कक्षा 7 हिंदी NCERT समाधान: हम पंछी उन्मुक्त गगन के

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यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पुस्तक के पाठ 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कविता पक्षियों की स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा और बंधन के प्रति उनके विरोध को दर्शाती है। समाधानों में उन कारणों की पड़ताल की गई है कि क्यों पक्षी सुख-सुविधाएँ होने पर भी पिंजरे में नहीं रहना चाहते, और वे खुले आकाश में उड़ने, पीने, खाने और अपने साथियों के साथ रहने जैसी अपनी किन इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं। इसमें पक्षी पालने की नैतिकता, पर्यावरण पर पक्षियों के महत्व और भाषा के व्याकरणिक पहलुओं, जैसे विशेषण और द्वंद्व समास पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को कविता के भावार्थ को गहराई से समझने, पक्षी कल्याण के प्रति संवेदनशील बनने और हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण नियमों को सीखने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. हम पंछी उन्मुक्त गगन के

Chapter summary

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' के ये NCERT समाधान छात्रों को कविता के मूल भाव को समझने में मदद करते हैं। इसमें पक्षियों की स्वतंत्रता की चाह, पिंजरे में बंद जीवन के प्रति उनका विरोध और खुले आकाश में विचरण की उनकी इच्छाओं पर प्रकाश डाला गया है। समाधान पक्षी पालने के औचित्य, पर्यावरण संतुलन में पक्षियों की भूमिका और भाषा के व्याकरणिक तत्वों जैसे विशेषण और द्वंद्व समास पर भी चर्चा करते हैं। यह खंड छात्रों को कविता के अर्थ को स्पष्ट करने और संबंधित व्याकरणिक अवधारणाओं को मजबूत करने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • पक्षियों की स्वतंत्रता की इच्छा के कारणों को समझना।
  • पिंजरे में बंद पक्षियों की विभिन्न इच्छाओं की पहचान करना।
  • पक्षी पालने के औचित्य पर अपने विचार व्यक्त करना।
  • पर्यावरण संतुलन में पक्षियों के महत्व का विश्लेषण करना।
  • कविता में प्रयुक्त विशेषण और द्वंद्व समास की पहचान करना और उनका प्रयोग सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • पक्षियों की स्वतंत्रता की इच्छा
  • पिंजरे में बंद जीवन का विरोध
  • पक्षी पालने की नैतिकता
  • पर्यावरण में पक्षियों का महत्व
  • गुणवाचक विशेषण
  • द्वंद्व समास
  • कविता का भावार्थ
  • स्वतंत्रता का महत्व

Important topics

  • पक्षियों की स्वतंत्रता की इच्छा और उसका महत्व
  • पर्यावरण संतुलन में पक्षियों की भूमिका
  • गुणवाचक विशेषण की पहचान
  • द्वंद्व समास के उदाहरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?
Solution: पक्षियों के पास पिंजरे के अंदर वे सभी सुख-सुविधाएँ उपलब्ध हो सकती हैं जो एक आरामदायक जीवन के लिए आवश्यक हैं, जैसे भोजन, पानी और सुरक्षा। लेकिन, पक्षी इन सुविधाओं के बावजूद पिंजरे में नहीं रहना चाहते क्योंकि वे परतंत्र होते हैं। उन्हें बंधन में रहना पसंद नहीं है, बल्कि वे स्वतंत्रता से खुले आकाश में उड़ना, अपनी मर्जी से खाना-पीना और विचरण करना चाहते हैं। उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति आज़ादी में जीने की है, न कि किसी सीमित स्थान पर सुख-सुविधाओं के साथ कैद रहने की। कवि ने पक्षी के माध्यम से इसी बंधन-मुक्त जीवन की लालसा को व्यक्त किया है।

प्रश्न 2

पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?
Solution: पक्षी जब उन्मुक्त (स्वतंत्र) होते हैं, तो वे अपनी कई इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं। वे नीम के पेड़ से कड़वी निबौरियाँ खाना चाहते हैं, जो उन्हें स्वतंत्रता का स्वाद देती हैं। वे विस्तृत और खुले आकाश में ऊँची उड़ान भरना चाहते हैं। वे नदियों और झरनों का बहता हुआ शीतल जल पीना चाहते हैं। वे पेड़ की सबसे ऊँची टहनी पर बैठकर झूलना चाहते हैं और क्षितिज से मिलने की होड़ में अन्य पक्षियों के साथ उड़ान भरना चाहते हैं। ये सभी इच्छाएँ उनकी आज़ादी और प्राकृतिक जीवन जीने की चाह को दर्शाती हैं।

