कक्षा 8 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 15 सूर के पद

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 8 हिंदी के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से पाठ 15 'सूर के पद' पर केंद्रित है। इसमें सूरदास द्वारा रचित पदों से संबंधित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर शामिल हैं, जो बाल कृष्ण के बचपन की लीलाओं, उनकी शरारतों और माता यशोदा के साथ उनके संवादों पर प्रकाश डालते हैं। समाधानों में बाल कृष्ण के दूध पीने के बहाने, माखन चुराने की उनकी आदत और ग्वालन के साथ उनके वार्तालाप जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया है। यह सामग्री छात्रों को पदों की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. सूर के पद - सूरदास

Chapter summary

कक्षा 8 हिंदी के पाठ 15 'सूर के पद' के लिए ये NCERT समाधान छात्रों को सूरदास के पदों की व्याख्या समझने में मदद करते हैं। समाधान बाल कृष्ण के दूध पीने के प्रति उनकी आनाकानी, माखन चुराने की उनकी शरारतों और यशोदा मैया के साथ उनके संवादों पर केंद्रित हैं। इसमें भाषा की बात के अंतर्गत पर्यायवाची और विलोम शब्दों का भी समावेश है, जो छात्रों की शब्दावली को समृद्ध करेगा।

Learning outcomes

  • बाल कृष्ण के दूध पीने के प्रति उनके विचारों को समझना।
  • श्रीकृष्ण की माखन चुराने की प्रवृत्ति के कारणों का विश्लेषण करना।
  • ग्वालन के मन के भावों को पंक्तियों के माध्यम से पहचानना।
  • दोनों पदों में से किसी एक पद को व्यक्तिगत पसंद के आधार पर चुनना और कारण बताना।
  • श्रीकृष्ण की अनुमानित आयु का आकलन करना।
  • दिए गए पाठ से पर्यायवाची और विलोम शब्दों को पहचानना और उनका प्रयोग करना।

Topics covered

Paper topics

  • बाल कृष्ण की बाल लीलाएं
  • यशोदा और कृष्ण का संवाद
  • दूध पीने के प्रति बाल कृष्ण की आनाकानी
  • माखन चुराने की प्रवृत्ति
  • ग्वालन के भाव
  • पदों की व्याख्या
  • सूरदास के पद
  • भाषा की बात
  • पर्यायवाची शब्द
  • विलोम शब्द
  • कक्षा 8 हिंदी व्याकरण
  • NCERT समाधान

Important topics

  • बाल कृष्ण की बाल लीलाएं
  • माखन चुराने की प्रवृत्ति और उसके कारण
  • पदों का भावार्थ
  • पर्यायवाची और विलोम शब्द
  • यशोदा और कृष्ण का संवाद

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?
Solution: माता यशोदा ने बाल श्रीकृष्ण को यह कहकर दूध पीने के लिए राजी किया कि यदि वे नित्य कच्चा दूध पिएंगे तो उनकी चोटी बलराम भैया की चोटी की तरह ही मोटी, लम्बी और बलशाली हो जाएगी। श्रीकृष्ण अपनी चोटी को बलराम भैया की तरह लम्बा और मोटा बनाने के लोभ में दूध पीने के लिए तैयार हो गए थे।

प्रश्न 2

श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या-क्या सोच रहे थे?
Solution: श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में यह सोच रहे थे कि उनकी चोटी अभी तक छोटी ही रह गई है। वे सोचते थे कि यदि वे दूध पीते रहे तो उनकी चोटी भी बलराम भैया की चोटी की तरह लम्बी और मोटी हो जाएगी, और फिर वह नागिन की तरह लहराएगी।

प्रश्न 3

दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौन-से खाद्य पदार्थ को अधिक पसंद करते थे?
Solution: दूध की तुलना में श्रीकृष्ण को माखन-रोटी खाना अधिक पसंद था।

प्रश्न 4

'तैं ही पूत अनोखी जायौ' - पंक्तियों में ग्वालन के मन के कौन-से भाव मुखरित हो रहे हैं?
Solution: 'तैं ही पूत अनोखी जायौ' - इन पंक्तियों में ग्वालन के मन में यशोदा के प्रति ईर्ष्या का भाव प्रकट हो रहा है, क्योंकि यशोदा ने कृष्ण जैसा अनोखा पुत्र पाया है। साथ ही, कृष्ण द्वारा उनका माखन चुराने पर ग्वालन के मन में क्रोध का भाव भी मुखरित हो रहा है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यशोदा को उलाहना भी दे रही है।

प्रश्न 5

मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?
Solution: श्रीकृष्ण के छोटे हाथ होने के कारण उन्हें ऊँचे टंगे छींकों से माखन निकालने में थोड़ी कठिनाई होती थी, जिस कारण माखन थोड़ा बिखर जाता था। इसके अतिरिक्त, वे चुराया हुआ आधा माखन स्वयं खाते थे और आधा अपने सखाओं को खिलाते थे, जिसके कारण भी माखन जगह-जगह गिर जाता था।

प्रश्न 6

दोनों पदों में से आपको कौन-सा पद अधिक अच्छा लगा और क्यों?
Solution: दोनों पदों में से प्रथम पद अधिक अच्छा लगता है। इस पद में बाल कृष्ण का स्वभाविक रूप से दूध पीने में आनाकानी करना और माता यशोदा द्वारा उन्हें चोटी लम्बी होने का लालच देना बहुत ही मनमोहक है। जब माता के कहने पर श्रीकृष्ण दूध पीते हैं, लेकिन फिर भी उनकी चोटी नहीं बढ़ती, तो उनका माता से अनुनय-विनय करना, अपनी नाराज़गी व्यक्त करना और बलराम भैया की तरह चोटी पाने की हठ करना, उनके बालपन को दर्शाता है और हृदय को आनंदित करता है।

