कक्षा 12 गणित: त्रि-विमीय ज्यामिति NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 गणित के लिए त्रि-विमीय ज्यामिति (अध्याय 11) पर विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें रेखाओं के समीकरण, समतलों के समीकरण, दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। प्रत्येक प्रश्न का हल चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को इन जटिल विषयों को समझने में मदद मिलती है। यह समाधान छात्रों को अभ्यास करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करते हैं, जिससे त्रि-विमीय ज्यामिति की उनकी समझ मजबूत होती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | गणित |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 11. त्रि-विमीय ज्यामिति |
Chapter summary
कक्षा 12 के लिए त्रि-विमीय ज्यामिति (अध्याय 11) के ये NCERT समाधान छात्रों को दिक्-कोसाइन, दिक्-अनुपात और रेखाओं तथा समतलों के समीकरणों की मूल बातें समझने में मदद करते हैं। समाधानों में विभिन्न कोणों से गुजरने वाली रेखाओं के समीकरण ज्ञात करना और दिए गए दिक्-अनुपातों से दिक्-कोसाइन की गणना करना शामिल है। यह खंड छात्रों को त्रि-विमीय अंतरिक्ष में ज्यामितीय आकृतियों का विश्लेषण करने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करता है।
Learning outcomes
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपातों की गणना करना सीखें।
- दिए गए कोणों के लिए रेखाओं के समीकरण ज्ञात करें।
- दिक्-अनुपातों से दिक्-कोसाइन परिवर्तित करें।
- बिंदुओं की संरेखता की जाँच करें।
- त्रि-विमीय ज्यामिति में सूत्रों को समझें।
Topics covered
Paper topics
- दिक्-कोसाइन
- दिक्-अनुपात
- रेखा का सदिश समीकरण
- रेखा का कार्तीय समीकरण
- दो बिंदुओं से जाने वाली रेखा
- समतल का सदिश समीकरण
- समतल का कार्तीय समीकरण
- बिंदुओं की संरेखता
- रेखाओं के बीच की दूरी
- समतलों के बीच की दूरी
- रेखा और समतल के बीच का कोण
- दो समतलों के बीच का कोण
Important topics
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात
- रेखा का सदिश और कार्तीय समीकरण
- समतल का सदिश और कार्तीय समीकरण
- दो रेखाओं के बीच की न्यूनतम दूरी
- बिंदुओं की संरेखता की जाँच
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
एक रेखा की दिक्-कोसाइन उसके द्वारा निर्देशांक अक्षों के साथ बनाए गए कोणों के कोसाइन होते हैं। इन्हें आमतौर पर l, m, और n से दर्शाया जाता है।
अतः, दिक्-कोसाइन हैं:
l = \cos \alpha = \cos 90^{\circ} = 0 और m = \cos \beta = \cos 135^{\circ}
हम जानते हैं कि \cos 135^{\circ} = \cos (180^{\circ} - 45^{\circ}) = -\cos 45^{\circ}.
m = -\cos 45^{\circ} = -\frac{1}{\sqrt{2}} और n = \cos \gamma = \cos 45^{\circ} = \frac{1}{\sqrt{2}}
इसलिए, रेखा की दिक्-कोसाइन 0, -\frac{1}{\sqrt{2}} तथा \frac{1}{\sqrt{2}} हैं।
प्रश्न 2
अतः, रेखा के दिक्-कोसाइन , , और होंगे।
हम जानते हैं कि किसी भी रेखा के लिए दिक्-कोसाइन का वर्ग का योग 1 के बराबर होता है, अर्थात .
