कक्षा 6 इतिहास: राज्य, राजा और प्राचीन गणराज्य - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 6 के लिए "हमारे अतीत" पुस्तक के अध्याय 6 "राज्य, राजा और प्राचीन गणराज्य" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय प्राचीन भारत में राजनीतिक संरचनाओं के विकास पर केंद्रित है, जिसमें जनपदों और महाजनपदों का उदय, राजाओं की भूमिका, वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति और उस पर प्रतिक्रियाएं, तथा गणराज्यों जैसी शासन की विभिन्न प्रणालियों की पड़ताल की गई है। समाधानों में ऋग्वेदिक काल के राजाओं और महाजनपदों के शासकों के बीच अंतर, वर्ण व्यवस्था के विरोध के कारण, और वज्जि संघ जैसी शासन प्रणालियों की अनूठी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त, यह एथेंस जैसे प्राचीन गणराज्यों की शासन व्यवस्था का भी संक्षिप्त परिचय देता है। ये समाधान छात्रों को प्राचीन भारत की जटिल राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. राज्य; राजा और प्राचीन गणराज्य

Chapter summary

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 6 "राज्य, राजा और प्राचीन गणराज्य" के ये NCERT समाधान प्राचीन भारत में राजनीतिक संगठनों के विकास की पड़ताल करते हैं। इनमें जनपदों और महाजनपदों के उद्भव, राजाओं की बढ़ती शक्ति, वर्ण व्यवस्था के सामाजिक निहितार्थ और उस पर उत्पन्न हुई प्रतिक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधानों में ऋग्वेदिक राजाओं और महाजनपदों के शासकों के बीच महत्वपूर्ण अंतरों को स्पष्ट किया गया है, साथ ही वर्ण व्यवस्था के विरोध के कारणों और वज्जि संघ जैसे गणराज्यों की अनूठी शासन पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह छात्रों को प्राचीन भारत की विविध राजनीतिक संरचनाओं की गहरी समझ प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • वर्ण व्यवस्था के विरोध के कारणों को समझना।
  • महाजनपदों के राजाओं और ऋग्वेदिक राजाओं के बीच अंतरों की पहचान करना।
  • शिकारी-संग्राहकों द्वारा राजाओं को दिए जाने वाले योगदानों का वर्णन करना।
  • वज्जि संघ और अन्य महाजनपदों के बीच शासन-प्रणाली के अंतरों को स्पष्ट करना।
  • एथेन्स जैसे प्राचीन गणराज्यों की शासन व्यवस्था की विशेषताओं को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • जनपद और महाजनपद
  • राजाओं की भूमिका और शक्ति
  • वर्ण व्यवस्था और उसका विरोध
  • ऋग्वेदिक राजा बनाम महाजनपद राजा
  • वज्जि संघ (गणराज्य)
  • शिकारी-संग्राहकों का योगदान
  • एथेन्स में प्रजातंत्र/गणतंत्र
  • नागरिक अधिकार और उनकी सीमाएँ
  • प्राचीन भारत में शासन प्रणालियाँ
  • सामाजिक संरचनाएँ

Important topics

  • महाजनपदों का उदय और उनकी विशेषताएँ
  • वर्ण व्यवस्था के विरोध के कारण
  • वज्जि संघ की शासन प्रणाली
  • ऋग्वेदिक राजा और महाजनपद राजा के बीच अंतर
  • एथेन्स में प्रजातंत्र की अवधारणा

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Questions and Solutions

1. लोगों ने वर्ण-व्यवस्था का विरोध क्यों किया?

लोगों ने वर्ण-व्यवस्था का विरोध क्यों किया?
Solution: वर्ण-व्यवस्था के विरोध के कई कारण थे, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
  1. जन्म-आधारित निर्धारण का विरोध: कुछ लोगों का मानना था कि किसी व्यक्ति का वर्ण केवल उसके जन्म के आधार पर तय नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी योग्यता और कर्मों पर आधारित होना चाहिए।
  2. सामाजिक श्रेष्ठता का प्रश्न: कुछ राजा स्वयं को पुरोहितों से अधिक श्रेष्ठ मानते थे, जो उस समय की वर्ण व्यवस्था के अनुसार अनुचित था, क्योंकि पुरोहितों को उच्च स्थान प्राप्त था।
  3. व्यवसाय-आधारित निर्धारण पर आपत्ति: कुछ लोगों को यह विचार भी ठीक नहीं लगता था कि किसी व्यक्ति का व्यवसाय उसके वर्ण को निर्धारित करे, क्योंकि वे मानते थे कि लोगों को अपनी पसंद का व्यवसाय चुनने का अधिकार होना चाहिए।
  4. अनुष्ठान के अधिकार का प्रश्न: कुछ लोगों का यह भी मानना था कि यज्ञ जैसे अनुष्ठान करने का अधिकार केवल कुछ विशेष वर्णों तक सीमित न होकर सभी के लिए उपलब्ध होना चाहिए।

