CBSE Class 8 Hindi Durva Chapter 5: Natak mein Natak NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 5, 'Natak mein Natak' (A Play within a Play) from the CBSE Class 8 Hindi Durva textbook. The solutions cover questions related to the story's plot, character actions, and the importance of rehearsals in drama. Students will find explanations for why characters behave in certain ways, the significance of stage arrangements, and the role of quick thinking in managing unexpected situations during a performance. These solutions aim to enhance comprehension of the narrative and the underlying themes of theatrical production, helping students prepare effectively for their exams by clarifying complex aspects of the chapter.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
SubjectHindi Durva
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 5

Chapter summary

Chapter 5, 'Natak mein Natak', focuses on a story about children organizing a play. The NCERT Solutions provided here address questions about the children's efforts in setting up the stage, the reasons behind a character's quick thinking, and the necessity of rehearsals for actors. It also delves into identifying drama-related vocabulary and understanding character motivations and audience reactions during a performance. These solutions offer clear explanations to help students grasp the essence of the story and its theatrical context.

Learning outcomes

  • Understand the importance of stage setup and preparation for a play.
  • Analyze character motivations and reactions in dramatic situations.
  • Identify and understand drama-related vocabulary.
  • Appreciate the role of quick thinking and improvisation in performances.
  • Explain the necessity and benefits of rehearsals for actors.

Topics covered

Paper topics

  • Understanding the story 'Natak mein Natak'
  • Stage arrangement and preparation
  • Importance of rehearsals
  • Character analysis (Rakesh and other actors)
  • Audience reactions and perception
  • Quick thinking and improvisation in drama
  • Drama-related vocabulary
  • Analyzing character emotions (anger, sadness, surprise)

Important topics

  • The role of quick thinking in managing performance crises
  • The necessity of rehearsals for actors
  • Understanding audience perception versus reality in a play
  • Character motivations and emotional responses
  • Identifying and using drama-specific vocabulary

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Questions and Solutions

प्रश्न 1 (क)

पाठ के अनुसार, बच्चों ने मंच की व्यवस्था किस प्रकार की थी?
Solution: मोहल्ले के बच्चों ने मिलकर एक फालतु पड़े छोटे से सार्वजनिक मैदान को चुना। उन्होंने उस मैदान में मेहनत करके घास और फूल-पौधे लगाए और वहीं पर नाटक के मंच की व्यवस्था भी की। यह उनकी सामूहिक प्रयास और रचनात्मकता को दर्शाता है।

प्रश्न 1 (ख)

पर्दे की आड़ में खड़े अन्य साथी मन-ही-मन राकेश की तुरतबुद्धि की प्रशंसा क्यों कर रहे थे?
Solution: पर्दे के पीछे खड़े अन्य साथी राकेश की तुरतबुद्धि की इसलिए प्रशंसा कर रहे थे क्योंकि जब नाटक में अप्रत्याशित रूप से कुछ गड़बड़ हो गई थी, तब राकेश ने तुरंत मंच पर आकर स्थिति को संभाला। उसने इस तरह से अभिनय किया कि दर्शकों को लगा कि यह नाटक का ही एक हिस्सा है, जिससे पूरा नाटक बच गया और किसी को भी असली समस्या का पता नहीं चला।

प्रश्न 1 (ग)

नाटक के लिए रिहर्सल (अभ्यास) की जरूरत क्यों होती है?
Solution: नाटक के लिए रिहर्सल बहुत जरूरी होती है क्योंकि नए कलाकार मंच पर आकर अक्सर डर जाते हैं और घबरा जाते हैं। अच्छी तैयारी के बिना, उन्हें यह समझ नहीं आता कि कब, क्या, कहाँ और कैसे बोलना या अभिनय करना है। रिहर्सल के दौरान, कलाकार मंच पर अपनी भूमिका को समझते हैं, संवादों का अभ्यास करते हैं, और निर्देशक के निर्देशों को सीखते हैं, जिससे वे प्रदर्शन के दौरान आत्मविश्वास से अभिनय कर सकें।

प्रश्न 2 (क)

कहानी को पढ़कर, नाटक से जुड़े ऐसे अन्य शब्दों की सूची बनाइए जो व्यक्तियों या वस्तुओं के नाम, उनके काम और अभिनय से संबंधित हों। तालिका को पूरा करें।
Solution: कहानी में नाटक से संबंधित कई शब्द आए हैं। यहाँ एक तालिका दी गई है जिसमें व्यक्तियों या वस्तुओं के नाम, उनके काम और अभिनय से संबंधित शब्दों को सूचीबद्ध किया गया है:

व्यक्तियों या वस्तुओं के नाम | काम | अभिनय से संबंधित शब्द

--------------------------|-------|-----------------------

कलाकार | अभिनय करना | अभिनय

मंच | नाटक प्रस्तुत करना | मंचन

चित्रकार | चित्र बनाना | चित्रकारी

संगीतकार | संगीत देना | संगीत रचना

राकेश | निर्देशन/अभिनय | निर्देशक, अभिनेता

कुर्सी | बैठना | (वस्तु)

डायरेक्टर | निर्देशन | निर्देशन

मोहल्ले वाले | दर्शक | दर्शक

दर्शक | नाटक देखना | अवलोकन

प्रश्न 5 (क)