प्रश्न 3

भाव स्पष्ट कीजिए - "या तो क्षितिज मिलन बन जाता/या तनती साँसों की डोरी।"
Solution: प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि पक्षी स्वतंत्रता की इतनी प्रबल इच्छा रखते हैं कि वे क्षितिज के अंत तक पहुँचने का प्रयास करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्षितिज एक ऐसी सीमा है जहाँ आकाश और पृथ्वी मिलते हुए प्रतीत होते हैं, और वहाँ तक पहुँचना असंभव है। फिर भी, पक्षी उस असंभव को पाने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देंगे। यदि इस प्रयास में उनकी मृत्यु भी हो जाती है, तो वे उसे स्वीकार करेंगे। यह पंक्ति दर्शाती है कि स्वतंत्रता की कीमत पक्षियों के लिए उनके प्राणों से भी बढ़कर है और वे इसके लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हैं।

प्रश्न 4.1

बहुत से लोग पक्षी पालते हैं। पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपना विचार लिखिए।
Solution: मेरे विचार से पक्षियों को पालना उचित नहीं है। ईश्वर ने उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए हैं, ताकि वे खुले आकाश में अपनी मर्जी से विचरण कर सकें। उन्हें पिंजरे में बंद करके रखना उनकी स्वतंत्रता का हनन करना है। भले ही हम उन्हें अच्छी तरह से पालें, उन्हें भोजन-पानी दें, लेकिन उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति - जैसे ऊँची उड़ान भरना, पेड़ों पर घोंसले बनाना, नदी-झरनों का जल पीना और फल-फूल खाना - से उन्हें वंचित रखना अनुचित है। किसी भी प्राणी को उसके स्वाभाविक परिवेश से अलग करना सही नहीं माना जा सकता। स्वतंत्रता अनमोल है और इसे खरीदा नहीं जा सकता, भले ही हम कितनी भी सुख-सुविधाएँ दे दें।

प्रश्न 4.2

क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।
Solution: हाँ, मेरी जानकारी में एक बार एक घायल कबूतर हमारे घर आ गया था। हमने उसकी देखभाल की और जब वह ठीक हो गया, तो वह हमारे साथ ही रहने लगा। हम सब घरवाले उसे एक छोटे बच्चे की तरह प्यार से पालते थे। उसे नियमित रूप से नहलाया जाता था और उसके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा जाता था। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने उसे पिंजरे में बंद नहीं किया था; वह अपनी इच्छानुसार पूरे घर में उड़ता फिरता था। इस प्रकार, हमने उसकी देखरेख की और उसे स्वतंत्रता भी दी।

प्रश्न 5

पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आज़ादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।
Solution: पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से न केवल उनकी स्वतंत्रता का हनन होता है, बल्कि पर्यावरण पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सबसे पहले, पर्यावरण में आहार श्रृंखला (food chain) असंतुलित हो जाती है। उदाहरण के लिए, छोटे कीटों को पक्षी खाते हैं। यदि पक्षी न रहें, तो इन कीटों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी, जो हमारी फसलों के लिए हानिकारक होगा। दूसरे, पक्षी जब फल खाते हैं, तो वे बीजों को इधर-उधर गिरा देते हैं, जिससे नए पौधे उगते हैं। पक्षियों के न होने से यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होगी। कुछ पक्षी हमारे द्वारा फैलाई गई गंदगी को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। उनके न रहने से पर्यावरण दूषित होगा और मानव विभिन्न बीमारियों का शिकार हो सकता है। इस प्रकार, पक्षी और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं और एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती।

भाषा की बात - 1

कविता से ढूंढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए। (स्वर्ण-श्रंखला और लाल किरण-सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं।)
Solution: कविता में 'स्वर्ण-श्रंखला' और 'लाल किरण-सी' जैसे गुणवाचक विशेषणों के तीन अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. पुलकित-पंख: यहाँ 'पुलकित' पंखों की अवस्था या भाव बता रहा है, जो एक गुण है।
  2. कटुक-निबौरी: 'कटुक' (कड़वी) निबौरी का गुण बता रहा है।
  3. कनक-कटोरी: 'कनक' (सोने की) कटोरी का गुण बता रहा है।
ये सभी शब्द संज्ञा (पंख, निबौरी, कटोरी) के गुण या विशेषता का बोध करा रहे हैं, इसलिए ये गुणवाचक विशेषण हैं।

