कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: उत्साह और अट नहीं रही

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक में शामिल कविताओं 'उत्साह' और 'अट नहीं रही' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। 'उत्साह' कविता में, कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' बादलों से गरजने का आह्वान करते हैं, जो विद्रोह और नई चेतना का प्रतीक है। समाधान इस कविता के शीर्षक, बादलों के विभिन्न अर्थों और नाद-सौंदर्य वाले शब्दों की व्याख्या करते हैं। 'अट नहीं रही है' कविता फागुन के मनमोहक सौंदर्य का वर्णन करती है, जहाँ प्रकृति अपने चरम पर होती है। समाधान बताते हैं कि कैसे कवि की आँखें फागुन की सुंदरता से नहीं हटतीं, प्रकृति की व्यापकता और अन्य ऋतुओं से फागुन की भिन्नता पर प्रकाश डालते हैं। अंत में, निराला जी की काव्य-शिल्प की विशेषताओं पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को कविताओं की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5 उत्साह और अट नहीं रही

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी के लिए 'उत्साह' और 'अट नहीं रही' कविताओं के NCERT समाधान। 'उत्साह' कविता में बादल के गरजने के प्रतीकात्मक अर्थ, शीर्षक की सार्थकता और नाद-सौंदर्य पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 'अट नहीं रही है' कविता फागुन के अनुपम सौंदर्य, प्रकृति के मानवीकरण और अन्य ऋतुओं से इसकी भिन्नता को स्पष्ट करती है। समाधान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की काव्य-शिल्प की विशेषताओं को भी रेखांकित करते हैं।

Learning outcomes

  • कविताओं 'उत्साह' और 'अट नहीं रही' के केंद्रीय भावों को समझना।
  • बादल के गरजने के प्रतीकात्मक अर्थ का विश्लेषण करना।
  • फागुन मास के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करना।
  • छायावाद की विशेषताओं को कविताओं के संदर्भ में पहचानना।
  • नाद-सौंदर्य युक्त शब्दों को पहचानना और उनका महत्व समझना।
  • कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की काव्य-शैली की विशेषताओं का अध्ययन करना।

Topics covered

Paper topics

  • उत्साह कविता का भावार्थ
  • बादल का प्रतीक अर्थ
  • नाद-सौंदर्य
  • अट नहीं रही कविता का भावार्थ
  • फागुन मास का सौंदर्य
  • प्रकृति का मानवीकरण
  • छायावाद की विशेषताएँ
  • सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का काव्य-शिल्प
  • क्रांति का आह्वान
  • वसंत ऋतु का वर्णन

Important topics

  • उत्साह कविता: बादल का प्रतीक अर्थ और क्रांति का आह्वान
  • अट नहीं रही कविता: फागुन का सर्वव्यापी सौंदर्य और प्रकृति का मानवीकरण
  • नाद-सौंदर्य की पहचान
  • छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ
  • कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की काव्य-शैली

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहता है?
Solution: कवि बादल से फुहार या रिमझिम करने के बजाय 'गरजने' का आह्वान इसलिए करता है क्योंकि गरजना विद्रोह और नई चेतना का प्रतीक है। कवि बादलों के गरजने के माध्यम से समाज में एक नए प्रकार के विद्रोह और परिवर्तन की लहर लाने का आह्वान करना चाहता है, जो सोए हुए लोगों को जगा सके।

प्रश्न 2

कविता का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?
Solution: कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि यह एक आह्वान गीत है। कवि इस कविता के माध्यम से लोगों के मन में क्रांति और परिवर्तन लाने के लिए उत्साह भरना चाहते हैं। बादलों का गरजना जिस प्रकार लोगों के मन में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर देता है, उसी प्रकार कवि भी अपनी कविता से लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं।

प्रश्न 3

कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
Solution: कविता में बादल कई अर्थों की ओर संकेत करता है:
  1. यह जल बरसाने वाली प्राकृतिक शक्ति का प्रतीक है।
  2. यह पीड़ित और प्यासे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है, जो जीवनदायिनी वर्षा लाता है।
  3. यह कवि के मन में उत्साह और संघर्ष की भावना भरकर कविता में नया जीवन लाने में सक्रिय भूमिका निभाता है।

