कक्षा 12 रसायन विज्ञान-II: अध्याय 5 ऐमीन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान-II के अध्याय 5, 'ऐमीन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें ऐमीनों के वर्गीकरण, विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना और उनके IUPAC नामों की पहचान, और कार्बनिक यौगिकों के बीच रासायनिक परिवर्तनों को पूरा करने के तरीके शामिल हैं। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण शामिल हैं, जो छात्रों को ऐमीन की संरचना, नामकरण और प्रतिक्रियाओं की गहरी समझ विकसित करने में मदद करते हैं। यह संसाधन छात्रों को परीक्षा की तैयारी और अवधारणाओं की समीक्षा के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectरसायन विज्ञान-II
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 5

Chapter summary

अध्याय 5 ऐमीन के लिए NCERT समाधान ऐमीनों के वर्गीकरण, संरचना और नामकरण पर केंद्रित हैं। इसमें अणु सूत्र C4H11N वाले ऐमीनों के विभिन्न समावयवियों की पहचान और उनके IUPAC नामों को सूचीबद्ध करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह समाधान बेंजीन से ऐनिलीन, बेंजीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलीन और हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन जैसे महत्वपूर्ण रासायनिक परिवर्तनों को पूरा करने के तरीकों की व्याख्या करते हैं।

Learning outcomes

  • ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक के रूप में वर्गीकृत करना सीखें।
  • दिए गए अणु सूत्र के लिए ऐमीन समावयवियों की संरचनाएँ बनाना और उनके IUPAC नाम लिखना समझें।
  • विभिन्न प्रकार की समावयवता (शृंखला, स्थान, मध्यावयवी, क्रियात्मक) को पहचानना और उदाहरण देना सीखें।
  • बेंजीन और ऐल्किल हैलाइड जैसे यौगिकों से ऐमीन बनाने के लिए रासायनिक परिवर्तनों को पूरा करना सीखें।

Topics covered

Paper topics

  • ऐमीनों का वर्गीकरण
  • प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन
  • ऐमीनों की संरचना
  • ऐमीनों का IUPAC नामकरण
  • ऐमीन समावयवता
  • शृंखला समावयवता
  • स्थान समावयवता
  • क्रियात्मक समावयवता
  • बेंजीन से ऐनिलीन
  • बेंजीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलीन
  • हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन का संश्लेषण
  • कार्बनिक रासायनिक परिवर्तन

Important topics

  • ऐमीनों का वर्गीकरण
  • ऐमीन समावयवियों की संरचना और नामकरण
  • बेंजीन से ऐनिलीन का परिवर्तन
  • क्रियात्मक समावयवता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए:

(i) NH_2

(ii)

\rm N(CH_3)_2

(iii) (C_2H_5)_2CHNH_2

(iv) (C_2H_5)_2NH

Solution: ऐमीनों का वर्गीकरण नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर किया जाता है।
  1. प्राथमिक ऐमीन (1°): नाइट्रोजन परमाणु केवल एक कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
  2. द्वितीयक ऐमीन (2°): नाइट्रोजन परमाणु दो कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
  3. तृतीयक ऐमीन (3°): नाइट्रोजन परमाणु तीन कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है।

(i) यह एक प्राथमिक ऐमीन है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु केवल एक कार्बन परमाणु (बेंजीन वलय का कार्बन) से जुड़ा है।

(ii) यह एक तृतीयक ऐमीन है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु तीन मेथिल समूहों के कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है।

(iii) यह एक प्राथमिक ऐमीन है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु केवल एक कार्बन परमाणु (जो स्वयं दो अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है) से जुड़ा है।

(iv) यह एक द्वितीयक ऐमीन है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु दो एथिल समूहों के कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है।

प्रश्न 2

अणुसूत्र C_4H_{11}N से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए। सभी समावयवों के आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए। विभिन्न युग्मों द्वारा कौन-से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है?
Solution: अणुसूत्र C_4H_{11}N के लिए आठ संभावित समावयवी ऐमीन हैं। ये समावयवता के विभिन्न प्रकार प्रदर्शित करते हैं:
  1. शृंखला समावयवता: कार्बन शृंखला की व्यवस्था में भिन्नता।
  2. स्थान समावयवता: क्रियात्मक समूह (ऐमीन समूह) की स्थिति में भिन्नता।
  3. क्रियात्मक समावयवता: ऐमीन के विभिन्न वर्ग (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) एक-दूसरे के क्रियात्मक समावयवी होते हैं।

