कक्षा 6 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 11 - जो देखकर भी नहीं देखते, छूना और देखना

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यह पृष्ठ कक्षा 6 के हिंदी विषय के NCERT समाधान प्रदान करता है, विशेष रूप से पाठ 11 'जो देखकर भी नहीं देखते' पर केंद्रित है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कैसे हम अपनी अन्य इंद्रियों, जैसे स्पर्श और श्रवण, का उपयोग करके दुनिया को गहराई से अनुभव कर सकते हैं, भले ही हमारी दृष्टि सीमित हो। समाधानों में हेलेन केलर के विचारों, प्रकृति के जादू और हमारी इंद्रियों के महत्व पर चर्चा की गई है। यह छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि दुनिया को केवल देखकर ही नहीं, बल्कि महसूस करके भी समझा जा सकता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. जो देखकर भी नही देखते, छुना और देखना

Chapter summary

कक्षा 6 हिंदी के पाठ 11 'जो देखकर भी नहीं देखते' के NCERT समाधान छात्रों को दृष्टिहीनता के अनुभव और अन्य इंद्रियों के महत्व को समझने में मदद करते हैं। यह पाठ सिखाता है कि कैसे हेलेन केलर जैसी हस्तियों ने स्पर्श और श्रवण जैसी इंद्रियों के माध्यम से प्रकृति की सुंदरता का अनुभव किया। समाधानों में प्रकृति के चमत्कारों, विभिन्न वस्तुओं के स्पर्श और श्रवण के माध्यम से पहचान, और इंद्रियों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा शामिल है। यह छात्रों को अपनी इंद्रियों के प्रति जागरूक होने और दुनिया को अधिक गहराई से अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

Learning outcomes

  • यह समझना कि दृष्टिहीन व्यक्ति दुनिया को कैसे अनुभव करते हैं।
  • स्पर्श और श्रवण जैसी अन्य इंद्रियों के महत्व को पहचानना।
  • प्रकृति की सुंदरता का अनुभव करने के विभिन्न तरीकों को समझना।
  • हेलेन केलर के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेना।
  • अपनी इंद्रियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना।

Topics covered

Paper topics

  • दृष्टिहीनता का अनुभव
  • इंद्रियों का महत्व (स्पर्श, श्रवण)
  • प्रकृति का सौंदर्य और अनुभव
  • हेलेन केलर का जीवन और विचार
  • संवेदना और अनुभूति
  • वस्तुओं की पहचान (स्पर्श द्वारा)
  • श्रवण के माध्यम से पहचान
  • जीवन का आनंद और इंद्रियों का उपयोग

Important topics

  • अन्य इंद्रियों द्वारा दुनिया का अनुभव
  • प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता
  • हेलेन केलर के अनुभव
  • दृष्टि का महत्व और उसकी सीमाएं
  • स्पर्श और श्रवण की भूमिका

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे सचमुच बहुत कम देखते हैं' - हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता था?
Solution: हेलेन केलर को ऐसा इसलिए महसूस होता था क्योंकि वे स्वयं अपनी अन्य इंद्रियों, विशेषकर स्पर्श और श्रवण के माध्यम से प्रकृति की सुंदरता और बारीकियों का गहरा अनुभव कर लेती थीं। एक बार उनकी एक मित्र जंगल घूमकर आने के बाद बोली कि उसने 'कुछ खास नहीं देखा'। इस पर हेलेन को आश्चर्य हुआ कि आँखें होते हुए भी उनकी मित्र प्रकृति की उन अद्भुत चीज़ों को महसूस नहीं कर पाई, जिन्हें हेलेन स्वयं स्पर्श से अनुभव कर लेती थीं। इससे उन्हें लगा कि बहुत से लोग अपनी आँखों का पूरा उपयोग नहीं करते और आस-पास की दुनिया की सुंदरता को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

