CBSE Class 4 आस-पास: पहाडों से समुंदर तक NCERT Solutions
This chapter, 'पहाडों से समुंदर तक' (From Mountains to the Sea), for CBSE Class 4 आस-पास, delves into the journey of a river and the impact of human activities on its water quality. Through engaging questions and detailed solutions, students will explore how a pristine river can become polluted due to factories, settlements, and waste disposal. The solutions explain the visual changes in the river's appearance, the reasons for the decline in aquatic life, and the importance of keeping water sources clean. This chapter encourages critical thinking about environmental responsibility and helps students understand the consequences of pollution on natural resources. These NCERT Solutions are designed to aid students in understanding the chapter's core concepts, preparing them effectively for their exams by clarifying complex ideas with simple explanations and step-by-step reasoning.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | आस-पास |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 12 |
Chapter summary
Chapter 12, 'पहाडों से समुंदर तक', in CBSE Class 4 आस-पास focuses on the life cycle of a river and the environmental challenges it faces. The NCERT Solutions provided cover the transformation of a clean river into a polluted one due to industrial waste, domestic sewage, and other human activities. Students will learn to identify the sources of pollution, understand its effects on aquatic life and water quality, and reflect on the importance of preserving rivers. The solutions encourage observation and discussion, making environmental awareness a key learning outcome.
Learning outcomes
- Understand the journey of a river from its origin to the sea.
- Identify the causes of river pollution.
- Explain the effects of pollution on aquatic life and water quality.
- Discuss the importance of keeping rivers clean.
- Analyze visual information from a diagram to answer questions.
- Reflect on personal choices regarding environmental preservation.
Topics covered
Paper topics
- River journey
- Water pollution
- Sources of pollution (factories, settlements)
- Impact of pollution on aquatic life
- Changes in water quality
- Environmental responsibility
- Conservation of rivers
- Human impact on nature
Important topics
- Causes and effects of river pollution
- Human activities impacting rivers
- Importance of clean water
- Environmental conservation
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
नाव, बहता पानी, नीला, मछलियाँ, पानी के पौधे, नदी, बड़ा जहाज, तेल, नदी के किनारे, बदबू, फैक्ट्रियाँ, जानवर, कपड़े धोना, दूसरे काम, बदलाव, शहर।
कहानी का नाम: 'नदी का बदलता रूप'
बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और साफ नदी बहती थी। उसका पानी एकदम नीला और निर्मल था, जिसमें रंग-बिरंगी मछलियाँ खुशी-खुशी तैरती थीं और पानी के पौधे भी स्वस्थ थे। नदी के किनारे का वातावरण बहुत शांत और मनोरम था।
धीरे-धीरे, नदी के किनारे एक फैक्ट्री लगाई गई। फैक्ट्री के कारण, लोगों ने नदी के पास रहना शुरू कर दिया और कुछ ही समय में वहाँ एक छोटा सा शहर बस गया। शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए, बड़े-बड़े जहाज नदी से सामान लाने-ले जाने लगे। कभी-कभी इन जहाजों से तेल रिसने लगता था, जो पानी में मिलकर उसे गंदा कर देता था।
शहर के लोग नदी का इस्तेमाल कई कामों के लिए करने लगे। वे अपने कपड़े, बर्तन और पालतू जानवरों को भी नदी में ही धोने लगे। घरों से निकलने वाला गंदा पानी भी सीधे नदी में बहाया जाने लगा। फैक्ट्री से निकलने वाला कचरा भी नदी में ही फेंका जाने लगा।
