कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: नौबतखाने में इबादत
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के पाठ 'नौबतखाने में इबादत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, उनके संगीत के प्रति समर्पण और उनकी सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित है। समाधानों में बिस्मिल्ला खाँ के जन्मस्थान डुमराँव के महत्व, शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा जाता है, और सुषिर वाद्यों में शहनाई के विशिष्ट स्थान जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया है। इसमें बिस्मिल्ला खाँ की प्रार्थनाओं, काशी में हो रहे परिवर्तनों पर उनकी व्यथा, और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं जैसे धार्मिक सौहार्द, सादगी और कला के प्रति अटूट निष्ठा पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 16 नौबतखाने में इबादत |
Chapter summary
कक्षा 10 हिंदी के पाठ 'नौबतखाने में इबादत' के ये NCERT समाधान उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत यात्रा पर केंद्रित हैं। इसमें शहनाई वाद्य यंत्र, डुमराँव का महत्व, और बिस्मिल्ला खाँ को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया, जैसे विषयों की व्याख्या की गई है। समाधान बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व, उनकी प्रार्थनाओं, काशी के प्रति उनके विचारों और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में उनकी भूमिका को भी स्पष्ट करते हैं। भाषा-अध्ययन खंड में मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानने का अभ्यास भी शामिल है।
Learning outcomes
- शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत के प्रति उनके समर्पण को समझना।
- डुमराँव के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पहचानना।
- शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' कहे जाने के कारणों का विश्लेषण करना।
- बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताओं, जैसे धार्मिक सौहार्द और सादगी, का वर्णन करना।
- मिश्र वाक्यों में प्रधान, संज्ञा और विशेषण उपवाक्यों को छाँटना और पहचानना।
Topics covered
Paper topics
- बिस्मिल्ला खाँ का जीवन परिचय
- शहनाई वाद्य यंत्र
- डुमराँव का महत्व
- मंगलध्वनि और शहनाई
- सुषिर-वाद्य
- कला के प्रति समर्पण
- धार्मिक सौहार्द
- काशी की संस्कृति
- सादा जीवन और उच्च विचार
- संगीत साधना
- मिश्र वाक्य और उपवाक्य
- हिंदी व्याकरण
Important topics
- बिस्मिल्ला खाँ का जीवन और संगीत के प्रति समर्पण
- शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया?
- बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ (धार्मिक सौहार्द, सादगी)
- काशी की सांस्कृतिक विरासत और बिस्मिल्ला खाँ का उस पर प्रभाव
- मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानना
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
अथवा
'बिस्मिल्ला खाँ हमेशा अपनी अजेय संगीतयात्रा के नायक रहेंगे।'-इस कथन की पुष्टि कीजिए।प्रश्न 3
प्रश्न 4
(क) 'फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।'
(ख) 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'
(क) आशय: इस कथन के माध्यम से शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे उन्हें कभी भी बेसुरा या फटा हुआ सुर न दें। उनके लिए शहनाई का सुर सबसे महत्वपूर्ण है। वे कहते हैं कि यदि उनकी लुंगिया (वस्त्र) फटी भी रह जाए तो कोई बात नहीं, क्योंकि फटे वस्त्र को सिला जा सकता है और यह अस्थायी है। लेकिन यदि सुर खराब हो गया, तो वह उनकी कला का अपमान होगा और उसे ठीक करना कठिन होगा। यह उनकी कला के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है।
(ख) आशय: इस प्रार्थना में बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से यह वरदान माँग रहे हैं कि उन्हें ऐसा सुर प्रदान करें जिसमें इतनी गहराई और मार्मिकता हो कि उसे सुनकर श्रोताओं की आँखों से सच्चे, अनगढ़ आँसू बह निकलें। वे चाहते हैं कि उनका संगीत केवल मनोरंजन का साधन न हो, बल्कि श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श करे और उन्हें भावुक कर दे, जैसे मोती अनगढ़ होते हुए भी मूल्यवान होते हैं। यह उनकी संगीत की शक्ति और उसके भावनात्मक प्रभाव में विश्वास को दर्शाता है।
प्रश्न 5
प्रश्न 6
(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।
अथवा
