कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 11: नजीर अकबराबादी - आदमी नामा NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श' के पाठ 11, 'आदमी नामा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। नजीर अकबराबादी द्वारा रचित यह कविता मनुष्य के विभिन्न रूपों और उसके विरोधाभासी स्वभाव का चित्रण करती है। समाधानों में कविता के छंदों की व्याख्या, कवि द्वारा दर्शाए गए आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का विश्लेषण, और मनुष्य के प्रति बनने वाली धारणाओं पर चर्चा शामिल है। यह छात्रों को कविता के गहरे अर्थ को समझने, विभिन्न सामाजिक वास्तविकताओं को पहचानने और मानवीय मूल्यों के महत्व को आत्मसात करने में मदद करेगा। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो छात्रों को कविता की गहरी समझ विकसित करने और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. नजीर अकबराबादी - आदमी नामा

Chapter summary

कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श' के पाठ 11, 'आदमी नामा' के ये NCERT समाधान, नजीर अकबराबादी की कविता का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। समाधानों में कविता के पहले छंद में वर्णित आदमी के विभिन्न सामाजिक और आर्थिक रूपों, चारों छंदों में सकारात्मक और नकारात्मक प्रवृत्तियों के द्वंद्व, और कविता के शीर्षक 'आदमी नामा' के माध्यम से मनुष्य के प्रति बनने वाली धारणाओं की व्याख्या की गई है। यह छात्रों को कविता के माध्यम से मानवीय स्वभाव की जटिलताओं और सामाजिक समानता के महत्व को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • कविता 'आदमी नामा' के पहले छंद में वर्णित आदमी के विभिन्न रूपों को पहचानना।
  • कविता के चारों छंदों में प्रस्तुत आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों के द्वंद्व को समझना।
  • मनुष्य के प्रति बनने वाली धारणाओं का विश्लेषण करना।
  • कविता के माध्यम से मानवीय स्वभाव की जटिलताओं को स्पष्ट करना।
  • सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • आदमी नामा कविता का सारांश
  • नजीर अकबराबादी का जीवन परिचय
  • कविता के छंदों की व्याख्या
  • आदमी के सकारात्मक रूप
  • आदमी के नकारात्मक रूप
  • मनुष्य के विरोधाभासी स्वभाव का चित्रण
  • सामाजिक विषमता का वर्णन
  • मानवीय मूल्यों का महत्व
  • कविता का व्यंग्य
  • आदमी की प्रवृत्तियाँ
  • कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 11

Important topics

  • आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों का द्वंद्व
  • मनुष्य के प्रति धारणाओं का विश्लेषण
  • कविता के माध्यम से सामाजिक विषमता का चित्रण
  • मानवीय मूल्यों का महत्व
  • आदमी नामा का केंद्रीय भाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के किन-किन रूपों का बखान करती है? क्रम से लिखिए।
Solution:

कविता के पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के निम्नलिखित रूपों का क्रमबद्ध बखान करती है:

  1. बादशाह (शासक)
  2. मुफ़लिस-ओ-गदा (गरीब और भिखारी)
  3. जरदार (धनवान व्यक्ति)
  4. बेनवा (असहाय व्यक्ति)
  5. निअमत खाने वाला अमीर (ऐशो-आराम में जीवन बिताने वाला अमीर)
  6. टुकडे चबाने वाला गरीब (बहुत ही निर्धन व्यक्ति)

इस प्रकार, कवि समाज के विभिन्न आर्थिक और सामाजिक स्तरों के लोगों का उल्लेख करता है।

प्रश्न 2

चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन-किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
Solution:

कविता के चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को एक-दूसरे के विपरीत रखते हुए प्रस्तुत किया है, जिससे मनुष्य के विरोधाभासी स्वभाव का पता चलता है। इसे निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है:

  • सकारात्मक रूप: आदमी मसजिद बनाता है, इमाम और खुतबाख्वो (उपदेशक) बनता है, नमाज पढ़ता है, कुरान पढ़ता है। वह दूसरों पर जान न्यौछावर करता है और किसी की एक पुकार पर सहायता के लिए दौड़ा चला आता है।
  • नकारात्मक रूप: वही आदमी मसजिद के बाहर जूतियाँ चुराता है, बुरा होता है, दूसरों की इज्जत उछालता है और उनका अपमान करता है। वही आदमी दूसरे आदमी को तलवार मारता है, उसकी जान लेता है और उसकी सहायता नहीं करता।

कवि यह दिखाना चाहता है कि मनुष्य में अच्छाई और बुराई दोनों ही विद्यमान हैं। एक ही व्यक्ति अच्छे और बुरे दोनों तरह के कार्य कर सकता है। यह मनुष्य के चरित्र की जटिलता को दर्शाता है।

प्रश्न 3

'आदमी नामा' शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति क्या धारणा बनती है?
Solution:

'आदमी नामा' कविता के अंशों को पढ़ने के बाद मनुष्य के प्रति हमारे मन में एक मिली-जुली धारणा बनती है, जिसमें अच्छाई और बुराई दोनों शामिल हैं।

एक ओर, हम देखते हैं कि मनुष्य धार्मिक और सामाजिक कार्यों में संलग्न है, दूसरों पर जान न्यौछावर करने को तैयार है और संकट में सहायता के लिए तत्पर रहता है। ये गुण मनुष्य को महान बनाते हैं।

दूसरी ओर, कविता यह भी दर्शाती है कि मनुष्य स्वार्थी, कपटी और हिंसक भी हो सकता है। वह जूतियाँ चुराता है, दूसरों का अपमान करता है और उनकी जान भी ले लेता है। यह पहलू मनुष्य के नकारात्मक चरित्र को उजागर करता है।

इस प्रकार, कविता यह सिखाती है कि मनुष्य अपने कर्मों से ही अच्छा या बुरा बनता है। केवल पद या धन से कोई अच्छा या बुरा नहीं होता। मनुष्य में मानवीय मूल्यों का होना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा वह केवल एक प्राणी मात्र रह जाता है, मनुष्य नहीं।

प्रश्न 4

इस कविता का कौन-सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
Solution:

इस कविता का वह भाग सबसे अच्छा लगता है जहाँ कवि समाज की सच्चाई को उजागर करता है और मनुष्य के विभिन्न रूपों का चित्रण करता है। विशेष रूप से, वह भाग जहाँ कवि अमीर और गरीब के बीच की खाई को दर्शाता है और यह बताता है कि चाहे कोई कितना भी ऊँचा या नीचा हो, वह अंततः एक 'आदमी' ही है।

यह भाग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सामाजिक समता की माँग करता है और हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि मनुष्य होने के नाते हम सभी समान हैं। यह कविता समाज की कड़वी सच्चाई को बिना लाग-लपेट के प्रस्तुत करती है, जो इसे प्रभावशाली बनाती है।

प्रश्न 5

आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
Solution:

'आदमी नामा' कविता के आधार पर आदमी की निम्नलिखित प्रवृत्तियाँ (स्वभाव या विशेषताएँ) उल्लेखित हैं:

  • धार्मिक और सांस्कृतिक: आदमी धार्मिक अनुष्ठान करता है, जैसे नमाज पढ़ना और कुरान पढ़ना।
  • स्वार्थी और अनैतिक: आदमी जूतियाँ चुराने जैसे अनैतिक कार्य भी करता है।
  • रक्षक और हत्यारा: आदमी दूसरों की रक्षा भी कर सकता है और किसी की जान भी ले सकता है।
  • सहृदय और परोपकारी: आदमी दूसरों पर जान न्यौछावर करता है और उनकी सहायता के लिए तत्पर रहता है।
  • विरोधाभासी: आदमी में संत और शैतान दोनों के गुण पाए जाते हैं। वह एक ही समय में अच्छे और बुरे दोनों कार्य कर सकता है।

संक्षेप में, आदमी की प्रवृत्तियाँ अत्यंत विविध और विरोधाभासी हैं।

प्रश्न 2.1

निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिए - दुनिया में बादशाह है सो वह भी आदमी और मुफ़लिस-ओ-गदा सो है वो भी आदमी
Solution:

इस अंश का अर्थ है कि इस संसार में हर प्रकार के मनुष्य मौजूद हैं। यदि कोई व्यक्ति बहुत शक्तिशाली और ऐश्वर्यशाली बादशाह है, तो वह भी अंततः एक मनुष्य ही है। इसी प्रकार, यदि कोई व्यक्ति अत्यंत गरीब, दीन-हीन या भिखारी है, तो वह भी मनुष्य ही है। कवि यह बताना चाहता है कि पद, धन या सामाजिक स्थिति के आधार पर मनुष्य का भेद किया जा सकता है, लेकिन मूल रूप से वे सभी एक ही प्रजाति के प्राणी हैं - 'आदमी'।

प्रश्न 2.2

निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिए - अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वो भी आदमी ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपजीर
Solution:

इस अंश का अर्थ है कि समाज में ऊँचे तबके के लोग (अशराफ़) से लेकर निम्न तबके के लोग (कमीने), और राजा (शाह) से लेकर सामान्य व्यक्ति तक, सभी मनुष्य ही हैं। ये सभी प्रकार के मनुष्य ही ऐसे कार्य करते हैं जो लोगों के दिलों को लुभा लेते हैं या उन्हें प्रभावित करते हैं। 'कारे दिलपजीर' का अर्थ है मन को भाने वाले या दिल को छू लेने वाले कार्य। कवि यहाँ यह कहना चाहता है कि मनुष्य अपने कर्मों से ही समाज में अपनी पहचान बनाता है और लोगों के दिलों पर छाप छोड़ता है, चाहे वह कार्य अच्छा हो या बुरा।

