कक्षा 4 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 7 - दान का हिसाब

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यह पृष्ठ कक्षा 4 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'रिमझिम' के पाठ 7 'दान का हिसाब' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ राजा की कंजूसी, दान के महत्व और जरूरतमंदों की मदद करने की आवश्यकता पर केंद्रित है। समाधानों में राजा द्वारा दान न देने के कारणों, दरबारियों के डर, सन्यासी की चतुराई और राजा के गिड़गिड़ाने की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। इसमें 'अंदाज़ अपना-अपना' और 'जिम्मेदारी अपनी-अपनी' जैसे खंडों के माध्यम से छात्रों को अपनी भाषा में वाक्यों को व्यक्त करने और राज दरबार में विभिन्न पदों की जिम्मेदारियों को समझने में मदद मिलती है। साथ ही, यह पाठ कर्ण जैसे दानी व्यक्ति के बारे में जानकारी देता है और दान के अर्थ और कारणों पर प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के इरादों को समझने और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने में सहायता करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 4
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. दान का हिसाब

Chapter summary

कक्षा 4 हिंदी के पाठ 'दान का हिसाब' के ये NCERT समाधान छात्रों को कहानी के मुख्य पात्रों, विशेषकर कंजूस राजा और चतुर सन्यासी के बीच के संवाद को समझने में मदद करते हैं। इसमें राजा की दान न देने की प्रवृत्ति, दरबारियों के मन की बात और सन्यासी द्वारा अपनी भिक्षा प्राप्त करने की अनोखी विधि का विश्लेषण किया गया है। समाधान छात्रों को अपनी भाषा में वाक्यों को व्यक्त करने, विभिन्न जिम्मेदारियों को समझने और दान के महत्व को जानने का अवसर प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • राजा की कंजूसी और दान न देने के कारणों को समझना।
  • दरबारियों के राजा से डरने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • सन्यासी द्वारा दान मांगने की चतुराई भरी युक्ति को समझना।
  • वाक्यों को अपने शब्दों में व्यक्त करने का अभ्यास करना।
  • राज दरबार में मंत्री और भंडारी जैसी भूमिकाओं की जिम्मेदारियों को पहचानना।
  • दान का अर्थ और महत्व समझना, साथ ही कर्ण जैसे दानी व्यक्ति के बारे में जानना।

Topics covered

Paper topics

  • राजा की कंजूसी
  • दान का महत्व
  • सन्यासी की चतुराई
  • राजदरबार की व्यवस्था
  • मंत्री और भंडारी की जिम्मेदारियाँ
  • अकाल और सहायता
  • कर्ण जैसे दानी
  • दान के कारण

Important topics

  • राजा की दान न देने की प्रवृत्ति और उसके कारण।
  • सन्यासी द्वारा दान मांगने की अनोखी विधि।
  • राजदरबार में मंत्री और भंडारी की भूमिकाएँ।
  • दान का अर्थ, महत्व और विभिन्न कारण।

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Questions and Solutions

कहानी से (क)

राजा किसी को भी दान क्यों नहीं देना चाहता था?
Solution: राजा अपनी सुख-सुविधाओं पर तो बहुत अधिक धन खर्च करता था, परन्तु वह दूसरों के प्रति अत्यंत कंजूस था। इसी कंजूसी के कारण वह किसी को भी दान के रूप में कुछ भी देना पसंद नहीं करता था।

कहानी से (ख)

राज दरबार के लोग मन ही मन राजा को बुरा कहते थे, लेकिन वे राजा का विरोध क्यों नहीं कर पाते थे?
Solution: राजदरबार के लोग राजा को मन ही मन बुरा तो कहते थे, लेकिन वे उसका विरोध करने का साहस नहीं कर पाते थे। इसका मुख्य कारण यह था कि वे राजा से बहुत डरते थे। उन्हें इस बात का भय था कि कहीं राजा उन्हें किसी प्रकार का दंड न दे दे, इसलिए वे चुप रहते थे।

कहानी से (ग)

राजसभा में सज्जन और विद्वान लोग क्यों नहीं जाते थे?
Solution: राजसभा में सज्जन और विद्वान लोग इसलिए नहीं जाते थे क्योंकि वहाँ पर उनका उचित सत्कार या सम्मान नहीं होता था। उन्हें वहाँ कोई महत्व नहीं दिया जाता था, जिससे वे वहाँ जाना पसंद नहीं करते थे।

कहानी से (घ)

सन्यासी ने सीधे-सीधे शब्दों में भिक्षा क्यों नहीं माँग ली?
Solution: सन्यासी ने सीधे-सीधे भिक्षा इसलिए नहीं माँगी क्योंकि यदि वह ऐसा करता, तो राजा उसे इतनी बड़ी रकम देने के लिए कभी भी सहमत नहीं होता। सन्यासी जानता था कि राजा कंजूस है, इसलिए उसने एक ऐसी युक्ति अपनाई जिससे राजा को लगा कि वह बहुत छोटी रकम माँग रहा है, जबकि वास्तव में वह बड़ी रकम थी।

