कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 15 - मेघ आए (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'क्षितिज' के पाठ 15, 'मेघ आए', जो सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित है, के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कविता बादलों के आगमन का मानवीकरण करते हुए ग्रामीण परिवेश में मेहमान के आने के उल्लास और रीति-रिवाजों का सजीव चित्रण करती है। समाधानों में कविता की पंक्तियों का भावार्थ, पात्रों के प्रतीकात्मक अर्थ और अलंकारिक प्रयोगों की व्याख्या शामिल है। छात्र इन समाधानों की मदद से कविता की गहरी समझ विकसित कर सकते हैं, कठिन अवधारणाओं को स्पष्ट कर सकते हैं और परीक्षा की तैयारी को बेहतर बना सकते हैं। यह विस्तृत विश्लेषण छात्रों को कविता के मूल भाव और साहित्यिक सौंदर्य को समझने में सहायता करेगा।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. सर्वेश्वर दयाल - सक्सेना मेघ आए

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी क्षितिज के पाठ 15 'मेघ आए' के ये NCERT समाधान कविता का गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं। इसमें बादलों के आगमन को एक मेहमान के आगमन के रूप में चित्रित किया गया है, जिसमें प्रकृति के विभिन्न तत्व (जैसे हवा, पेड़, नदी, लता, पीपल) मानवीकृत किए गए हैं। समाधान कविता की पंक्तियों के भावार्थ, प्रतीकात्मक अर्थों और अलंकारिक प्रयोगों (मानवीकरण, रूपक) पर केंद्रित हैं। यह छात्रों को कविता के माध्यम से चित्रित ग्रामीण संस्कृति और रीति-रिवाजों को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • कविता 'मेघ आए' में चित्रित मानवीकरण अलंकार को पहचानना और समझना।
  • बादलों के आगमन को मेहमान के आगमन के रूप में चित्रित करने के भाव को स्पष्ट करना।
  • कविता में प्रयुक्त प्रतीकों (जैसे धूल, पेड़, नदी, लता, ताल) के अर्थ को समझना।
  • कविता में वर्णित ग्रामीण रीति-रिवाजों और उल्लासपूर्ण वातावरण का विश्लेषण करना।
  • कविता की पंक्तियों के भावार्थ को अपने शब्दों में व्यक्त करना सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • मेघ आए कविता का सारांश
  • बादलों का मानवीकरण
  • प्रकृति के तत्व और उनके प्रतीक
  • ग्रामीण परिवेश का चित्रण
  • मेहमान के आगमन का उल्लास
  • मानवीकरण अलंकार
  • रूपक अलंकार
  • कविता की पंक्तियों का भावार्थ
  • सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का साहित्यिक परिचय (अप्रत्यक्ष)
  • हिंदी काव्य की व्याख्या
  • कक्षा 9 हिंदी क्षितिज पाठ 15

Important topics

  • कविता 'मेघ आए' का केंद्रीय भाव
  • मानवीकरण अलंकार के उदाहरण और व्याख्या
  • प्रकृति के विभिन्न तत्वों का प्रतीकात्मक अर्थ
  • कविता में चित्रित रीति-रिवाजों का वर्णन
  • पंक्तियों का भावार्थ स्पष्टीकरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है, उन्हें लिखिए।
Solution:

बादलों के आगमन पर प्रकृति में अनेक सजीव और गतिशील क्रियाएँ होती हैं, जिन्हें कवि ने बड़े ही खूबसूरती से चित्रित किया है। ये क्रियाएँ इस प्रकार हैं:

  1. बयार का आगमन: बादलों के आने की सूचना देने के लिए हवा (बयार) नवयुवतियों की तरह नाचती-गाती हुई चलती है।

  2. खिड़की-दरवाजों का खुलना: मेहमान (बादल) के आने की आहट से घर के खिड़की-दरवाजे स्वतः ही खुल जाते हैं, मानो स्वागत की तैयारी हो रही हो।

  3. पेड़ों का देखना: पेड़, जिन्हें ग्रामीणों के समान माना गया है, गरदन ऊँची करके आने वाले बादल रूपी मेहमान को उत्सुकता से देखते हैं।