दिक्-कोसाइन के मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
यह समीकरण सरल होकर बनता है:
इससे हमें प्राप्त होता है:
वर्गमूल लेने पर:
इसलिए, रेखा के दिक्-कोसाइन हैं। इसका मतलब है कि दिक्-कोसाइन के चार संभावित सेट हो सकते हैं: (), (), (), आदि।
प्रश्न 3
एक रेखा की दिक्-कोसाइन (l, m, n) की गणना उसके दिक्-अनुपातों (a, b, c) का उपयोग करके निम्न सूत्र से की जाती है:
, ,
सबसे पहले, हम दिक्-अनुपातों के वर्गों के योग का वर्गमूल ज्ञात करते हैं:
अब, हम दिक्-कोसाइन की गणना करते हैं:
अतः, रेखा के दिक्-कोसाइन तथा हैं।
प्रश्न 4
मान लीजिए दिए गए बिंदु A(2, 3, 4), B(-1, -2, 1), और C(5, 8, 7) हैं।
हम सदिश AB और सदिश BC के दिक्-अनुपात ज्ञात करते हैं।
सदिश AB के दिक्-अनुपात हैं:
x_2 - x_1 = -1 - 2 = -3
y_2 - y_1 = -2 - 3 = -5
z_2 - z_1 = 1 - 4 = -3
अतः, AB के दिक्-अनुपात (-3, -5, -3) हैं।
सदिश BC के दिक्-अनुपात हैं:
x_3 - x_2 = 5 - (-1) = 5 + 1 = 6
y_3 - y_2 = 8 - (-2) = 8 + 2 = 10
z_3 - z_2 = 7 - 1 = 6
अतः, BC के दिक्-अनुपात (6, 10, 6) हैं।
अब हम जाँच करते हैं कि क्या सदिश AB और सदिश BC के दिक्-अनुपात समानुपाती हैं।
हम देख सकते हैं कि BC के दिक्-अनुपात AB के दिक्-अनुपातों के -2 गुना हैं:
6 = -2 \times (-3)
10 = -2 \times (-5)
6 = -2 \times (-3)
चूंकि सदिश AB और सदिश BC के दिक्-अनुपात समानुपाती हैं, और वे बिंदु B पर उभयनिष्ठ हैं, इसलिए बिंदु A, B, और C संरेख हैं।
वैकल्पिक रूप से, हम दूरियों की गणना कर सकते हैं:
AB = \sqrt{(-1-2)^2 + (-2-3)^2 + (1-4)^2} = \sqrt{(-3)^2+(-5)^2+(-3)^2} = \sqrt{9+25+9} = \sqrt{43}
BC = \sqrt{(5-(-1))^2 + (8-(-2))^2 + (7-1)^2} = \sqrt{(6)^2+(10)^2+(6)^2} = \sqrt{36+100+36} = \sqrt{172} = \sqrt{4 \times 43} = 2\sqrt{43}
AC = \sqrt{(5-2)^2 + (8-3)^2 + (7-4)^2} = \sqrt{(3)^2+(5)^2+(3)^2} = \sqrt{9+25+9} = \sqrt{43}
यहाँ, AB + AC = \sqrt{43} + \sqrt{43} = 2\sqrt{43} = BC।
चूंकि AB + AC = BC नहीं है, और AB + BC = AC नहीं है, और AC + BC = AB नहीं है, हमें दूरियों की गणना में त्रुटि हुई है या विधि गलत है।
सही दूरी गणना:
AB = \sqrt{(-1-2)^2 + (-2-3)^2 + (1-4)^2} = \sqrt{(-3)^2 + (-5)^2 + (-3)^2} = \sqrt{9 + 25 + 9} = \sqrt{43}
BC = \sqrt{(5-(-1))^2 + (8-(-2))^2 + (7-1)^2} = \sqrt{(6)^2 + (10)^2 + (6)^2} = \sqrt{36 + 100 + 36} = \sqrt{172} = 2\sqrt{43}
AC = \sqrt{(5-2)^2 + (8-3)^2 + (7-4)^2} = \sqrt{(3)^2 + (5)^2 + (3)^2} = \sqrt{9 + 25 + 9} = \sqrt{43}
यहाँ, AB + AC = \sqrt{43} + \sqrt{43} = 2\sqrt{43} = BC। यह दर्शाता है कि बिंदु A, C, B संरेख हैं, न कि A, B, C।
दिक्-अनुपात विधि अधिक सीधी है। चूँकि सदिश AB और सदिश BC के दिक्-अनुपात समानुपाती हैं (BC के दिक्-अनुपात AB के दिक्-अनुपातों के -2 गुना हैं), और वे बिंदु B पर उभयनिष्ठ हैं, इसलिए बिंदु A, B, और C संरेख हैं।
Common mistakes
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपातों के बीच भ्रमित होना।
- सूत्रों को लागू करते समय गणना में त्रुटियाँ करना।
- त्रिकोणमितीय मानों को गलत याद रखना।
- समतल और रेखा के समीकरणों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
Revision tips
- प्रत्येक सूत्र को याद करने के लिए एक फ्लैशकार्ड बनाएं।
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपातों के बीच के अंतर को समझें।
- हल किए गए उदाहरणों को स्वयं हल करने का प्रयास करें।
- त्रि-विमीय ज्यामिति में उपयोग किए जाने वाले सदिशों और समीकरणों की समीक्षा करें।
Practice MCQs
Q1. यदि एक रेखा x, y, और z अक्षों के साथ क्रमशः 90°, 135°, 45° के कोण बनाती है, तो इसकी दिक्-कोसाइन क्या हैं?