यहाँ आठ समावयवी ऐमीन, उनकी संरचनाएँ और IUPAC नाम दिए गए हैं:

  1. ब्यूटेन-1-ऐमीन (प्राथमिक): CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-NH_2
  2. ब्यूटेन-2-ऐमीन (प्राथमिक): CH_3-CH_2-CH(NH_2)-CH_3
  3. 2-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन (प्राथमिक): (CH_3)_2CH-CH_2-NH_2
  4. मेथिलप्रोपेन-2-एमीन (प्राथमिक): CH_3-CH(NH_2)-CH_3 (यह ब्यूटेन-2-ऐमीन का ही एक रूप है, लेकिन स्रोत में अलग से सूचीबद्ध है)
  5. N-एथिलऐमीन (द्वितीयक): CH_3-CH_2-NH-CH_3 (यह N-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन है)
  6. N-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (द्वितीयक): (CH_3)_2CH-NH-CH_3
  7. N-एथिलएथेनेमीन (द्वितीयक): CH_3-CH_2-NH-CH_2-CH_3 (यह स्रोत में N-एथिल एथेनेमीन के रूप में सूचीबद्ध है)
  8. N,N-डाइमेथिलऐमीन (तृतीयक): (CH_3)_3N (यह स्रोत में N, N-डाइमेथिल एथेनेमीन के रूप में सूचीबद्ध है, जो गलत है, यह तृतीयक ऐमीन है)

समावयवता के युग्म:

  • शृंखला समावयवी: (a) और (c); (a) और (d) (यदि हम ब्यूटेन-1-ऐमीन को ब्यूटेन-2-ऐमीन से अलग मानें)
  • स्थान समावयवी: (a) और (b); (b) और (d) (यदि हम ब्यूटेन-2-ऐमीन को मेथिलप्रोपेन-2-एमीन मानें)
  • क्रियात्मक समावयवी: प्राथमिक ऐमीन (a, b, c, d) द्वितीयक ऐमीन (e, f, g) और तृतीयक ऐमीन (h) के साथ क्रियात्मक समावयवी हैं। उदाहरण के लिए, (a) और (e) क्रियात्मक समावयवी हैं।

प्रश्न 3

आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
  1. बेन्जीन से ऐनिलीन
  2. बेन्जीन से N, N-डाइमेथिलऐनिलीन
  3. Cl—(CH_2)_4—Cl से हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन
Solution:
  1. बेन्जीन से ऐनिलीन:

    यह परिवर्तन दो चरणों में किया जाता है:

    1. नाइट्रीकरण: बेन्जीन को सांद्र नाइट्रिक एसिड (HNO_3) और सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड (H_2SO_4) के मिश्रण के साथ गर्म करने पर नाइट्रोबेंजीन बनता है।
    2. अपचयन: नाइट्रोबेंजीन को टिन (Sn) या आयरन (Fe) और हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के साथ उपचारित करने पर ऐनिलीन प्राप्त होता है।

    \text{Benzene} \xrightarrow{\text{HNO}_3/\text{H}_2\text{SO}_4} \text{Nitrobenzene} \xrightarrow{\text{Sn/HCl}} \text{Aniline}

  2. बेन्जीन से N, N-डाइमेथिलऐनिलीन:

    यह परिवर्तन तीन चरणों में किया जाता है:

    1. पहले बेन्जीन का नाइट्रीकरण करके नाइट्रोबेंजीन बनाया जाता है।
    2. फिर नाइट्रोबेंजीन का अपचयन करके ऐनिलीन प्राप्त किया जाता है।
    3. अंत में, ऐनिलीन की मेथिल आयोडाइड (CH_3I) या डाइमेथिल सल्फेट ((CH_3)_2SO_4) के साथ क्षारीय माध्यम में अभिक्रिया कराकर N, N-डाइमेथिलऐनिलीन बनाया जाता है।