2. महाजनपदों के राजा ऋग्वेद में उल्लेखित राजाओं से किस प्रकार भिन्न थे? दो अंतर बताओ।

महाजनपदों के राजा ऋग्वेद में उल्लेखित राजाओं से किस प्रकार भिन्न थे? दो अंतर बताओ।
Solution: महाजनपदों के राजा और ऋग्वेद में वर्णित राजाओं के बीच दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
  1. निवास और राजधानी: महाजनपदों के राजा बड़े-बड़े महलों में रहते थे और उनकी अपनी विशाल, सुसज्जित राजधानियाँ होती थीं। इसके विपरीत, ऋग्वेद के राजा महलों में नहीं रहते थे और न ही उनकी बड़ी राजधानियाँ होती थीं।
  2. सेना का आकार: महाजनपदों के राजाओं के पास अपनी एक विशाल और स्थायी सेना होती थी, जिसमें पैदल, घुड़सवार और हाथी सवार सैनिक शामिल होते थे। वहीं, ऋग्वेद के राजाओं के पास अपनी कोई स्थायी या बड़ी सेना नहीं होती थी; वे युद्ध के समय लोगों को इकट्ठा करते थे।

3. शिकारी व खाद्य-संग्राहक राजाओं को क्या देते होंगे?

शिकारी व खाद्य-संग्राहक राजाओं को क्या देते होंगे?
Solution: शिकारी और खाद्य-संग्राहक समूह राजाओं को विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ भेंट करते होंगे, जो उनके जीवन शैली और प्राकृतिक परिवेश से जुड़ी होती थीं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
  • जड़ी-बूटियाँ: विभिन्न औषधीय और अन्य उपयोगी जड़ी-बूटियाँ।
  • वन उत्पाद: जैसे शहद, फल, कंद-मूल आदि।
  • जानवरों से प्राप्त वस्तुएँ: जैसे हिरण, बाघ, या अन्य जानवरों की खालें, हाथी दाँत, सींग, पंख आदि।
  • अन्य सामग्री: जो वे शिकार या संग्रह से प्राप्त करते थे।
ये वस्तुएँ राजाओं के लिए खजाने का हिस्सा बनती थीं या उनके दैनिक उपयोग में आती थीं।

4. वज्जि संघ अन्य महाजनपदों से कैसे भिन्न था? कम से कम तीन अंतर बताओ।

वज्जि संघ अन्य महाजनपदों से कैसे भिन्न था? कम से कम तीन अंतर बताओ।
Solution: वज्जि संघ की शासन व्यवस्था अन्य महाजनपदों से कई मायनों में भिन्न थी। यहाँ तीन मुख्य अंतर दिए गए हैं:
  1. शासन का तरीका: वज्जि संघ में शासन के निर्णय आपसी मेल-जोल और सामूहिक चर्चाओं द्वारा लिए जाते थे। इसके विपरीत, अन्य महाजनपदों में राजा अक्सर स्वेच्छा से निर्णय ले सकता था और उसकी शक्ति अधिक केंद्रित होती थी।
  2. नियमों का पालन: वज्जि संघ में पारंपरिक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता था। यह व्यवस्था स्थिरता और सामूहिक सहमति पर जोर देती थी।
  3. सभाओं का आयोजन: वज्जि संघ में पूर्ण और नियमित सभाएँ आयोजित की जाती थीं, जहाँ सदस्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते थे और निर्णय लेते थे। अन्य महाजनपदों में राजा सलाह तो ले सकते थे, लेकिन अंतिम निर्णय अक्सर उन्हीं का होता था।

अन्यत्र (एथेन्स में शासन व्यवस्था)

