कक्षा 12 गणित अध्याय 5 त्रि-विमीय ज्यामिति के लिए NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 गणित के अध्याय 5, त्रि-विमीय ज्यामिति (Three-Dimensional Geometry) के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय त्रि-विमीय अंतरिक्ष में रेखाओं और समतलों के समीकरणों, उनकी दिशा कोसाइन और दिशा अनुपात जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल करता है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिसमें आवश्यक सूत्र और गणनाएँ शामिल हैं। यह छात्रों को त्रि-विमीय ज्यामिति की मूल बातें समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यास करने में मदद करेगा। ये समाधान छात्रों को जटिल समस्याओं को हल करने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जिससे उनकी वैचारिक स्पष्टता बढ़ती है और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | गणित-II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 5 |
Chapter summary
अध्याय 5, त्रि-विमीय ज्यामिति, त्रि-विमीय अंतरिक्ष में रेखाओं और समतलों के अध्ययन पर केंद्रित है। इसमें दिशा कोसाइन, दिशा अनुपात, दो बिंदुओं से गुजरने वाली रेखा का समीकरण, एक बिंदु से गुजरने वाली और एक सदिश के समानांतर रेखा का समीकरण, और समतलों के समीकरणों जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं। यह खंड इन अवधारणाओं पर आधारित प्रश्नावली के प्रश्नों के हल प्रदान करता है, जिससे छात्रों को त्रि-विमीय ज्यामिति की समस्याओं को हल करने का अभ्यास मिलता है।
Learning outcomes
- रेखाओं के दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात की गणना करना सीखें।
- दिए गए कोणों से रेखाओं के दिक्-कोसाइन ज्ञात करें।
- दिक्-अनुपातों को दिक्-कोसाइन में परिवर्तित करें।
- त्रि-विमीय अंतरिक्ष में बिंदुओं की संरेखता की जाँच करें।
Topics covered
Paper topics
- त्रि-विमीय ज्यामिति का परिचय
- दिक्-कोसाइन
- दिक्-अनुपात
- एक बिंदु से जाने वाली रेखा का समीकरण
- दो बिंदुओं से जाने वाली रेखा का समीकरण
- समतल का समीकरण
- बिंदुओं की संरेखता
Important topics
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात
- रेखाओं के समीकरण (सदिश और कार्तीय रूप)
- समतलों के समीकरण
- बिंदुओं की संरेखता की जाँच
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
मान लीजिए कि रेखा द्वारा x, y, और z अक्षों के साथ बनाए गए कोण क्रमशः α, β, और γ हैं। हमें दिए गए हैं:
\alpha = 90^{\circ}
\beta = 135^{\circ}
\gamma = 45^{\circ}
एक रेखा की दिक्-कोसाइन (direction cosines) उसके द्वारा निर्देशांक अक्षों के साथ बनाए गए कोणों के कोसाइन होते हैं। इन्हें सामान्यतः l, m, और n से दर्शाया जाता है।
अतः, दिक्-कोसाइन इस प्रकार ज्ञात की जाती हैं:
l = \cos \alpha = \cos 90^{\circ} = 0
m = \cos \beta = \cos 135^{\circ}
चूंकि 135^{\circ} = 180^{\circ} - 45^{\circ}, हम लिख सकते हैं:
m = \cos (180^{\circ} - 45^{\circ}) = -\cos 45^{\circ} = -\frac{1}{\sqrt{2}} और n = \cos \gamma = \cos 45^{\circ} = \frac{1}{\sqrt{2}}
इस प्रकार, रेखा की दिक्-कोसाइन 0, -\frac{1}{\sqrt{2}}, \frac{1}{\sqrt{2}} हैं।