प्रश्न 4

शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। 'उत्साह' कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
Solution: 'उत्साह' कविता में नाद-सौंदर्य युक्त पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं, जिनमें शब्दों के प्रयोग से एक विशेष ध्वनि और प्रभाव उत्पन्न होता है:
  1. "घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ।" - यहाँ 'घेर घेर घोर गगन' में 'घ' वर्ण की आवृत्ति और ध्वनि से बादलों के घिरने का व्यापक प्रभाव उत्पन्न होता है।
  2. "ललित ललित, काले घुँघराले, बाल कल्पना के-से पाले" - यहाँ 'ललित ललित' और 'काले घुँघराले' जैसे शब्दों के प्रयोग से एक मधुर और लयबद्ध ध्वनि उत्पन्न होती है।
  3. "विदुयत-छवि उर में" - यहाँ 'विद्युत' शब्द की ध्वनि बिजली की चमक का बोध कराती है।

प्रश्न 5

छायावाद की एक खास विशेषता है अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।
Solution: कविता की निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है कि इसमें अन्तर्मन के भावों का बाहरी प्रकृति से सामंजस्य बिठाया गया है:

"कहीं साँस लेते हो, घर घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम, पर पर कर देते हो।"

इन पंक्तियों में कवि फागुन के सौंदर्य को महसूस कर रहा है और ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं साँस ले रही हो और घर-घर को सुगंध से भर रही हो, तथा उड़ने के लिए पंख फैला रही हो। यह कवि के अन्तर्मन की भावनाओं का प्रकृति के साथ जुड़ाव दर्शाता है।

प्रश्न 6

कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
Solution: कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही है क्योंकि फागुन का मौसम अत्यंत मनमोहक और मादक होता है। इस समय चारों ओर का वातावरण अत्यंत स्वच्छ, हरा-भरा और सुगंधित होता है। पेड़ों पर नई हरी और लाल पत्तियाँ आ जाती हैं, फूलों की मंद-मंद खुशबू हृदय को मोह लेती है। प्रकृति अपने पूरे उल्लास और सौंदर्य में होती है, जिसे देखकर कवि अभिभूत है और उसकी दृष्टि उस पर से हट नहीं पा रही है।

प्रश्न 7

प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
Solution: प्रस्तुत कविता 'अट नहीं रही है' में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी ने फागुन के सर्वव्यापक सौन्दर्य और मादक रूप के प्रभाव को कई रूपों में दर्शाया है:
  1. पेड़-पौधे नए पत्तों, फलों और फूलों से लद गए हैं, जिससे वे भरे-भरे से दिख रहे हैं।
  2. हवा सुगंधित हो उठी है, जो प्रकृति की व्यापकता का अहसास कराती है।
  3. प्रकृति के कण-कण में सौंदर्य भर गया है, जो कहीं भी समा नहीं रहा है।
  4. खेत-खलिहानों, बाग-बगीचों, जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों एवं चौराहों तक में फागुन का उल्लास सहज ही दिखाई देता है।
इस प्रकार, कवि ने प्रकृति के हर छोटे-बड़े हिस्से में फागुन के सौंदर्य की व्यापकता को चित्रित किया है।

प्रश्न 8

फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
Solution: फागुन मास में प्रकृति अपने चरम सौंदर्य और उल्लास पर होती है, जो इसे अन्य ऋतुओं से भिन्न बनाता है। इस समय:
  • सर्वत्र एक विशेष प्रकार की मादकता छाई रहती है।
  • पेड़-पौधे नए पत्तों, फल और फूलों से लद जाते हैं, जिससे वे अत्यंत सजीव और सुंदर लगते हैं।
  • हवा सुगंधित हो उठती है, जो वातावरण को मनमोहक बना देती है।
  • आकाश प्रायः साफ और स्वच्छ होता है।
  • पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते हुए उल्लास बिखेरते हैं।
  • बाग-बगीचों और जीव-जन्तुओं में एक विशेष प्रकार का उल्लास और नवीनता आ जाती है।
यह पूर्णता और नवजीवन का समय होता है, जो इसे अन्य ऋतुओं से अलग करता है।

