कक्षा 7 हिंदी: आश्रम का अनुमानित व्यय - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के पाठ 19, 'आश्रम का अनुमानित व्यय' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह खंड छात्रों को गांधीजी के आश्रम के लिए अनुमानित बजट को समझने में मदद करता है, जिसमें विभिन्न वस्तुओं और औजारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। समाधान इस बात की पड़ताल करते हैं कि गांधीजी पेशेवर औजार क्यों खरीदना चाहते थे, हिसाब-किताब के प्रति उनकी सतर्कता पर चर्चा करते हैं, और बाल आश्रम के लिए एक बजट बनाने के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह पाठ भाषा की बारीकियों पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें 'इत' और 'इक' जैसे प्रत्ययों के प्रयोग और तत्पुरुष समास की अवधारणाओं को समझाया गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter19 आश्रम का अनुमानित व्यय

Chapter summary

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 19 'आश्रम का अनुमानित व्यय' के ये NCERT समाधान छात्रों को आश्रम के वित्तीय नियोजन और गांधीजी के आत्मनिर्भरता के दर्शन को समझने में मदद करते हैं। इसमें पेशेवर औजारों की खरीद के पीछे के तर्क, हिसाब-किताब में गांधीजी की कुशलता और एक बाल आश्रम के लिए बजट तैयार करने जैसे विषयों पर प्रश्न-उत्तर शामिल हैं। भाषा की बात खंड में 'इत' और 'इक' प्रत्ययों के प्रयोग तथा तत्पुरुष समास की व्याख्या की गई है, जो छात्रों की भाषाई समझ को बढ़ाते हैं।

Learning outcomes

  • आश्रम के अनुमानित व्यय को समझना।
  • गांधीजी के आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के विचारों को पहचानना।
  • बजट बनाने की प्रक्रिया और उसमें शामिल मदों का विश्लेषण करना।
  • 'इत' और 'इक' प्रत्ययों से बने शब्दों को पहचानना और उनका अर्थ समझना।
  • तत्पुरुष समास की अवधारणा को समझना और उदाहरणों की पहचान करना।

Topics covered

Paper topics

  • आश्रम का अनुमानित व्यय
  • गांधीजी के विचार
  • पेशेवर औजारों की आवश्यकता
  • आत्मनिर्भरता और स्वदेशी
  • बजट निर्माण
  • बाल आश्रम की योजना
  • प्रत्यय (इत, इक)
  • तत्पुरुष समास
  • शब्द निर्माण
  • भाषा की बात

Important topics

  • आश्रम का अनुमानित व्यय और उसके पीछे के उद्देश्य
  • गांधीजी के आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के सिद्धांत
  • 'इत' और 'इक' प्रत्ययों का प्रयोग
  • तत्पुरुष समास की पहचान और उदाहरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं, लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार-छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि क्यों खरीदना चाहते होंगे?
Solution:

गांधीजी का मानना था कि व्यक्ति को हर छोटा-बड़ा काम स्वयं करना चाहिए और आत्मनिर्भर बनना चाहिए। वे किसी भी कार्य को छोटा नहीं मानते थे और न ही किसी को संकोच महसूस करने देते थे। इसके अतिरिक्त, गांधीजी लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के पक्षधर थे। इसलिए, वे पेशेवर कारीगरों के औजार जैसे छेनी, हथौड़े और बसूले खरीदना चाहते थे ताकि आश्रमवासी इन औजारों का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के काम सीख सकें और आत्मनिर्भर बन सकें, साथ ही छोटे उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिले।

प्रश्न 2

गाँधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उन पर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गाँधी जी की चुस्ती का पता चलता है।
Solution:

गांधीजी हिसाब-किताब के मामले में बहुत सतर्क और चुस्त थे। उनकी जीवनी या उन पर आधारित पुस्तकों में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जो उनकी इस विशेषता को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, वे आश्रम के हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब रखते थे और सुनिश्चित करते थे कि कोई भी व्यय अनावश्यक न हो। वे स्वयं भी हिसाब-किताब में रुचि लेते थे और दूसरों को भी इसके प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित करते थे। छात्रों को गांधीजी पर लिखी पुस्तकों का अध्ययन करके ऐसे अंशों को चुनना चाहिए जो उनकी इस आदत को स्पष्ट करते हों।

