणा और साहित्यिक मूल्य को व्यावसायिक लाभ के तराजू में तौल रहे थे और कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं थे, जिसके कारण यह फिल्म कब आई और कब चली गई, इसका पता ही नहीं चला।

प्रश्न 3

शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?
Solution: शैलेंद्र के अनुसार, प्रत्येक कलाकार का यह परम कर्तव्य है कि वह दर्शकों की रुचियों को परिष्कृत करने का प्रयास करे। इसका अर्थ है कि कलाकार को दर्शकों को केवल वही नहीं दिखाना चाहिए जो वे वर्तमान में पसंद करते हैं, बल्कि उन्हें उच्च कोटि की कला और विचारों से परिचित कराकर उनकी समझ और पसंद को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए, न कि सस्ता और उथला मनोरंजन उन पर थोपना चाहिए।

प्रश्न 4

फिल्‍मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफाई क्यों कर दिया जाता है?
Solution: फिल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन अक्सर ग्लोरिफाई ( महिमामंडित) कर दिया जाता है ताकि दर्शकों का भावनात्मक शोषण किया जा सके और उन्हें फिल्म देखने के लिए अधिक आकर्षित किया जा सके। वास्तविकता को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने से फिल्म अधिक नाटकीय और व्यावसायिक रूप से आकर्षक बन जाती है, जिससे उसकी बिक्री बढ़ने की संभावना होती है।

प्रश्न 5

'शैलेंद्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं' - इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Solution: यह कथन इस बात पर जोर देता है कि राजकपूर, जो अपनी फिल्मों में भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जाने जाते थे, अक्सर अपनी बात कहने के लिए शब्दों की तलाश में रहते थे। गीतकार शैलेंद्र ने राजकपूर की इन्हीं अनकही भावनाओं और विचारों को अपने गीतों के माध्यम से सटीक शब्द प्रदान किए। कहने का तात्पर्य यह है कि राजकपूर जो कुछ भी अपनी फिल्मों के माध्यम से व्यक्त करना चाहते थे, उसे शैलेंद्र अपने गीतों द्वारा प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर देते थे।

प्रश्न 6

लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
Solution: 'शोमैन' एक ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल में ही एक किंवदंती बन चुका हो, जिसका नाम सुनकर ही फिल्में बिक जाती हों और जिसका नाम ही दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचने की क्षमता रखता हो। राजकपूर अपनी फिल्मों और अपने व्यक्तित्व के बल पर इस परिभाषा पर पूरी तरह खरे उतरते थे, इसलिए लेखक ने उन्हें एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है।

प्रश्न 7

फ़िल्म 'तीसरी कसम' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
Solution: संगीतकार जयकिशन ने फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर आपत्ति इसलिए जताई क्योंकि उनका मानना था कि साहित्यिक सोच और आम जनसामान्य की सोच में अंतर होता है। उनके अनुसार, दर्शक केवल चार दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) से परिचित होते हैं, जबकि 'दसों दिशाओं' की अवधारणा सभी के लिए सुलभ नहीं होती। इस कारण गीतकार और दर्शक के बीच संवाद में एक तालमेल की कमी महसूस हो रही थी। हालांकि, यह गीत बाद में बहुत प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 8

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेंद्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?
Solution: राजकपूर जैसे अनुभवी निर्माता-निर्देशक द्वारा असफलता के खतरों से आगाह किए जाने के बावजूद शैलेंद्र ने 'तीसरी कसम' फ़िल्म का निर्माण इसलिए किया क्योंकि वे धन या सम्मान की कामना नहीं रखते थे। उनकी मुख्य प्रेरणा आत्म-तुष्टि, अपनी मन की भावनाओं की अभिव्यक्ति और दर्शकों के हृदय को छूना था। उन्होंने नफा-नुकसान के व्यावसायिक पहलुओं से ऊपर उठकर, अपने कलाकार मन के साथ समझौता न करते हुए इस फिल्म का निर्माण किया।

प्रश्न 9

'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया है? स्पष्ट कीजिए।
Solution: 'तीसरी कसम' में राजकपूर ने हीरामन का किरदार इतनी गहराई से निभाया कि उन्होंने हीरामन के चरित्र को आत्मसात कर लिया, लेकिन साथ ही अपने अभिनय को उस पर हावी नहीं होने दिया। यह एक कलाकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। राजकपूर ने हीरामन, जो एक गाड़ीवान है, के भोलेपन, हीराबाई के प्रति उसके अपनेपन की भावना को खोजना, और उसकी उपेक्षा पर स्वयं से जूझना जैसी भावनाओं को बड़ी ही कुशलता से प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल दिल की जुबान को समझते हुए, दिमाग की नहीं, हीरामन के चरित्र को जीवंत कर दिया।