भाषा की बात - 2

'भूखे-प्यासे' में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से 'और' का संकेत मिलता है, जैसे - भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे। इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
Solution: 'भूखे-प्यासे' में द्वंद्व समास है, जहाँ दोनों पदों (भूखे, प्यासे) का अर्थ प्रधान होता है और उनके बीच 'और' का लोप होता है। इसी प्रकार के दस अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. अमीर-गरीब = अमीर और गरीब
  2. सुख-दुःख = सुख और दुःख
  3. रात-दिन = रात और दिन
  4. तन-मन = तन और मन
  5. मीठा-खट्टा = मीठा और खट्टा
  6. अपना-पराया = अपना और पराया
  7. पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
  8. सही-गलत = सही और गलत
  9. धूप-छाँव = धूप और छाँव
  10. सुबह-शाम = सुबह और शाम
इन सभी उदाहरणों में दो विपरीत या संबंधित शब्दों को जोड़कर एक नया शब्द बनाया गया है, जो द्वंद्व समास का उदाहरण है।

Common mistakes

  • पक्षियों को पालने के पक्ष और विपक्ष में तर्कों को स्पष्ट रूप से न बता पाना।
  • पर्यावरण में पक्षियों की भूमिका को कम आंकना।
  • विशेषण और द्वंद्व समास के बीच अंतर को समझने में कठिनाई।
  • कविता के भावार्थ को केवल शाब्दिक अर्थ तक सीमित रखना।

Revision tips

  • कविता को बार-बार पढ़ें और उसके मुख्य भाव को समझें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • व्याकरण के विशेषण और द्वंद्व समास वाले भाग को विशेष ध्यान से दोहराएँ।
  • पर्यावरण में पक्षियों के महत्व पर चर्चा करें और अपने विचार बनाएँ।

Practice MCQs

Q1. पक्षी पिंजरे में सुख-सुविधाएँ पाकर भी क्यों नहीं रहना चाहते?

Q2. पक्षी उन्मुक्त रहकर क्या खाना चाहते हैं?

Q3. पंक्ति 'या तो क्षितिज मिलन बन जाता/या तनती साँसों की डोरी' का क्या भाव है?

Q4. पक्षी पालना उचित है या अनुचित, इस पर लेखक का क्या विचार है?

Q5. पर्यावरण संतुलन में पक्षियों की क्या भूमिका है?

Q6. 'पुलकित-पंख' में कौन सा विशेषण है?

Q7. 'रात-दिन' में कौन सा समास है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस पाठ में पक्षियों की स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा, बंधन के प्रति उनके विरोध और खुले आकाश में विचरण की उनकी अभिलाषा को दर्शाया गया है। साथ ही, पक्षी पालने की नैतिकता और पर्यावरण में पक्षियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।

पक्षी सुख-सुविधाएँ पाकर भी पिंजरे में क्यों नहीं रहना चाहते?

पक्षी पिंजरे में सुख-सुविधाएँ पाकर भी इसलिए नहीं रहना चाहते क्योंकि उन्हें बंधन स्वीकार नहीं है। वे स्वतंत्रता से उड़ना, चहचहाना और अपनी मर्जी से जीना चाहते हैं, जो पिंजरे में संभव नहीं है।

इस पाठ में व्याकरण के किन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई है?

इस पाठ में गुणवाचक विशेषण (जैसे - पुलकित-पंख) और द्वंद्व समास (जैसे - रात-दिन) के उदाहरणों पर चर्चा की गई है, जिससे छात्रों को इन व्याकरणिक अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है।

पर्यावरण के लिए पक्षी क्यों महत्वपूर्ण हैं?

पक्षी पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे कीटों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही, वे फलों के बीजों को फैलाकर नए पौधों को पनपने में मदद करते हैं और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी योगदान देते हैं।

क्या पक्षियों को पालना उचित है?

पाठ के अनुसार, पक्षियों को पालना उचित नहीं है क्योंकि ईश्वर ने उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए हैं। उन्हें उनके प्राकृतिक परिवेश से अलग रखना उनकी स्वतंत्रता का हनन है।

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