कक्षा 7 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 20 विप्लव गायन
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 20, 'विप्लव गायन' के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय क्रांति के आह्वान और समाज में परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर केंद्रित है। समाधान छात्रों को कविता के मूल भाव, प्रतीकों और भाषा के प्रयोग को समझने में मदद करते हैं। इसमें 'वही स्वर', 'वह ध्वनि', 'वही तान' जैसे वाक्यांशों के अर्थ, क्रांति के स्वरों से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयाँ और स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी कविताओं के उदाहरण शामिल हैं। 'विप्लव-गायन' शीर्षक की सार्थकता, विराम चिह्नों का प्रयोग और तुकबंदी जैसे भाषाई पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को कविता की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायक होंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 20 विप्लव गायन |
Chapter summary
अध्याय 20 'विप्लव गायन' के NCERT समाधान छात्रों को कविता के केंद्रीय भाव को समझने में मदद करते हैं, जो कि क्रांति और नव-निर्माण का आह्वान है। समाधान कविता की पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट करते हैं, जैसे कि 'वही स्वर' का तात्पर्य क्रांति की भावना से है। यह भी समझाया गया है कि कैसे क्रांति के प्रयास में कठिनाइयाँ आती हैं। स्वाधीनता संग्राम से प्रेरित कविताओं के उदाहरण और 'विप्लव-गायन' शीर्षक की सार्थकता पर चर्चा की गई है। भाषा के प्रयोग, जैसे योजक चिह्न और विराम चिह्नों के महत्व को भी समझाया गया है।
Learning outcomes
- कविता 'विप्लव गायन' के केंद्रीय भाव को समझना।
- कविता में प्रयुक्त प्रतीकों और वाक्यांशों के अर्थ को स्पष्ट करना।
- क्रांति के आह्वान से जुड़ी कठिनाइयों का विश्लेषण करना।
- स्वाधीनता संग्राम से संबंधित कविताओं के उदाहरणों को पहचानना।
- कविता में प्रयुक्त भाषा, जैसे योजक चिह्न और तुकबंदी के प्रयोग को समझना।
Topics covered
Paper topics
- विप्लव गायन का भावार्थ
- क्रांति का आह्वान
- नव निर्माण की चेतना
- कविता के प्रतीक (स्वर, ध्वनि, तान)
- क्रांति की कठिनाइयाँ
- स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी कविताएँ
- माखनलाल चतुर्वेदी की कविताएँ
- मैथिलीशरण गुप्त की कविताएँ
- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविताएँ
- योजक चिह्न का प्रयोग
- विराम चिह्नों का महत्व
- तुकबंदी (अंत्यानुप्रास)
Important topics
- कविता का मूल भाव और शीर्षक की सार्थकता
- क्रांति के स्वरों से जुड़ी कठिनाइयाँ
- स्वाधीनता संग्राम से प्रेरित कविताओं के उदाहरण
- भाषा खंड: योजक चिह्न और तुकबंदी का प्रयोग
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
'कण-कण में है व्याप्त वही स्वर... कालकूट फणि की चिंतामणि।'
- (क) 'वही स्वर', 'वह ध्वनि' एवं 'वही तान' आदि वाक्यांश किसके लिए∕किस भाव के लिए प्रयुक्त हुए हैं?
- (ख) वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान से संबंधित भाव का 'रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है। निकली मेरी अंतरतर से'-'पंक्तियों से क्या कोई संबंध बनता है?