प्रश्न 2
मान लीजिए कि रेखा निर्देशांक अक्षों के साथ समान कोण α बनाती है। तब रेखा की दिक्-कोसाइन (l, m, n) इस प्रकार होंगी: हम जानते हैं कि किसी भी रेखा के लिए दिक्-कोसाइन के वर्गों का योग हमेशा 1 के बराबर होता है, अर्थात: दिए गए शर्त के अनुसार, हम प्रतिस्थापित करते हैं: दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर: इसलिए, रेखा की दिक्-कोसाइन हैं। यहाँ '+' या '-' चिन्हों का कोई भी संयोजन संभव है, बशर्ते कि सभी तीन दिक्-कोसाइन समान हों (या तो सभी धनात्मक या सभी ऋणात्मक)।
प्रश्न 3
मान लीजिए कि रेखा के दिक्-अनुपात (direction ratios) a, b, और c हैं। हमें दिए गए हैं: एक रेखा की दिक्-कोसाइन (l, m, n) को उसके दिक्-अनुपातों से निम्नलिखित सूत्र का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है: सबसे पहले, हम हर (denominator) के मान की गणना करते हैं: अब, हम दिक्-कोसाइन की गणना करते हैं: अतः, रेखा की दिक्-कोसाइन तथा हैं।
प्रश्न 4
मान लीजिए दिए गए तीन बिंदु A, B, और C हैं, जिनके निर्देशांक क्रमशः A(2, 3, 4), B(–1, –2, 1), और C(5, 8, 7) हैं।
तीन बिंदु संरेख (collinear) कहलाते हैं यदि वे एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों। इसकी जाँच करने के लिए, हम बिंदुओं के बीच की दूरियों की गणना करेंगे और देखेंगे कि क्या किन्हीं दो दूरियों का योग तीसरी दूरी के बराबर है।
बिंदुओं A और B के बीच की दूरी (AB) की गणना करते हैं:
AB = \sqrt{(-1-2)^2 + (-2-3)^2 + (1-4)^2}
= \sqrt{(-3)^2 + (-5)^2 + (-3)^2}
= \sqrt{9 + 25 + 9}
= \sqrt{43}
अब, बिंदुओं B और C के बीच की दूरी (BC) की गणना करते हैं:
BC = \sqrt{(5-(-1))^2 + (8-(-2))^2 + (7-1)^2}
= \sqrt{(5+1)^2 + (8+2)^2 + (6)^2}
= \sqrt{(6)^2 + (10)^2 + (6)^2}
= \sqrt{36 + 100 + 36}
= \sqrt{172}
= \sqrt{4 \times 43}
= 2\sqrt{43}
अंत में, बिंदुओं A और C के बीच की दूरी (AC) की गणना करते हैं:
AC = \sqrt{(5-2)^2 + (8-3)^2 + (7-4)^2}
= \sqrt{(3)^2 + (5)^2 + (3)^2}
= \sqrt{9 + 25 + 9}
= \sqrt{43}
अब हम दूरियों की तुलना करते हैं। हम देखते हैं कि:
AB + AC = \sqrt{43} + \sqrt{43} = 2\sqrt{43}
और हमने गणना की है कि
BC = 2\sqrt{43}
चूंकि AB + AC = BC, यह दर्शाता है कि बिंदु A, B, और C एक ही सीधी रेखा पर स्थित हैं। इसलिए, दिए गए बिंदु सरेख हैं।
Common mistakes
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात के बीच भ्रमित होना।
- दिक्-कोसाइन के वर्ग के योग को 1 के बराबर करने में त्रुटियाँ।
- दूरी सूत्र का उपयोग करते समय ऋणात्मक संख्याओं के वर्ग में गलती करना।
- सरेखता की जाँच के लिए दूरियों के बीच संबंध स्थापित करने में चूक।
Revision tips
- दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात से संबंधित सूत्रों को याद करें।
- प्रत्येक प्रश्न के हल में उपयोग की गई विधि को समझें।
- दूरी सूत्र और संरेखता की शर्तों का अभ्यास करें।
- हल किए गए उदाहरणों को स्वयं हल करने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. एक रेखा x-अक्ष के साथ 90° का कोण बनाती है। इसकी दिक्-कोसाइन क्या हैं?
