कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: नौबतखाने में इबादत

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के पाठ 'नौबतखाने में इबादत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, उनके संगीत के प्रति समर्पण और उनकी सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित है। समाधानों में बिस्मिल्ला खाँ के जन्मस्थान डुमराँव के महत्व, शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा जाता है, और सुषिर वाद्यों में शहनाई के विशिष्ट स्थान जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया है। इसमें बिस्मिल्ला खाँ की प्रार्थनाओं, काशी में हो रहे परिवर्तनों पर उनकी व्यथा, और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं जैसे धार्मिक सौहार्द, सादगी और कला के प्रति अटूट निष्ठा पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter16 नौबतखाने में इबादत

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी के पाठ 'नौबतखाने में इबादत' के ये NCERT समाधान उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत यात्रा पर केंद्रित हैं। इसमें शहनाई वाद्य यंत्र, डुमराँव का महत्व, और बिस्मिल्ला खाँ को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया, जैसे विषयों की व्याख्या की गई है। समाधान बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व, उनकी प्रार्थनाओं, काशी के प्रति उनके विचारों और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में उनकी भूमिका को भी स्पष्ट करते हैं। भाषा-अध्ययन खंड में मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानने का अभ्यास भी शामिल है।

Learning outcomes

  • शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत के प्रति उनके समर्पण को समझना।
  • डुमराँव के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पहचानना।
  • शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' कहे जाने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताओं, जैसे धार्मिक सौहार्द और सादगी, का वर्णन करना।
  • मिश्र वाक्यों में प्रधान, संज्ञा और विशेषण उपवाक्यों को छाँटना और पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • बिस्मिल्ला खाँ का जीवन परिचय
  • शहनाई वाद्य यंत्र
  • डुमराँव का महत्व
  • मंगलध्वनि और शहनाई
  • सुषिर-वाद्य
  • कला के प्रति समर्पण
  • धार्मिक सौहार्द
  • काशी की संस्कृति
  • सादा जीवन और उच्च विचार
  • संगीत साधना
  • मिश्र वाक्य और उपवाक्य
  • हिंदी व्याकरण

Important topics

  • बिस्मिल्ला खाँ का जीवन और संगीत के प्रति समर्पण
  • शहनाई को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया?
  • बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ (धार्मिक सौहार्द, सादगी)
  • काशी की सांस्कृतिक विरासत और बिस्मिल्ला खाँ का उस पर प्रभाव
  • मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानना

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

शहनाई की दुनिया में दुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
Solution: शहनाई की दुनिया में दुमराँव को दो मुख्य कारणों से याद किया जाता है। पहला, यह प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि है, जिन्होंने शहनाई वादन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। दूसरा, दुमराँव में सोन नदी के किनारे एक विशेष प्रकार की नरकट घास पाई जाती है, जिसकी रीड (खोखली डंडी) का उपयोग शहनाई बनाने के लिए किया जाता है। यह घास शहनाई की ध्वनि की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रश्न 2

बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

अथवा

'बिस्मिल्ला खाँ हमेशा अपनी अजेय संगीतयात्रा के नायक रहेंगे।'-इस कथन की पुष्टि कीजिए।
Solution:बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक इसलिए कहा गया है क्योंकि शहनाई को पारंपरिक रूप से शुभ और मंगल अवसरों पर बजाया जाता है। बिस्मिल्ला खाँ ने अपने असाधारण वादन से शहनाई को एक विशेष प्रतिष्ठा दिलाई। वे भारत के ही नहीं, बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादकों में गिने जाते थे। उनकी शहनाई का वादन इतना सुरीला, मधुर और प्रभावशाली था कि वह श्रोताओं के मन को मोह लेता था। उन्होंने अपनी संगीत यात्रा में कभी हार नहीं मानी और जीवन भर शहनाई वादन को समर्पित रहे, जिससे वे वास्तव में 'अजेय संगीतयात्रा के नायक' बन गए।

प्रश्न 3

सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' की उपाधि क्यों दी गई होगी?
Solution:सुषिर-वाद्यों से अभिप्राय उन वाद्य यंत्रों से है जिन्हें फूँक मारकर बजाया जाता है। 'सुषिर' का अर्थ है 'खोखला' या 'छिद्र वाला', और इन वाद्यों में हवा भरकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' (या 'शाहे-नय') की उपाधि इसलिए दी गई होगी क्योंकि यह सभी फूँक वाले वाद्यों में सबसे अधिक मोहक, सुरीली और प्रभावशाली ध्वनि उत्पन्न करती है। इसकी मधुर तान श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है, जिस प्रकार एक राजा अपने राज्य में सर्वोपरि होता है, उसी प्रकार शहनाई सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