(क) कविता में प्रयुक्त 'वही स्वर', 'वह ध्वनि' एवं 'वही तान' जैसे वाक्यांश नव निर्माण के लिए जनता को जागृत करने वाली क्रांति की भावना के प्रतीक हैं। ये उस चेतना को दर्शाते हैं जो समाज में व्याप्त जड़ता, अंधविश्वास और कुरीतियों के विरुद्ध परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक है।
(ख) हाँ, इन वाक्यांशों का 'रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है। निकली मेरी अंतरतर से' पंक्तियों से गहरा संबंध बनता है। कवि के हृदय में वर्तमान व्यवस्था के प्रति जो तीव्र रोष और क्रोध है, वही क्रांति के गीत के रूप में मुखर हो रहा है। यह क्रुद्ध तान ही कण-कण में व्याप्त होकर प्रतिध्वनित होती है और परिवर्तन का आह्वान करती है।
प्रश्न 2
नीचे दी गई पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए 'सावधान! मेरी वीणा में... दोनों मेरी ऐंठीं हैं।'
कवि इन पंक्तियों के माध्यम से यह बताना चाहता है कि जब वह अपनी वीणा से क्रांति के स्वर छेड़ने का प्रयास करता है, तो यह कोई सामान्य संगीत नहीं होता। इस प्रक्रिया में वीणा से चिंगारियाँ निकलने लगती हैं, उसके तार (मिज़राबें) टूट जाते हैं, और उसकी अपनी अंगुलियाँ भी ऐंठ जाती हैं। इसका भावार्थ यह है कि क्रांति का मार्ग अत्यंत कठिन और पीड़ादायक होता है। इसमें व्यक्ति को दमनकारी शक्तियों के कठोर प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है, और अपने प्राणों की बाजी तक लगानी पड़ सकती है। यह पंक्तियाँ क्रांति की शुरुआत में आने वाली बाधाओं और बलिदान की ओर संकेत करती हैं।
प्रश्न 3
स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करनेवाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भाव ओज से मुखर हुए हैं।
स्वाधीनता संग्राम के दौरान कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं से लोगों में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना जगाई। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जैसे कवियों की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
(क) माखनलाल चतुर्वेदी:
द्वार बलि का खोल, चल, भूडोल कर दें,
एक हिमगिरि, एक सिर का मोल कर दें,
मसल कर, अपने इरादों-सी उठाकर,
दो हथेली हैं कि पृथ्वी गोल कर दें।
(ख) मैथिलीशरण गुप्त:
इस नींद में ही तो यवन आकर यहाँ आहत हुए, जागे न हो!
स्वातंत्र्य खोकर अन्त में तुम धृत हुए।
इस नींद में ही सब तुम्हारे पूर्व गौरव हत हुए,
अब और कब तक इस तरह सोते रहोगे मृत हुए।
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला':
योग्य जन जीता है। पश्चिम की उक्ति नहीं-गीता है, गीता है-
स्मरण करो बार-बार- जागो फिर एक बार।
ये पंक्तियाँ उस समय के कवियों की ओजस्वी वाणी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 1
कविता के मूलभाव को ध्यान में रखते हुए बताइए कि इसका शीर्षक 'विप्लव-गायन' क्यों रखा गया होगा?
कविता का मूल भाव समाज में व्याप्त जड़ता, अंधविश्वास, रूढ़ियों और कुरीतियों के बंधनों से मानवजाति को मुक्त कराना तथा एक नए, प्रगतिशील समाज का निर्माण करना है। कवि इस परिवर्तन को क्रांति के माध्यम से लाना चाहता है और इसी क्रांति का आह्वान अपनी कविता में करता है। इसलिए, क्रांति का आह्वान करने वाली इस कविता का शीर्षक 'विप्लव-गायन' (क्रांति का गीत) रखना पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 1
कविता में दो शब्दों के मध्य (-) का प्रयोग किया गया है, जैसे-'जिससे उथल-पुथल मच जाए' एवं 'कण-कण में है। व्याप्त वही स्वर'। इन पंक्तियों को पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कवि ऐसा प्रयोग क्यों करते हैं?
