कक्षा 12 अर्थशास्त्र: पाठ 5 - सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 12 अर्थशास्त्र के छात्रों के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जो पाठ 5 'सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था' पर केंद्रित है। इसमें सार्वजनिक वस्तुओं की प्रकृति और सरकार द्वारा उनके प्रावधान की आवश्यकता, राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय के बीच महत्वपूर्ण अंतर, राजकोषीय घाटे और ऋण ग्रहण के बीच संबंध, और राजस्व घाटे व राजकोषीय घाटे के बीच के संबंध की विस्तृत व्याख्या शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह संतुलन आय स्तर, सरकारी व्यय गुणक और कर गुणक की गणना, और सरकारी व्यय में परिवर्तन के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मैक्रोइकॉनॉमिक अवधारणाओं को भी स्पष्ट करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त समझ प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | समष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था |
Chapter summary
पाठ 5 'सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था' के लिए NCERT समाधान छात्रों को सरकारी बजट के प्रमुख घटकों और अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। समाधान सार्वजनिक वस्तुओं की विशेषताओं, राजस्व और पूंजीगत व्यय के बीच अंतर, राजकोषीय घाटे की अवधारणा और ऋण की आवश्यकता, तथा राजस्व और राजकोषीय घाटे के बीच संबंध को स्पष्ट करते हैं। इसमें आय निर्धारण और गुणक प्रभाव से संबंधित गणितीय प्रश्नों का भी समावेश है, जो छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- सार्वजनिक वस्तुओं की विशेषताओं और सरकार द्वारा उनके प्रावधान की आवश्यकता को समझें।
- राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय के बीच मुख्य अंतरों की पहचान करें।
- राजकोषीय घाटे और सरकार के ऋण ग्रहण की आवश्यकता के बीच संबंध का विश्लेषण करें।
- राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे के बीच संबंध को स्पष्ट करें।
- संतुलन आय स्तर, सरकारी व्यय गुणक और कर गुणक की गणना करें।
- सरकारी व्यय में परिवर्तन के संतुलन आय पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करें।
Topics covered
Paper topics
- सार्वजनिक वस्तुएँ
- सार्वजनिक वस्तुओं का सरकारी प्रावधान
- राजस्व व्यय
- पूँजीगत व्यय
- राजस्व घाटा
- राजकोषीय घाटा
- ऋण ग्रहण
- संतुलन आय स्तर
- सरकारी व्यय गुणक
- कर गुणक
- गुणक प्रभाव
Important topics
- सार्वजनिक वस्तुओं की प्रकृति और सरकारी प्रावधान
- राजस्व व्यय बनाम पूँजीगत व्यय
- राजकोषीय घाटे की अवधारणा और निहितार्थ
- राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटे के बीच संबंध
- सरकारी व्यय गुणक और आय निर्धारण
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
- मुफ्तखोरी की समस्या (Free-rider Problem): चूँकि सार्वजनिक वस्तुओं से किसी को भी वंचित नहीं किया जा सकता, लोग इनके लिए भुगतान करने से बच सकते हैं, यह उम्मीद करते हुए कि दूसरे भुगतान करेंगे। इससे निजी बाजार इन वस्तुओं का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता। सरकार करों के माध्यम से धन एकत्र करके इन वस्तुओं का प्रावधान सुनिश्चित करती है।
- गैर-प्रतिस्पर्धी प्रकृति: एक व्यक्ति के सार्वजनिक वस्तु का उपभोग दूसरे के उपभोग को कम नहीं करता। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति के सड़क का उपयोग करने से दूसरे के लिए सड़क की उपलब्धता कम नहीं होती। इस विशेषता के कारण, इन वस्तुओं पर कीमत लगाना अव्यावहारिक होता है।
प्रश्न 2
| आधार | राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) | पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure) |
|---|---|---|
| परिभाषा | यह वह व्यय है जिसके फलस्वरूप न तो सरकार की परिसंपत्तियों का निर्माण होता है और न ही उसकी देनदारियों में कमी आती है। | यह वह व्यय है जिसके फलस्वरूप या तो सरकार की परिसंपत्तियों का निर्माण होता है या उसकी देनदारियों में कमी आती है। |