प्रश्न 4

आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) 'फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।'

(ख) 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'

Solution:

(क) आशय: इस कथन के माध्यम से शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे उन्हें कभी भी बेसुरा या फटा हुआ सुर न दें। उनके लिए शहनाई का सुर सबसे महत्वपूर्ण है। वे कहते हैं कि यदि उनकी लुंगिया (वस्त्र) फटी भी रह जाए तो कोई बात नहीं, क्योंकि फटे वस्त्र को सिला जा सकता है और यह अस्थायी है। लेकिन यदि सुर खराब हो गया, तो वह उनकी कला का अपमान होगा और उसे ठीक करना कठिन होगा। यह उनकी कला के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है।

(ख) आशय: इस प्रार्थना में बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से यह वरदान माँग रहे हैं कि उन्हें ऐसा सुर प्रदान करें जिसमें इतनी गहराई और मार्मिकता हो कि उसे सुनकर श्रोताओं की आँखों से सच्चे, अनगढ़ आँसू बह निकलें। वे चाहते हैं कि उनका संगीत केवल मनोरंजन का साधन न हो, बल्कि श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श करे और उन्हें भावुक कर दे, जैसे मोती अनगढ़ होते हुए भी मूल्यवान होते हैं। यह उनकी संगीत की शक्ति और उसके भावनात्मक प्रभाव में विश्वास को दर्शाता है।

प्रश्न 5

काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
Solution:बिस्मिल्ला खाँ काशी में हो रहे कुछ सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तनों से बहुत दुखी और व्यथित थे। उन्हें इस बात का कष्ट था कि काशी की पुरानी परंपराएँ और विशेषताएँ धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही थीं। जैसे कि, मलाई-बरफ़ वाले, कुलसुम की संगीतात्मक कचौड़ी और देशी घी की जलेबी जैसी पारंपरिक चीजें और उनके स्वाद अब नहीं रहे थे। इसके अतिरिक्त, उन्हें यह देखकर भी दुख होता था कि संगीत, साहित्य और अदब का वह सम्मान अब नहीं रहा जो पहले था। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहले जैसा मेलजोल और भाईचारा भी कम हो रहा था, और संगतकारों के प्रति कलाकारों के मन में सम्मान की भावना भी घट रही थी। ये सभी परिवर्तन उन्हें काशी की पहचान खोते हुए प्रतीत होते थे।

प्रश्न 6

पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि-

(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।

अथवा

विस्मिल्ला खाँ हिंदू-पुस्लिम एकता के प्रतीक थे, कैसे?
Solution:

(क) मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक: बिस्मिल्ला खाँ सच्चे मुसलमान थे और अपने धर्म, उत्सवों (जैसे मुहर्रम) और नमाज के प्रति गहरी आस्था रखते थे। इसके बावजूद, वे काशी की संस्कृति में पूरी तरह रमे हुए थे। वे जीवन भर काशी के विश्वनाथ और बालाजी मंदिर में शहनाई बजाते रहे, गंगा को 'मैया' मानते थे और काशी से बाहर होने पर भी बालाजी की ओर मुँह करके प्रणाम करते थे। उनका यह आचरण दर्शाता है कि वे केवल एक धर्म तक सीमित नहीं थे, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करते थे, इसलिए वे मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

(ख) सच्चे इंसान: बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थों में सच्चे इंसान थे क्योंकि उन्होंने कभी धार्मिक कट्टरता, संकीर्णता या घृणा का प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने अपने धर्म का पालन करते हुए भी अन्य संस्कृतियों का सम्मान किया। उन्होंने कभी ईश्वर से धन-संपत्ति नहीं माँगी, बल्कि हमेशा सच्चे सुर और कला की उत्कृष्टता की कामना की। वे अत्यंत सरल, सादे और विनम्र थे, भले ही उन्हें भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान मिले हों। उन्होंने कभी अहंकार नहीं किया और फटेहाल में भी सादगी से जीवन जिया। उनकी यह निस्वार्थता, सरलता और मानवतावादी दृष्टिकोण उन्हें एक सच्चा इंसान साबित करता है।

प्रश्न 7

बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?
Solution:बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को कई व्यक्तियों और घटनाओं ने समृद्ध किया। उनके जीवन में कुछ प्रमुख व्यक्ति थे: रसूलनबाई, बतूलनबाई, मामूजान अलीबख्श खाँ, नाना, कुलसुम हलवाइन और अभिनेत्री सुलोचना।

