कक्षा 6 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 36 ऐसे ऐसे
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की पुस्तक 'ऐसे ऐसे' के पाठ 36 के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह एकांकी छात्रों को संवाद, कल्पना और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने में मदद करती है। समाधानों में पाठ के पात्रों, उनके संवादों और विभिन्न स्थितियों के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं का गहन विश्लेषण शामिल है। छात्र स्कूल के बहानों, वास्तविक बीमारी और संकट के समय की बातचीत जैसी अवधारणाओं को समझेंगे। यह सामग्री छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 36 |
Chapter summary
कक्षा 6 हिंदी के पाठ 36 'ऐसे ऐसे' के ये NCERT समाधान एकांकी के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं। इसमें बैठक के दृश्य का वर्णन, मोहन के 'ऐसे ऐसे' कहने के पीछे के कारणों की पड़ताल, और स्कूल से बचने के लिए बनाए गए बहानों पर चर्चा शामिल है। समाधान छात्रों को संवाद की बारीकियों को समझने, अनुमान लगाने और कल्पना करने तथा संकटकालीन स्थितियों में संवाद करने का तरीका सिखाते हैं। यह पाठ छात्रों की समझ और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Learning outcomes
- एकांकी के दृश्य का विस्तार से वर्णन करना सीखें।
- पात्रों के व्यवहार और उनके पीछे के कारणों का विश्लेषण करें।
- बहाने बनाने और वास्तविक बीमारी के बीच अंतर को समझें।
- संवादों में प्रयुक्त भाषा की बारीकियों को पहचानें।
- संकटकालीन स्थितियों में प्रभावी ढंग से संवाद करना सीखें।
- कल्पना और अनुमान के आधार पर कहानी का विस्तार करें।
Topics covered
Paper topics
- एकांकी का दृश्य वर्णन
- पात्रों का विश्लेषण
- संवाद लेखन
- बहाने और बीमारियाँ
- भाषा की बारीकियां
- संकटकालीन संवाद
- कल्पना और अनुमान
- पाठ का सारांश
Important topics
- एकांकी के पात्रों और उनके संवादों को समझना
- मोहन के 'ऐसे ऐसे' के पीछे के कारणों का विश्लेषण
- स्कूल से बचने के बहानों की पहचान
- संकटकालीन स्थितियों में संवाद का अभ्यास
- पाठ में प्रयुक्त मुहावरों और बोलियों का अर्थ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
यह बैठक एक आधुनिक और आरामदायक फ्लैट के अंदर का दृश्य है। बैठक का एक दरवाजा सीधे सड़क की ओर जाने वाले बरामदे में खुलता है, जिससे बाहर की हलचल का कुछ आभास हो सकता है। बैठक के अंदर का माहौल शांत और सुंदर है। संभवतः इसमें आरामदायक सोफे, एक कॉफी टेबल, और शायद कुछ सजावटी सामान जैसे तस्वीरें या पौधे रखे होंगे। कमरे में एक फोन भी रखा है, जो संचार का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह बैठक घर के सदस्यों के आराम करने, मेहमानों से मिलने या फोन पर बात करने के लिए एक केंद्रीय स्थान हो सकती है।
प्रश्न 2
माँ मोहन के 'ऐसे-ऐसे' कहने पर घबरा रही थी क्योंकि वह मोहन के पेट दर्द का कारण समझ नहीं पा रही थी। यह कोई सामान्य या पहचानी जाने वाली बीमारी नहीं लग रही थी। मोहन का बार-बार 'ऐसे-ऐसे' कहना और उसका दर्द का सटीक कारण न बता पाना माँ के लिए चिंता का विषय था, जिससे वह परेशान और घबराई हुई थी कि कहीं मोहन को कोई गंभीर समस्या तो नहीं है।
प्रश्न 3
मास्टर जी अक्सर उन बहानों को तुरंत समझ जाते हैं जो स्कूल से बचने के लिए बनाए जाते हैं और जिन्हें छात्र बार-बार इस्तेमाल करते हैं। ऐसे कुछ सामान्य बहाने हो सकते हैं:
- पेट दर्द या सिर दर्द का बहाना, खासकर परीक्षा के दिनों में।
- बीमार होने का नाटक करना, जैसे बुखार या उल्टी का बहाना।
- घर पर किसी खास काम का बहाना, जैसे किसी रिश्तेदार का आना या किसी की तबीयत खराब होना।
- स्कूल यूनिफॉर्म या होमवर्क खो जाने का बहाना।
- पालतू जानवर के बीमार होने या खो जाने का बहाना।
ये ऐसे बहाने हैं जिन्हें मास्टर जी अक्सर सुनते हैं और समझ जाते हैं कि छात्र स्कूल न आने का प्रयास कर रहा है।
प्रश्न 1
