कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: नेताजी का चश्मा

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यह पृष्ठ कक्षा 10 की हिंदी पुस्तक के पाठ 'नेताजी का चश्मा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कैप्टन चश्मेवाले के चरित्र, हालदार साहब की देशभक्ति, पानवाले के विचार और मूर्ति के प्रति लोगों के दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। समाधान प्रत्येक प्रश्न के पीछे के आशय को स्पष्ट करते हैं, पात्रों की विशेषताओं का विश्लेषण करते हैं और देशभक्ति तथा राष्ट्रीय गौरव के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। यह सामग्री छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10 नेताजी का चश्मा

Chapter summary

कक्षा 10 के लिए 'नेताजी का चश्मा' पाठ के NCERT समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह समाधान पाठ के मुख्य पात्रों जैसे कैप्टन, हालदार साहब और पानवाले के चरित्र चित्रण पर केंद्रित हैं। इसमें देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और आम नागरिकों द्वारा देश के प्रति व्यक्त किए जाने वाले प्रेम के विभिन्न रूपों का विश्लेषण किया गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे एक साधारण चश्मेवाला भी देशभक्ति का प्रतीक बन सकता है और कैसे सरकंडे का चश्मा नई पीढ़ी में देशभक्ति की उम्मीद जगाता है।

Learning outcomes

  • कैप्टन चश्मेवाले के चरित्र और उसके देशभक्ति के भाव को समझना।
  • हालदार साहब के अवलोकन और उनकी देशभक्ति की भावना का विश्लेषण करना।
  • पानवाले के चरित्र और उसकी बदलती सोच को समझना।
  • मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगाए जाने के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना।
  • देशभक्ति को व्यक्त करने के विभिन्न रूपों को पहचानना।
  • स्थानीय बोली के प्रभाव और मानक हिंदी के प्रयोग को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • कैप्टन चश्मेवाले का चरित्र
  • हालदार साहब का अवलोकन
  • पानवाले का चरित्र
  • देशभक्ति की भावना
  • मूर्ति का प्रतीकात्मक अर्थ
  • सरकंडे का चश्मा
  • कस्बे का जीवन
  • स्थानीय बोली का प्रभाव
  • मानक हिंदी
  • आशय स्पष्टीकरण
  • पात्रों की विशेषताएँ
  • रचना और अभिव्यक्ति

Important topics

  • कैप्टन चश्मेवाले का चरित्र चित्रण
  • देशभक्ति का भाव और उसका प्रदर्शन
  • मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा
  • हालदार साहब का दृष्टिकोण
  • पानवाले का चरित्र विकास

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
Solution: चश्मेवाला कभी भी सेना में भर्ती नहीं हुआ था और न ही उसने कभी सेनानी के तौर पर काम किया था। वह शारीरिक रूप से भी काफी कमजोर और मरियल-सा दिखता था। परंतु, उसके मन में देश के प्रति गहरा सम्मान और देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। वह विशेष रूप से नेताजी सुभाषचंद्र बोस का बहुत आदर करता था। जब उसने देखा कि नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के है, तो उसे यह बात बहुत बुरी लगी। इसलिए, वह अपनी ओर से एक चश्मा बनाकर नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था। उसकी इसी देशभक्ति और नेताजी के प्रति सम्मान की भावना को देखकर ही कस्बे के लोग उसे व्यंग्य में या सम्मानपूर्वक 'कैप्टन' कहने लगे थे। यह नाम भले ही व्यंग्य में रखा गया हो, पर यह उसके चरित्र और भावना के अनुरूप था, क्योंकि वह कस्बे के लोगों के लिए एक तरह का मार्गदर्शक या प्रेरणास्रोत बन गया था।

प्रश्न 2

हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा।
  • (क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
  • (ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
  • (ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
Solution:

(क) हालदार साहब तब मायूस हो गए जब उन्होंने कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु के बारे में सुना। उन्हें यह सोचकर दुख हुआ कि अब उस कस्बे में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा है जो नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगा सके। उन्हें लगा कि अब नेताजी की मूर्ति हमेशा बिना चश्मे के ही खड़ी रहेगी, जो उनकी देशभक्ति के प्रति एक प्रकार की उपेक्षा होगी।

(ख) मूर्ति पर लगा सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देशभक्ति की भावना अभी भी जीवित है। भले ही कैप्टन जैसा देशभक्त व्यक्ति अब नहीं रहा, लेकिन अन्य लोग, विशेषकर नई पीढ़ी, उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकंडे का चश्मा किसी बच्चे द्वारा बनाया गया था, जो यह दर्शाता है कि बच्चे भी अपनी क्षमतानुसार देश के प्रति प्रेम व्यक्त कर सकते हैं और गरीबी के बावजूद देश को गौरवान्वित करने का प्रयास करेंगे।

(ग) हालदार साहब के लिए नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगना केवल एक छोटी सी बात नहीं थी, बल्कि यह उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। यह देखकर उन्हें बहुत खुशी और आशा हुई कि कैप्टन के न रहने पर भी, कस्बे के बच्चों ने मिलकर सरकंडे का चश्मा बनाकर मूर्ति को पूरा कर दिया। यह उनके मन में यह विश्वास जगाता था कि देश की नई पीढ़ी में भी देशभक्ति की भावना जीवित है। इस खुशी और आशा से वे भावुक हो उठे।

प्रश्न 3

आशय स्पष्ट कीजिए- "बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"
Solution: हालदार साहब ने जब कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु का समाचार सुना, तो वे बहुत उदास हो गए। उन्हें कैप्टन जैसे देशभक्त लोग देश की आशा की किरण लगते थे। लेकिन साथ ही, उन्हें यह सोचकर निराशा होती थी कि जिस देश में ऐसे महान देशभक्तों का सम्मान करने के बजाय उन पर हँसा जाता है, और जहाँ लोग केवल अपने स्वार्थ के लिए बिकने के मौके तलाशते हैं, उस देश का भविष्य क्या होगा। उन्होंने नगरपालिका द्वारा बनवाई गई नेताजी की अधूरी मूर्ति का भी स्मरण किया, जिसे चश्मा तक नहीं दिया गया था। यह सोचकर कि कैप्टन जैसे लोग भी उस समाज में उपहास का पात्र बनते हैं, हालदार साहब को देश के भविष्य की चिंता सताने लगी। वे यह भी सोचते थे कि जहाँ लोग केवल अपने प्रचार-प्रसार में लगे रहते हैं और देश के लिए बलिदान देने वालों का सम्मान नहीं करते, उस देश का विकास कैसे संभव है।

प्रश्न 4

पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिएं।
Solution: पानवाला एक मोटा, तोंद वाला व्यक्ति था जिसकी दुकान पर हमेशा पान लगा रहता था। उसके मुँह में भी पान भरा रहता था, जिसके कारण वह ठीक से बोल भी नहीं पाता था और बात करने से पहले उसे थूकना पड़ता था। वह स्वभाव से बहुत खुशमिजाज, हँसमुख और मज़ाकिया था। जब वह हँसता था, तो उसकी तोंद हिलने लगती थी और उसके पान खाए हुए लाल-काले दाँत दिखाई देते थे। वह बातें बनाने में माहिर था और उसकी बातों में अक्सर हँसी और व्यंग्य का पुट होता था। वह कैप्टन चश्मेवाले का मज़ाक भी उड़ाता था, लेकिन बाद में उसके प्रति संवेदनशीलता भी दिखाता है।