रसूलनबाई और बतूलनबाई की गायिकी, विशेषकर उनके द्वारा गाए गए दुमरी, टप्पे और दादरा, ने बिस्मिल्ला खाँ को संगीत की ओर आकर्षित किया और उनमें संगीत की ललक जगाई। वे उनकी प्रारंभिक प्रेरणा स्रोत बनीं।

उनके नाना, अलीबख्श खाँ, जो शाही दरबार में शहनाई बजाते थे, को देखकर बिस्मिल्ला खाँ शहनाई वादन के प्रति प्रेरित हुए। वे अपने नाना को शहनाई बजाते हुए सुनकर उसे खोजा करते थे।

जब उनके मामूजान अलीबख्श खाँ शहनाई बजाते हुए 'सम' (संगीत में एक विशेष ठहराव या लय) पर आते थे, तो बिस्मिल्ला खाँ जमीन पर पत्थर मारकर अपनी दाद (प्रशंसा) व्यक्त करते थे। इस प्रकार उन्होंने संगीत में दाद देना सीखा।

कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी तलने की कला में भी वे संगीत का आरोह-अवरोह देखते थे, जो उनकी संगीत की सूक्ष्म दृष्टि को दर्शाता है।

अभिनेत्री सुलोचना की फिल्मों ने भी उनके संगीत के अनुभव को समृद्ध किया। इन सभी अनुभवों और व्यक्तियों ने मिलकर बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को गहराई और विस्तार प्रदान किया।

प्रश्न 8

बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

अथवा

बिस्मिल्ला खाँ के चरित्र की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिनसे आप बहुत अधिक प्रभावित हुए?
Solution:बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ हैं जिन्होंने मुझे गहराई से प्रभावित किया है। उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

धार्मिक सौहार्द: वे एक सच्चे मुसलमान थे, पाँचों वक्त नमाज पढ़ते थे और मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा से मनाते थे। इसके बावजूद, वे काशी की हिंदू संस्कृति का भी उतना ही सम्मान करते थे। वे गंगा को 'मैया' कहते थे, बाबा विश्वनाथ और बालाजी के मंदिर में शहनाई बजाते थे। उनका यह समन्वयकारी दृष्टिकोण अत्यंत प्रेरणादायक है।

प्रभु के प्रति आस्था: बिस्मिल्ला खाँ का ईश्वर के प्रति गहरा विश्वास था। वे नमाज पढ़ते हुए भी सच्चे सुर की कामना करते थे और अपनी कला की सारी प्रशंसा ईश्वर को समर्पित करते थे। वे कभी भी धन-दौलत या भौतिक सुख-सुविधाओं की कामना नहीं करते थे, बल्कि अपनी कला को ही सर्वोपरि मानते थे।

सरलता और सादगी: भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के बावजूद, बिस्मिल्ला खाँ अत्यंत सरल और सादे जीवन जीते थे। वे कभी भी अपनी उपलब्धियों पर घमंड नहीं करते थे। वे अक्सर फटी हुई तहमद (धोती) पहनते थे और बनाव-श्रृंगार पर ध्यान नहीं देते थे। उनकी यह विनम्रता और सादगी प्रशंसनीय है।

रसिक और विनोदी स्वभाव: वे बचपन से ही रसिक थे और संगीत, गायन तथा खान-पान के शौकीन थे। वे अपनी बात कहने में कुशल थे और हास्य-विनोद के माध्यम से अपनी बात कह देते थे, जैसा कि भारत-रत्न मिलने पर लुंगिया के बारे में उनका कथन दर्शाता है।

प्रश्न 9

मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution:मुहर्रम का महीना बिस्मिल्ला खाँ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र था। इस महीने के दौरान, वे किसी भी प्रकार के मंगलवाद्य या राग-रागिनी का वादन नहीं करते थे, यहाँ तक कि वे अपनी प्रिय शहनाई भी नहीं बजाते थे। यह उनके गहरे धार्मिक लगाव और शोक व्यक्त करने का तरीका था। मुहर्रम के दसवें दिन, जब दालमंडी से ताजियों का जुलूस निकलता था, तो बिस्मिल्ला खाँ पूरे उत्साह और भावुकता के साथ आठ किलोमीटर तक चलते हुए नौहा (शोकगीत) बजाते थे। यह उनकी शिया मुस्लिम परंपरा के प्रति गहरी निष्ठा और सम्मान को दर्शाता है।