प्रश्न 3

मान लीजिए, आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसका आनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहेंगे। किन नयी मदों को जोड़ना-हटाना चाहेंगे?
Solution:

बाल आश्रम खोलने के लिए एक अनुमानित बजट बनाने हेतु, हमें सबसे पहले यह तय करना होगा कि आश्रम में बच्चों के लिए किन-किन सुविधाओं और संसाधनों की आवश्यकता होगी। इस पाठ में दिए गए आश्रम के बजट से प्रेरणा लेते हुए, हम निम्नलिखित मदों पर विचार कर सकते हैं:

  1. भवन और रखरखाव: रहने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान, खेलने के लिए मैदान।
  2. भोजन: पौष्टिक और संतुलित आहार की व्यवस्था।
  3. शिक्षा: पुस्तकें, स्टेशनरी, शिक्षक का वेतन।
  4. स्वास्थ्य: प्राथमिक उपचार की व्यवस्था, दवाइयाँ।
  5. मनोरंजन और खेलकूद: खेल सामग्री, पुस्तकालय।
  6. कर्मचारी: देखभाल करने वाले, शिक्षक, रसोइए आदि का वेतन।

इस पाठ के बजट से हम उन मदों को चुन सकते हैं जो बाल आश्रम के लिए प्रासंगिक हों, जैसे भोजन, वस्त्र, और रहने की व्यवस्था। हमें शायद कुछ नई मदें जोड़नी पड़ें, जैसे बच्चों के लिए विशेष शैक्षिक सामग्री या खेलकूद की व्यवस्था। कुछ मदें हटाई भी जा सकती हैं यदि वे बाल आश्रम के लिए आवश्यक न हों। उदाहरण के लिए, यदि आश्रम का उद्देश्य केवल बच्चों की देखभाल और शिक्षा है, तो शायद बड़े पैमाने पर खेती या विशेष औजारों पर उतना खर्च न किया जाए जितना कि गांधीजी के आश्रम में किया गया था। छात्र अपनी कल्पना और आवश्यकतानुसार इस बजट को विस्तृत कर सकते हैं।

प्रश्न 4

आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे-घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे? उन कामों की सूची-बनाइए, जिन्हें आप सीखकर ही छोड़ेंगे।
Solution:

यह एक व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित प्रश्न है। छात्र अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार सूची बना सकते हैं।

कुछ काम जिन्हें छात्र चाहकर भी नहीं सीख पाते (संभावित कारण):

  • समय का अभाव: स्कूल और अन्य गतिविधियों के कारण।
  • अवसर की कमी: सीखने के लिए सही मार्गदर्शन या सामग्री का न मिलना।
  • कठिनाई का स्तर: कुछ काम सीखने में अधिक मेहनत या विशेष कौशल की आवश्यकता होती है।
  • प्रेरणा की कमी: काम के प्रति रुचि या महत्व को न समझ पाना।

कुछ काम जिन्हें छात्र सीखकर ही छोड़ेंगे (संभावित सूची):

  • कंप्यूटर प्रोग्रामिंग
  • कोई वाद्य यंत्र बजाना (जैसे गिटार, कीबोर्ड)
  • एक नई भाषा सीखना
  • खाना पकाना
  • तैराकी

छात्रों को अपनी सूची बनाते समय उन कारणों पर भी विचार करना चाहिए कि वे कुछ काम क्यों नहीं सीख पा रहे हैं और किन कामों को सीखने के लिए वे अतिरिक्त प्रयास करने को तैयार हैं।

प्रश्न 5

इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?
Solution:

इस अनुमानित बजट का गहराई से अध्ययन करने पर आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में कई महत्वपूर्ण अनुमान लगाए जा सकते हैं:

आश्रम के उद्देश्य:

  • आंदोलनों की तैयारी: यह स्पष्ट है कि आश्रम गांधीजी के आंदोलनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ सहयोगी, मित्र और सत्याग्रही एकत्र होते थे, योजनाएँ बनाई जाती थीं और सत्याग्रह की रूपरेखा तैयार की जाती थी।
  • आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: बजट में स्वयं काम करने और खेती करके अन्न उगाने पर जोर दिया गया है, जो आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन के गांधीवादी सिद्धांत को दर्शाता है।
  • श्रम का महत्व: आश्रम का उद्देश्य नागरिकों में मेहनत और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था, ताकि एक कर्मठ भारतीय जीवन का निर्माण हो सके।
  • सादा जीवन: बजट में आवश्यक वस्तुओं पर ही खर्च का अनुमान है, जो सादा जीवन जीने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

