कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया - शमशेर बहादुर सिंह

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यह पृष्ठ कक्षा 9 के हिंदी कृतिका भाग 2 के पाठ 5, 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ प्रसिद्ध कवि शमशेर बहादुर सिंह के जीवन के शुरुआती संघर्षों, उनकी साहित्यिक यात्रा और हिंदी भाषा में उनके योगदान पर प्रकाश डालता है। समाधानों में लेखक की बेरोजगारी, अंग्रेजी में कविता लिखने के पश्चाताप, और इलाहाबाद में साहित्यिक वातावरण में उनके विकास जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसमें हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत और निराला जैसे साहित्यिक दिग्गजों से मिले सहयोग का भी वर्णन है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया - शमशेर बहादुर सिंह

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी कृतिका भाग 2 के पाठ 5 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' के ये NCERT समाधान लेखक शमशेर बहादुर सिंह के जीवन के प्रारंभिक संघर्षों और हिंदी साहित्य में उनके प्रवेश की यात्रा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। समाधानों में लेखक की आर्थिक तंगी, व्यक्तिगत क्षति और साहित्यिक मार्गदर्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। यह पाठ छात्रों को लेखक के जीवन के उतार-चढ़ावों और हिंदी भाषा के प्रति उनके समर्पण को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • लेखक के जीवन में आई कठिनाइयों को समझना।
  • लेखक के हिंदी लेखन की ओर प्रेरित होने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • हरिवंश राय बच्चन और अन्य साहित्यकारों के योगदान को पहचानना।
  • लेखक की व्यक्तिगत और साहित्यिक यात्रा के चरणों को क्रमबद्ध करना।
  • साहित्यिक भाषा और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखक का प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
  • बेरोजगारी की समस्या
  • अंग्रेजी से हिंदी में लेखन का परिवर्तन
  • हरिवंश राय बच्चन का योगदान
  • इलाहाबाद का साहित्यिक वातावरण
  • सुमित्रानंदन पंत और निराला का प्रभाव
  • व्यक्तिगत क्षति और उसका प्रभाव
  • आर्थिक कठिनाइयाँ
  • साहित्यिक यात्रा का क्रम
  • शमशेर बहादुर सिंह का परिचय

Important topics

  • लेखक के हिंदी लेखन में आने के कारण
  • हरिवंश राय बच्चन और अन्य साहित्यकारों का सहयोग
  • लेखक द्वारा झेली गई कठिनाइयाँ
  • लेखक के जीवन का साहित्यिक प्रभाव
  • लेखक की व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

वह ऐसी कौन सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया?
Solution:

लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य करने वाली बात संभवतः उनकी बेरोजगारी से जुड़ी कोई घटना रही होगी। यह संभव है कि बेरोजगारी के कारण उन्हें किसी ने कुछ अप्रिय या कटु बातें कही हों, जिन्हें वे सहन नहीं कर पाए। अथवा, घर पर किसी बात को लेकर परिवार के सदस्यों के साथ कोई बड़ी बहस हुई हो, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने बिना सोचे-समझे घर छोड़ दिया और दिल्ली चले आए।

प्रश्न 2

लेखक को अंग्रेज़ी में कविता लिखने का अफ़सोस क्यों रहा होगा?
Solution:

लेखक को अंग्रेज़ी में कविता लिखने पर अफ़सोस इसलिए रहा होगा क्योंकि अंग्रेज़ी भारत की आम बोलचाल की भाषा नहीं थी, इसलिए उनके अपने देशवासी, यानी भारतीय पाठक, उनकी कविताओं को समझ नहीं पाते होंगे। जब वे इलाहाबाद आए और वहाँ बच्चन, निराला और पंत जैसे महान हिंदी लेखकों और कवियों के साहित्यिक माहौल और सानिध्य में आए, तो उन्होंने हिंदी में रचनाएँ करना शुरू कर दिया। इस प्रकार, अंग्रेज़ी में लिखने का उनका प्रयास व्यर्थ गया, जिसका उन्हें बाद में अफ़सोस हुआ होगा।

प्रश्न 3

अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए नोट में क्या लिखा होगा?
Solution:

दिल्ली के उकील आर्ट स्कूल में हरिवंश राय बच्चन लेखक के लिए एक नोट छोड़कर गए थे। कल्पना के आधार पर, उस नोट में संभवतः यह लिखा होगा: "प्रिय लेखक, तुम इलाहाबाद आ जाओ। तुम्हारा भविष्य लेखन में ही निहित है। जीवन में संघर्ष करने वाले ही आगे बढ़ते हैं, इसलिए परिश्रम करो, सफलता अवश्य मिलेगी। मैं तुम्हारी सहायता के लिए सदैव तत्पर हूँ।"

प्रश्न 4

लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है?
Solution:

लेखक ने हरिवंश राय बच्चन के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को उजागर किया है:

  1. संघर्षशील और परोपकारी स्वभाव: बच्चन जी का स्वभाव संघर्षशील था और वे दूसरों की मदद करने वाले थे। उनमें फौलादी संकल्प था।
  2. कला-प्रतिभा के पारखी: वे समय के पाबंद थे और कला की परख रखते थे। लेखक द्वारा लिखी गई केवल एक सॉनेट (14 पंक्तियों की कविता) पढ़कर ही उन्होंने लेखक की कलात्मक प्रतिभा को पहचान लिया था।
  3. कोमल और सहृदय: बच्चन जी अत्यंत कोमल हृदय के थे और अपनी कही बातों का निर्वाह करते थे।
  4. सहयोगी और अभिभावक: वे केवल बातों से ही नहीं, बल्कि कर्मों से भी सहायक थे। उन्होंने न केवल लेखक को इलाहाबाद आने के लिए प्रेरित किया, बल्कि उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी ली और एक जिम्मेदार अभिभावक की भूमिका निभाई।

प्रश्न 5

बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?
Solution:

लेखक को हरिवंश राय बच्चन के अलावा अन्य कई लोगों से भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ, जिसका विवरण इस प्रकार है:

  • तेजबहादुर सिंह (बड़े भाई): आर्थिक तंगी के मुश्किल समय में उन्होंने लेखक को कुछ पैसे भेजकर आर्थिक सहायता प्रदान की।
  • बच्चन के पिता: जब लेखक इलाहाबाद में बस गए, तो उन्हें एक स्थानीय अभिभावक की आवश्यकता महसूस हुई। इस पर हरिवंश राय बच्चन के पिता ने उनका अभिभावक बनना स्वीकार किया और सहारा दिया।
  • सुमित्रानंदन पंत और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': इलाहाबाद में लेखक को हिंदी के इन प्रसिद्ध कवियों का सानिध्य मिला। उन्होंने लेखक को हिंदी लेखन में भरपूर सहयोग दिया। विशेष रूप से, सुमित्रानंदन पंत ने लेखक को इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम दिलवाया और उनकी कविताओं में कुछ आवश्यक संशोधन भी किए।
  • ससुराल पक्ष: जब लेखक विधुर थे और आजीविका कमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उनके ससुराल वालों ने उन्हें अपनी दुकान पर कम्पाउंडरी (दवा बनाने की प्रक्रिया) का प्रशिक्षण दिया, जिससे उन्हें कुछ आर्थिक संबल मिला।
  • हरिवंश राय बच्चन: यद्यपि प्रश्न में बच्चन के अतिरिक्त पूछा गया है, फिर भी यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि बच्चन जी से उन्हें सर्वाधिक सहयोग मिला। उन्होंने लेखक को इलाहाबाद आने, एम.ए. करने के लिए प्रेरित किया, पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया और हर कदम पर मार्गदर्शन किया।

प्रश्न 6

लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिये।
Solution:

लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने की प्रक्रिया का क्रमानुसार वर्णन इस प्रकार है:

  • प्रारंभिक प्रेरणा: मित्रों के सहयोग, इलाहाबाद के साहित्यिक माहौल और हिंदी कविता के वातावरण से प्रोत्साहन पाकर लेखक ने हिंदी में रचनाएँ करना शुरू किया।
  • प्रकाशन की शुरुआत (1933): सन् 1933 में, लेखक की कुछ कविताएँ 'सरस्वती' और 'चाँद' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं।
  • बच्चन के सुझाव पर प्रयास (1937): सन् 1937 में, बच्चन जी के कहने पर लेखक ने 14 पंक्तियों की कविता लिखने का प्रयास किया, जो संभवतः सॉनेट का रूप था।
  • 'निशा निमंत्रण के कवि के प्रति' कविता: लेखक ने 'निशा निमंत्रण के कवि के प्रति' शीर्षक से एक कविता लिखी, जिसमें सुमित्रानंदन पंत ने कुछ संशोधन भी किए, लेकिन यह कविता अप्रकाशित ही रही।
  • 'रूपाभ' और 'हंस' में कार्य: इसके बाद, लेखक ने 'रूपाभ' के कार्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर बनारस से प्रकाशित होने वाले 'हंस' पत्रिका के कार्यालय में काम संभाला, जिससे उनका साहित्यिक जुड़ाव और गहरा हुआ।

