कक्षा 7 वसंत: पाठ 7 'पापा खो गए' नाटक के NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के हिंदी वसंत पाठ 7, 'पापा खो गए' नाटक के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह नाटक एक खोई हुई बच्ची और उसे उसके घर पहुँचाने के प्रयासों के इर्द-गिर्द घूमता है। समाधानों में नाटक के पात्रों, जैसे कौआ, पेड़, खंभा, और लेटर बक्स की बुद्धिमत्ता और विशेषताओं पर चर्चा की गई है। इसमें पात्रों के बीच दोस्ती, लेटर बक्स को 'लाल ताऊ' क्यों कहा जाता है, और वे सभी मिलकर भी बच्ची को घर क्यों नहीं पहुँचा पा रहे थे, जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है। नाटक के शीर्षक की सार्थकता और बच्ची को खोजने के वैकल्पिक तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया है। भाषा की बात के अंतर्गत, मंचन के लिए रात के दृश्य के निर्देशों और विराम चिह्नों के सही प्रयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। ये समाधान छात्रों को नाटक की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectवसंत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. पापा खो गए नाटक (मराठी)

Chapter summary

कक्षा 7 के हिंदी वसंत पुस्तक के पाठ 7 'पापा खो गए' नाटक के लिए ये NCERT समाधान नाटक के मुख्य पात्रों, उनकी बातचीत और कहानी के विकास को समझने में मदद करते हैं। इसमें कौए की बुद्धिमत्ता, पेड़ और खंभे की दोस्ती, लेटर बक्स के 'लाल ताऊ' कहलाने का कारण, और बच्ची को घर पहुँचाने में आ रही कठिनाइयों का विश्लेषण शामिल है। समाधान नाटक के शीर्षक की सार्थकता और भाषा के व्यावहारिक उपयोग (विराम चिह्न, मंच निर्देश) पर भी केंद्रित हैं।

Learning outcomes

  • नाटक के पात्रों की बुद्धिमत्ता और भूमिका का विश्लेषण करना।
  • पात्रों के बीच विकसित हुई दोस्ती के कारणों को समझना।
  • नाटक के शीर्षक 'पापा खो गए' की सार्थकता का मूल्यांकन करना।
  • खोई हुई बच्ची को खोजने के विभिन्न तरीकों पर विचार करना।
  • नाटक में प्रयुक्त मंच निर्देशों और विराम चिह्नों के महत्व को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • नाटक के पात्रों का विश्लेषण
  • पात्रों के बीच संबंध (दोस्ती)
  • बुद्धिमत्ता और चतुराई
  • खोई हुई बच्ची की समस्या
  • घर पहुँचाने के प्रयास
  • नाटक का शीर्षक और उसका अर्थ
  • भाषा की बात: मंच निर्देश
  • भाषा की बात: विराम चिह्न

Important topics

  • नाटक के पात्रों की बुद्धिमत्ता और भूमिका
  • लेटर बक्स को 'लाल ताऊ' क्यों कहा जाता है?
  • बच्ची को घर पहुँचाने में कठिनाई के कारण
  • नाटक के शीर्षक 'पापा खो गए' की सार्थकता
  • मंचन के लिए रात के दृश्य का वर्णन

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों?
Solution:

नाटक में हमें सबसे बुद्धिमान पात्र कौआ लगा। इसका कारण यह है कि कौए ने ही उस खोई हुई बच्ची के पापा को खोजने में सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई। उसी की योजना के अनुसार लेटर बक्स संदेश लिख पाता है। कौआ अपनी उड़ने की क्षमता के कारण लगातार चारों ओर की जानकारी रखता है। उसकी सतर्कता और समझदारी के कारण ही बच्ची असामाजिक तत्वों के हाथों में पड़ने से बच जाती है।

प्रश्न 2

पेड़ और खंभे में दोस्ती कैसे हुई?
Solution:

पेड़ और खंभे के बीच दोस्ती एक विशेष घटना के कारण हुई। एक बार बहुत तेज आँधी आई, जिसके कारण खंभा पेड़ के ऊपर गिर गया। उस समय पेड़ ने खंभे को गिरने से संभाल लिया, हालाँकि इस प्रयास में पेड़ खुद भी थोड़ा घायल हो गया। इस घटना ने खंभे के मन से अपने मजबूत और ऊँचा होने का घमंड पूरी तरह खत्म कर दिया। इस आपसी सहयोग और अनुभव ने दोनों के बीच एक गहरी दोस्ती का निर्माण किया।

प्रश्न 3

लैटर बक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे?
Solution:

लैटर बक्स को सभी 'लाल ताऊ' कहकर पुकारते थे क्योंकि वह ऊपर से लेकर नीचे तक पूरे लाल रंग में रंगा हुआ था। इसके अतिरिक्त, वह बड़ों की तरह बहुत बुद्धिमानी और समझदारी से बातें करता था। वह अपने खाली समय में अपने अंदर आए हुए सभी पत्रों को पढ़ लेता था, जिससे उसे हर तरह की जानकारी हो जाती थी। इसी ज्ञान और समझदारी के कारण उसे 'लाल ताऊ' कहा जाता था।

