CBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata ka Aanchal NCERT Solutions

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This comprehensive set of NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1, 'Mata ka Aanchal', delves into the tender relationship between a child and parents, exploring themes of emotional security, childhood games, and the nuances of rural life in the 1930s. The solutions provide in-depth answers to questions about why a child seeks maternal comfort during distress, the reasons behind forgetting sorrow amidst friends, and the evolution of rural culture. It also includes personal reflections on cherished childhood memories and parental affection. These solutions are designed to help students understand the chapter's core messages, analyze its literary elements, and prepare effectively for their examinations by offering clear explanations and insights into the text.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectकृतिका
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. माता का आँचल

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1, 'Mata ka Aanchal', focuses on the emotional bond between a child and their mother, especially during times of distress. It explores the innocent world of childhood games, friendships, and the simple joys of rural life in the past. The solutions also touch upon the contrast between past and present rural cultures and encourage personal reflection on parental love and childhood experiences.

Learning outcomes

  • Understand the deep emotional connection between a child and their mother.
  • Analyze the reasons behind a child's preference for maternal comfort during difficult times.
  • Describe the nature of childhood games and friendships in the early 20th century rural setting.
  • Compare and contrast rural life and culture of the past with the present.
  • Reflect on personal childhood memories and parental affection.
  • Appreciate the literary depiction of innocence and emotional security in the chapter.

Topics covered

Paper topics

  • Child-mother emotional bond
  • Childhood innocence and games
  • Rural life in the 1930s
  • Comparison of past and present rural culture
  • Parental affection (Vatsalya)
  • Significance of maternal comfort
  • Friendship and peer influence
  • Literary analysis of 'Mata ka Aanchal'

Important topics

  • The child's emotional dependence on the mother during distress
  • The nature and evolution of rural culture
  • The depiction of childhood games and innocence
  • Parental love and affection as portrayed in the chapter

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Questions and Solutions

Question 1

प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है ?
Solution:

यह सच है कि पाठ में भोलानाथ का अपने पिता से गहरा लगाव दिखाया गया है, वे साथ खेलते और कुश्ती भी करते थे। परन्तु, जब भोलानाथ पर विपदा आती है, जैसे कि साँप के डसने का डर, तो वह अपने पिता के पास जाने के बजाय माँ की गोद में शरण लेता है। इसका मुख्य कारण यह है कि बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता, स्नेह और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और आरामदायक स्थान होता है, जहाँ उसे असीम वात्सल्य और शांति मिलती है। पिता का स्नेह भी महत्वपूर्ण है, लेकिन माँ की ममता की छाया बच्चे को वह भावनात्मक संबल प्रदान करती है जिसकी उसे सबसे अधिक ज़रूरत होती है। माँ की गोद में बच्चा स्वयं को पूर्णतः सुरक्षित महसूस करता है।

Question 2

आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है ?
Solution:

भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना भूल जाता है क्योंकि बच्चों की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे अपनी उम्र के अन्य बच्चों के साथ खेलने में अत्यधिक रुचि लेते हैं। भोलानाथ भी अपने मित्र मंडली के साथ विभिन्न प्रकार के खेल खेलना और शरारतें करना पसंद करता है। जब वह अपने दोस्तों को खेलते, हँसते और मौज-मस्ती करते हुए देखता है, तो वह स्वयं को रोक नहीं पाता। खेल के आनंद और साथियों के साथ की धुन में वह अपना सारा दुःख और रोना भूल जाता है और पुनः उनके साथ खेलने लगता है। इस प्रकार, खेल का उल्लास और मित्रता उसे अपनी पीड़ा भुलाने में मदद करती है।

Question 3

आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
Solution:

हाँ, बचपन में खेलते समय तुकबंदी करना एक आम बात है। यह खेलों को और अधिक मनोरंजक बनाता है। मुझे भी अपने बचपन के कुछ खेल और उनसे जुड़ी तुकबंदियाँ याद हैं, जैसे:

  1. अटकन-बटकन दही चटाके, बनफूल बंगाले।

  2. अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो, अस्सी नब्बे पूरे सौ।

  3. पकड़म-पकड़ाई में, जो पकड़ा वो छोटा।

  4. छुपन-छुपाई में, छुपा वो जो रोया।

इस तरह की तुकबंदियाँ बच्चों के खेल का अभिन्न अंग होती हैं और उन्हें खेल में और अधिक मग्न कर देती हैं।

Question 4

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?
Solution:

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आज के बच्चों के खेलों से काफी भिन्न है।

सामग्री में भिन्नता: भोलानाथ और उसके साथी अपने खेल के लिए आँगन, घर और आसपास के वातावरण में उपलब्ध चीजों का उपयोग करते थे। जैसे - मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के टूटे-फूटे सामान आदि। ये वस्तुएँ उन्हें आसानी से और बिना किसी मूल्य के मिल जाती थीं। इसके विपरीत, आज के बच्चों के खेलने की सामग्री अधिकतर बाज़ार से खरीदी हुई होती है, जैसे - क्रिकेट किट, बैडमिंटन, विभिन्न प्रकार के वीडियो गेम्स, कंप्यूटर गेम्स, और अन्य प्लास्टिक के खिलौने। इन सामग्रियों को खरीदने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

खेलों में भिन्नता: भोलानाथ के खेल अधिक स्वच्छंद और प्राकृतिक थे, जैसे - कुश्ती, पकड़म-पकड़ाई, छुपन-छुपाई, बारात का स्वांग आदि। वे खुले मैदानों, आँगन और खेतों में खेलते थे। आज के बच्चों के खेल अक्सर घर के अंदर या सीमित दायरे में खेले जाते हैं, जैसे वीडियो गेम्स या बोर्ड गेम्स। इसके अलावा, आज के माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं और उन्हें खेलने के लिए उतनी स्वतंत्रता नहीं देते जितनी पहले दी जाती थी। आज के खेलों में बाजारीकरण और तकनीक का प्रभाव अधिक है, जबकि भोलानाथ के खेल सादगी और स्वाभाविकता से भरे थे।

Question 5

पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों।
Solution:

पाठ 'माता का आँचल' में कई ऐसे प्रसंग हैं जो पाठक के हृदय को गहराई से स्पर्श करते हैं:

  1. पिता के साथ भोलानाथ का आईना देखना: जब भोलानाथ रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठा होता है और आईने में अपना श्रृंगार देखकर खुश होता है, तो यह दृश्य बहुत ही मनमोहक लगता है। जब उसके पिता उसे देखते हैं और वह शरमाकर आईना रख देता है, तो यह भोलानाथ की बालसुलभ लज्जा और पिता के प्रति उसके स्नेह को दर्शाता है।

  2. पिता के साथ कुश्ती: भोलानाथ का अपने पिता के साथ कुश्ती खेलना, पिता का जानबूझकर हार जाना और बच्चे का मूंछ खींचना, यह प्रसंग पिता-पुत्र के बीच के गहरे प्रेम, विश्वास और खेल-खेल में स्नेह को व्यक्त करता है। यह दिखाता है कि पिता अपने बच्चे के साथ कितना सहज और आनंदित रहते हैं।

  3. बच्चों द्वारा बारात का स्वांग: बच्चों द्वारा बारात का स्वांग रचना, जिसमें वे समधी का बकरे पर सवार होते हैं, दुल्हन लाते हैं, और फिर पिता द्वारा दुल्हन का घूंघट उठाने पर भाग जाते हैं, यह प्रसंग बच्चों की कल्पनाशीलता, नाटकीयता और समाज के प्रति उनके अनजाने रुझान को दर्शाता है। यह उनके खेल की मासूमियत को उजागर करता है।