अगर मोहन को सचमुच पेट में दर्द हो जाता और उसकी बातों पर कोई विश्वास नहीं करता, तो उस पर बहुत बीतती। वह बहुत अकेला और निराश महसूस करता। उसे लगता कि कोई उसकी तकलीफ को समझ ही नहीं रहा है। वह शायद और भी ज्यादा दर्द में होता और उसे यह भी समझ नहीं आता कि वह अपनी बात कैसे समझाए। उसे शायद यह भी डर लगता कि अगर वह सच में बीमार है तो उसका इलाज कैसे होगा। यह अनुभव उसके लिए बहुत कष्टदायक और भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला होता।
प्रश्न 2
- इत्ती नयी - नयी बीमारियाँ निकली हैं ,
- राम मारी बीमारियों ने तंग कर दिया ,
- तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है । •
अनुमान लगाओ , इन पंक्तियों को दूसरे ढंग से कैसे लिखा जा सकता है?लेखक ने संवाद को अधिक सजीव और प्रभावशाली बनाने के लिए बोलियों के रंग-ढंग का प्रयोग किया है। इन पंक्तियों को दूसरे ढंग से इस प्रकार लिखा जा सकता है:
- 'इत्ती नयी - नयी बीमारियाँ निकली हैं' को ऐसे लिखा जा सकता है: 'आजकल कितनी नई-नई बीमारियाँ आ गई हैं।' या 'बाजार में तरह-तरह की नई बीमारियाँ फैल रही हैं।'
- 'राम मारी बीमारियों ने तंग कर दिया' को ऐसे लिखा जा सकता है: 'इन बीमारियों ने बहुत परेशान कर दिया है।' या 'बीमारियों से तंग आ गए हैं।'
- 'तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है' को ऐसे लिखा जा सकता है: 'तुम बहुत चालाक हो।' या 'तुम्हारे मन में कुछ और चल रहा है।' या 'तुम बहुत होशियार हो और कुछ छिपा रहे हो।'
इन बदलावों से संवाद का मूल अर्थ तो वही रहता है, लेकिन बोलचाल की भाषा का वह खास रंग और अंदाज़ थोड़ा कम हो जाता है जो लेखक ने संवाद में विशेषता लाने के लिए इस्तेमाल किया है।
प्रश्न 3
मैं: अरे मोहन, क्या हाल है? सुना है तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है।
मोहन: (दर्द से कराहते हुए) हाँ यार, पेट में बहुत तेज दर्द हो रहा है।
मैं: क्या हुआ? कब से है ये दर्द?
मोहन: पता नहीं, सुबह से ही 'ऐसे-ऐसे' हो रहा है। बहुत तेज चुभन सी हो रही है।
मैं: डॉक्टर को दिखाया? माँ-पापा क्या कह रहे हैं?
मोहन: माँ तो बहुत परेशान है, डॉक्टर को बुलाने की बात कर रही है। पर मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा।
मैं: कोई बात नहीं, आराम करो। शायद कुछ खाया-पिया ठीक न हो। मैं तुम्हारे लिए कुछ देर यहीं बैठता हूँ, तुम्हें कुछ चाहिए तो बताना।
मोहन: धन्यवाद यार।
प्रश्न 4
संकट के समय के लिए हमें निम्नलिखित नंबर याद रखने चाहिए:
- पुलिस: 100 या 112 (आपातकालीन नंबर)
- फायर ब्रिगेड: 101 या 112 (आपातकालीन नंबर)
- डॉक्टर/एम्बुलेंस: 108 या 112 (आपातकालीन नंबर)
- अन्य स्थानीय आपातकालीन नंबर।
पुलिस से बात करते समय:
शांत रहें और स्पष्ट रूप से बताएं कि क्या हुआ है, कहाँ हुआ है, और क्या मदद चाहिए। जैसे: "नमस्ते, मेरा नाम [आपका नाम] है। मैं [स्थान का नाम] से बोल रहा हूँ। यहाँ [समस्या का संक्षिप्त विवरण, जैसे चोरी, दुर्घटना] हुई है। कृपया जल्दी मदद भेजें।"
फायर ब्रिगेड से बात करते समय:
तुरंत बताएं कि आग कहाँ लगी है, आग कितनी बड़ी है, और क्या कोई फंसा हुआ है। जैसे: "नमस्ते, मैं [स्थान का नाम] से बोल रहा हूँ। यहाँ [पता] पर आग लग गई है। आग काफी फैल गई है। कृपया जल्दी आएं।"
डॉक्टर/एम्बुलेंस से बात करते समय:
मरीज की स्थिति बताएं, जैसे कि क्या हुआ है, मरीज की उम्र, क्या वह होश में है, और क्या कोई गंभीर चोट है। जैसे: "नमस्ते, मुझे एम्बुलेंस की जरूरत है। मेरे घर में [पता] एक व्यक्ति [उम्र] बेहोश हो गया है / उसे तेज दर्द हो रहा है। कृपया जल्दी आएं।"
कक्षा में इन नंबरों को याद रखने और इन नंबरों पर कॉल करने का अभ्यास रोल-प्ले (अभिनय) के माध्यम से किया जा सकता है, जहाँ एक छात्र कॉल करने वाले की भूमिका निभाएगा और दूसरा संबंधित विभाग के अधिकारी की।
प्रश्न १
(मोहन हाँ में सिर हिलाता है।)
मोहन : जी , सब काम पूरा कर लिया है ।
इस स्थिति में नाटक का अंत क्या होता ? लिखो ।यदि मोहन सच में स्कूल का सारा काम पूरा कर लेता और मास्टर जी उससे पूछते, तो नाटक का अंत कुछ इस प्रकार हो सकता था:
मास्टर जी: (खुश होकर) बहुत अच्छे मोहन! मुझे खुशी है कि तुमने अपना काम समय पर पूरा किया। अब तुम आराम कर सकते हो या अपनी पसंद का कोई काम कर सकते हो।
मोहन: (राहत की सांस लेते हुए) जी, धन्यवाद सर।
इस स्थिति में, मोहन को स्कूल से छुट्टी मिल जाती क्योंकि उसने अपना काम पूरा कर लिया था। वह अपने पेट दर्द के बहाने की बजाय, अपने काम को पूरा करने के कारण आराम कर पाता। यह एक सकारात्मक अंत होता जहाँ मोहन को उसकी मेहनत का फल मिलता और उसे बहाने बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। वह शायद घर जाकर अपनी पसंद की चीजें करता या आराम करता, यह जानते हुए कि उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है।
Common mistakes
- बहाने और वास्तविक बीमारी के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से न समझना।
- संवादों में निहितार्थों को समझने में कठिनाई।
- संकटकालीन स्थितियों में आवश्यक जानकारी को याद रखने में चूक।
Revision tips
- एकांकी के मुख्य पात्रों और उनके संवादों को याद करें।
- मोहन द्वारा बनाए गए बहानों और वास्तविक बीमारी के बीच के अंतर पर ध्यान दें।
- संकटकालीन नंबरों और उनसे बातचीत के तरीके का अभ्यास करें।
- पाठ में प्रयुक्त विभिन्न बोलियों और मुहावरों को समझें।
Practice MCQs
Q1. मोहन के पेट में 'ऐसे ऐसे' कहने पर माँ क्यों घबरा रही थी?
Explanation: माँ मोहन की बीमारी के कारण को लेकर चिंतित थी क्योंकि यह कोई सामान्य या पहचानी जाने वाली बीमारी नहीं लग रही थी, जिससे वह घबरा रही थी।
Q2. पाठ के अनुसार, मास्टर जी किस तरह के बहानों को तुरंत समझ जाते हैं?
Explanation: मास्टर जी उन बहानों को आसानी से समझ जाते हैं जो विशेष रूप से स्कूल से बचने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, क्योंकि वे अक्सर पहले से सुने हुए या सामान्य होते हैं।
Q3. पाठ में 'लोचा-लोचा फिरे है' का क्या अर्थ है?
Explanation: वाक्यांश 'लोचा-लोचा फिरे है' का अर्थ है कि व्यक्ति बहुत कमजोर या ढीला-ढाला महसूस कर रहा है, जो पाठ के संदर्भ में मोहन की स्थिति को दर्शाता है।
Q4. संकट के समय कौन से नंबर याद रखना महत्वपूर्ण है?
Explanation: आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस, फायर ब्रिगेड और डॉक्टर जैसे आवश्यक सेवाओं के नंबर याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q5. पाठ में 'तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है' पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
Explanation: यह एक मुहावरा है जिसका अर्थ है कि व्यक्ति बहुत चालाक है और उसके मन में कुछ और चल रहा है, जिसे वह छिपाने की कोशिश कर रहा है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 6 के हिंदी विषय के लिए है, जो पाठ 36 'ऐसे ऐसे' पर आधारित है।
इस पाठ के समाधानों में किन मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
समाधानों में एकांकी के दृश्य का वर्णन, पात्रों के संवाद, बहानों की पहचान, वास्तविक बीमारी और संकटकालीन स्थितियों में संवाद जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ विकसित करने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और अभ्यास प्रश्न प्रदान करने के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।
पाठ में 'ऐसे ऐसे' का क्या मतलब है?
पाठ में 'ऐसे ऐसे' एक काल्पनिक या अस्पष्ट पेट दर्द का बहाना है जिसका उपयोग मोहन स्कूल जाने से बचने के लिए करता है। यह किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं है।
संकट के समय किन नंबरों को याद रखना चाहिए?
संकट के समय पुलिस, फायर ब्रिगेड और डॉक्टर जैसे आपातकालीन सेवाओं के नंबर याद रखना महत्वपूर्ण है।
क्या पाठ में कोई मुहावरे या विशेष बोलियाँ हैं?
हाँ, पाठ में 'लोचा-लोचा फिरे है' और 'तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है' जैसे मुहावरे और बोलियों के रंग-ढंग का प्रयोग किया गया है।
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