  4. आँधी और धूल का उड़ना: बादल के साथ तेज हवा चलती है, जिससे आँधी आती है और धूल उड़ने लगती है। धूल को यहाँ एक ऐसी स्त्री के रूप में चित्रित किया गया है जो अपना घाघरा उठाए भाग रही है।

  5. नदी का ठिठकना: नदी, जो एक ग्रामीण वधू के समान है, बादल को देखकर ठिठक जाती है और तिरछी चितवन से उसे देखती है, मानो उसका घूँघट सरक गया हो।

  6. पीपल का स्वागत: गाँव का बूढ़ा पीपल का वृक्ष, जो एक बुजुर्ग सदस्य की तरह है, आगे बढ़कर बादल रूपी मेहमान का आदर-सत्कार करता है।

  7. तालाब का जल लाना: तालाब, जिसे सेवक के रूप में दर्शाया गया है, परात भर पानी लेकर आता है, जो मेहमान के पैर धोने की पारंपरिक क्रिया का प्रतीक है।

  8. बिजली का चमकना और वर्षा: आकाश में बिजली चमकती है और फिर वर्षा की बूँदें गिरती हैं, जिन्हें मिलन के आँसू के रूप में देखा जा सकता है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ?

• धूल

• पेड़

• नदी

• लता

• ताल

Solution:

कविता में विभिन्न प्राकृतिक तत्वों को मानवीय प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इस प्रकार हैं:

  • धूल: धूल को एक स्त्री के रूप में प्रतीक किया गया है, जो हवा के चलने पर अपना घाघरा उठाए भागती हुई प्रतीत होती है।
  • पेड़: पेड़ों को नगरवासियों या ग्रामीणों के समान माना गया है, जो मेहमान (बादल) को उत्सुकता से गरदन ऊँची करके देखते हैं।
  • नदी: नदी को भी एक स्त्री या ग्रामीण वधू के रूप में प्रतीक किया गया है, जो बादल को देखकर ठिठक जाती है और तिरछी चितवन से देखती है।
  • लता: लता को मेघ रूपी नायक की प्रतीक्षारत नायिका के रूप में दर्शाया गया है, जो व्याकुलता और रूठे हुए भाव से किवाड़ की ओट से बादल को देखती है।
  • ताल (तालाब): तालाब को एक सेवक के रूप में प्रतीक किया गया है, जो मेहमान (बादल) के स्वागत के लिए परात भर पानी लेकर आता है।

प्रश्न 3

लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों ?
Solution:

लता ने बादल रूपी मेहमान को किवाड़ की ओट में से देखा। इसके दो मुख्य कारण थे:

  1. व्याकुलता: लता बादल को देखने के लिए बहुत व्याकुल थी और उसका इंतजार कर रही थी।
  2. रूठापन: बादलों के बहुत देर से आने के कारण लता थोड़ी रूठी हुई भी थी, इसलिए वह सीधे सामने आने के बजाय किवाड़ की ओट से ही उन्हें देख रही थी, जो उसके मिले-जुले भावों को दर्शाता है।

प्रश्न 4.1

भाव स्पष्ट कीजिए - क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की
Solution:

इस पंक्ति का भाव यह है कि नायिका (यहाँ लता या प्रकृति का कोई कोमल अंग) को यह भ्रम या शंका थी कि बादल रूपी प्रियतम शायद उसे भूल गए हैं या अब नहीं आएँगे। लेकिन जब बादल सचमुच आ गए, तो उसका यह भ्रम दूर हो गया। इस भ्रम के दूर होने पर वह बादल से क्षमा याचना कर रही है, मानो कह रही हो कि मुझे क्षमा करें, मेरा भ्रम दूर हो गया है कि आप नहीं आएँगे। यह उसके मन की व्याकुलता और फिर राहत के भाव को व्यक्त करता है।

प्रश्न 4.2

भाव स्पष्ट कीजिए - बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरके।
Solution:

इस पंक्ति का भाव यह है कि जब बादल रूपी मेहमान आए, तो नदी, जिसे एक ग्रामीण वधू के समान चित्रित किया गया है, उन्हें देखकर ठिठक गई। ठिठकने के कारण उसका घूँघट थोड़ा सरक गया, जिससे वह तिरछी या 'बाँकी' नज़र से मेहमान को देखने लगी। यह दृश्य ग्रामीण परिवेश में मेहमान के आगमन पर स्त्रियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया को दर्शाता है, जहाँ वे उत्सुकता और संकोच के मिले-जुले भाव से मेहमान को देखती हैं।

प्रश्न 5

मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए ?
Solution:

मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जो इस प्रकार हैं:

  1. तेज हवा और आँधी: हवा का तेज बहाव शुरू हो गया, जिससे आँधी चलने लगी।
  2. पेड़ों की प्रतिक्रिया: आँधी के कारण पेड़ कभी झुक जाते हैं तो कभी उठते हैं, मानो वे मेहमान के आने से उत्साहित हों या हवा के झोंकों से हिल रहे हों।
  3. खिड़की-दरवाजों का खुलना: हवा के तेज झोंकों से घरों के खिड़की-दरवाजे खुल जाते हैं।
  4. नदी का बहना: नदी का प्रवाह भी प्रभावित होता है; वह 'बाँकी' होकर बहने लगती है, जो उसके ठिठकने और तिरछी नज़र से देखने के भाव से जुड़ा है।
  5. पीपल का झुकना: बूढ़ा पीपल का वृक्ष भी मेहमान के स्वागत में झुकता है।
  6. तालाब में हलचल: तालाब के पानी में उथल-पुथल मच जाती है, क्योंकि वह मेहमान के लिए परात भर पानी लाता है।
  7. वर्षा का आगमन: अंततः, आसमान से वर्षा की बूँदें गिरने लगती हैं, जो मिलन का प्रतीक हैं।

प्रश्न 6

मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात क्यों कही गई है?
Solution:

कवि ने मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात इसलिए कही है ताकि उनमें सजीवता और मानवीयता का भाव आ सके। यह वर्णन ठीक उसी प्रकार है जैसे कोई दामाद या विशेष मेहमान बहुत दिनों बाद ससुराल या किसी खास अवसर पर सज-धज कर आता है। इस उक्ति से मेघों के आगमन को एक महत्वपूर्ण और उत्सवपूर्ण घटना के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो उनके भव्य और आकर्षक स्वरूप को दर्शाता है। यह उनके आगमन के प्रति उल्लास और अपेक्षा को भी व्यक्त करता है।

प्रश्न 7

कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।
Solution:

कविता 'मेघ आए' में कवि ने मानवीकरण और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया है। उनके उदाहरण निम्नलिखित हैं:

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण:

  • मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के (मेघों का सजना-संवरना)
  • नाचती गाती बयार चली (हवा का नाचना-गाना)
  • पेड़ झुक झाँकने लगे (पेड़ों का मनुष्यों की तरह झुककर देखना)
  • धूल भागी घाघरा उठाए (धूल का स्त्री की तरह भागना)
  • बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी (नदी का स्त्री की तरह ठिठकना और तिरछी नजर से देखना)
  • बूढ़े पीपल ने जुहार की (पीपल का मनुष्यों की तरह अभिवादन करना)
  • बोली अकुलाई लता (लता का मनुष्यों की तरह व्याकुल होकर बोलना)
  • हरसाया ताल लाया पानी परात भर के (तालाब का मनुष्यों की तरह प्रसन्न होकर सेवा करना)

रूपक अलंकार के उदाहरण:

  • क्षितिज अटारी गहराई (क्षितिज को अटारी का रूप दिया गया है)
  • दामिनी दमकी (बिजली का चमकना, यहाँ दामिनी को किसी आभूषण या चमक के रूप में देखा जा सकता है, हालांकि यह रूपक का एक सूक्ष्म प्रयोग है।)

प्रश्न 8

कविता में जिन रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।
Solution:

कविता 'मेघ आए' में ग्रामीण परिवेश में मेहमान के आगमन से जुड़े कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण किया गया है। यद्यपि ये सीधे तौर पर किसी विशेष व्यक्ति के घर आने के रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि पूरे गाँव के सामूहिक उल्लास और स्वागत की भावना को दर्शाते हैं:

  1. स्वागत की तैयारी: मेहमान के आगमन की सूचना मिलते ही घर के दरवाजे-खिड़कियाँ खुल जाते हैं, जो स्वागत की तत्परता को दर्शाता है।
  2. आदर-सत्कार: बूढ़े पीपल का वृक्ष का आगे बढ़कर मेहमान का अभिवादन करना (जुहार करना) आदर का प्रतीक है।
  3. सेवा भाव: तालाब का परात भर पानी लेकर आना मेहमान के पैर धोने की पारंपरिक सेवा का प्रतीक है, जो अत्यंत आदर और सत्कार को दर्शाता है।
  4. सामूहिक उल्लास: यह चित्रण दर्शाता है कि गाँव में जब भी कोई महत्वपूर्ण 'मेहमान' (जैसे बादल) आता है, तो पूरा गाँव उसमें सम्मिलित होता है और अपने-अपने तरीके से उसका स्वागत करता है। यह सामूहिक जुड़ाव और उत्सव की भावना को उजागर करता है।

यह चित्रण दर्शाता है कि मेहमान का आना केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक उत्सव होता है, जिसमें प्रकृति के तत्व भी सहभागी बनते हैं।

Common mistakes

  • मानवीकरण और रूपक अलंकारों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • कविता में प्रयुक्त प्रतीकों के गहरे अर्थ को समझने में चूक।
  • पंक्तियों के शाब्दिक अर्थ पर अटक जाना और भावार्थ को न समझ पाना।
  • कविता के ग्रामीण परिवेश और सांस्कृतिक चित्रण को अनदेखा करना।

Revision tips

  • कविता को एक बार जोर से पढ़ें और उसके मुख्य भाव को समझने का प्रयास करें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को कविता की पंक्तियों से जोड़कर याद करें।
  • मानवीकरण और रूपक अलंकारों के उदाहरणों को अलग से नोट करें।
  • कविता में आए रीति-रिवाजों और प्रकृति के मानवीकृत रूपों की सूची बनाएँ।
  • समाधानों को पढ़ने के बाद, स्वयं कविता का सारांश लिखने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. कविता 'मेघ आए' में 'धूल' किसका प्रतीक है?

Q2. पेड़ों को कविता में किसका प्रतीक माना गया है?

Q3. नदी के ठिठकने और घूँघट सरकने का क्या भाव है?

Q4. तालाब को किस रूप में चित्रित किया गया है?

Q5. कविता में 'क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' का क्या अर्थ है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के पाठ 15 'मेघ आए' में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?

इस पाठ में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता 'मेघ आए' का विश्लेषण है, जिसमें बादलों के आगमन को एक मेहमान के आगमन के रूप में चित्रित किया गया है। इसमें प्रकृति के विभिन्न तत्वों का मानवीकरण और ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण है।

कविता में मानवीकरण अलंकार का क्या अर्थ है और इसके क्या उदाहरण हैं?

मानवीकरण अलंकार में निर्जीव वस्तुओं या प्रकृति के तत्वों को सजीव प्राणियों की तरह चित्रित किया जाता है। 'मेघ आए' कविता में नाचती-गाती बयार, झुकते पेड़, ठिठकती नदी, और जुहार करते पीपल इसके उदाहरण हैं।

कविता में धूल, पेड़, नदी और तालाब किसके प्रतीक हैं?

कविता में धूल स्त्री का, पेड़ नगरवासियों का, नदी स्त्री का, और तालाब सेवक का प्रतीक है। ये सभी बादल रूपी मेहमान के आगमन पर प्रतिक्रिया करते हैं।

यह NCERT समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

यह समाधान छात्रों को कविता की गहरी समझ विकसित करने, कठिन पंक्तियों के भावार्थ को समझने, अलंकारों की पहचान करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करता है।

कविता में 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात मेघों के लिए क्यों कही गई है?

यह बात मेघों में सजीवता लाने के लिए कही गई है। जिस प्रकार दामाद ससुराल आने पर सज-संवर कर आते हैं, उसी प्रकार मेघों के भी बहुत दिनों बाद आने पर उनके सजने-संवरने की बात कही गई है।

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