अपने एटलस में यूनान और एथेन्स को ढूँढो। लगभग २५०० साल पहले एथेन्स के लोगों ने एक शासन-व्यवस्था की स्थापना की, जिसे प्रजातंत्र या गणतंत्र कहते हैं। यह व्यवस्था लगभग २०० सालों तक चली। इसमें ३० साल से ऊपर के उन सभी पुरुषों को पूर्ण नागरिकता प्राप्त थी, जो दास नहीं थे। वहाँ एक सभा थी जो महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए सालभर में कम से कम 40 बार बुलाई जाती थी। इस सभा में सभी नागरिक भाग ले सकते थे। शासन के कई पदों पर नियुक्तियाँ लॉटरियों द्वारा की जाती थीं। सभी नागरिकों को सेना और नौसेना में अपनी सेवाएँ देनी होती थी। औरतों को नागरिक का दर्जा नहीं मिलता था। व्यापारियों तथा शिल्पकारों के रूप में एथेन्स में रहने और काम करने वाले बहुत से विदेशियों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे। एथेन्स में खदानों, खेतों, घरों और कार्यशालाओं में काम कर रहे दासों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे। क्या एथेन्स में वास्तव में जनतंत्र था?
Solution: एथेन्स में स्थापित शासन व्यवस्था को प्रजातंत्र या गणतंत्र कहा जाता था, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष नागरिक (जो दास नहीं थे) भाग ले सकते थे। हालाँकि, इसे 'वास्तव में जनतंत्र' कहना पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें कई समूह शामिल नहीं थे:
  • महिलाओं को नागरिकता नहीं: एथेन्स में महिलाओं को नागरिक का दर्जा प्राप्त नहीं था और वे शासन-प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकती थीं।
  • दासों को अधिकार नहीं: खदानों, खेतों, घरों और कार्यशालाओं में काम करने वाले दासों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे।
  • विदेशियों को सीमित अधिकार: एथेन्स में रहने वाले और व्यापार करने वाले बहुत से विदेशियों को भी नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं थे।
इस प्रकार, एथेन्स का जनतंत्र केवल एक सीमित वर्ग के पुरुषों तक ही सीमित था, न कि सभी निवासियों के लिए।

कल्पना करो: वैशाली के उस सभागार में तुम अंदर झाँक रहे हो जहाँ मगध के राजाओं द्वारा आक्रमण का सामना करने के विषयों पर चर्चा की जा रही है। तुमने क्या सुना?

कल्पना करो: वैशाली के उस सभागार में तुम अंदर झाँक रहे हो जहाँ मगध के राजाओं द्वारा आक्रमण का सामना करने के विषयों पर चर्चा की जा रही है। तुमने क्या सुना?
Solution: वैशाली के सभागार में प्रवेश करने पर मैंने जो सुना, वह कुछ इस प्रकार था:

सभी राजा मगध की विशाल और शक्तिशाली सेना के बारे में चिंता व्यक्त कर रहे थे। वे मगध की सेना में बड़ी संख्या में पैदल सैनिकों, रथों और हाथियों की उपस्थिति का उल्लेख कर रहे थे। राजा आपस में इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि इतनी बड़ी और सुसज्जित सेना का मुकाबला कैसे किया जाए। उनकी बातों से घबराहट और अनिश्चितता का भाव झलक रहा था, क्योंकि मगध एक बहुत बड़ा और शक्तिशाली राज्य बन गया था, जिसका सामना करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। वे अपनी सुरक्षा और अपने गणराज्य को बचाने के तरीकों पर विचार-विमर्श कर रहे थे।

1. सही या गलत बताओ।

सही या गलत बताओ।
  • (क) अश्वमेध के घोड़े को अपने राज्य से गुजरने की छूट देने वाले राजाओं को यज्ञ में आमंत्रित किया जाता था।
  • (ख) राजा के ऊपर सारथी पवित्र जल का छिड़काव करता था।
  • (ग) पुरातत्त्वविदों को जनपदों की बस्तियों में महल मिले हैं।
  • (घ) चित्रित-धूसर पात्रों में अनाज रखा जाता था।
  • (ङ) महाजनपदों में बहुत से नगर क़िलाबंद थे।
Solution:
  • (क) सही: अश्वमेध यज्ञ में, राजा के छोड़े गए घोड़े को दूसरे राजाओं को अपने राज्य से गुजरने देना पड़ता था, और जो राजा इसकी अनुमति देते थे, उन्हें यज्ञ में आमंत्रित किया जाता था।
  • (ख) गलत: राजा के ऊपर सारथी द्वारा पवित्र जल छिड़कने का उल्लेख नहीं है; यह कार्य पुरोहित करते थे।
  • (ग) गलत: पुरातत्त्वविदों को जनपदों की बस्तियों में बड़े महल नहीं, बल्कि सामान्य घर और किलेबंदी के अवशेष मिले हैं। महल जैसी संरचनाएँ महाजनपदों से अधिक जुड़ी हैं।
  • (घ) गलत: चित्रित-धूसर पात्रों का उपयोग मुख्य रूप से खाना पकाने या भोजन परोसने के लिए किया जाता था, न कि अनाज रखने के लिए। अनाज को बड़े मिट्टी के बर्तनों या भंडारों में रखा जाता था।
  • (ङ) सही: महाजनपदों में कई बड़े नगर थे, और अपनी सुरक्षा के लिए इन नगरों के चारों ओर मज़बूत क़िलाबंदियाँ (दीवारें) बनाई जाती थीं।