कविता में दो शब्दों के मध्य योजक चिह्न (-) का प्रयोग अक्सर उन शब्द युग्मों के लिए किया जाता है जो एक साथ प्रयोग होने पर विशेष अर्थ या प्रभाव उत्पन्न करते हैं। कवि ने यहाँ इसका प्रयोग अपने शब्दों को अधिक प्रभावी और प्रभावशाली बनाने के लिए किया है। उदाहरण के लिए, 'कण-कण' शब्द हर एक कण में व्याप्त होने की भावना को बल देता है, और 'उथल-पुथल' शब्द व्यापक अशांति को दर्शाता है। यह प्रयोग शब्दों के बीच संबंध को मजबूत करता है और अर्थ में गहराई लाता है।
प्रश्न 2
कविता में ( , - आदि) विराम चिह्नों का उपयोग रूकने, आगे-बढ़ने अथवा किसी खास भाव को अभिव्यक्त करने के लिए किया जाता है। कविता पढ़ने में इन विराम चिह्नों का प्रभावी प्रयोग करते हुए काव्य पाठ कीजिए। गद्य में आमतौर पर है शब्द का प्रयोग वाक्य के अंत में किया जाता है, जैसे-देशराज जाता है। अब कविता की निम्न पंक्तियों को देखिए 'कण-कण में है व्याप्त... वही तान गाती रहती है'
इन पंक्तियों में 'है' शब्द का प्रयोग अलग-अलग जगहों पर किया गया है। कविता में अगर आपको ऐसे अन्य प्रयोग मिलें तो उन्हें छाँटकर लिखिए।
कविता में विराम चिह्नों का प्रयोग भावों को स्पष्ट करने और लय बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होता है। 'है' शब्द का प्रयोग कविता में विभिन्न संदर्भों में किया जा सकता है, जो वाक्य संरचना और अर्थ को प्रभावित करता है। दिए गए उदाहरणों के अतिरिक्त, कविता में 'है' शब्द के अन्य प्रयोग इस प्रकार मिल सकते हैं:
1. दूटी हैं मिजराबें, अंगुलियाँ दोनों मेरी ऐंठी हैं। (यहाँ 'हैं' बहुवचन क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुआ है।)
2. कंठ रुका है महानाश का मारक गीत रुद्ध होता है, (यहाँ 'रुका है' क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुआ है।)
ये प्रयोग वाक्य के अर्थ और प्रवाह को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
प्रश्न 3
निम्न पॅक्तियों को ध्यान से देखिए--
'कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ... एक हिलोर उधर से आए'
इन पंक्तियों के अंत में आए, जाए जैसे तुक मिलाने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसे तुकबंदी या अंत्यानुप्रास कहते हैं। कविता से तुकबंदी के अन्य शब्दों को छाँटकर लिखिए। छाँटे गए शब्दों से अपनी कविता बनाने की कोशिश कीजिए
कविता में तुकबंदी (अंत्यानुप्रास) का प्रयोग उसे संगीतात्मकता और प्रवाह प्रदान करता है। 'आए' और 'जाए' जैसे शब्दों के समान अंत वाले अन्य तुकबंदी वाले शब्द जो कविता में मिलते हैं, वे इस प्रकार हैं:
- बैठी / ऐंठी
- ध्वनि / चिंतामणि
- इधर / उधर
- रुद्ध / युद्ध
छात्र इन शब्दों का प्रयोग करके अपनी स्वयं की कविता बनाने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, 'बैठी' और 'ऐंठी' का प्रयोग करके एक छोटी कविता बनाई जा सकती है जो किसी स्थिति का वर्णन करे।
Common mistakes
- कविता के प्रतीकात्मक अर्थों को शाब्दिक रूप से समझना।
- विराम चिह्नों के प्रयोग के महत्व को अनदेखा करना।
- तुकबंदी वाले शब्दों को केवल कविता की सुंदरता के लिए समझना, न कि भाव अभिव्यक्ति के लिए।
- क्रांति के आह्वान को केवल नकारात्मक रूप में देखना।
Revision tips
- कविता को बार-बार पढ़ें और उसके मूल भाव को समझने का प्रयास करें।
- कविता में प्रयुक्त कठिन शब्दों और वाक्यांशों के अर्थ को स्पष्ट करें।
- स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी कविताओं के उदाहरणों को याद करें।
- भाषा खंड में दिए गए व्याकरणिक बिंदुओं, जैसे योजक चिह्न और तुकबंदी पर विशेष ध्यान दें।
Practice MCQs
Q1. 'कण-कण में है व्याप्त वही स्वर...' पंक्ति में 'वही स्वर' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: कविता में 'वही स्वर', 'वह ध्वनि' और 'वही तान' जैसे वाक्यांश नव निर्माण के लिए जनता को जागृत करने वाली क्रांति की भावना के प्रतीक हैं।
Q2. कवि की वीणा से क्रांति के स्वर निकालने के प्रयास में क्या होता है?