कहानी से (ङ)

राजा को सन्यासी के आगे गिड़गिड़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
Solution: राजा को सन्यासी के आगे गिड़गिड़ाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि राजा ने सन्यासी को भिक्षा देने का वचन दे दिया था। सन्यासी की शर्त के अनुसार, खजाने से दस लाख से भी अधिक रूपए निकलने वाले थे, जिससे राजा दिवालिया हो जाता। अपने राजकोष को इस भारी नुकसान से बचाने के लिए राजा को गिड़गिड़ाना पड़ा।

अंदाज़ अपना-अपना (क)

'दान के वक्त उनकी मुट्ठी बंद हो जाती थी।' तुम इस वाक्य को किस तरह से कहोगे?
Solution: इस वाक्य को इस तरह से कहा जा सकता है: दान देने के समय राजा बहुत कंजूसी करने लगते थे और पैसे खर्च करने से कतराते थे।

अंदाज़ अपना-अपना (ख)

'हिसाब देकर मंत्री का चेहरा फीका पड़ गया।' तुम इस वाक्य को किस तरह से कहोगे?
Solution: इस वाक्य को इस तरह से कहा जा सकता है: हिसाब देखकर मंत्री बहुत घबरा गया और उसका चेहरा डर या चिंता के कारण पीला पड़ गया।

अंदाज़ अपना-अपना (ग)

'सन्यासी की बात सुनकर सभी की जान में जान आई।' तुम इस वाक्य को किस तरह से कहोगे?
Solution: इस वाक्य को इस तरह से कहा जा सकता है: सन्यासी की बात सुनकर सभी को बहुत राहत महसूस हुई और उनका डर कम हो गया।

अंदाज़ अपना-अपना (घ)

'लाखों रूपए राजकोष में मौजूद हैं, जैसे धन का सागर हो।' तुम इस वाक्य को किस तरह से कहोगे?
Solution: इस वाक्य को इस तरह से कहा जा सकता है: राजकोष में इतने सारे पैसे थे कि ऐसा लगता था मानो धन का भंडार हो।

साथी हाथ बढ़ाना

कभी-कभी कुछ इलाकों में बारिश बिल्कुल भी नहीं होती। नदी-नाले, तालाब, सब सूख जाते हैं। फसलों के लिए पानी नहीं मिलता, खेत सूख जाते हैं। पशु-पक्षी, जानवर, लोग भूख से मरने लगते हैं। ऐसे समय में वहाँ रहने वाले लोगों की मदद की जरूरत होती है। तुम भी लोगों की मदद जरूर कर सकते हो। सोच कर बताओ कि तुम अकाल में परेशान लोगों की मदद कैसे करोगे?
Solution: अकाल से पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए, मैं सबसे पहले अपनी कक्षा के सभी साथियों को इस समस्या के बारे में बताऊंगा। हम सब मिलकर पैसे इकट्ठा करने का प्रयास करेंगे। इस पैसे से हम खाने-पीने की आवश्यक सामग्री जैसे अनाज, दालें, पानी और अन्य जरूरी चीजें खरीदेंगे। फिर हम इन सामग्रियों को उन जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाने की व्यवस्था करेंगे। इसके अतिरिक्त, हम अपने शिक्षकों और बड़ों से भी अपील करेंगे कि वे इस नेक काम में हमारी मदद करें और अधिक से अधिक सहायता प्रदान करें।

जिम्मेदारी अपनी-अपनी (क)

तुम्हारे विचार से राज दरबार में मंत्री की क्या जिम्मेदारी होगी?
Solution: मेरे विचार से, राजदरबार में मंत्री की मुख्य जिम्मेदारी पूरे राज्य की देखरेख करना होगी। वह राजा को महत्वपूर्ण मामलों में सलाह देगा ताकि राज्य का शासन सुचारू रूप से चलता रहे। मंत्री की सलाह पर ही राजा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करता है और राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय लेता है। वह राजा और प्रजा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।

जिम्मेदारी अपनी-अपनी (ख)

तुम्हारे विचार से राज दरबार में भंडारी की क्या जिम्मेदारी होगी?
Solution: मेरे विचार से, राजदरबार में भंडारी की मुख्य जिम्मेदारी राजा के खजाने की देखभाल करना होगी। वह राजकोष में जमा धन और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा हिसाब-किताब रखेगा। राजा के आदेशानुसार, वह धन के लेन-देन का प्रबंधन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि खजाने की सुरक्षा बनी रहे।

करण जैसा दानी (क)

