कक्षा 10 कृतिका: जॉर्ज पंचम की नाक NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 कृतिका पुस्तक के अध्याय 2, 'जॉर्ज पंचम की नाक' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय सरकारी तंत्र की मानसिकता, औपनिवेशिक मानसिकता के प्रति समर्पण, और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालता है। समाधानों में रानी एलिजाबेथ की भारत यात्रा के संदर्भ में सरकारी मशीनरी की चिंताएं, मूर्तिकार द्वारा जॉर्ज पंचम की नाक को फिर से लगाने के प्रयास, और समकालीन पत्रकारिता के सतहीपन पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण शामिल हैं। यह सामग्री छात्रों को पाठ के गहन अर्थों को समझने, आलोचनात्मक सोच विकसित करने और परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में मदद करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectकृतिका
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. जॉर्ज पंचम की नाक

Chapter summary

कक्षा 10 कृतिका के अध्याय 2, 'जॉर्ज पंचम की नाक' के ये NCERT समाधान, सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता का विश्लेषण करते हैं। इसमें रानी एलिजाबेथ के आगमन की तैयारियों, मूर्तिकार के अथक प्रयासों और समकालीन पत्रकारिता के सतही पहलुओं पर चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को पाठ के मुख्य संदेशों को समझने और आलोचनात्मक मूल्यांकन करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता को समझना।
  • राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व का विश्लेषण करना।
  • समकालीन पत्रकारिता के सतहीपन का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना।
  • पाठ में निहित व्यंग्य और आलोचना को पहचानना।
  • जॉर्ज पंचम की नाक के प्रतीकात्मक अर्थ को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • जॉर्ज पंचम की नाक का प्रतीकात्मक अर्थ
  • सरकारी तंत्र की मानसिकता
  • औपनिवेशिक मानसिकता का प्रभाव
  • रानी एलिजाबेथ की भारत यात्रा
  • नई दिल्ली का सौंदर्यीकरण
  • मूर्तिकार के प्रयास
  • समकालीन पत्रकारिता का विश्लेषण
  • सतही पत्रकारिता का प्रभाव
  • राष्ट्रीय प्रतीकों का महत्व
  • व्यंग्य और आलोचना

Important topics

  • सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता
  • जॉर्ज पंचम की नाक का प्रतीकात्मक अर्थ
  • समकालीन पत्रकारिता की आलोचना
  • राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता
  • मूर्तिकार के यत्न और उनका निष्कर्ष

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?
Solution: सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर दिखाई गई चिंता और बदहवासी उनकी गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता को प्रकट करती है। यह दर्शाता है कि वे अभी भी उस विदेशी सत्ता के प्रति अत्यधिक सम्मान और समर्पण का भाव रखते हैं, जिसने कभी भारत पर अत्याचार किया था। अपनी अयोग्यता, अदूरदर्शिता और चाटुकारिता को छिपाने के लिए वे जॉर्ज पंचम जैसे व्यक्ति के सम्मान में जुट जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से उनकी गुलामी की मानसिकता से मुक्ति न पाने का संकेत है।

प्रश्न 2

रानी एलिजाबेथ के दर्ज़ी की परेशानी का कारण क्या था? उसकी इस परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?
Solution: रानी एलिजाबेथ के दर्ज़ी की मुख्य परेशानी यह थी कि उसे भारत, पाकिस्तान और नेपाल की यात्रा के दौरान रानी के लिए उपयुक्त पोशाकें तैयार करनी थीं, लेकिन उसे वहाँ के पहनावे-ओढ़ावे, मौसम और अवसरों की कोई जानकारी नहीं थी। यह परेशानी तर्कसंगत है क्योंकि रानी अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, इसलिए उनकी वेशभूषा उनके व्यक्तित्व, पद और यात्रा के उद्देश्य के अनुरूप होनी चाहिए थी। रंग चयन, डिज़ाइन और अवसर के अनुसार पोशाक का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण था, ताकि कोई चूक न हो और रानी की गरिमा बनी रहे। दर्ज़ी की चिंता रानी के क्रोध से बचने और अपने कर्तव्य को सही ढंग से निभाने की थी।

प्रश्न 3

'और देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा' - नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?
Solution: इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के आगमन की सूचना मिलते ही नई दिल्ली का कायापलट करने के लिए अनेक प्रयत्न किए गए होंगे, जिनमें प्रमुख हैं:
  1. पूरे शहर की गहन साफ-सफाई अभियान चलाना।
  2. सभी सरकारी और महत्वपूर्ण इमारतों की बाहरी दीवारों की सफ़ाई और रंग-रोगन करके उन्हें नया रूप देना।
  3. रानी के आवागमन के मार्गों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था करना और सजावट करना।
  4. सड़कों की मरम्मत करना, रेलिंग को रंगीन करना और मार्ग पर स्वागत द्वार बनाना।
  5. राजपथ के दोनों ओर सुंदर फूल-पौधे लगाना।
  6. जगह-जगह पुलिस और फौजी टुकड़ियाँ तैनात करना ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रहे।
  7. मार्ग पर दोनों देशों के झंडे लगाना।
यह सब महारानी के स्वागत और भारत की छवि को बेहतर दिखाने के उद्देश्य से किया गया था।