प्रश्न 3.1

निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए - पढ़ते है आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
Solution:

इस पंक्ति में कवि ने एक गहरा व्यंग्य किया है। 'यहां' (यां) शब्द का प्रयोग करके कवि यह बताना चाहता है कि मनुष्य धार्मिक ग्रंथ कुरान पढ़ता है और नमाज जैसी इबादत भी करता है, जो कि अच्छे और पवित्र कार्य माने जाते हैं। लेकिन, इसी के साथ वह अन्य नकारात्मक कार्य भी करता है, जैसा कि कविता के अन्य हिस्सों में बताया गया है (जैसे जूतियाँ चुराना, अपमान करना, मारना)।

व्यंग्य इस बात पर है कि मनुष्य एक ओर तो धार्मिकता और पवित्रता का आचरण करता है, लेकिन दूसरी ओर वह अनैतिक और हिंसक भी हो सकता है। यह दोहरा मापदंड और विरोधाभास ही कवि के व्यंग्य का विषय है, जो मनुष्य के चरित्र की जटिलता और पाखंड को उजागर करता है।

Common mistakes

  • कविता के विभिन्न छंदों में प्रस्तुत विरोधाभासी विचारों को जोड़ने में कठिनाई।
  • आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से न बता पाना।
  • कविता के माध्यम से व्यक्त व्यंग्य को समझने में चूक।

Revision tips

  • कविता को कई बार पढ़ें और उसके मुख्य भाव को समझने का प्रयास करें।
  • प्रत्येक छंद में कवि द्वारा वर्णित आदमी के विभिन्न रूपों को सूचीबद्ध करें।
  • सकारात्मक और नकारात्मक प्रवृत्तियों के उदाहरणों को नोट करें और उनके बीच संबंध स्थापित करें।
  • कविता के शीर्षक 'आदमी नामा' के महत्व पर विचार करें और यह मनुष्य के प्रति क्या दर्शाता है, इसे समझें।

Practice MCQs

Q1. कविता 'आदमी नामा' के पहले छंद में कवि की दृष्टि में आदमी के कौन-कौन से रूप शामिल हैं?

Q2. कविता के अनुसार, आदमी मसजिद बनाता है, लेकिन साथ ही क्या करता है?

Q3. कवि के अनुसार, कौन से कार्य 'कार-ए-दिलपजीर' (मन को लुभाने वाले कार्य) कहलाते हैं?

Q4. 'आदमी नामा' शीर्षक कविता मनुष्य के किस पहलू पर प्रकाश डालती है?

Q5. कविता के अनुसार, आदमी की कौन सी प्रवृत्ति उसे 'अच्छा' या 'बुरा' बनाती है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के 'आदमी नामा' पाठ में कवि नजीर अकबराबादी क्या दर्शाना चाहते हैं?

कवि नजीर अकबराबादी इस कविता के माध्यम से मनुष्य के विभिन्न रूपों, उसके अच्छे-बुरे स्वभाव और समाज में उसकी स्थिति का चित्रण करते हैं। वे मनुष्य के विरोधाभासी चरित्र को उजागर करते हैं, जहाँ एक ही व्यक्ति में संत और शैतान दोनों के गुण हो सकते हैं।

'आदमी नामा' कविता के पहले छंद में किन सामाजिक वर्गों का उल्लेख है?

पहले छंद में कवि ने समाज के विभिन्न वर्गों का उल्लेख किया है, जैसे बादशाह, मुफ़लिस (गरीब), गदा (भिखारी), जरदार (धनवान), बेनवा (असहाय), निअमत खाने वाला अमीर (सुविधा संपन्न अमीर) और टुकडे चबाने वाला गरीब।

कविता में आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक कार्यों के क्या उदाहरण दिए गए हैं?

सकारात्मक कार्यों में मसजिद बनाना, इमाम बनना, नमाज पढ़ना, कुरान पढ़ना और एक पुकार पर दौड़ा चले आना शामिल हैं। नकारात्मक कार्यों में मसजिद के बाहर जूतियाँ चुराना, अपमान करना, तलवार मारना और सहायता न करना शामिल हैं।

'आदमी नामा' शीर्षक का क्या महत्व है?

'आदमी नामा' का अर्थ है 'मनुष्य का विवरण' या 'मनुष्य का बखान'। यह शीर्षक कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाता है, जो मनुष्य के विभिन्न रूपों और उसके स्वभाव का वर्णन करता है।

यह NCERT समाधान कक्षा 9 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को 'आदमी नामा' कविता की गहरी समझ प्रदान करते हैं। वे कविता के कठिन अंशों की व्याख्या, मुख्य भाव और परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर समझने में मदद करते हैं, जिससे उनकी तैयारी बेहतर होती है।

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