प्रश्न 2

'प्रकृति का जादू' किसे कहा गया है?
Solution: 'प्रकृति का जादू' प्रकृति के अनमोल खजाने, उसके अद्भुत सौंदर्य और उसमें हर पल होने वाले बदलावों को कहा गया है। इसमें ऋतुओं का बदलना, वसंत में फूलों का खिलना, बागों में पेड़ों पर बैठे पक्षियों का कलरव, और कालीन की तरह फैले हरे-भरे घास के मैदान जैसी चीज़ें शामिल हैं, जो प्रकृति की सुंदरता और निरंतरता को दर्शाती हैं।

प्रश्न 3

'कुछ खास तो नहीं' - हेलेन की मित्र ने यह जवाब किस मौके पर दिया और यह सुनकर हेलेन को आश्चर्य क्यों हुआ?
Solution: हेलेन की मित्र ने यह जवाब तब दिया जब वह जंगल में घूमकर वापस लौटी और हेलेन केलर ने उससे जंगल के बारे में पूछा। यह सुनकर हेलेन को बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि वे स्वयं आँखों से न देख पाने के बावजूद स्पर्श जैसी अन्य इंद्रियों से प्रकृति की कई चीज़ों को महसूस कर लेती थीं और उनका आनंद उठा लेती थीं। उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि आँखें होते हुए भी उनकी मित्र प्रकृति की सुंदरता और बारीकियों को महसूस नहीं कर पाई।

प्रश्न 4

हेलेन केलर प्रकृति की किन चीज़ों को छूकर और सुनकर पहचान लेती थीं? पाठ पढ़कर इसका उत्तर लिखो।
Solution: पाठ के अनुसार, हेलेन केलर प्रकृति की कई चीज़ों को स्पर्श और श्रवण के माध्यम से पहचान लेती थीं। वे भोज-पत्र के पेड़ की चिकनी छाल और चीड़ की खुरदरी छाल को छूकर पहचान लेती थीं। वसंत ऋतु में, वे टहनियों में नई कलियों के आने, फूलों की पंखुड़ियों की मखमली सतह और उनकी घुमावदार बनावट को भी छूकर महसूस कर लेती थीं। इसके अतिरिक्त, वे चिड़िया के मधुर स्वर को सुनकर भी उसे पहचान लेती थीं।

प्रश्न 5

'जबिक इस नियामत से ज़िंदगी को खुशियों के इन्द्रधनुषी रंगों से हरा-भरा जा सकता है।' - तुम्हारी नज़र में इसका क्या अर्थ हो सकता है?
Solution: इस वाक्य का अर्थ है कि दृष्टि (देखने की क्षमता) ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल वरदान है। यदि हम इस वरदान का सही उपयोग करें और प्रकृति व जीवन की सुंदरता को गहराई से अनुभव करें, तो हम अपने जीवन को खुशियों से भर सकते हैं। इसका मतलब है कि हमें केवल अपनी आँखों से ही नहीं, बल्कि अपने दिल और अन्य इंद्रियों से भी दुनिया को महसूस करना चाहिए, जिससे जीवन अधिक रंगीन और आनंदमय बन सके। हमें इस नियामत के लिए ईश्वर का आभारी होना चाहिए और इसका सम्मान करना चाहिए।

प्रश्न 1

आज तुमने अपने घर से आते हुए बारीकी से क्या-क्या देखा-सुना? मित्रों के साथ सामूहिक चर्चा कीजिए।
Solution: आज जब मैं अपने घर से विद्यालय आ रही थी, तो मैंने रास्ते में कई चीज़ें देखीं और सुनीं। विद्यालय के फाटक से बाहर निकलते ही मुझे खोमचे वालों की आवाज़ें सुनाई पड़ीं जो अपने सामान की ओर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे थे। सड़क पर कार, साइकिलों, रिक्शा और बसों की भीड़ थी, और वे एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। इन वाहनों के शोरगुल से बचकर जब मैं अपने घर की ओर जाने वाली शांत सड़क पर मुड़ी, तो मुझे सड़क के दोनों ओर लगे गुलमोहर, अशोक और आम के पेड़ों से आती ठंडी हवा का स्पर्श महसूस हुआ। इन पेड़ों पर फुदकती नन्हीं गिलहरियों को ऊपर-नीचे आते-जाते देखना भी एक सुखद अनुभव था। माँ का ध्यान आने पर मैं दौड़कर घर की ओर चल पड़ी।