आश्रम की कार्यप्रणाली:

  • श्रम आधारित: आश्रम की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से शारीरिक श्रम पर आधारित थी। सभी सदस्य आश्रम के कार्यों में हाथ बंटाते थे।
  • सेवा भाव: आश्रम का वातावरण सेवा और सहयोग पर केंद्रित था।
  • स्वावलंबन: आश्रम अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर होने का प्रयास करता था, जैसे कि खेती करके भोजन उगाना।
  • सामूहिकता: सदस्यों के बीच सहयोग और सामूहिक भावना कार्यप्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

संक्षेप में, यह बजट एक ऐसे आश्रम की तस्वीर पेश करता है जो केवल रहने का स्थान नहीं था, बल्कि एक ऐसी संस्था थी जो राष्ट्रीय आंदोलनों को बल देती थी, आत्मनिर्भरता सिखाती थी और एक आदर्श समाज की नींव रखती थी।

प्रश्न 1

अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इत प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का न, नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे-इत प्रत्यय वाले कुछ और*शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है—

प्रमाणित व्यथित द्रवित मुखरित झंकृत शिक्षित मोहित चर्चित

इन प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और तब शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है जैसे-सप्ताह इक = साप्ताहिक। नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है

मौखिक संवैधानिक प्राथमिक नैतिक पौराणिक दैनिक

Solution:

यहाँ 'इत' और 'इक' प्रत्यय से बने शब्दों का विश्लेषण दिया गया है:

'इत' प्रत्यय युक्त शब्द और उनका मूल शब्द:

  • प्रमाणित → प्रमाण + इत (यहाँ 'न' का कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, 'त' जुड़ गया है)
  • व्यथित → व्यथा + इत (यहाँ 'था' का 'थत' में परिवर्तन हुआ है)
  • द्रवित → द्रव + इत (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है, केवल 'इत' जुड़ा है)
  • मुखरित → मुखर + इत (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है, केवल 'इत' जुड़ा है)
  • झंकृत → झंकार + इत (यहाँ 'र' का 'कृत' में परिवर्तन हुआ है)
  • शिक्षित → शिक्षा + इत (यहाँ 'क्षा' का 'क्षित' में परिवर्तन हुआ है)
  • मोहित → मोह + इत (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है, केवल 'इत' जुड़ा है)
  • चर्चित → चर्चा + इत (यहाँ 'चा' का 'चित' में परिवर्तन हुआ है)

'इक' प्रत्यय युक्त शब्द और उनका मूल शब्द:

  • मौखिक → मुख + इक (यहाँ 'मु' का 'मौ' हो गया है)
  • संवैधानिक → संविधान + इक (यहाँ 'सं' का 'सौ' हो गया है)
  • प्राथमिक → प्रथम +इक (यहाँ 'प्र' का 'प्रा' हो गया है)
  • नैतिक → नीति +इक (यहाँ 'नि' का 'नै' हो गया है)
  • पौराणिक → पुराण +इक (यहाँ 'पु' का 'पौ' हो गया है)
  • दैनिक → दिन +इक (यहाँ 'दि' का 'दै' हो गया है)

'इत' प्रत्यय के प्रयोग में परिवर्तन: 'इत' प्रत्यय लगने पर मूल शब्द के अंत में परिवर्तन हो सकता है, जैसे 'व्यथा' से 'व्यथित', 'शिक्षा' से 'शिक्षित'। कुछ शब्दों में केवल 'इत' जुड़ जाता है।

'इक' प्रत्यय के प्रयोग में परिवर्तन: 'इक' प्रत्यय लगने पर शब्द के पहले अक्षर में वृद्धि (जैसे 'अ' का 'आ', 'इ' का 'ए', 'उ' का 'ओ') होती है, जैसे 'दिन' से 'दैनिक', 'नीति' से 'नैतिक'।

प्रश्न 2

बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर टिका है। ऐसे समास को तत्पुरूष समास कहते हैं। ऐसे छह शब्द और सोचकर लिखिए और समझिए कि उनमें दूसरा शब्द प्रमुख क्यों हैं?
Solution:

तत्पुरुष समास में, जैसा कि बताया गया है, दूसरा शब्द प्रधान होता है और उसका अर्थ ही मुख्य होता है। पहला शब्द दूसरे शब्द के अर्थ को स्पष्ट करने या उसकी विशेषता बताने का कार्य करता है। ऐसे छह शब्द और उनके विश्लेषण इस प्रकार हैं:

  1. राजपुत्र: राजा का पुत्र। यहाँ 'पुत्र' प्रधान है। 'राज' (राजा का) यह बताता है कि पुत्र किसका है।
  2. वनवास: वन में वास। यहाँ 'वास' (रहना) प्रधान है। 'वन' यह बताता है कि वास कहाँ है।
  3. रोगमुक्त: रोग से मुक्त। यहाँ 'मुक्त' (आज़ाद) प्रधान है। 'रोग से' यह बताता है कि किस चीज़ से मुक्ति मिली है।
  4. देशभक्त: देश का भक्त। यहाँ 'भक्त' प्रधान है। 'देश का' यह बताता है कि भक्त किसके प्रति है।
  5. गंगाजल: गंगा का जल। यहाँ 'जल' प्रधान है। 'गंगा का' यह बताता है कि जल किसका है।
  6. विद्यालय: विद्या के लिए आलय (घर)। यहाँ 'आलय' (घर) प्रधान है। 'विद्या के लिए' यह बताता है कि घर किस उद्देश्य से है।

इन सभी उदाहरणों में, दूसरा शब्द (पुत्र, वास, मुक्त, भक्त, जल, आलय) अपने आप में एक पूर्ण अर्थ रखता है और वाक्य का मुख्य भाव वही शब्द व्यक्त करता है। पहला शब्द केवल उस मुख्य शब्द की विशेषता या संबंध बताता है।

Common mistakes

  • प्रत्यय और मूल शब्द को गलत पहचानना।
  • तत्पुरुष समास के उदाहरणों में दूसरे पद की प्रधानता को न समझना।
  • बजट बनाते समय आवश्यक मदों को छोड़ देना या अनावश्यक मदें जोड़ना।

Revision tips

  • प्रत्यय वाले शब्दों का अभ्यास करें और उनके मूल शब्द पहचानें।
  • तत्पुरुष समास के उदाहरणों को समझें और स्वयं कुछ नए शब्द बनाएँ।
  • आश्रम के बजट की प्रत्येक मद पर विचार करें और उसके पीछे के तर्क को समझें।
  • गांधीजी के आत्मनिर्भरता के विचारों को अपने जीवन से जोड़कर देखें।

Practice MCQs

Q1. गांधीजी पेशेवर कारीगरों के औजार क्यों खरीदना चाहते थे?

Q2. 'अनुमानित' शब्द में कौन सा प्रत्यय लगा है?

Q3. तत्पुरुष समास में प्रधानता किसकी होती है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द 'इत' प्रत्यय से नहीं बना है?

Q5. आश्रम की कार्यप्रणाली किन सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 19 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 19, 'आश्रम का अनुमानित व्यय' का मुख्य विषय गांधीजी के आश्रम के लिए एक अनुमानित बजट तैयार करना और उसके माध्यम से उनके आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और श्रम के सिद्धांतों को समझना है।

गांधीजी पेशेवर औजार क्यों खरीदना चाहते थे?

गांधीजी पेशेवर औजार इसलिए खरीदना चाहते थे ताकि वे लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर सकें।

पाठ में 'इत' प्रत्यय से बने कुछ शब्द कौन से हैं?

पाठ में 'इत' प्रत्यय से बने कुछ शब्द हैं: प्रमाणित, व्यथित, द्रवित, मुखरित, झंकृत, शिक्षित, मोहित, चर्चित।

तत्पुरुष समास को कैसे समझा जा सकता है?

तत्पुरुष समास में दो शब्दों को जोड़ा जाता है, जिसमें दूसरा शब्द प्रधान होता है और उसका अर्थ ही मुख्य होता है। जैसे - बैलगाड़ी (गाड़ी जो बैल से चले)।

ये समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने, भाषा के नियमों (जैसे प्रत्यय और समास) को सीखने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकारों का अभ्यास करने में मदद मिलती है।

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