Explanation: यदि रेखा x-अक्ष के साथ 90° का कोण बनाती है, तो उसकी दिक्-कोसाइन l = cos 90° = 0 होगी। अन्य दो अक्षों के साथ कोणों के आधार पर m और n ज्ञात किए जा सकते हैं, लेकिन यहाँ केवल x-अक्ष के साथ कोण दिया गया है, जिससे l=0 होता है। प्रश्न में दिए गए कोणों के अनुसार, दिक्-कोसाइन 0, -1/√2, 1/√2 हैं, लेकिन यदि केवल x-अक्ष के साथ 90° का कोण दिया जाए तो l=0 होगा।
Q2. यदि एक रेखा के दिक्-अनुपात -18, 12, -4 हैं, तो इसकी दिक्-कोसाइन क्या हैं?
Explanation: दिक्-अनुपातों (a, b, c) से दिक्-कोसाइन (l, m, n) ज्ञात करने के लिए, हम सूत्र l = a/√(a²+b²+c²), m = b/√(a²+b²+c²), n = c/√(a²+b²+c²) का उपयोग करते हैं। यहाँ √(a²+b²+c²) = √((-18)² + 12² + (-4)²) = √484 = 22 है। इसलिए, दिक्-कोसाइन -18/22, 12/22, -4/22 हैं, जो सरल होकर -9/11, 6/11, -2/11 होते हैं।
Q3. त्रि-विमीय ज्यामिति में, दिक्-कोसाइन के वर्ग का योग हमेशा किसके बराबर होता है?
Explanation: किसी भी रेखा की दिक्-कोसाइन (l, m, n) के लिए, यह एक मौलिक गुण है कि उनके वर्गों का योग हमेशा 1 के बराबर होता है, अर्थात l² + m² + n² = 1।
Q4. बिंदु A(2, 3, 4) और B(-1, -2, 1) के बीच की दूरी क्या है?
Explanation: दो बिंदुओं (x1, y1, z1) और (x2, y2, z2) के बीच की दूरी का सूत्र √((x2-x1)² + (y2-y1)² + (z2-z1)²) है। यहाँ, दूरी = √((-1-2)² + (-2-3)² + (1-4)²) = √((-3)² + (-5)² + (-3)²) = √(9 + 25 + 9) = √43।
Frequently asked questions
कक्षा 12 गणित के अध्याय 5, त्रि-विमीय ज्यामिति में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में त्रि-विमीय अंतरिक्ष में रेखाओं और समतलों का अध्ययन किया जाता है। इसमें रेखाओं के दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात, रेखाओं के समीकरण (सदिश और कार्तीय रूप), और समतलों के समीकरण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं।
दिक्-कोसाइन और दिक्-अनुपात में क्या अंतर है?
दिक्-कोसाइन वे कोसाइन होते हैं जो एक रेखा द्वारा त्रि-विमीय अक्षों (x, y, z) के साथ बनाए गए कोणों से प्राप्त होते हैं (l = cos α, m = cos β, n = cos γ)। दिक्-अनुपात कोई भी तीन संख्याएँ (a, b, c) हो सकती हैं जो दिक्-कोसाइन के समानुपाती हों, अर्थात l = ka, m = kb, n = kc।
क्या ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार विस्तृत और चरण-दर-चरण हल प्रदान करते हैं, जो कक्षा 12 की गणित परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। ये छात्रों को अवधारणाओं को समझने और अभ्यास करने में मदद करते हैं।
बिंदुओं की संरेखता का क्या अर्थ है?
तीन या अधिक बिंदु संरेख कहलाते हैं यदि वे एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों। त्रि-विमीय ज्यामिति में, हम यह जाँच सकते हैं कि क्या दो बिंदुओं के बीच की दूरी तीसरे बिंदु के साथ बनी दूरियों के योग के बराबर है, या उनके दिक्-अनुपात समानुपाती हैं।
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