"राकेश को गुस्सा भी आ रहा था और रोना भी।" तुम्हारे विचार से राकेश को गुस्सा और रोना क्यों आ रहा होगा?
Solution: राकेश को गुस्सा इसलिए आ रहा था क्योंकि वह जिस नाटक की तैयारी के लिए इतनी मेहनत कर रहा था, उसके बाकी साथी कलाकार ठीक से अभिनय नहीं कर रहे थे और नाटक को बिगाड़ रहे थे। उसे रोना इसलिए आ रहा था क्योंकि उसकी सारी मेहनत और योजनाएं बेकार होती हुई दिख रही थीं, और वह अपनी टीम के प्रदर्शन से निराश था।

प्रश्न 5 (ख)

"राकेश मंच पर पहुँच गया। सब चुप हो गए, सकपका गए।" तुम्हारे विचार से राकेश जब मंच पर पहुँचा, बाकी सब कलाकार क्यों चुप हो गए होंगे?
Solution: बाकी सब कलाकार इसलिए चुप हो गए और सकपका गए क्योंकि राकेश नाटक का हिस्सा नहीं था और न ही उसे मंच पर उस समय मौजूद होना था। उसका अचानक मंच पर आ जाना उनके लिए एक अनपेक्षित घटना थी, जिससे वे समझ नहीं पाए कि क्या हो रहा है और उन्हें आगे क्या करना चाहिए। उन्हें डर था कि कहीं राकेश की वजह से नाटक और न बिगड़ जाए।

प्रश्न 5 (ग)

"दर्शक सब शांत थे, भौंचक्के थे।" दर्शक भौंचक्के क्यों हो गए थे?
Solution: दर्शक भौंचक्के इसलिए हो गए थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि नाटक खराब हो रहा है और कलाकार घबरा गए हैं। लेकिन जब राकेश मंच पर आया और उसने स्थिति को संभाला, तो दर्शकों को यह समझ नहीं आया कि यह असली गड़बड़ी है या नाटक का ही एक हिस्सा। राकेश के चतुर अभिनय के कारण, वे भ्रमित रह गए और यह सोचकर शांत और भौंचक्के रह गए कि शायद यह 'नाटक में नाटक' ही चल रहा है।

प्रश्न 5 (घ)

राकेश ने ऐसा क्यों कहा होगा कि "मैंने कहा था न कि रिहर्सल में भी यह मानकर चलो कि दर्शक सामने ही बैठे हैं।"?
Solution: राकेश ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि वह जानता था कि रिहर्सल के दौरान भी पूरी गंभीरता और एकाग्रता से अभिनय करना चाहिए, जैसे कि असली दर्शक सामने बैठे हों। उसका यह कहने का मतलब था कि अगर वे रिहर्सल में ही दर्शकों के सामने होने का अहसास करके अभ्यास करते, तो शायद मंच पर अचानक आई मुश्किल स्थिति में वे इतने घबराते नहीं और उन्हें पता होता कि ऐसी स्थिति में क्या करना है। यह बात वह अपने साथियों को उनकी अधूरी तैयारी का अहसास दिलाने के लिए कह रहा था।

Common mistakes

  • Confusing the fictional play with the actual events happening on stage.
  • Underestimating the importance of rehearsals for new actors.
  • Misinterpreting character emotions like anger and sadness.
  • Not recognizing the role of improvisation in saving a performance.

Revision tips

  • Reread the story 'Natak mein Natak' to better understand the context of each question.
  • Focus on the reasons behind characters' actions and emotions as explained in the solutions.
  • Pay attention to the vocabulary related to drama and theatre mentioned in the chapter.
  • Discuss the importance of rehearsals and quick thinking with classmates.
  • Try to visualize the scenes described in the story and the solutions.

Practice MCQs

Q1. बच्चों ने मंच की व्यवस्था कैसे की?

Q2. राकेश की तुरतबुद्धि की प्रशंसा क्यों हुई?

Q3. नाटक के लिए रिहर्सल क्यों आवश्यक है?

Q4. राकेश को गुस्सा और रोना क्यों आ रहा था?

Q5. दर्शक भौंचक्के क्यों रह गए थे?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 8 के हिंदी दुर्वा पाठ्यपुस्तक के अध्याय 5, 'नाटक में नाटक' के लिए हैं।

अध्याय 5 'नाटक में नाटक' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

यह अध्याय बच्चों द्वारा नाटक की तैयारी, मंच व्यवस्था, अभिनेताओं के डर, रिहर्सल के महत्व और प्रदर्शन के दौरान अचानक आने वाली समस्याओं को संभालने के बारे में है।

समाधानों में प्रश्नों के उत्तर कैसे दिए गए हैं?

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर कहानी के संदर्भ में विस्तृत और स्पष्ट रूप से दिया गया है, जिससे छात्रों को विषय को गहराई से समझने में मदद मिलती है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और अभ्यास प्रश्न प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राकेश की तुरतबुद्धि का क्या महत्व है?

राकेश की तुरतबुद्धि ने बिगड़े हुए नाटक को संभाला और दर्शकों को यह विश्वास दिलाया कि जो हो रहा है वह नाटक का ही हिस्सा है, जिससे प्रदर्शन सफल हुआ।

नाटक में रिहर्सल क्यों जरूरी है?

रिहर्सल अभिनेताओं को मंच पर आत्मविश्वास देती है, उन्हें अपने संवाद और क्रियाएं याद रखने में मदद करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि वे घबराएं नहीं।

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