प्रश्न 10

लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि 'तीसरी कसम' ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?
Solution: लेखक ने ऐसा इसलिए लिखा है क्योंकि 'तीसरी कसम' एक विशुद्ध साहित्यिक फिल्म थी, जिसे लेखक श्री फणीश्वर नाथ रेणु की मूल कहानी के स्वरूप में कोई भी बदलाव किए बिना बनाया गया था। फिल्म की पटकथा स्वयं रेणु जी ने लिखी थी। इसमें दर्शकों को आकर्षित करने के लिए किसी भी प्रकार के काल्पनिक मनोरंजन को जबरदस्ती नहीं जोड़ा गया था। फिल्म ने कहानी की मूल आत्मा, यानी उसकी भावुकता और साहित्यिक गहराई के साथ पूरा न्याय किया, इसलिए लेखक का मानना है कि इसने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है।

प्रश्न 11

शैलेंद्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: शैलेंद्र एक भावनात्मक और आदर्शवादी कवि थे, जिसके कारण उनके गीत अत्यंत सरल, सहज, संदेशात्मक और सीधे मन को छूने वाले होते थे। उनके गीतों में विचारों की गहराई तो थी ही, साथ ही वे आम आदमी के जीवन और भावनाओं से भी गहराई से जुड़े हुए थे। उनका व्यक्तित्व जैसा सीधा और सरल था, उनकी गीत रचनाएँ भी उतनी ही सहज और आम बोलचाल की भाषा के करीब थीं, जिनमें जटिलता का अभाव था।

प्रश्न 12

फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Solution: 'तीसरी कसम' फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की पहली और एकमात्र फ़िल्म थी। उन्होंने इस फ़िल्म का निर्माण किसी भी व्यावसायिक लाभ या प्रसिद्धि की कामना के बिना, केवल अपनी आत्म-संतुष्टि के लिए किया था। उनके सीधे-सादे और आदर्शवादी व्यक्तित्व की छाप उनकी फ़िल्म के मुख्य किरदार हीरामन में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। फिल्म निर्माण से जुड़े खतरों और अनिश्चितताओं से भली-भांति परिचित होने के बावजूद, उन्होंने एक शुद्ध साहित्यिक और कलात्मक फिल्म बनाने का जोखिम उठाया, जो उनकी निर्माता के रूप में एक महत्वपूर्ण विशेषता थी।

Common mistakes

  • Confusing artistic merit with commercial viability.
  • Underestimating the importance of literary expression in films.
  • Not understanding the role of a lyricist in conveying a director's vision.
  • Failing to recognize the challenges of producing non-commercial cinema.

Revision tips

  • Focus on understanding the reasons behind the film 'Teesri Kasam's' artistic acclaim and commercial struggles.
  • Analyze Shailendra's dual role as a lyricist and producer, noting his artistic principles.
  • Pay attention to the definitions and examples of terms like 'showman' and 'glorification' of tragedy.
  • Relate Shailendra's lyrical style to his personality and filmmaking approach.

Practice MCQs

Q1. 'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?

Q2. शैलेंद्र के अनुसार, दर्शकों की रुचियों का परिष्कार करने का क्या अर्थ है?

Q3. फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों को ग्लोरिफाई क्यों किया जाता है?

Q4. राजकपूर को 'एशिया का सबसे बड़ा शोमैन' क्यों कहा गया?

Q5. संगीतकार जयकिशन ने 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' गीत पर आपत्ति क्यों जताई?

Frequently asked questions

CBSE कक्षा 10 हिंदी बी के लिए यह समाधान किस अध्याय पर आधारित हैं?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 हिंदी बी के स्पर्श पुस्तक के अध्याय 12 पर आधारित हैं, जो 'तीसरी कसम' फिल्म और गीतकार शैलेंद्र पर केंद्रित है।

'तीसरी कसम' को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?

इसे इसलिए कहा गया है क्योंकि फिल्म में एक कवि की कोमल भावनाओं को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया था, जिसमें काव्यात्मक संवेदना और भावुकता थी।

शैलेंद्र के अनुसार एक कलाकार का क्या कर्तव्य है?

शैलेंद्र के अनुसार, कलाकार का कर्तव्य दर्शकों की रुचियों का परिष्कार करना है, न कि उन पर सस्ता और उथला मनोरंजन थोपना।

राजकपूर को 'शोमैन' क्यों कहा जाता था?

राजकपूर को शोमैन इसलिए कहा जाता था क्योंकि उनका नाम ही फिल्मों की बिक्री के लिए पर्याप्त था और वे दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच सकते थे।

क्या 'तीसरी कसम' फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही?

नहीं, फिल्म को वितरक नहीं मिल रहे थे क्योंकि यह एक सामान्य मनोरंजक फिल्म न होकर उच्च कोटि की साहित्यिक फिल्म थी, जिसमें अनावश्यक मसाले नहीं थे।

शैलेंद्र के गीतों की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

शैलेंद्र के गीत सरल, सहज, संदेशात्मक, मन को छूने वाले और आम आदमी से जुड़े होते थे, जिनमें गहराई के साथ-साथ सरलता भी होती थी।

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