Explanation: कविता के अनुसार, जब कवि क्रांति के स्वर छेड़ने का प्रयास करता है, तो वीणा से चिंगारियाँ निकलती हैं, मिज़राबें टूट जाती हैं और अंगुलियाँ ऐंठ जाती हैं, जो क्रांति के मार्ग की कठिनाइयों को दर्शाता है।
Q3. 'विप्लव-गायन' शीर्षक का क्या अर्थ है?
Explanation: शीर्षक 'विप्लव-गायन' का अर्थ है क्रांति का गीत, जो कविता के मूल भाव - जड़ता, रूढ़ियों और कुरीतियों के विरुद्ध परिवर्तन लाने के आह्वान - को दर्शाता है।
Q4. कविता में योजक चिह्न (-) का प्रयोग क्यों किया गया है?
Explanation: कविता में योजक चिह्न का प्रयोग कुछ शब्द युग्मों को साथ रखने और कवि के शब्दों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया गया है, जैसे 'कण-कण' या 'उथल-पुथल'।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सी पंक्ति स्वाधीनता के भाव को ओज से मुखर करती है?
Explanation: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की पंक्ति 'जागो फिर एक बार' स्वाधीनता के भाव को ओजपूर्ण ढंग से व्यक्त करती है, जो छात्रों को जागृत करने का आह्वान है।
Frequently asked questions
कक्षा 7 हिंदी के अध्याय 20 'विप्लव गायन' में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?
इस अध्याय में कविता 'विप्लव गायन' के माध्यम से क्रांति के आह्वान, नव-निर्माण की चेतना और समाज में परिवर्तन लाने की आवश्यकता को समझाया गया है। इसमें कविता के प्रतीकों, भाषा प्रयोग और स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी कविताओं के उदाहरण भी शामिल हैं।
'वही स्वर', 'वह ध्वनि' और 'वही तान' का क्या अर्थ है?
कविता में ये वाक्यांश नव निर्माण के लिए जनता को जागृत करने वाली क्रांति की भावना के प्रतीक हैं। यह वह स्वर है जो हर ओर व्याप्त है और परिवर्तन की आवश्यकता को दर्शाता है।
कविता में क्रांति के प्रयास में आने वाली कठिनाइयों का वर्णन कैसे किया गया है?
कवि वीणा से क्रांति के स्वर निकालने का प्रयास करते हुए बताता है कि इससे चिंगारियाँ निकलती हैं, मिज़राबें टूट जाती हैं और अंगुलियाँ ऐंठ जाती हैं। यह क्रांति के मार्ग में आने वाले दमन और संघर्ष का प्रतीक है।
'विप्लव-गायन' शीर्षक क्यों रखा गया है?
यह शीर्षक इसलिए रखा गया है क्योंकि कविता का मुख्य भाव क्रांति का आह्वान करना है। 'विप्लव' का अर्थ है क्रांति या उथल-पुथल, और 'गायन' का अर्थ है गीत। अतः यह शीर्षक कविता के क्रांतिकारी संदेश को स्पष्ट करता है।
भाषा की बात खंड में किन व्याकरणिक बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है?
भाषा की बात खंड में योजक चिह्न (-) के प्रयोग, विराम चिह्नों के महत्व और तुकबंदी (अंत्यानुप्रास) जैसे व्याकरणिक और साहित्यिक तत्वों पर प्रकाश डाला गया है।
यह NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान कविता के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सही उत्तर देने में मदद मिलती है।
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