Explanation: दिक्-कोसाइन cos α, cos β, cos γ होते हैं। दिए गए कोणों के लिए, ये cos 90° = 0, cos 135° = -1/√2, और cos 45° = 1/√2 हैं।
Q2. एक रेखा की दिक्-कोसाइन ज्ञात कीजिए जो निर्देशांक्षों के साथ समान कोण बनाती है।
Explanation: चूंकि कोण समान हैं (α), दिक्-कोसाइन cos α, cos α, cos α हैं। l² + m² + n² = 1 का उपयोग करने पर, 3cos²α = 1, जिससे cos α = ±1/√3 प्राप्त होता है।
Q3. यदि एक रेखा के दिक्-अनुपात –18, 12, –4 हैं, तो इसकी दिक्-कोसाइन क्या हैं?
Explanation: दिक्-कोसाइन की गणना दिक्-अनुपातों को उनके परिमाण (√((-18)² + 12² + (-4)²)) से विभाजित करके की जाती है, जो 22 है। इसलिए, दिक्-कोसाइन -18/22, 12/22, -4/22 हैं, जो सरल होकर -9/11, 6/11, -2/11 हो जाते हैं।
Q4. तीन संरेख बिंदुओं के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
Explanation: यदि तीन बिंदु A, B, C संरेख हैं, तो सदिश AB, सदिश BC का एक अदिश गुणज होगा, जिसका अर्थ है कि उनके दिक्-अनुपात समानुपाती होंगे।
Frequently asked questions
त्रि-विमीय ज्यामिति में दिक्-कोसाइन क्या हैं?
दिक्-कोसाइन एक रेखा द्वारा धनात्मक x, y, और z अक्षों के साथ बनाए गए कोणों के कोसाइन होते हैं। इन्हें आमतौर पर l, m, और n से दर्शाया जाता है, और ये l² + m² + n² = 1 संबंध को संतुष्ट करते हैं।
दिक्-अनुपात और दिक्-कोसाइन में क्या अंतर है?
दिक्-अनुपात किसी रेखा की दिशा को दर्शाने वाले कोई भी तीन संख्याएँ हो सकती हैं, जबकि दिक्-कोसाइन विशिष्ट मान होते हैं जो रेखा की दिशा को इकाई सदिश के रूप में दर्शाते हैं। दिक्-अनुपात (a, b, c) और दिक्-कोसाइन (l, m, n) के बीच संबंध l = a/√(a²+b²+c²), m = b/√(a²+b²+c²), और n = c/√(a²+b²+c²) है।
कक्षा 12 के लिए त्रि-विमीय ज्यामिति के महत्वपूर्ण सूत्र कौन से हैं?
महत्वपूर्ण सूत्रों में एक बिंदु से जाने वाली रेखा का समीकरण (सदिश और कार्तीय रूप), दो बिंदुओं से जाने वाली रेखा का समीकरण, समतल का समीकरण (एक बिंदु और अभिलंब सदिश, या तीन असंरेख बिंदुओं से जाने वाला), दो रेखाओं के बीच की दूरी, और दो समतलों के बीच का कोण शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। हल किए गए उदाहरण और अभ्यास प्रश्न परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
क्या इन समाधानों में सभी प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
ये समाधान NCERT पाठ्यपुस्तक में दिए गए सभी प्रश्नों को कवर करते हैं, जिनमें दिक्-कोसाइन, दिक्-अनुपात, रेखाओं और समतलों के समीकरणों से संबंधित गणनाएँ और प्रमाण शामिल हैं।
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