प्रश्न 10

बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Solution:बिस्मिल्ला खाँ कला के सच्चे और अनन्य उपासक थे, जिसके कई तर्क दिए जा सकते हैं। उन्होंने लगभग 80 वर्षों तक निरंतर शहनाई वादन का अभ्यास किया और इस क्षेत्र में अद्वितीय महारत हासिल की। वे इतने समर्पित थे कि इतनी लंबी साधना के बाद भी वे स्वयं को पूर्ण नहीं मानते थे। वे हमेशा ईश्वर से सच्चे सुर की माँग करते रहते थे, ताकि वे श्रोताओं के हृदय को छू सकें। उन्हें अक्सर यह मलाल रहता था कि वे अभी तक शहनाई को पूरी तरह से नहीं सीख पाए हैं। यह आत्म-आलोचना और निरंतर सीखने की ललक दर्शाती है कि वे केवल प्रसिद्धि या सम्मान के लिए नहीं, बल्कि कला की पूर्णता के लिए जीते थे। उन्होंने कभी भी दो-चार राग सीखकर स्वयं को उस्ताद नहीं समझा, बल्कि जीवन भर अभ्यास और साधना जारी रखी। यह समर्पण ही उन्हें कला का सच्चा उपासक बनाता है।

प्रश्न 11

निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए-

(क) यह ज़रूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

(ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।

(ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।

(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।

(ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।

(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।

Solution:

(क) यह ज़रूर है। (प्रधान उपवाक्य)

कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं। (संज्ञा उपवाक्य) (ख) रीड अंदर से पोली होती है। (प्रधान उपवाक्य)

जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है। (विशेषण उपवाक्य) (ग) रीड नरकट से बनाई जाती है। (प्रधान उपवाक्य)

जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। (विशेषण उपवाक्य) (घ) उनको यकीन है। (प्रधान उपवाक्य)

कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा। (संज्ञा उपवाक्य) (ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है। (प्रधान उपवाक्य)

जिसकी गमक उसी में समाई है। (विशेषण उपवाक्य) (च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है। (प्रधान उपवाक्य)

कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा। (संज्ञा उपवाक्य)

Common mistakes

  • बिस्मिल्ला खाँ के जीवन की घटनाओं और उनके संगीत साधना पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच संबंध स्थापित करने में कठिनाई।
  • मिश्र वाक्यों के उपवाक्यों को सही ढंग से पहचानने और उनके भेद बताने में त्रुटि।
  • बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताओं को केवल सतही तौर पर समझना, गहराई में न जाना।
  • पाठ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को समझने में चूक।

Revision tips

  • बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाओं और व्यक्तियों की सूची बनाएँ।
  • शहनाई और 'मंगलध्वनि' के संबंध को स्पष्ट करने वाले वाक्यों को रेखांकित करें।
  • मिश्र वाक्यों के अभ्यास प्रश्नों को हल करते समय प्रत्येक उपवाक्य के कार्य पर ध्यान दें।
  • बिस्मिल्ला खाँ के धार्मिक सौहार्द और सादगी के उदाहरणों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?

Q2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

Q3. सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है?

Q4. बिस्मिल्ला खाँ खुदा से क्या प्रार्थना करते थे?

Q5. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?

Q6. बिस्मिल्ला खाँ को किस कारण हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक कहा गया है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय के लिए है, विशेष रूप से 'नौबतखाने में इबादत' पाठ पर आधारित है।

'नौबतखाने में इबादत' पाठ का मुख्य विषय क्या है?

यह पाठ महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, संगीत के प्रति उनके समर्पण, उनकी सादगी और धार्मिक सौहार्द पर केंद्रित है।

बिस्मिल्ला खाँ को 'मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा जाता है?

उन्हें यह उपाधि इसलिए दी गई क्योंकि वे शहनाई को अत्यंत मधुरता और सुरीलेपन से बजाते थे, और शहनाई को पारंपरिक रूप से मंगल कार्यों में बजाया जाता है।

क्या इन समाधानों में व्याकरण के प्रश्न भी शामिल हैं?

हाँ, इन समाधानों में पाठ के अंत में दिए गए भाषा-अध्ययन के प्रश्नों को भी शामिल किया गया है, जिसमें मिश्र वाक्यों के उपवाक्य पहचानने का अभ्यास है।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और व्याकरण के अभ्यास के माध्यम से छात्रों को परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के लिए तैयार करते हैं।

बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषताएँ पाठ में उजागर की गई हैं?

पाठ में बिस्मिल्ला खाँ के धार्मिक सौहार्द, सादगी, कला के प्रति अटूट निष्ठा, और विनोदी स्वभाव जैसी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.