| आवृत्ति | ये भुगतान सामान्यतः बार-बार या आवर्ती प्रकृति के होते हैं। | ये भुगतान सामान्यतः एक बार या गैर-आवर्ती प्रकृति के होते हैं। |
| उदाहरण | सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, सब्सिडी (आर्थिक सहायता), सरकारी ऋणों पर ब्याज का भुगतान। | भूमि, भवन, मशीनरी की खरीद, सड़कों, पुलों, मेट्रो ट्रेनों का निर्माण, विदेशी सरकारों को दिए गए ऋण, सार्वजनिक उद्यमों की स्थापना। |
प्रश्न 3
प्रश्न 4
राजस्व घाटा (Revenue Deficit): यह तब होता है जब सरकार का राजस्व व्यय उसके राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो जाता है।
यह दर्शाता है कि सरकार अपने नियमित खर्चों (जैसे वेतन, पेंशन, सब्सिडी) को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त राजस्व उत्पन्न नहीं कर पा रही है।राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): यह सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है।
हम जानते हैं कि कुल व्यय = राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय, और कुल प्राप्तियाँ = राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ।इसलिए, राजकोषीय घाटे को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:
पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
पहले कोष्ठक में राजस्व घाटा है। दूसरे कोष्ठक में पूँजीगत व्यय और गैर-ऋण सृजित पूँजीगत प्राप्तियों का अंतर है। यदि पूँजीगत व्यय, गैर-ऋण सृजित पूँजीगत प्राप्तियों से अधिक है, तो यह सरकार की उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस प्रकार, संबंध को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
यह समीकरण दर्शाता है कि राजकोषीय घाटा राजस्व घाटे और सरकार द्वारा उधार ली गई राशि (जो पूँजीगत व्यय को वित्तपोषित करती है) का योग है।प्रश्न 5
- संतुलन आय स्तर क्या है?
- सरकारी व्यय गुणांक और कर गुणांक के मानों की गणना करो।
- यदि सरकार के व्यय में 200 की बढ़ोतरी होती है, तो संतुलन आय में क्या परिवर्तन होगा?
दिया गया है:
निवेश (I) = 200
सरकारी क्रय (G) = 150
निवल कर (T) = 100
उपभोग फलन (C) = 100 + 0.75y_d, जहाँ y_d प्रयोज्य आय है।
प्रयोज्य आय (y_d) = कुल आय (y) - निवल कर (T)
y_d = y - 100
अतः, उपभोग फलन को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
C = 100 + 0.75(y - 100)
1. संतुलन आय स्तर (Equilibrium Income Level):संतुलन आय स्तर वह होती है जहाँ कुल व्यय (Aggregate Demand, AD) कुल आय (Aggregate Supply, AS) के बराबर होता है। एक बंद अर्थव्यवस्था में, और ।
संतुलन में,
अतः, संतुलन आय स्तर 1500 है।
2. सरकारी व्यय गुणांक और कर गुणांक के मान:गुणक का सूत्र है: , जहाँ MPC सीमांत उपभोग प्रवृत्ति है।
यहाँ, MPC = 0.75
सरकारी व्यय गुणांक (Government Expenditure Multiplier):
कर गुणांक (Tax Multiplier):
सरकारी व्यय गुणांक 4 है और कर गुणांक -3 है।
3. सरकारी व्यय में 200 की बढ़ोतरी का संतुलन आय पर प्रभाव:आय में परिवर्तन = सरकारी व्यय गुणांक × सरकारी व्यय में परिवर्तन
यदि सरकार के व्यय में 200 की बढ़ोतरी होती है, तो संतुलन आय में 800 की वृद्धि होगी। नई संतुलन आय होगी।
Common mistakes
- सार्वजनिक वस्तुओं की 'मुफ्तखोरी की समस्या' को समझने में कठिनाई।
- राजस्व और पूंजीगत व्यय के बीच अंतर को गलत समझना।
- राजकोषीय घाटे और राजस्व घाटे के बीच संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
- गुणक प्रभाव की गणना में त्रुटियाँ करना।
Revision tips
- सार्वजनिक वस्तुओं की विशेषताओं पर विशेष ध्यान दें, खासकर 'मुफ्तखोरी की समस्या' पर।
- राजस्व और पूंजीगत व्यय के बीच अंतर को सारणीबद्ध रूप में याद करें।
- राजकोषीय घाटे के सूत्र और उसके ऋण ग्रहण से संबंध को समझें।
- गुणक प्रभाव से संबंधित गणितीय प्रश्नों का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. सार्वजनिक वस्तुएँ सरकार द्वारा ही क्यों प्रदान की जानी चाहिए?