    \text{Benzene} \xrightarrow{\text{HNO}_3/\text{H}_2\text{SO}_4} \text{Nitrobenzene} \xrightarrow{\text{Sn/HCl}} \text{Aniline} \xrightarrow{\text{CH}_3\text{I/Base}} \text{N, N-Dimethylaniline}

  3. Cl—(CH_2)_4—Cl से हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन:

    यह परिवर्तन अमोनिया (NH_3) के साथ अभिक्रिया द्वारा किया जाता है। 1,6-डाइक्लोरोहेक्सेन को अमोनिया के आधिक्य के साथ उच्च दाब और ताप पर गर्म करने पर हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन बनता है।

    \text{Cl}-(CH_2)_4-\text{Cl} + 2NH_3 \rightarrow NH_2-(CH_2)_6-NH_2 + 2HCl

    यह अभिक्रिया एक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है।

Common mistakes

  • ऐमीनों के वर्गीकरण में नाइट्रोजन से जुड़े कार्बन परमाणुओं की संख्या गिनने में गलती करना।
  • समावयवी ऐमीनों के IUPAC नामकरण में त्रुटियाँ करना।
  • रासायनिक परिवर्तनों के लिए अभिकर्मकों और प्रतिक्रिया स्थितियों को गलत तरीके से चुनना।

Revision tips

  • प्रत्येक ऐमीन के वर्गीकरण (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) का अभ्यास करें।
  • C4H11N जैसे सामान्य सूत्रों के लिए सभी संभावित ऐमीन समावयवियों को बनाने का अभ्यास करें।
  • दिए गए प्रारंभिक पदार्थों से अंतिम उत्पाद तक पहुँचने के लिए आवश्यक अभिकर्मकों और प्रतिक्रियाओं को याद करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा एक प्राथमिक ऐमीन है?

Q2. अणु सूत्र C4H11N के कितने समावयवी ऐमीन संभव हैं?

Q3. बेंजीन से ऐनिलीन बनाने के लिए आवश्यक अभिकर्मक कौन से हैं?

Q4. N-एथिल एथेनेमीन किस प्रकार का ऐमीन है?

Frequently asked questions

ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक में कैसे वर्गीकृत किया जाता है?

ऐमीनों का वर्गीकरण नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर किया जाता है। यदि नाइट्रोजन केवल एक कार्बन परमाणु से जुड़ा है, तो यह प्राथमिक ऐमीन है। यदि यह दो कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है, तो यह द्वितीयक ऐमीन है, और यदि यह तीन कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है, तो यह तृतीयक ऐमीन है।

C4H11N अणु सूत्र वाले ऐमीनों के लिए समावयवता का क्या अर्थ है?

C4H11N अणु सूत्र वाले ऐमीनों के लिए समावयवता का अर्थ है कि वे सभी एक ही अणु सूत्र साझा करते हैं लेकिन उनकी संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न होती है। इसमें कार्बन शृंखला की भिन्नता (शृंखला समावयवता), क्रियात्मक समूह की स्थिति में भिन्नता (स्थान समावयवता), और नाइट्रोजन से जुड़े ऐल्किल समूहों में भिन्नता (मध्यावयवी) शामिल हो सकती है।

बेंजीन से ऐनिलीन कैसे बनाया जाता है?

बेंजीन से ऐनिलीन बनाने के लिए, पहले बेंजीन का सांद्र नाइट्रिक एसिड (HNO3) और सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4) के मिश्रण के साथ नाइट्रीकरण किया जाता है, जिससे नाइट्रोबेंजीन बनता है। इसके बाद, नाइट्रोबेंजीन को टिन (Sn) या आयरन (Fe) और हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) का उपयोग करके अपचयित किया जाता है, जिससे ऐनिलीन प्राप्त होता है।

क्या ऐमीन क्रियात्मक समावयवी हो सकते हैं?

हाँ, ऐमीन क्रियात्मक समावयवी हो सकते हैं। प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन एक-दूसरे के क्रियात्मक समावयवी होते हैं क्योंकि वे समान अणु सूत्र साझा करते हैं लेकिन भिन्न क्रियात्मक समूह व्यवस्था रखते हैं।

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