2. नीचे दिए गए खानों में निम्नलिखित शब्द भरो।

नीचे दिए गए खानों में निम्नलिखित शब्द भरो।

शिकारी-संग्राहक, कृषक, व्यापारी, शिल्पकार, पशुपालक

Solution: इस प्रश्न के लिए एक रिक्त स्थान (जैसे कि एक ग्रिड या बॉक्स) की आवश्यकता होगी जिसमें इन शब्दों को भरा जा सके। यदि यह एक सामान्य प्रश्न है, तो इन शब्दों का उपयोग विभिन्न सामाजिक समूहों या व्यवसायों को दर्शाने के लिए किया जाता है जो उस काल में मौजूद थे। उदाहरण के लिए, इन शब्दों का उपयोग विभिन्न प्रकार के लोगों के बारे में जानकारी देने के लिए किया जा सकता है जो समाज का हिस्सा थे।
  • शिकारी-संग्राहक: वे लोग जो भोजन के लिए शिकार करते थे और कंद-मूल, फल आदि इकट्ठा करते थे।
  • कृषक: वे लोग जो खेती करते थे और अनाज उगाते थे।
  • व्यापारी: वे लोग जो वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते थे।
  • शिल्पकार: वे लोग जो विभिन्न वस्तुएँ बनाते थे, जैसे औजार, बर्तन, वस्त्र आदि।
  • पशुपालक: वे लोग जो पशुओं को पालते थे और उनसे प्राप्त उत्पाद (दूध, ऊन आदि) का उपयोग करते थे।

Common mistakes

  • वर्ण व्यवस्था के विरोध के कारणों को केवल एक बिंदु तक सीमित समझना।
  • ऋग्वेदिक राजाओं और महाजनपदों के राजाओं के बीच के अंतरों को ठीक से न बता पाना।
  • वज्जि संघ की शासन प्रणाली की विशिष्टताओं को अन्य महाजनपदों से अलग न कर पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।
  • महाजनपदों और वज्जि संघ की शासन प्रणालियों के बीच तुलनात्मक तालिका बनाएँ।
  • वर्ण व्यवस्था के विरोध के विभिन्न तर्कों को सूचीबद्ध करें और उनका विश्लेषण करें।

Practice MCQs

Q1. कुछ लोग जन्म के आधार पर वर्ण-निर्धारण को सही क्यों नहीं मानते थे?

Q2. महाजनपदों के राजाओं की एक प्रमुख विशेषता क्या थी जो ऋग्वेद के राजाओं में नहीं थी?

Q3. शिकारी और खाद्य-संग्राहक राजाओं को क्या प्रदान करते थे?

Q4. वज्जि संघ की शासन व्यवस्था अन्य महाजनपदों से कैसे भिन्न थी?

Q5. एथेन्स में लगभग 2500 साल पहले स्थापित शासन व्यवस्था को क्या कहा जाता था?

Frequently asked questions

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 6 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में प्राचीन भारत में जनपदों और महाजनपदों के विकास, राजाओं की भूमिका, वर्ण व्यवस्था और उस पर हुई प्रतिक्रियाओं, तथा वज्जि संघ जैसे गणराज्यों की शासन प्रणालियों को शामिल किया गया है।

महाजनपदों के राजा ऋग्वेद के राजाओं से कैसे भिन्न थे?

महाजनपदों के राजाओं के पास बड़ी सेनाएँ होती थीं, वे बड़े महलों में रहते थे और उनकी बड़ी राजधानियाँ होती थीं, जबकि ऋग्वेद के राजाओं के पास ये विशेषताएँ नहीं थीं।

वर्ण व्यवस्था का विरोध क्यों किया गया?

वर्ण व्यवस्था का विरोध इसलिए किया गया क्योंकि कुछ लोग इसे जन्म पर आधारित मानते थे जो सही नहीं था, कुछ राजा पुरोहितों से श्रेष्ठ मानते थे, और कुछ लोग व्यवसाय या अनुष्ठान के आधार पर निर्धारण को अनुचित मानते थे।

वज्जि संघ की शासन व्यवस्था की क्या विशेषता थी?

वज्जि संघ में कार्य आपसी मेल-जोल द्वारा किए जाते थे, पारंपरिक नियमों का पालन होता था, और पूर्ण व नियमित सभाएँ की जाती थीं, जो इसे अन्य महाजनपदों से अलग बनाती थी।

एथेन्स में स्थापित शासन व्यवस्था को क्या कहा जाता था?

लगभग 2500 साल पहले एथेन्स में स्थापित शासन व्यवस्था को प्रजातंत्र या गणतंत्र कहा जाता था।

क्या एथेन्स में सभी को नागरिक अधिकार प्राप्त थे?

नहीं, एथेन्स में औरतों, दासों, और विदेशियों को नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं थे, इसलिए इसे पूर्ण जनतंत्र नहीं माना जा सकता।

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