प्रश्न 4

लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है?
Solution:

लाल ताऊ (लैटर बक्स) बाकी पात्रों से कई मायनों में भिन्न था। वह पढ़ा-लिखा, हँसमुख और मिलनसार स्वभाव का था। वह नीरस और उबाऊ माहौल को भी अपनी मजेदार बातों से खुशनुमा बना देता था। वह बोरियत दूर करने के लिए अपने अंदर आए पत्रों को पढ़ता था और समाज की समस्याओं के बारे में भी सोचता था। वह किसी से डरता नहीं था और उसके विचार बहुत सशक्त और अकाट्य थे। निर्जीव होते हुए भी उसके विचार और व्यक्तित्व उसे अन्य पात्रों से अलग बनाते थे।

प्रश्न 5

नाटक में बच्ची को बचानेवाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको मजेदार लगीं? लिखिए।
Solution:

नाटक में कौआ ही एकमात्र सजीव पात्र है। उसकी निम्नलिखित बातें मजेदार लगीं:

  1. जब वह कहता है, "वह दुष्ट कौन है? पहले उसे नज़र तो आने दीजिए।" यह उसकी बहादुरी और सतर्कता को दर्शाता है।
  2. जब वह कहता है, "ताऊ एक जगह बैठकर यह कैसे जान सकोगे? उसके लिए तो मेरी तरह रोज चारों दिशाओं में गश्त लगानी पड़ेगी, तब जान पाओगे यह सब।" यह उसकी सक्रियता और जानकारी रखने के तरीके को मजेदार ढंग से प्रस्तुत करता है।
ये बातें कौए के चतुर और सक्रिय स्वभाव को दर्शाती हैं, जो नाटक को रोचक बनाते हैं।

प्रश्न 6

क्या वजह थी कि सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे?
Solution:

सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे क्योंकि लड़की बहुत छोटी और नादान थी। वह अपने घर का सही पता नहीं बता पा रही थी। यहाँ तक कि वह अपने पापा का नाम भी ठीक से नहीं बता पा रही थी। इस वजह से, चाहे पात्र कितने भी बुद्धिमान या मददगार क्यों न हों, वे उसे उसके घर तक पहुँचाने में असमर्थ थे।

प्रश्न 7

मराठी से अनूदित इस नाटक का शीर्षक 'पापा खो गए' क्यों रखा गया होगा? अगर आपके मन में कोई दूसरा शीर्षक हो तो सुझाइए और साथ में कारण भी बताइए।
Solution:

इस नाटक का शीर्षक 'पापा खो गए' इसलिए रखा गया होगा क्योंकि नाटक की मुख्य पात्र एक छोटी बच्ची है जो अपने पापा को ढूंढ रही है। उसे अपने पापा का नाम और घर का पता भी ठीक से याद नहीं है। नाटक के सभी पात्र मिलकर उसी के पापा को खोजने की कोशिश करते हैं, इसलिए यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय बिंदु को दर्शाता है।

एक अन्य संभावित शीर्षक 'लापता बच्ची' हो सकता है। इसका कारण यह है कि नाटक का पूरा कथानक एक ऐसी बच्ची के इर्द-गिर्द घूमता है जो खो गई है और जिसे उसके घर पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह शीर्षक भी कहानी के मुख्य विषय को स्पष्ट रूप से बताता है।

प्रश्न 8

क्या आप बच्ची के पापा को खोजने का नाटक से अलग कोई और तरीका बता सकते हैं?
Solution:

हाँ, बच्ची के पापा को खोजने के लिए नाटक में बताए गए तरीकों के अलावा कुछ और तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। हम पुलिस की मदद ले सकते हैं, जो गुमशुदा लोगों को खोजने में विशेषज्ञ होती है। इसके अलावा, समाचार-पत्रों में विज्ञापन देकर, पोस्टर छपवाकर, या टेलीविजन और अन्य मीडिया के माध्यम से बच्ची के खो जाने की सूचना प्रसारित करके भी उसके माता-पिता या संबंधित लोगों तक पहुँचा जा सकता है।

भाषा की बात 1

आपने देखा होगा कि नाटक के बीच-बीच में कुछ निर्देश दिए गए हैं। ऐसे निर्देशों से नाटक के दृश्य स्पष्ट होते हैं, जिन्हें नाटक खेलते हुए मंच पर दिखाया जाता है, जैसे - 'सड़क / रात का समय...दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज।' यदि आपको रात का दृश्य मंच पर दिखाना हो तो क्या-क्या करेंगे, सोचकर लिखिए।
Solution:

रात के दृश्य को मंच पर दिखाने के लिए हम निम्नलिखित चीजें कर सकते हैं:

  • प्रकाश व्यवस्था: मंच पर घुप्प अँधेरा छा देंगे, केवल चाँद और तारों की हल्की रोशनी का आभास कराएंगे।
  • ध्वनि प्रभाव: दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाजें, किसी बिल्ली के रोने की आवाज, या हवा के चलने की 'साँय-साँय' की आवाजें सुनाई देंगी।
  • अन्य आवाजें: नेपथ्य (पर्दे के पीछे से) से चौकीदार की "जागते रहो" की आवाज भी सुनाई जा सकती है।
इन सभी तत्वों के माध्यम से रात के सन्नाटे और माहौल को मंच पर जीवंत किया जा सकता है।