प्रश्न 5

"वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!" कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
Solution: पानवाले की यह टिप्पणी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील है। कैप्टन चश्मेवाला शारीरिक रूप से भले ही लँगड़ा हो, लेकिन वह देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था। वह नेताजी की मूर्ति को अधूरा नहीं देखना चाहता था, इसलिए अपनी ओर से चश्मा लगाता था। पानवाले को कैप्टन की इस भावना का सम्मान करना चाहिए था, न कि उसकी शारीरिक अक्षमता या मानसिक स्थिति पर टिप्पणी करनी चाहिए थी। किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक स्थिति का उपहास उड़ाना या उसे 'पागल' कहना गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय है। पानवाले को कैप्टन के देशभक्तिपूर्ण कार्यों को देखना चाहिए था, न कि उसकी कमियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था।

प्रश्न 6

निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-
  • (क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।
  • (ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुआ बोला-साहब! कैप्टन मर गया।
  • (ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
Solution:

(क) हालदार साहब का हमेशा चौराहे पर रुककर नेताजी की मूर्ति को निहारना उनकी देशभक्ति और नेताजी के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है। उन्हें मूर्ति में गहरी रुचि थी और वे उसके हर पहलू पर ध्यान देते थे, जैसे कि चश्मा लगा है या नहीं। यह उनकी संवेदनशीलता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है।

(ख) पानवाले का उदास हो जाना, पान थूकना और आँखें पोंछना यह दर्शाता है कि वह एक संवेदनशील व्यक्ति था। यद्यपि वह जीते जी कैप्टन का मज़ाक उड़ाता था, लेकिन कैप्टन की मृत्यु पर उसे गहरा दुख हुआ। उसे कैप्टन के अकेलेपन और देशभक्ति का एहसास हुआ और उसने महसूस किया कि कस्बे में उसके जैसा कोई और नहीं है। यह उसकी अंदरूनी भावनाओं और कैप्टन के प्रति सम्मान को प्रकट करता है।

(ग) कैप्टन का बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगाना उसकी अटूट देशभक्ति और नेताजी के प्रति निष्ठा को दर्शाता है। वह किसी भी कीमत पर नेताजी की मूर्ति को अधूरा नहीं देखना चाहता था। यह कार्य उसकी देशभक्ति की भावना का एक निरंतर प्रदर्शन था, जो उसे दूसरों से अलग बनाता था।

प्रश्न 7

जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
Solution: जब तक हालदार साहब ने कैप्टन चश्मेवाले को स्वयं नहीं देखा था, तब तक उन्होंने उसके बारे में एक अलग ही छवि अपने मन में बना रखी थी। वे सोचते थे कि 'कैप्टन' नाम के अनुरूप वह व्यक्ति अवश्य ही शारीरिक रूप से हट्टा-कट्टा, मजबूत और रौबदार होगा। शायद वह हमेशा फौजी टोपी पहने रहता होगा, उसकी चाल-ढाल में अनुशासन और दबंगई झलकती होगी, और उसकी आवाज़ में एक खास तरह का भारीपन होगा। वे उसे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में कल्पना करते थे जो अपनी उपस्थिति से ही प्रभावित करे।

प्रश्न 8

कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है-
  • (क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
  • (ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
  • (ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
Solution:

(क) चौराहों पर प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्तियाँ लगाने के कई उद्देश्य हो सकते हैं। मुख्य उद्देश्य यह होता है कि लोग उस महान व्यक्ति के जीवन, कार्यों और योगदानों को याद रखें। इन मूर्तियों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है कि वे भी उस व्यक्ति के आदर्शों का अनुकरण करें और समाज व देश के लिए कुछ अच्छा करें। यह उन व्यक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी एक तरीका है जिन्होंने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

(ख) मैं अपने इलाके के चौराहे पर किसी ऐसे राष्ट्रीय महापुरुष, महान संत, प्रसिद्ध साहित्यकार या वैज्ञानिक की मूर्ति स्थापित करवाना चाहूँगा जिन्होंने समाज और देश के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। उदाहरण के लिए, महात्मा गांधी, भगत सिंह, या किसी ऐसे साहित्यकार जिसने अपनी रचनाओं से लोगों को प्रेरित किया हो। ऐसा इसलिए, ताकि हम उनके बलिदानों, विचारों और कार्यों को याद रख सकें, उनसे प्रेरणा ले सकें और आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बारे में बता सकें।