प्रश्न 2

कान से न सुनने पर आस-पास की दुनिया कैसी लगती होगी? इस पर टिप्पणी लिखो और साथियों के साथ विचार करो।
Solution: यदि हम कान से न सुन पाएं, तो हमारे आस-पास की दुनिया बहुत अलग और शायद थोड़ी सूनी लगने लगेगी। हम न तो किसी की बात समझ पाएंगे और न ही अपनी बात दूसरों को समझा पाएंगे, जिससे विचारों का आदान-प्रदान मुश्किल हो जाएगा। संगीत, पक्षियों का चहचहाना, हँसी, या किसी की पुकार जैसी ध्वनियाँ हमारे जीवन का हिस्सा नहीं होंगी। इससे हमें अकेलापन महसूस हो सकता है और बाहरी दुनिया से हमारा जुड़ाव कम हो जाएगा। यह अनुभव निश्चित रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होगा।

प्रश्न 3

कई चीज़ों को छूकर ही पता चलता है, जैसे - कपड़े की चिकनाहट या खुरदरापन, पत्तियों की नसों का उभार आदि। ऐसी और चीज़ों की सूची तैयार करो जिनको छूने से उनकी खासियत का पता चलता है।
Solution: ऐसी कई चीज़ें हैं जिन्हें छूकर उनकी खासियत का पता चलता है। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
  • कपड़े: रेशम का मुलायमपन, ऊनी कपड़े की खुरदरापन, सूती कपड़े की कोमलता।
  • फल: संतरे का खुरदुरा छिलका, केले का चिकना छिलका, अनानास के कांटेदार बाहरी हिस्से।
  • पेड़-पौधे: गुलाब की पंखुड़ियों की मखमली सतह, कैक्टस के कांटे, पेड़ की छाल की खुरदरी या चिकनी बनावट।
  • अन्य वस्तुएँ: लकड़ी की चिकनाई या खुरदरापन, धातु की ठंडक, बर्फ़ की शीतलता, मिट्टी का नम अहसास।

प्रश्न 4

हम अपनी पाँचों इंद्रियों में से आँखों का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा करते हैं। ऐसी चीज़ों के अहसासों की तालिका बनाओ जो तुम बाकी चार इंद्रियों से महसूस करते हो - सुनना, चखना, सूँघना, छूना।
Solution: यहाँ एक तालिका दी गई है जिसमें चार इंद्रियों से महसूस होने वाले अहसासों के उदाहरण शामिल हैं:

सुनना (कान)

मधुर ध्वनियाँ: कोयल की बोली, पक्षियों का चहचहाना, मधुर संगीत, बच्चों की हँसी।

कर्कश ध्वनियाँ: ट्रैफिक का शोर, मशीन की आवाज़, तेज़ चीख।

चखना (जीभ)

मीठा स्वाद: फल, मिठाई, शहद।

खट्टा स्वाद: नींबू, इमली।

कड़वा स्वाद: करेला, नीम।

नमकीन स्वाद: नमक, चिप्स।

सूँघना (नाक)

सुगंध: फूलों की खुशबू, इत्र, ताज़ी पकी रोटी।

दुर्गंध: कूड़े का ढेर, गंदा नाला, सड़ी हुई चीज़ें।

छूना (त्वचा)