Explanation: सार्वजनिक वस्तुओं का लाभ सभी को मिलता है और भुगतान न करने वालों को वंचित करना कठिन होता है, जिसे 'मुफ्तखोरी की समस्या' कहते हैं। इसलिए, सरकार इन्हें प्रदान करती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा एक राजस्व व्यय का उदाहरण है?
Explanation: सरकारी कर्मचारियों का वेतन एक आवर्ती व्यय है जिससे न तो परिसंपत्ति का निर्माण होता है और न ही देनदारियों में कमी आती है, इसलिए यह राजस्व व्यय है।
Q3. राजकोषीय घाटा किसके बराबर होता है?
Explanation: राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है, जो सरकार की कुल उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है।
Q4. यदि सरकार के व्यय में वृद्धि होती है, तो संतुलन आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Explanation: सरकारी व्यय गुणक के कारण, सरकारी व्यय में वृद्धि से संतुलन आय में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि होती है।
Q5. राजस्व घाटा तब होता है जब:
Explanation: राजस्व घाटा सरकार के राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर है, जो तब उत्पन्न होता है जब व्यय प्राप्तियों से अधिक हो जाता है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 अर्थशास्त्र में 'सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था' पाठ क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पाठ सरकारी बजट के घटकों, विभिन्न प्रकार के व्यय और घाटे की अवधारणाओं को समझने में मदद करता है, जो समष्टि अर्थशास्त्र के लिए मौलिक हैं।
सार्वजनिक वस्तुएँ क्या हैं और उन्हें सरकार को क्यों प्रदान करना चाहिए?
सार्वजनिक वस्तुएँ वे हैं जिनका उपभोग गैर-प्रतिस्पर्धी और गैर-बहिष्कृत होता है (जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा)। इन्हें सरकार को प्रदान करना चाहिए क्योंकि बाजार तंत्र इनकी आपूर्ति नहीं कर पाता और 'मुफ्तखोरी की समस्या' उत्पन्न होती है।
राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में मुख्य अंतर क्या है?
राजस्व व्यय से न तो परिसंपत्ति का निर्माण होता है और न ही देनदारियों में कमी आती है (जैसे वेतन)। पूँजीगत व्यय से परिसंपत्तियों का निर्माण होता है या देनदारियों में कमी आती है (जैसे सड़क निर्माण)।
राजकोषीय घाटा क्या दर्शाता है?
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है। यह सरकार की कुल उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है।
सरकारी व्यय गुणक कैसे काम करता है?
सरकारी व्यय गुणक बताता है कि सरकारी व्यय में प्रत्येक इकाई वृद्धि से आय में कितनी गुना वृद्धि होगी। यह अर्थव्यवस्था में कुल मांग को बढ़ाता है।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण प्रक्रिया प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने में मदद मिलती है।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.