(ग) उस मूर्ति के प्रति हमारा और समाज के सभी लोगों का यह उत्तरदायित्व बनता है कि हम उसकी देखभाल करें और उसे स्वच्छ रखें। मूर्ति को समय-समय पर साफ-सफाई और रखरखाव की आवश्यकता होती है ताकि वह जीर्ण-शीर्ण न हो। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मूर्ति के आसपास गंदगी न फैले और लोग उसका सम्मान करें। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम उन महान व्यक्तियों के प्रति अपना आदर बनाए रखें जिनकी मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं।

प्रश्न 9

सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे-सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।
Solution: यह बात बिल्कुल सही है कि देशप्रेम केवल सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों तक ही सीमित नहीं है। हम सभी अपने दैनिक जीवन में विभिन्न तरीकों से देशप्रेम व्यक्त कर सकते हैं। कुछ अन्य कार्य इस प्रकार हैं:
  1. पानी को व्यर्थ न बहाना और बिजली का सदुपयोग करना।
  2. अपने आसपास सफाई बनाए रखना और सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करना।
  3. प्लास्टिक का प्रयोग कम करना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना।
  4. देश के कानूनों का पालन करना और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना।
  5. अपने देश के साहित्य, संस्कृति और महापुरुषों का सम्मान करना और उनका अपमान करने वालों का विरोध करना।
  6. दूसरों की मदद करना और समाज में सद्भाव बनाए रखना।
  7. अपने काम को ईमानदारी और लगन से करना, चाहे वह छोटा हो या बड़ा।
इन कार्यों पर अमल करके हम सभी एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने देश के प्रति प्रेम और कर्तव्य निभा सकते हैं।

प्रश्न 10

निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखए- "कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।"
Solution: स्थानीय बोली के प्रभाव वाली पंक्तियों का मानक हिंदी में रूपांतरण इस प्रकार है:

"मानो कोई ग्राहक आ गया। उसे चौड़े फ्रेम वाला चश्मा चाहिए। तो कैप्टन कहाँ से लाएगा? तो उसे मूर्ति पर लगा चश्मा दे दिया। और उसकी जगह (मूर्ति पर) कोई दूसरा चश्मा लगा दिया।"

इस रूपांतरण में, 'गिराक' को 'ग्राहक', 'किदर' को 'कहाँ से', 'मूर्तिवाला' को 'मूर्ति पर लगा' और 'उदर' को 'उसकी जगह' जैसे मानक हिंदी शब्दों से बदला गया है।

प्रश्न 11

'भई खूब! क्या आइडिया है।' इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?
Solution: किसी भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों का प्रयोग होने से भाषा समृद्ध होती है और उसके अर्थ विस्तार में वृद्धि होती है। जैसा कि वाक्य "भई खूब! क्या आइडिया है" में देखा जा सकता है, 'खूब' (उर्दू शब्द) और 'आइडिया' (अंग्रेजी शब्द) का प्रयोग किया गया है।
  • 'खूब' शब्द में 'बहुत अच्छा' या 'अद्भुत' से भी अधिक गहरी प्रशंसा का भाव निहित है, जो केवल हिंदी के शब्दों में मिलना कठिन है।
  • इसी प्रकार, 'आइडिया' शब्द में 'विचार', 'युक्ति' या 'सूझ' की तुलना में एक विशेष प्रकार की नवीनता और मौलिकता का भाव है, जो किसी नई सोच या योजना के लिए प्रयुक्त होता है।
इस प्रकार, अन्य भाषाओं के शब्द अपनी भाषा में ऐसे अर्थ और भाव ला सकते हैं जो मूल भाषा में उपलब्ध नहीं होते। यह भाषा को अधिक अभिव्यंजक और प्रभावशाली बनाता है। हालाँकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग स्वाभाविक हो और अनावश्यक रूप से भाषा में बोझ न बने।