भाषा की बात 2

पाठ को पढ़ते हुए आपका ध्यान कई तरह के विराम चिहन की ओर गया होगा। अगले पृष्ठ पर दिए गए अंश से विराम चिह्नों को हटा दिया गया है। ध्यानपूर्वक पढिए तथा उपयुक्त चिहन लगाइए - मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी अरे बाप रे वो बिजली थी या आफ़त याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड्डा कितना गहरा पड़ गया था खंभे महाराज अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है, अंग थरथर काँपने लगते हैं
Solution:

विराम चिह्नों के साथ सही किया गया अंश इस प्रकार है:

मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। अरे, बाप रे! वो बिजली थी या आफ़त! याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड्डा कितना गहरा पड़ गया था, खंभे महाराज! अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है। अंग थरथर काँपने लगते हैं।

यहाँ पूर्ण विराम (।), विस्मयादिबोधक चिह्न (!), अल्पविराम (,), और प्रश्नवाचक चिह्न (?) जैसे विराम चिह्नों का प्रयोग किया गया है ताकि वाक्य का अर्थ स्पष्ट हो सके और पढ़ने में प्रवाह बना रहे।

Common mistakes

  • पात्रों की बुद्धिमत्ता का सही आकलन न कर पाना।
  • नाटक के शीर्षक के पीछे के गहरे अर्थ को न समझ पाना।
  • विराम चिह्नों का गलत प्रयोग करना, जिससे अर्थ बदल जाए।
  • मंच के लिए आवश्यक दृश्यों और ध्वनियों की कल्पना करने में कठिनाई।

Revision tips

  • प्रत्येक पात्र की विशेषताओं और नाटक में उनकी भूमिका को सूचीबद्ध करें।
  • नाटक के शीर्षक 'पापा खो गए' के औचित्य पर विचार करें और वैकल्पिक शीर्षक सोचें।
  • विराम चिह्नों के सही प्रयोग का अभ्यास करें, विशेषकर संवादों में।
  • रात के दृश्य के लिए आवश्यक मंच निर्देशों और ध्वनियों की सूची बनाएं।
  • नाटक के मुख्य संदेश और पात्रों के बीच संबंधों को संक्षेप में लिखें।

Practice MCQs

Q1. नाटक में सबसे बुद्धिमान पात्र किसे माना गया है और क्यों?

Q2. पेड़ और खंभे में दोस्ती का मुख्य कारण क्या था?

Q3. लैटर बक्स को 'लाल ताऊ' क्यों कहा जाता था?

Q4. नाटक में सभी पात्र मिलकर भी बच्ची को घर क्यों नहीं पहुँचा पा रहे थे?

Q5. नाटक में कौन सा पात्र एकमात्र सजीव पात्र है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के हिंदी वसंत पाठ 7 'पापा खो गए' में मुख्य पात्र कौन हैं?

इस नाटक के मुख्य पात्रों में एक खोई हुई बच्ची, कौआ, पेड़, खंभा और लेटर बक्स (लाल ताऊ) शामिल हैं। कौआ एकमात्र सजीव पात्र है जो सक्रिय भूमिका निभाता है।

नाटक में लेटर बक्स को 'लाल ताऊ' क्यों कहा गया है?

लेटर बक्स को 'लाल ताऊ' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह ऊपर से नीचे तक लाल रंग का था और बड़ों की तरह बुद्धिमानी से बातें करता था। वह पत्रों को पढ़कर समाज की जानकारी रखता था।

बच्ची को उसके घर पहुँचाने में क्या समस्या आ रही थी?

समस्या यह थी कि बच्ची बहुत छोटी और नादान थी, इसलिए वह अपने घर का पता या अपने पापा का नाम नहीं बता पा रही थी। इस वजह से सभी पात्र मिलकर भी उसे उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान नाटक के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं, जैसे पात्रों का विश्लेषण, कहानी की समझ, और भाषा के प्रयोग, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

नाटक के शीर्षक 'पापा खो गए' का क्या अर्थ है?

नाटक का शीर्षक 'पापा खो गए' इसलिए रखा गया है क्योंकि कहानी का मुख्य केंद्र एक ऐसी बच्ची है जो अपने पापा को ढूंढ रही है और जिसे अपने पापा का नाम-पता भी ठीक से याद नहीं है। सभी पात्र मिलकर उसके पापा को खोजने का प्रयास करते हैं।

भाषा की बात में किन दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है?

भाषा की बात में दो मुख्य बिंदु हैं: पहला, नाटक के मंचन के लिए रात के दृश्य को दर्शाने हेतु आवश्यक निर्देश (जैसे अँधेरा, आवाज़ें) और दूसरा, पाठ में प्रयुक्त विराम चिह्नों का सही स्थान पर प्रयोग।

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