इन सब कारणों से नदी का पानी धीरे-धीरे गंदा और बदबूदार हो गया। मछलियों की संख्या कम होने लगी और कुछ तो मर भी गईं। पानी के पौधे भी मुरझाने लगे। वह सुंदर नदी अब वैसी नहीं रही थी, उसका रूप पूरी तरह बदल गया था। यह बदलाव इंसानी गतिविधियों का सीधा परिणाम था।
प्रश्न 2
जहाँ से नदी निकलना शुरू हो रही है, वहाँ पानी का रंग मूल रूप से रंगहीन होता है। यह बहुत साफ और शुद्ध होता है। हालांकि, जब हम इसे दूर से देखते हैं, तो आसपास के वातावरण या प्रकाश के कारण यह नीला दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका अपना कोई रंग नहीं होता।
प्रश्न 3
नदी में मछलियों की संख्या में यह अंतर पानी की गुणवत्ता के कारण है। जहाँ नदी का पानी साफ है, जैसे कि उसके उद्गम स्थल के पास या उन जगहों पर जहाँ मानवीय गतिविधियाँ कम हैं, वहाँ मछलियों के लिए जीवित रहना आसान होता है, इसलिए उनकी संख्या ज्यादा होती है।
इसके विपरीत, जहाँ नदी में बस्तियों से निकलने वाला गंदा पानी, फैक्ट्री का कचरा या अन्य प्रदूषक मिलते हैं, वहाँ पानी दूषित हो जाता है। इस गंदे पानी में मछलियों के लिए साँस लेना और जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण, प्रदूषित हिस्सों में या तो मछलियाँ बहुत कम पाई जाती हैं या फिर वे मरी हुई मिलती हैं।
प्रश्न 4
चित्र के अनुसार, गाँव में पहुँचने से पहले नदी में बहुत सारी मछलियाँ तैरती हुई दिखाई दे रही हैं। यह दर्शाता है कि इस हिस्से में पानी अभी भी अपेक्षाकृत साफ है और जलीय जीवन के लिए उपयुक्त है।
प्रश्न 5
नदी के पानी का रंग उन जगहों पर बदल गया है जहाँ बस्तियाँ (गाँव या शहर) और फैक्ट्री स्थित हैं। इन जगहों पर, घरों से निकलने वाला गंदा सीवेज पानी और फैक्ट्री से निकलने वाला औद्योगिक कचरा सीधे नदी में बहा दिया जाता है।
यह कचरा और सीवेज पानी नदी के साफ पानी में मिलकर उसे गंदा, मैला और अक्सर बदबूदार बना देता है। इस प्रदूषण के कारण पानी का प्राकृतिक नीला या साफ रंग बदलकर भूरा या मटमैला हो जाता है।
प्रश्न 6
मैं चित्र में दिखाई गई जगहों में से उस जगह के पास रहना पसंद करूँगा जहाँ नदी का पानी साफ है और आसपास हरियाली है, जैसे कि नदी के उद्गम स्थल के पास या किसी ऐसे गाँव के पास जहाँ प्रदूषण नहीं फैला है।
इसका कारण यह है कि साफ पानी और स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। प्रदूषित जगहों पर रहना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और यह प्रकृति के सौंदर्य को भी नष्ट करता है।
प्रश्न 7
हाँ, मैं चित्र में हो रहे कुछ बदलावों को बदलना चाहूँगा। मैं चाहूँगा कि नदी में किसी भी प्रकार का कचरा या गंदा पानी न बहाया जाए।
इसे बदलने के लिए, मैं यह चाहूँगा कि:
- फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को पहले साफ किया जाए और फिर उसे नदी में छोड़ा जाए।
- लोगों को नदी में कपड़े धोने, बर्तन धोने या कचरा फेंकने से रोका जाए।
- सभी घरों के सीवेज पानी को एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाकर साफ किया जाए और फिर उसका निपटान किया जाए।
- नदी के किनारे पेड़ लगाए जाएँ ताकि पर्यावरण स्वच्छ रहे।
इस तरह, हम नदी को फिर से साफ और सुंदर बना सकते हैं।
प्रश्न 8
अगर मुझे पानी पीना हो, तो मैं नदी के उस हिस्से का पानी पीना चाहूँगा जहाँ से वह निकलना शुरू होती है (उद्गम स्थल)।
इसका कारण यह है कि नदी के उद्गम स्थल का पानी सबसे शुद्ध, साफ और बिना किसी प्रदूषण के होता है। जैसे-जैसे नदी आगे बढ़ती है, उसमें मानवीय गतिविधियों के कारण प्रदूषण बढ़ता जाता है, इसलिए उद्गम स्थल का पानी पीने के लिए सबसे सुरक्षित होता है।
प्रश्न 9
यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। छात्र अपने अनुभव के अनुसार उत्तर दे सकते हैं।
उदाहरण के लिए, एक छात्र उत्तर दे सकता है: 'हाँ, मैंने समुद्र देखा है। मैं अपने परिवार के साथ गोवा की यात्रा पर गया था और वहाँ समुद्र तट पर घूमा था। मैंने फिल्मों में भी समुद्र देखा है, जहाँ लहरें उठती हैं और बहुत सारा पानी दिखाई देता है।' या 'मैंने समुद्र केवल फिल्मों और तस्वीरों में ही देखा है।' या 'मैंने अपने शहर के पास एक झील देखी है, जो बहुत बड़ी है, लेकिन मैंने असली समुद्र नहीं देखा है।'
Common mistakes
- Confusing the source of pollution with its effects.