प्रश्न 7

लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।
Solution:

लेखक शमशेर बहादुर सिंह ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, जिनका उल्लेख पाठ में मिलता है:

  • बेरोजगारी और उपहास: अपने शुरुआती दिनों में, लेखक को बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्हें लोगों के व्यंग्य बाणों को झेलना पड़ता था, जो मानसिक पीड़ा का कारण बनता था।
  • आर्थिक समस्याएँ: लेखक को अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में गंभीर आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ा। गुजारा चलाने के लिए उन्हें साइन बोर्ड पेंट करने जैसे काम भी करने पड़े।
  • पत्नी का वियोग: लेखक की पत्नी का टी.बी. की बीमारी के कारण देहांत हो गया था। इस कारण वे युवावस्था में ही विधुर हो गए और उन्हें पत्नी के बिछड़ने के गहरे दुःख और पीड़ा को झेलना पड़ा।
  • इलाहाबाद में आर्थिक संघर्ष: जब लेखक बच्चन जी के आग्रह पर इलाहाबाद आए, तब भी वे आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे। बच्चन जी ने उनकी पढ़ाई का सारा खर्च उठाकर इस समस्या से उन्हें उबारा।

इस प्रकार, लेखक के जीवन के शुरुआती दिन अत्यधिक आर्थिक कठिनाइयों और व्यक्तिगत दुखों से भरे रहे।

Common mistakes

  • लेखक के जीवन के संघर्षों को सतही तौर पर समझना।
  • विभिन्न साहित्यकारों के योगदान को अलग-अलग न कर पाना।
  • लेखक के अंग्रेजी से हिंदी में आने के कारणों को ठीक से न समझना।
  • पाठ में वर्णित घटनाओं के क्रम को याद रखने में कठिनाई।

Revision tips

  • लेखक के जीवन के प्रमुख संघर्षों को सूचीबद्ध करें।
  • उन साहित्यकारों के नाम और उनके सहयोग को याद करें जिन्होंने लेखक की मदद की।
  • लेखक के हिंदी में आने के कारणों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • पाठ में वर्णित घटनाओं के कालक्रम को समझने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. लेखक को किस भाषा में कविता लिखने का अफ़सोस था?

Q2. लेखक को दिल्ली जाने के लिए किस बात ने बाध्य किया होगा?

Q3. हरिवंश राय बच्चन ने लेखक के लिए उकील आर्ट स्कूल में क्या छोड़ा था?

Q4. सुमित्रानंदन पंत ने लेखक की किस प्रकार सहायता की?

Q5. लेखक के जीवन में किस व्यक्तिगत क्षति का उल्लेख है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 9 के हिंदी विषय (कृतिका भाग 2) के लिए है, विशेष रूप से पाठ 5 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' पर केंद्रित है।

इस पाठ में लेखक के जीवन के किन प्रमुख संघर्षों का वर्णन है?

पाठ में लेखक के जीवन के बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, पत्नी की मृत्यु के कारण विधुर होना और साहित्यिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के संघर्षों का वर्णन है।

लेखक को हिंदी में लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

लेखक को इलाहाबाद के साहित्यिक वातावरण, बच्चन, निराला और पंत जैसे कवियों के सानिध्य और उनके प्रोत्साहन से हिंदी में लिखने की प्रेरणा मिली।

हरिवंश राय बच्चन ने लेखक की किस प्रकार सहायता की?

बच्चन जी ने लेखक को इलाहाबाद बुलाया, एम.ए. करने के लिए प्रेरित किया, उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया और हर कदम पर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।

ये समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर विस्तार से समझाते हैं और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

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