प्रश्न 9

इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ।
Solution: महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनकी कविताओं 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' के आधार पर उनके काव्य-शिल्प की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं:
  1. प्रकृति चित्रण एवं मानवीकरण: निराला जी प्रकृति का अत्यंत सजीव चित्रण करते हैं और उसे मानवीय भावनाओं से युक्त दर्शाते हैं। 'अट नहीं रही है' में फागुन का मानवीकरण इसका उदाहरण है।
  2. भाव पक्ष और शिल्प पक्ष का सामंजस्य: उनकी कविताओं में अनुभूति (भाव) और अभिव्यक्ति (शिल्प) दोनों का सुंदर संतुलन मिलता है।
  3. भाषा प्रयोग: निराला जी की भाषा संस्कृतनिष्ठ, सामासिक और आलंकारिक होने के साथ-साथ ठेठ ग्रामीण शब्दों के प्रयोग से भी समृद्ध है। भाषा सरल, सहज, सुबोध और प्रवाहमयी है।
  4. अतुकांत शैली: उन्होंने अतुकांत (बिना तुकबंदी वाली) शैली में भी कविताएँ लिखी हैं, जिनमें क्रांति का स्वर, मादकता और मोहकता भरी है। 'उत्साह' कविता इसका एक उदाहरण है।
  5. गेयता एवं संगीतात्मकता: उनकी कविताओं में गेयता और संगीतात्मकता का गुण भी पाया जाता है।
  6. क्रांतिकारी स्वर: 'उत्साह' जैसी कविताओं में सामाजिक परिवर्तन और विद्रोह का स्वर स्पष्ट सुनाई देता है।

Common mistakes

  • बादल के गरजने के केवल शाब्दिक अर्थ पर ध्यान देना, प्रतीकात्मक अर्थ को अनदेखा करना।
  • कविता के शीर्षक 'उत्साह' के पीछे के गहरे भाव को न समझना।
  • फागुन के सौंदर्य का वर्णन करते समय प्रकृति के मानवीकरण को न पहचान पाना।
  • नाद-सौंदर्य जैसे काव्य-शिल्प के तत्वों को पहचानने में कठिनाई।

Revision tips

  • दोनों कविताओं के केंद्रीय भावों को सारांशित करें।
  • बादल के गरजने और फागुन के सौंदर्य से जुड़े मुख्य बिंबों को याद करें।
  • कविताओं में प्रयुक्त अलंकारिक भाषा और नाद-सौंदर्य वाले शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
  • निराला जी की काव्य-शिल्प की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझें।

Practice MCQs

Q1. कवि बादल से फुहार या रिमझिम के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहता है?

Q2. कविता 'उत्साह' का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?

Q3. कविता 'अट नहीं रही है' में कवि किस ऋतु का वर्णन कर रहा है?

Q4. कविता की किन पंक्तियों में 'नाद-सौंदर्य' का प्रभाव स्पष्ट होता है?

Q5. छायावाद की कौन सी विशेषता 'अट नहीं रही है' कविता में स्पष्ट दिखती है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के लिए 'उत्साह' और 'अट नहीं रही' कविताओं के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ये समाधान छात्रों को कविताओं के गहन अर्थ, प्रतीकों और काव्य-शिल्प को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक है।

'उत्साह' कविता में बादल किसका प्रतीक है?

कविता में बादल केवल जल बरसाने वाली शक्ति नहीं, बल्कि विद्रोह, नई चेतना और परिवर्तन लाने वाली शक्ति का प्रतीक है।

'अट नहीं रही है' कविता में कवि फागुन के किस सौंदर्य का वर्णन करता है?

कवि फागुन के सर्वव्यापी और मनमोहक सौंदर्य का वर्णन करता है, जिसमें प्रकृति अपने पूर्ण यौवन पर होती है, चारों ओर हरियाली, नए पत्ते और सुगंध फैली होती है।

नाद-सौंदर्य क्या है और यह 'उत्साह' कविता में कहाँ मिलता है?

नाद-सौंदर्य शब्दों के प्रयोग से उत्पन्न होने वाली मधुर ध्वनि है। 'उत्साह' कविता में 'घेर घेर घोर गगन' और 'ललित ललित, काले घुँघराले' जैसी पंक्तियों में यह स्पष्ट है।

छायावाद की कौन सी विशेषता इन कविताओं में देखने को मिलती है?

इन कविताओं में छायावाद की प्रमुख विशेषता 'अन्तर्मन के भावों का बाहरी दुनिया से सामंजस्य' और 'प्रकृति का मानवीकरण' स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

क्या ये समाधान परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए पर्याप्त हैं?

हाँ, ये समाधान NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं और कविताओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों और अवधारणाओं को कवर करते हैं।

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