- Not clearly distinguishing between different stages of the river's journey.
- Overlooking the cumulative impact of various human activities on the river.
- Failing to connect personal actions to environmental consequences.
Revision tips
- Review the provided diagram carefully and relate it to each question.
- Focus on understanding the 'why' behind each change in the river's condition.
- Discuss the solutions with classmates to reinforce learning.
- Think about how you can contribute to keeping local water bodies clean.
Practice MCQs
Q1. नदी के उद्गम स्थल पर पानी का रंग कैसा होता है?
Explanation: नदी जहाँ से निकलना शुरू होती है, वहाँ पानी का रंग मूल रूप से रंगहीन होता है, हालांकि दूर से यह नीला दिखाई दे सकता है।
Q2. नदी में मछलियों की संख्या कम या मरी हुई क्यों पाई जाती है?
Explanation: जब नदी का पानी गंदा हो जाता है, जैसे कि बस्तियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे के कारण, तो मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।
Q3. नदी के पानी का रंग कहाँ-कहाँ बदल जाता है?
Explanation: मानवीय गतिविधियों जैसे घरों से निकलने वाले गंदे पानी और फैक्ट्री के कचरे को नदी में बहाने से पानी का रंग बदल जाता है, खासकर बस्तियों और फैक्ट्री के आसपास।
Q4. चित्र में नदी के किनारे क्या-क्या बसा हुआ दिखाई दे रहा है?
Explanation: कहानी के अनुसार, नदी के किनारे फैक्ट्री बनने के बाद लोग रहने लगे और धीरे-धीरे एक शहर बस गया।
Q5. नदी को साफ रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
Explanation: नदी में गिरने वाले गंदे पानी को उपचारित करने के बाद ही नदी में छोड़ना चाहिए ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 4 के आस-पास (EVS) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 12: पहाडों से समुंदर तक।
अध्याय 12 'पहाडों से समुंदर तक' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
यह अध्याय नदी की यात्रा, प्रदूषण के कारणों (जैसे फैक्ट्री और बस्तियों से निकलने वाला कचरा), और प्रदूषण के जलीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में सिखाता है।
क्या इन समाधानों में प्रश्नों के उत्तर विस्तृत हैं?
हाँ, प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तृत रूप से दिया गया है, जिसमें कारण और स्पष्टीकरण शामिल हैं ताकि छात्र विषय को अच्छी तरह समझ सकें।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं को समझने और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को जानने में मदद करते हैं, जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नदी के पानी का रंग क्यों बदल जाता है?
नदी के पानी का रंग तब बदल जाता है जब उसमें घरों से निकलने वाला गंदा पानी, फैक्ट्री का कचरा या अन्य प्रदूषक मिलाए जाते हैं, जिससे पानी गंदा और बदबूदार हो जाता है।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.