कक्षा 6 इतिहास: अध्याय 7 नए प्रश्न नए विचार - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 7, 'नए प्रश्न नए विचार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुए सामाजिक और धार्मिक परिवर्तनों पर केंद्रित है, जिसमें बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) और जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर की शिक्षाओं का वर्णन है। समाधानों में बुद्ध की चार प्रमुख शिक्षाओं को समझाया गया है, जिसमें जीवन की दुखमय प्रकृति, इच्छाओं पर नियंत्रण, दयालुता और कर्म के महत्व पर जोर दिया गया है। साथ ही, उपनिषदों के दार्शनिक विचारों, जैसे आत्मा और ब्रह्म की एकता, पर भी प्रकाश डाला गया है। यह खंड छात्रों को इन प्राचीन विचारों की गहरी समझ प्रदान करता है और परीक्षा की तैयारी में सहायक है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. नए प्रश्न नए विचार

Chapter summary

कक्षा 6 इतिहास के अध्याय 7 'नए प्रश्न नए विचार' के ये NCERT समाधान छात्रों को लगभग 2500 वर्ष पूर्व के महत्वपूर्ण दार्शनिक और धार्मिक आंदोलनों से परिचित कराते हैं। इसमें गौतम बुद्ध की शिक्षाओं, जैसे दुख, तृष्णा, आत्मसंयम और कर्म के सिद्धांत, तथा महावीर की अहिंसा और त्याग पर आधारित शिक्षाओं का सार प्रस्तुत किया गया है। समाधान उपनिषदों के गहन दार्शनिक विचारों और संघ की स्थापना के बारे में भी जानकारी देते हैं, जो उस काल के सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • गौतम बुद्ध की प्रमुख शिक्षाओं को समझना।
  • महावीर की जैन धर्म संबंधी शिक्षाओं को पहचानना।
  • उपनिषदों के दार्शनिक विचारों का अध्ययन करना।
  • प्राचीन भारत में हुए धार्मिक और सामाजिक सुधारों का विश्लेषण करना।
  • कर्म, अहिंसा और आत्मसंयम जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • नए प्रश्न और विचार
  • गौतम बुद्ध का जीवन और शिक्षाएं
  • बौद्ध धर्म का प्रसार
  • महावीर और जैन धर्म
  • जैन धर्म की शिक्षाएं
  • उपनिषद् और उनका दर्शन
  • आत्मा और ब्रह्म की अवधारणा
  • संघ की स्थापना और नियम
  • भिक्खु और भिक्खुणी
  • विहार का महत्व
  • प्राकृत भाषा का प्रयोग
  • कर्म का सिद्धांत

Important topics

  • गौतम बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएं (दुख, तृष्णा, आत्मसंयम, दया)
  • महावीर की शिक्षाएं (अहिंसा, त्याग)
  • उपनिषदों का दार्शनिक विचार (आत्मा-ब्रह्म की एकता)
  • संघ की संरचना और नियम
  • कर्म के सिद्धांत का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: बुद्ध ने लोगो तक अपने विचारो का प्रसार करने के लिए किन-किन बातों पर ज़ोर दिया?

बुद्ध ने लोगो तक अपने विचारो का प्रसार करने के लिए किन-किन बातों पर ज़ोर दिया?
Solution: बुद्ध ने अपने विचारों को लोगों तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातों पर ज़ोर दिया, जिन्हें उनकी प्रमुख शिक्षाओं के रूप में समझा जा सकता है:
  1. जीवन की दुखमय प्रकृति: बुद्ध ने सिखाया कि यह जीवन दुखों से भरा है। उन्होंने बताया कि ये दुख हमारी इच्छाओं और लालसाओं के कारण उत्पन्न होते हैं।
  2. आत्मसंयम का महत्व: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आत्मसंयम अपनाकर हम इन लालसाओं से मुक्ति पा सकते हैं और दुख को कम कर सकते हैं।
  3. दया और आदर: बुद्ध ने सभी प्राणियों के प्रति दयालु होने और मनुष्य के साथ-साथ जानवरों का भी आदर करने की शिक्षा दी।
  4. कर्म का प्रभाव: उन्होंने समझाया कि हमारे कर्मों के परिणाम, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, हमारे वर्तमान जीवन के साथ-साथ हमारे भविष्य को भी प्रभावित करते हैं।
इन शिक्षाओं के माध्यम से बुद्ध ने लोगों को एक नैतिक और सचेत जीवन जीने का मार्ग दिखाया।