  4. माँ के आँचल में शरण: कहानी के अंत में, जब भोलानाथ को साँप का काटा हुआ समझकर सब घबरा जाते हैं और वह माँ की गोद में छिपकर रोता है, तो यह दृश्य अत्यंत मार्मिक है। माँ की चिंता, हल्दी लगाना और पिता के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना, यह माँ के वात्सल्य और बच्चे की सुरक्षा की भावना को गहराई से दर्शाता है। यह प्रसंग अनायास ही हर बच्चे को अपनी माँ की याद दिला देता है।

Question 6

इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं ?
Solution:

तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्रामीण संस्कृति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं:

  1. आवास: पहले गाँवों में कच्चे मकान, खपरैल की छतें और वृक्षों की छाया वाले घर आम थे। आज अधिकांश गाँवों में पक्के मकान बन गए हैं और कंक्रीट का प्रयोग बढ़ गया है।

  2. पारिवारिक संरचना: पहले गाँवों में बड़े, संयुक्त परिवार होते थे, जहाँ कई पीढ़ियाँ एक साथ रहती थीं। आज एकल परिवार की संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है, जहाँ माता-पिता और बच्चे अलग रहते हैं।

  3. तकनीक और आधुनिकीकरण: पहले लालटेन का प्रयोग होता था, अब बिजली आ गई है। खेती में बैलों की जगह ट्रैक्टरों ने ले ली है। घरेलू खाद की जगह रासायनिक खाद और विदेशी दवाइयों का प्रयोग बढ़ गया है। संचार के साधनों में भी क्रांति आई है।

  4. जीवन शैली: पहले गाँव के लोग बहुत ही सादा और सरल जीवन जीते थे। आज के ग्रामीण जीवन में बनावटीपन और भौतिकता का प्रभाव बढ़ा है।

  5. रोजगार: पहले खेती और पारंपरिक व्यवसाय मुख्य थे। आज गाँवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा है और रोजगार के नए साधन विकसित हुए हैं, जिससे खेतिहर मजदूरों की संख्या में कमी आई है।

कुल मिलाकर, आज की ग्रामीण संस्कृति अधिक आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और भौतिकवादी हो गई है, जबकि पहले की संस्कृति अधिक सरल, प्राकृतिक और सामुदायिक जीवन पर आधारित थी।

Question 7

पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
Solution:

डायरी प्रविष्टि:

दिनांक: [आज की तारीख]

प्रिय डायरी,

आज 'माता का आँचल' पाठ पढ़ा और पढ़ते-पढ़ते मुझे अपने बचपन के वे दिन याद आ गए जब माँ और पिताजी का लाड़-प्यार मुझे सबसे सुरक्षित महसूस कराता था। पाठ में भोलानाथ के पिता के साथ खेलने और माँ के आँचल में शरण लेने के प्रसंगों ने मुझे अपने बचपन की एक घटना याद दिला दी।

मुझे याद है, मैं लगभग सात साल का था और आँगन में अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। हम सब मिलकर एक पेड़ पर अटकी पतंग निकालने की कोशिश कर रहे थे। खेलते-खेलते अचानक एक पत्थर मेरी आँख पर लग गया। मैं दर्द से चीख पड़ा और रोने लगा। मेरी रोने की आवाज़ सुनकर माँ दौड़कर आई और मुझे रोता देख वह भी घबरा गई और रोने लगी। पिताजी भी तुरंत आ गए। दोनों मुझे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने जब कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, बस थोड़ी चोट है, तब जाकर दोनों को राहत मिली। उस दिन मैंने महसूस किया कि मेरे माता-पिता के लिए मैं कितना अनमोल हूँ और उनका प्यार मुझे हर मुश्किल से बचाता है। आज भी, जब मैं उस घटना को याद करता हूँ, तो उनके वात्सल्य की गर्माहट महसूस होती है।

[आपका नाम]

Question 8

यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Solution:

'माता का आँचल' पाठ में माता-पिता के वात्सल्य का अत्यंत सरस और हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है। लेखक ने अपने शैशव काल के अनुभवों के माध्यम से यह दर्शाया है कि माता-पिता का प्रेम बच्चे के लिए कितना महत्वपूर्ण होता है।

पिता का वात्सल्य भोलानाथ के साथ खेलने, कुश्ती लड़ने और उसे शरारतें करने की छूट देने में झलकता है। पिता जानबूझकर हारकर बच्चे को प्रसन्न करते हैं, उसकी मूंछें खिंचवाने देते हैं, जिससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।

वहीं, माँ का वात्सल्य अत्यंत ममतामयी और सुरक्षात्मक है। जब भोलानाथ विपदा में होता है (जैसे साँप के डसने के डर से), तो वह तुरंत माँ की गोद में शरण लेता है। माँ की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित आश्रय है, जहाँ उसे असीम स्नेह और शांति मिलती है। माँ की चिंता, उसका तुरंत हल्दी लगाना और बच्चे को दिलासा देना, यह सब माँ के गहरे वात्सल्य को प्रकट करता है। पिता के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना, बच्चे की माँ के प्रति अनन्य निर्भरता और माँ के वात्सल्य की गहराई को दिखाता है। इस प्रकार, पाठ में माता-पिता दोनों के प्रेम की विभिन्न अभिव्यक्तियों को खूबसूरती से उकेरा गया है, जो बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक हैं।

Common mistakes

  • Confusing the child's primary attachment figure solely with the father, overlooking the mother's role in providing emotional security.
  • Underestimating the significance of peer group influence on a child's emotional state.
  • Failing to recognize the cultural and societal shifts reflected in the comparison of past and present rural life.
  • Providing superficial answers to questions requiring personal reflection and emotional connection.

Revision tips

  • Focus on the emotional nuances of the parent-child relationship described in the chapter.
  • Pay attention to the descriptions of childhood games and compare them with your own experiences.
  • Analyze the author's portrayal of rural life and the changes over time.
  • Use the personal reflection questions to connect with the chapter's themes on a deeper level.
  • Re-read the sections describing Bholanath's reactions to distress and comfort.

Practice MCQs

Q1. विपदा के समय भोलानाथ माँ की शरण क्यों लेता है?

Q2. भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

Q3. पाठ के अनुसार, भोलानाथ और उसके साथियों के खेल की सामग्री मुख्य रूप से कहाँ से आती थी?

Q4. आज की ग्रामीण संस्कृति में पहले की तुलना में क्या परिवर्तन आया है?

Q5. पाठ का कौन सा प्रसंग माँ के वात्सल्य को गहराई से दर्शाता है?

Frequently asked questions

What is the main theme of 'Mata ka Aanchal'?

The main theme of 'Mata ka Aanchal' is the deep emotional bond between a child and their mother, emphasizing the mother's lap as a place of ultimate security and comfort, especially during times of distress. It also explores childhood innocence and rural life.

Why does Bholanath prefer his mother's comfort over his father's during distress?

Although Bholanath shares a strong bond with his father, he seeks his mother's comfort because her lap provides a sense of unparalleled security, warmth, and unconditional love, which is particularly needed during moments of crisis.

How does the chapter portray childhood games?

The chapter vividly describes the simple, imaginative, and often boisterous games played by Bholanath and his friends using natural objects and everyday items, reflecting the innocence and freedom of childhood in a rural setting.

What changes are highlighted in rural culture from the past to the present?

The chapter contrasts the past rural culture, characterized by natural surroundings, joint families, and simple living, with the present, which shows the influence of modernization, urbanization, nuclear families, and technological advancements.

How do these NCERT solutions help Class 10 students?

These solutions provide clear, detailed, and rewritten answers to all chapter questions, helping students understand the text, analyze its themes, and prepare effectively for their Hindi examinations.

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