प्रश्न 7

दूसरे पद को पढ़कर बताइए कि आपके अनुसार उस समय श्रीकृष्ण की उम्र क्या रही होगी?
Solution: दूसरे पद को पढ़कर ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि उस समय श्रीकृष्ण की उम्र लगभग चार से सात साल के बीच रही होगी। इस उम्र में बच्चे अक्सर शरारतें करते हैं और उनके छोटे हाथों से सावधानी बरतने पर भी चीजें बिखर जाती हैं, जैसा कि माखन बिखेरने के प्रसंग में वर्णित है।

भाषा की बात - प्रश्न 1

श्रीकृष्ण गोपियों का माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुराने वाला भी कहा गया है। इसके लिए एक शब्द दीजिए।
Solution: माखन चुराने वाले के लिए एक शब्द है: माखनचोर

भाषा की बात - प्रश्न 2

श्रीकृष्ण के लिए पाँच पर्यायवाची शब्द लिखिए।
Solution: श्रीकृष्ण के पाँच पर्यायवाची शब्द इस प्रकार हैं:
  1. गोविन्द
  2. रणछोड़
  3. वासुदेव
  4. मुरलीधर
  5. नन्दलाल

भाषा की बात - प्रश्न 3

कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थवाले होते हैं, उन्हें पर्यायवाची कहते हैं। और कुछ विपरीत अर्थ वाले भी। समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम, जैसे - चंद्रमा-शशि, इंदु, राका पर्यायवाची | मधुकर-भ्रमर, भौंरा, मधुप | सूर्य-रवि, भानु, दिनकर | दिन-रात विपरीतार्थक | श्वेत-श्याम | शीत-उष्ण | पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।
Solution: पाठों से खोजे गए पर्यायवाची और विलोम शब्द इस प्रकार हैं:

पर्यायवाची शब्द:

  • अनोखा - अद्भुत, विचित्र, अनूठा
  • मैया - जननी, माँ, माता
  • दूध - दुग्ध, पय, गोरस
  • सखा - मित्र, मीत, दोस्त
  • बलराम - दाऊ, हलधर
  • ढोटा (पुत्र) - सुत, पुत्र, बेटा

विपरीतार्थक शब्द:

  • लम्बी - छोटी
  • श्याम (काला) - श्वेत (सफेद)
  • संग्रह (इकट्ठा करना) - विग्रह (अलग करना)
  • मोटी - पतली
  • रात - दिन
  • प्रकट (दिखाई देना) - ओझल (गायब होना)

Common mistakes

  • पदों के भावार्थ को समझने में कठिनाई।
  • श्रीकृष्ण के बालसुलभ हठ और वात्सल्य भाव के बीच अंतर न कर पाना।
  • भाषा की बात के प्रश्नों में पर्यायवाची और विलोम शब्दों को गलत मिलाना।
  • व्यक्तिगत पसंद वाले प्रश्न का उत्तर देते समय केवल एक पक्षीय विचार रखना।

Revision tips

  • प्रत्येक पद को ध्यान से पढ़ें और उसके मुख्य भाव को समझने का प्रयास करें।
  • बाल कृष्ण की शरारतों और यशोदा मैया के वात्सल्य को दर्शाने वाले अंशों को रेखांकित करें।
  • भाषा की बात खंड में दिए गए पर्यायवाची और विलोम शब्दों का अभ्यास करें।
  • अपने व्यक्तिगत विचार वाले प्रश्न का उत्तर देते समय दोनों पदों के गुणों पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. श्रीकृष्ण को दूध पीने के लिए किस बात का लालच दिया गया?

Q2. श्रीकृष्ण को दूध की तुलना में कौन-सा खाद्य पदार्थ अधिक प्रिय था?

Q3. 'तैं ही पूत अनोखी जायौ' - इस पंक्ति में ग्वालन के मन में कौन-से भाव हैं?

Q4. श्रीकृष्ण माखन चुराते समय थोड़ा मक्खन बिखरा क्यों देते थे?

Q5. पाठ के अनुसार, श्रीकृष्ण के लिए 'माखन चुराने वाला' के लिए एक शब्द क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 8 हिंदी के पाठ 15 'सूर के पद' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस पाठ में बाल कृष्ण की बाल लीलाओं, जैसे दूध पीने के बहाने, माखन चुराने की उनकी शरारतों और यशोदा मैया के साथ उनके संवादों को समझाया गया है। साथ ही, भाषा के अभ्यास के लिए पर्यायवाची और विलोम शब्द भी दिए गए हैं।

श्रीकृष्ण दूध क्यों नहीं पीना चाहते थे?

श्रीकृष्ण दूध इसलिए नहीं पीना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि दूध पीने से उनकी चोटी बलराम भैया की तरह लम्बी और मोटी नहीं हो रही है। वे माखन-रोटी अधिक पसंद करते थे।

ग्वालन के मन में यशोदा के प्रति क्या भाव थे?

ग्वालन के मन में यशोदा के प्रति ईर्ष्या का भाव था क्योंकि कृष्ण जैसे अनोखे पुत्र को पाकर भी वह उनके माखन चुराने से परेशान थी। वह यशोदा को उलाहना भी दे रही थी।

इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?

ये समाधान पाठ के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है।

भाषा की बात खंड में क्या शामिल है?

भाषा की बात खंड में पाठ से संबंधित व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं, जैसे कि 'माखनचोर' जैसे शब्दों का निर्माण और पर्यायवाची व विलोम शब्दों की सूची।

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