प्रश्न 2: 'सही' व 'गलत' वाक्य बताओ।

'सही' व 'गलत' वाक्य बताओ।
Solution: यहाँ दिए गए वाक्यों का सही या गलत के रूप में वर्गीकरण प्रस्तुत है:
  1. बुद्ध ने पश्बलि को बढ़ावा दिया। उत्तर: गलत बुद्ध ने पशुओं के प्रति दया और आदर का उपदेश दिया, न कि पशु बलि को बढ़ावा दिया।
  2. बुद्ध द्वारा प्रथम उपदेश सारनाथ में देने के कारण इस जगह का बहुत महत्व है। उत्तर: सही बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था, जो बौद्ध धर्म के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
  3. बुद्ध ने शिक्षा कि कर्म का हमारे जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उत्तर: गलत बुद्ध ने स्पष्ट रूप से सिखाया था कि हमारे कर्मों का हमारे वर्तमान और भविष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
  4. बुद्ध बने बोध में ज्ञान प्राप्त किया। उत्तर: सही गौतम बुद्ध को बोधगया में एक वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, जिसके बाद वे बुद्ध कहलाए।
  5. उपनिषदों के विचारो का मानना था कि आत्मा और ब्रहा वास्तव में एक ही है। उत्तर: सही उपनिषदों के प्रमुख दार्शनिक विचारों में से एक यह था कि आत्मा (व्यक्तिगत चेतना) और ब्रह्म (सार्वभौमिक चेतना) मूल रूप से एक ही हैं।

Common mistakes

  • बुद्ध की शिक्षाओं को गलत समझना, जैसे पशु बलि को बढ़ावा देना।
  • कर्म के सिद्धांत के प्रभाव को कम आंकना।
  • उपनिषदों के दार्शनिक विचारों को सतही तौर पर समझना।

Revision tips

  • बुद्ध और महावीर की शिक्षाओं के बीच समानताएं और अंतर नोट करें।
  • उपनिषदों के मुख्य दार्शनिक विचारों को संक्षेप में लिखें।
  • अध्याय में उल्लिखित महत्वपूर्ण शब्दों जैसे 'तृष्णा', 'संघ', 'विहार' को परिभाषित करें।
  • सही/गलत प्रश्नों का अभ्यास करके अपनी समझ का परीक्षण करें।

Practice MCQs

Q1. गौतम बुद्ध के अनुसार, जीवन में दुख का मुख्य कारण क्या है?

Q2. महावीर का जैन धर्म में क्या अर्थ है?

Q3. उपनिषद् का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Q4. बुद्ध ने अपनी शिक्षाएं किस भाषा में दीं?

Q5. संघ में रहने वाले भिक्षुओं के लिए नियम किस ग्रंथ में लिखे गए हैं?

Frequently asked questions

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 7 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 7, 'नए प्रश्न नए विचार' का मुख्य विषय लगभग 2500 वर्ष पूर्व भारत में हुए महत्वपूर्ण दार्शनिक और धार्मिक विचारों का उदय है, जिसमें गौतम बुद्ध और महावीर की शिक्षाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

गौतम बुद्ध की मुख्य शिक्षाएं क्या थीं?

गौतम बुद्ध की मुख्य शिक्षाओं में यह शामिल है कि जीवन दुखों से भरा है, जिसका कारण हमारी ईच्छाएं और लालसाएं (तृष्णा) हैं। उन्होंने आत्मसंयम, दयालुता, और जानवरों के प्रति आदर का उपदेश दिया। उन्होंने यह भी सिखाया कि हमारे कर्म हमारे वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करते हैं।

महावीर ने जैन धर्म में किन सिद्धांतों पर जोर दिया?

महावीर ने जैन धर्म में अहिंसा के सिद्धांत पर अत्यधिक जोर दिया, जिसका अर्थ है किसी भी जीव को न मारना या चोट पहुँचाना। उन्होंने सत्य जानने की इच्छा रखने वालों के लिए घर छोड़ने, सादा जीवन जीने, चोरी न करने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की शिक्षा दी।

उपनिषदों के अनुसार आत्मा और ब्रह्म के बारे में क्या कहा गया है?

उपनिषदों के विचारकों का मानना था कि आत्मा और ब्रह्म वास्तव में एक ही हैं। वे इस विचार पर चिंतन करते थे कि आत्मा का ब्रह्म में विलीन होना ही अंतिम लक्ष्य है।

संघ क्या था और इसके नियम क्या थे?

संघ घर त्याग करने वाले लोगों के लिए एक साथ रहने का स्थान था, जहाँ वे सच्चे ज्ञान की प्राप्ति के लिए अभ्यास करते थे। संघ में प्रवेश के लिए कई नियम थे, जैसे बच्चों को माता-पिता की, दासों को स्वामी की अनुमति लेनी पड़ती थी, और पुरुषों व स्त्रियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था थी।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझने, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत उत्तर और स्पष्टीकरण प्रदान किया गया है।

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