विस्मिल्ला खाँ हिंदू-पुस्लिम एकता के प्रतीक थे, कैसे?(क) मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक: बिस्मिल्ला खाँ सच्चे मुसलमान थे और अपने धर्म, उत्सवों (जैसे मुहर्रम) और नमाज के प्रति गहरी आस्था रखते थे। इसके बावजूद, वे काशी की संस्कृति में पूरी तरह रमे हुए थे। वे जीवन भर काशी के विश्वनाथ और बालाजी मंदिर में शहनाई बजाते रहे, गंगा को 'मैया' मानते थे और काशी से बाहर होने पर भी बालाजी की ओर मुँह करके प्रणाम करते थे। उनका यह आचरण दर्शाता है कि वे केवल एक धर्म तक सीमित नहीं थे, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करते थे, इसलिए वे मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
(ख) सच्चे इंसान: बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थों में सच्चे इंसान थे क्योंकि उन्होंने कभी धार्मिक कट्टरता, संकीर्णता या घृणा का प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने अपने धर्म का पालन करते हुए भी अन्य संस्कृतियों का सम्मान किया। उन्होंने कभी ईश्वर से धन-संपत्ति नहीं माँगी, बल्कि हमेशा सच्चे सुर और कला की उत्कृष्टता की कामना की। वे अत्यंत सरल, सादे और विनम्र थे, भले ही उन्हें भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान मिले हों। उन्होंने कभी अहंकार नहीं किया और फटेहाल में भी सादगी से जीवन जिया। उनकी यह निस्वार्थता, सरलता और मानवतावादी दृष्टिकोण उन्हें एक सच्चा इंसान साबित करता है।
प्रश्न 7
रसूलनबाई और बतूलनबाई की गायिकी, विशेषकर उनके द्वारा गाए गए दुमरी, टप्पे और दादरा, ने बिस्मिल्ला खाँ को संगीत की ओर आकर्षित किया और उनमें संगीत की ललक जगाई। वे उनकी प्रारंभिक प्रेरणा स्रोत बनीं।
उनके नाना, अलीबख्श खाँ, जो शाही दरबार में शहनाई बजाते थे, को देखकर बिस्मिल्ला खाँ शहनाई वादन के प्रति प्रेरित हुए। वे अपने नाना को शहनाई बजाते हुए सुनकर उसे खोजा करते थे।
जब उनके मामूजान अलीबख्श खाँ शहनाई बजाते हुए 'सम' (संगीत में एक विशेष ठहराव या लय) पर आते थे, तो बिस्मिल्ला खाँ जमीन पर पत्थर मारकर अपनी दाद (प्रशंसा) व्यक्त करते थे। इस प्रकार उन्होंने संगीत में दाद देना सीखा।
कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी तलने की कला में भी वे संगीत का आरोह-अवरोह देखते थे, जो उनकी संगीत की सूक्ष्म दृष्टि को दर्शाता है।
अभिनेत्री सुलोचना की फिल्मों ने भी उनके संगीत के अनुभव को समृद्ध किया। इन सभी अनुभवों और व्यक्तियों ने मिलकर बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को गहराई और विस्तार प्रदान किया।
प्रश्न 8
अथवा
बिस्मिल्ला खाँ के चरित्र की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिनसे आप बहुत अधिक प्रभावित हुए?धार्मिक सौहार्द: वे एक सच्चे मुसलमान थे, पाँचों वक्त नमाज पढ़ते थे और मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा से मनाते थे। इसके बावजूद, वे काशी की हिंदू संस्कृति का भी उतना ही सम्मान करते थे। वे गंगा को 'मैया' कहते थे, बाबा विश्वनाथ और बालाजी के मंदिर में शहनाई बजाते थे। उनका यह समन्वयकारी दृष्टिकोण अत्यंत प्रेरणादायक है।
प्रभु के प्रति आस्था: बिस्मिल्ला खाँ का ईश्वर के प्रति गहरा विश्वास था। वे नमाज पढ़ते हुए भी सच्चे सुर की कामना करते थे और अपनी कला की सारी प्रशंसा ईश्वर को समर्पित करते थे। वे कभी भी धन-दौलत या भौतिक सुख-सुविधाओं की कामना नहीं करते थे, बल्कि अपनी कला को ही सर्वोपरि मानते थे।
सरलता और सादगी: भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के बावजूद, बिस्मिल्ला खाँ अत्यंत सरल और सादे जीवन जीते थे। वे कभी भी अपनी उपलब्धियों पर घमंड नहीं करते थे। वे अक्सर फटी हुई तहमद (धोती) पहनते थे और बनाव-श्रृंगार पर ध्यान नहीं देते थे। उनकी यह विनम्रता और सादगी प्रशंसनीय है।
रसिक और विनोदी स्वभाव: वे बचपन से ही रसिक थे और संगीत, गायन तथा खान-पान के शौकीन थे। वे अपनी बात कहने में कुशल थे और हास्य-विनोद के माध्यम से अपनी बात कह देते थे, जैसा कि भारत-रत्न मिलने पर लुंगिया के बारे में उनका कथन दर्शाता है।
प्रश्न 9
प्रश्न 10
प्रश्न 11
(क) यह ज़रूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।
(ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
(ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।
(ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।
(क) यह ज़रूर है। (प्रधान उपवाक्य)
कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं। (संज्ञा उपवाक्य) (ख) रीड अंदर से पोली होती है। (प्रधान उपवाक्य)
जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है। (विशेषण उपवाक्य) (ग) रीड नरकट से बनाई जाती है। (प्रधान उपवाक्य)
जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। (विशेषण उपवाक्य) (घ) उनको यकीन है। (प्रधान उपवाक्य)
कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा। (संज्ञा उपवाक्य) (ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है। (प्रधान उपवाक्य)
जिसकी गमक उसी में समाई है। (विशेषण उपवाक्य) (च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है। (प्रधान उपवाक्य)
कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा। (संज्ञा उपवाक्य)
Common mistakes
- बिस्मिल्ला खाँ के जीवन की घटनाओं और उनके संगीत साधना पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच संबंध स्थापित करने में कठिनाई।
- मिश्र वाक्यों के उपवाक्यों को सही ढंग से पहचानने और उनके भेद बताने में त्रुटि।
- बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताओं को केवल सतही तौर पर समझना, गहराई में न जाना।
- पाठ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को समझने में चूक।
Revision tips
- बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाओं और व्यक्तियों की सूची बनाएँ।
- शहनाई और 'मंगलध्वनि' के संबंध को स्पष्ट करने वाले वाक्यों को रेखांकित करें।
- मिश्र वाक्यों के अभ्यास प्रश्नों को हल करते समय प्रत्येक उपवाक्य के कार्य पर ध्यान दें।
- बिस्मिल्ला खाँ के धार्मिक सौहार्द और सादगी के उदाहरणों को याद करें।
Practice MCQs
Q1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
Explanation: डुमराँव को बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि होने और शहनाई के लिए आवश्यक नरकट घास मिलने के कारण शहनाई की दुनिया में विशेष महत्व दिया जाता है।
Q2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
Explanation: शहनाई को शुभ अवसरों पर बजाया जाता है और बिस्मिल्ला खाँ अपने वादन से उसे अत्यंत मधुर और सुरीला बनाते थे, इसलिए उन्हें 'मंगलध्वनि का नायक' कहा गया।
Q3. सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है?
Explanation: सुषिर-वाद्यों का अर्थ है 'सुख देने वाले वाद्य', जिन्हें हवा फूँककर बजाया जाता है, जैसे कि शहनाई, बाँसुरी आदि।
Q4. बिस्मिल्ला खाँ खुदा से क्या प्रार्थना करते थे?
Explanation: बिस्मिल्ला खाँ कला के सच्चे उपासक थे और वे खुदा से प्रार्थना करते थे कि उन्हें कभी बेसुरा वादन न मिले और उनके सुर में इतनी मार्मिकता हो कि श्रोताओं की आँखों से सच्चे आँसू निकल पड़ें।
Q5. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
Explanation: बिस्मिल्ला खाँ काशी की पुरानी सांस्कृतिक पहचान, जैसे पारंपरिक खान-पान और आपसी सौहार्द के लुप्त होने से दुखी थे।
Q6. बिस्मिल्ला खाँ को किस कारण हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक कहा गया है?
Explanation: बिस्मिल्ला खाँ का जीवन धार्मिक सहिष्णुता और समन्वय का अद्भुत उदाहरण था, जहाँ वे अपनी मुस्लिम पहचान बनाए रखते हुए भी हिंदू संस्कृति का सम्मान करते थे।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय के लिए है, विशेष रूप से 'नौबतखाने में इबादत' पाठ पर आधारित है।
'नौबतखाने में इबादत' पाठ का मुख्य विषय क्या है?
यह पाठ महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, संगीत के प्रति उनके समर्पण, उनकी सादगी और धार्मिक सौहार्द पर केंद्रित है।
बिस्मिल्ला खाँ को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा जाता है?
उन्हें यह उपाधि इसलिए दी गई क्योंकि वे शहनाई को अत्यंत मधुरता और सुरीलेपन से बजाते थे, और शहनाई को पारंपरिक रूप से मंगल कार्यों में बजाया जाता है।
क्या इन समाधानों में व्याकरण के प्रश्न भी शामिल हैं?
हाँ, इन समाधानों में पाठ के अंत में दिए गए भाषा-अध्ययन के प्रश्नों को भी शामिल किया गया है, जिसमें मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानने का अभ्यास है।
ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और व्याकरण के अभ्यास के माध्यम से छात्रों को परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के लिए तैयार करते हैं।
बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषताएँ पाठ में उजागर की गई हैं?
पाठ में बिस्मिल्ला खाँ के धार्मिक सौहार्द, सादगी, कला के प्रति अटूट निष्ठा, और विनोदी स्वभाव जैसी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।
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