Common mistakes

  • कैप्टन के चरित्र को केवल एक साधारण चश्मेवाला समझ लेना, उसकी देशभक्ति की भावना को अनदेखा करना।
  • पानवाले की प्रारंभिक टिप्पणियों को उसके स्थायी स्वभाव के रूप में देखना, उसके संवेदनशील पक्ष को न समझना।
  • मूर्ति पर चश्मा लगाने के कार्य को केवल एक औपचारिकता मानना, उसके पीछे के गहरे राष्ट्रीय भाव को न समझना।
  • स्थानीय बोली के प्रयोग को केवल अशुद्धि मानना, उसके सांस्कृतिक महत्व को न समझना।

Revision tips

  • कैप्टन के चरित्र की विभिन्न परतों को समझें, विशेषकर उसकी देशभक्ति और स्वाभिमान पर ध्यान दें।
  • हालदार साहब के दृष्टिकोण से कहानी को देखें और समझें कि वे कस्बे और उसके लोगों के बारे में क्या सोचते हैं।
  • पानवाले के संवादों और उसके हाव-भाव पर ध्यान दें, यह समझने की कोशिश करें कि उसका चरित्र कैसे बदलता है।
  • मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगने के प्रसंग के प्रतीकात्मक अर्थ पर विचार करें।
  • पाठ में प्रयुक्त स्थानीय बोली के वाक्यों को मानक हिंदी में बदलने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. कैप्टन को लोग 'कैप्टन' क्यों कहते थे, जबकि वह सेनानी नहीं था?

Q2. हालदार साहब पहली बार मूर्ति पर चश्मा न देखकर क्यों मायूस हो गए थे?

Q3. मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?

Q4. पानवाला स्वभाव से कैसा था?

Q5. हालदार साहब ने कैप्टन के बारे में क्या सोचा था जब तक उन्होंने उसे देखा नहीं था?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'नेताजी का चश्मा' पाठ के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ के पात्रों, उनकी विशेषताओं, देशभक्ति के भाव और कहानी के मुख्य संदेश को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक है।

कैप्टन चश्मेवाले को लोग 'कैप्टन' क्यों कहते थे?

कैप्टन सेना में नहीं था, लेकिन वह सुभाषचंद्र बोस का बहुत बड़ा प्रशंसक था और उनकी मूर्ति पर हमेशा चश्मा लगाए रखता था। उसकी इसी देशभक्ति की भावना के कारण लोग उसे कैप्टन कहते थे।

मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या दर्शाता है?

सरकंडे का चश्मा यह दर्शाता है कि देशभक्ति की भावना केवल बड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में भी है। यह उम्मीद जगाता है कि देश की नई पीढ़ी भी देशप्रेम से ओत-प्रोत है।

हालदार साहब ने कैप्टन को पहली बार देखने से पहले उसके बारे में क्या सोचा था?

हालदार साहब ने सोचा था कि कैप्टन एक फौजी टोपी पहने हुए, हट्टा-कट्टा, रौबदार और अनुशासित व्यक्ति होगा।

पानवाले का चरित्र कैसे बदलता है?

शुरुआत में पानवाला कैप्टन का मज़ाक उड़ाता है, लेकिन कैप्टन की मृत्यु का समाचार सुनकर वह उदास हो जाता है और उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं, जो उसके संवेदनशील पक्ष को दर्शाता है।

क्या 'नेताजी का चश्मा' पाठ केवल देशभक्ति के बारे में है?

यह पाठ मुख्य रूप से देशभक्ति के बारे में है, लेकिन यह आम नागरिकों के छोटे-छोटे कार्यों से व्यक्त होने वाले देशप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और चरित्रों के विकास जैसे विषयों को भी छूता है।

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