नरम अहसास: फूलों की पंखुड़ियाँ, बिल्ली का फर, रुई।

खुरदुरा अहसास: रेत, खुरदरी दीवार, अखरोट का छिलका।

ठंडा अहसास: बर्फ़, ठंडा पानी, धातु की वस्तु।

गर्म अहसास: गर्म चाय, आग, धूप।

प्रश्न 5

तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो तो तुम उससे प्रकृति के उसके अनुभवों के बारे में क्या-क्या पूछना चाहोगे और क्यों?
Solution: यदि मुझे किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो, तो मैं उनसे प्रकृति के बारे में उनके अनुभवों को जानने के लिए कई प्रश्न पूछना चाहूँगा। मैं पूछूंगा कि वे हवा के झोंकों को कैसे महसूस करते हैं, क्या वे बारिश की बूंदों की आवाज़ और गंध को पहचान पाते हैं, और क्या वे फूलों की खुशबू से उन्हें पहचान लेते हैं। मैं यह भी जानना चाहूँगा कि वे मिट्टी की महक, पेड़ों की छाल की बनावट, या पक्षियों के गीतों से प्रकृति के विभिन्न रूपों का अनुभव कैसे करते हैं। यह सब इसलिए पूछना चाहूँगा ताकि मैं यह समझ सकूँ कि वे अपनी अन्य इंद्रियों का उपयोग करके दुनिया को कैसे अनुभव करते हैं और प्रकृति के साथ उनका कैसा गहरा संबंध है, जो शायद हम देखने वाले लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

Common mistakes

  • केवल दृष्टि पर निर्भर रहना और अन्य इंद्रियों के महत्व को अनदेखा करना।
  • प्रकृति के सूक्ष्म अनुभवों को नज़रअंदाज़ करना।
  • दृष्टिहीन व्यक्तियों के अनुभवों को समझने में कठिनाई।
  • पाठ में दिए गए उदाहरणों को सामान्य जीवन से न जोड़ पाना।

Revision tips

  • पाठ में हेलेन केलर के अनुभवों पर विशेष ध्यान दें।
  • अपनी इंद्रियों का उपयोग करके आसपास की दुनिया को अनुभव करने का अभ्यास करें।
  • प्रकृति की उन चीज़ों की सूची बनाएँ जिन्हें आप छूकर या सुनकर पहचान सकते हैं।
  • पाठ के मुख्य विचारों पर चर्चा करें और अपने दोस्तों के साथ अपने अनुभव साझा करें।

Practice MCQs

Q1. हेलेन केलर को उनकी मित्र के जंगल के अनुभव के बारे में क्या सुनकर आश्चर्य हुआ?

Q2. 'प्रकृति का जादू' किसे कहा गया है?

Q3. हेलेन केलर भोज-पत्र के पेड़ की छाल को कैसे पहचान लेती थीं?

Q4. पाठ के अनुसार, दृष्टि एक ईश्वर प्रदत्त क्या है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सी चीज़ छूकर महसूस की जा सकती है?

Frequently asked questions

कक्षा 6 हिंदी के पाठ 11 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 6 हिंदी के पाठ 11 'जो देखकर भी नहीं देखते' का मुख्य विषय यह है कि हम अपनी अन्य इंद्रियों, जैसे स्पर्श और श्रवण, का उपयोग करके भी दुनिया को गहराई से अनुभव कर सकते हैं, और दृष्टिहीनता के अनुभव को समझना।

हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता था कि 'जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे सचमुच बहुत कम देखते हैं'?

हेलेन केलर को ऐसा इसलिए लगता था क्योंकि वे स्वयं स्पर्श और श्रवण जैसी इंद्रियों से प्रकृति की सुंदरता का गहरा अनुभव कर लेती थीं, जबकि उनकी मित्र, जिसके पास आँखें थीं, जंगल घूमने के बाद भी कुछ खास न देख पाने की बात कहती थी।

इस पाठ से हमें क्या सीखने को मिलता है?

इस पाठ से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें अपनी इंद्रियों का महत्व समझना चाहिए और केवल दृष्टि पर निर्भर न रहकर, स्पर्श, श्रवण, गंध और स्वाद जैसी अन्य इंद्रियों से भी दुनिया का अनुभव करना चाहिए। यह हमें प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद मिलेगी।

पाठ में 'प्रकृति का जादू' किसे कहा गया है?

पाठ में प्रकृति के अनमोल सौंदर्य, ऋतुओं के बदलाव, फूलों के खिलने, पक्षियों के कलरव और घास के मैदानों जैसे प्राकृतिक चमत्कारों को 'प्रकृति का जादू' कहा गया है।

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