पता करो कि कर्ण कौन थे?
Solution: कर्ण महाभारत काल के एक महान योद्धा और कुंती के सबसे बड़े पुत्र थे। उन्हें उनकी उदारता और दानशीलता के लिए जाना जाता था। वे अपने जीवनकाल में बहुत बड़े दानी माने जाते थे।

करण जैसा दानी (ख)

'कर्ण जैसे दानी' का क्या मतलब है?
Solution: 'कर्ण जैसे दानी' का मतलब है कि कोई व्यक्ति इतना उदार और दानी हो कि वह अपनी सारी संपत्ति या सब कुछ दूसरों की भलाई के लिए दान कर दे। यह किसी की अत्यधिक दानशीलता को दर्शाने वाला एक मुहावरा है।

करण जैसा दानी (ग)

दान क्या होता है?
Solution: दान वह कार्य है जिसमें किसी जरूरतमंद व्यक्ति को बिना किसी स्वार्थ के कोई वस्तु या सहायता स्वेच्छा से भेंट की जाती है। यह किसी की मदद करने की भावना से किया जाता है।

करण जैसा दानी (घ)

किन-किन कारणों से लोग दान करते हैं?
Solution: लोग विभिन्न कारणों से दान करते हैं। मुख्य कारण यह है कि वे दूसरों की मदद करना चाहते हैं और उनकी पीड़ा को कम करना चाहते हैं। कुछ लोग पुण्य कमाने या ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए दान करते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग समाज में अपनी अच्छी छवि बनाने या यश प्राप्त करने के लिए भी दान करते हैं।

Common mistakes

  • राजा के दान न देने के पीछे के वास्तविक कारणों को न समझ पाना।
  • सन्यासी की युक्ति के पीछे की चालाकी को अनदेखा करना।
  • वाक्यों को अपने शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई।
  • दान के वास्तविक अर्थ और महत्व को सतही तौर पर समझना।

Revision tips

  • कहानी के मुख्य पात्रों - राजा, सन्यासी और मंत्री - के चरित्रों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • सन्यासी द्वारा दान मांगने की विधि को विस्तार से समझें।
  • 'अंदाज़ अपना-अपना' खंड के वाक्यों को अपने शब्दों में कहने का अभ्यास करें।
  • दान के महत्व और कर्ण जैसे दानी व्यक्ति के बारे में जानकारी को याद रखें।
  • पाठ में आई नई शब्दावली और मुहावरों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. राजा किसी को भी दान क्यों नहीं देना चाहता था?

Q2. राजदरबार के लोग राजा का विरोध क्यों नहीं कर पाते थे?

Q3. सन्यासी ने सीधे-सीधे भिक्षा क्यों नहीं माँगी?

Q4. 'दान के वक्त उनकी मुट्ठी बंद हो जाती थी' - इस वाक्य का क्या अर्थ है?

Q5. भंडारी की मुख्य जिम्मेदारी क्या होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 4 हिंदी के पाठ 'दान का हिसाब' में मुख्य पात्र कौन हैं?

इस पाठ में मुख्य पात्र कंजूस राजा और एक चतुर सन्यासी हैं। मंत्री और भंडारी जैसे सहायक पात्र भी हैं।

राजा दान क्यों नहीं देना चाहता था?

राजा बहुत कंजूस था और अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च करना पसंद करता था, इसलिए वह दूसरों को दान नहीं देना चाहता था।

सन्यासी ने राजा से दान मांगने के लिए क्या तरीका अपनाया?

सन्यासी ने सीधे भिक्षा मांगने के बजाय, राजा से एक विशेष प्रकार का दान मांगा जिसमें हर दिन दान की राशि दोगुनी होती जाती थी, जिससे राजा को अंततः बड़ी रकम देनी पड़ी।

'अंदाज़ अपना-अपना' खंड का क्या उद्देश्य है?

इस खंड का उद्देश्य छात्रों को दिए गए वाक्यों को अपनी भाषा और समझ के अनुसार व्यक्त करने का अभ्यास कराना है, जिससे उनकी भाषा अभिव्यक्ति क्षमता बढ़े।

इस पाठ से हमें दान के बारे में क्या सीखने को मिलता है?

यह पाठ सिखाता है कि दान एक महत्वपूर्ण गुण है और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। यह यह भी बताता है कि दान केवल पैसे का नहीं होता, बल्कि मदद की भावना महत्वपूर्ण है।

कर्ण कौन थे और उन्हें दानी क्यों कहा जाता है?

कर्ण महाभारत काल के एक महान योद्धा और दानवीर थे। वे इतने दानी थे कि अपना सब कुछ दान में दे देते थे, इसीलिए 'कर्ण जैसे दानी' का अर्थ है अत्यंत उदार और दानशील व्यक्ति।

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