प्रश्न 4.1

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है - इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?
Solution: आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान जैसी व्यक्तिगत आदतों का वर्णन करना अनावश्यक और सतही पत्रकारिता का उदाहरण है। यह पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य नहीं है, जो कि समाज को सूचित करना और राष्ट्रहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है। इस प्रकार की खबरें अक्सर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए होती हैं और यह युवा पीढ़ी को दिशाहीन कर सकती है। पत्रकारिता को गंभीर और राष्ट्र निर्माण में सहायक विषयों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न 4.2

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है - इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?
Solution: इस प्रकार की पत्रकारिता आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह उन्हें दिग्भ्रमित करती है और नकल करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। युवा पीढ़ी इन चर्चित हस्तियों के फैशन और जीवनशैली को अपनाकर अपने वास्तविक लक्ष्यों और सामाजिक व्यवहार से भटक सकती है। वे अपना समय और धन व्यर्थ की सजावट और दिखावे में खर्च करने लगते हैं, जो उनके व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र के लिए हानिकारक है।

प्रश्न 5

जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?
Solution: जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने निम्नलिखित यत्न किए:
  • सबसे पहले, उसने व्यक्तिगत रूप से नाक लगाने की जिम्मेदारी लेते हुए देश भर के पहाड़ों और पत्थर की खानों का तूफानी दौरा किया ताकि वह मूल पत्थर का पता लगा सके।
  • जब उसे मूल पत्थर का पता नहीं चला, तो उसने देश भर में लगे छोटे-बड़े नेताओं की मूर्तियों की नाक से जॉर्ज पंचम की लाट की नाक का मिलान किया, इस उम्मीद में कि शायद किसी मूर्ति से नाक काटकर वहाँ लगाई जा सके। दुर्भाग्यवश, सभी की नाकें जॉर्ज पंचम की नाक से बड़ी निकलीं।
  • अंत में, उसने शहीद हुए बहादुर बच्चों की मूर्तियों की नाकें भी नापीं, लेकिन वहाँ भी उसे सफलता नहीं मिली।
  • जब सभी प्रयास विफल हो गए, तो हताश मूर्तिकार की सलाह पर हुक्मरानों ने जिंदा इंसान की नाक काटकर लगाने का परामर्श दिया और इस पर विचार किया।
ये सभी यत्न व्यवस्था की निरर्थकता और जॉर्ज पंचम के प्रति अंधभक्ति को दर्शाते हैं।

प्रश्न 6

प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए हैं जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं। उदाहरण के लिए 'फाईलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं।' 'सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ़ ताका।' पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।
Solution: मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करने वाले कुछ अन्य कथन निम्नलिखित हैं:
  1. शंख इंग्लैण्ड में बज रहा था, गूँज हिन्दुस्तान में आ रही थी। (यह कथन ब्रिटिश शासन के प्रभाव और भारत की निर्भरता को दर्शाता है।)
  2. गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई। (यह व्यवस्था की लापरवाही और सुरक्षा में चूक को उजागर करता है।)
  3. सड़कें जवान हो गईं, बुढ़ापे की धूल साफ़ हो गई। (यह रानी के आगमन के लिए किए गए ऊपरी दिखावे और दिखावटी सुधारों पर व्यंग्य है।)
  4. रानी आए और नाक न हो, तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी। (यह सरकारी अफसरों की अपनी प्रतिष्ठा और पद बचाने की चिंता को दर्शाता है, न कि राष्ट्रीय गौरव को।)
  5. एक ख़ास कमेटी बनाई गई और उसके जिम्मे यह काम दिया गया। (यह समस्या के समाधान के लिए बनाई गई निरर्थक समितियों पर कटाक्ष है।)
  6. चालीस करोड़ में से कोई एक ज़िंदा नाक काटकर लगा दी जाए। (यह व्यवस्था की संवेदनहीनता और अमानवीयता को दर्शाता है।)
ये कथन तत्कालीन व्यवस्था की अक्षमता, चाटुकारिता और संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य करते हैं।

Common mistakes

  • सरकारी तंत्र की चिंताओं को केवल व्यवस्थागत समस्या मानना, न कि मानसिकता का प्रतिबिंब।
  • पत्रकारिता के सतही पहलुओं को राष्ट्रीय महत्व का विषय समझना।
  • मूर्तिकार के प्रयासों को केवल एक तकनीकी कार्य के रूप में देखना, न कि एक प्रतीकात्मक खोज के रूप में।
  • पाठ के व्यंग्यात्मक लहजे को अनदेखा करना।

Revision tips

  • सरकारी तंत्र की 'नाक' बचाने की चिंता के पीछे छिपी मानसिकता पर ध्यान केंद्रित करें।
  • रानी की यात्रा के लिए की गई तैयारियों और उनके प्रतीकात्मक अर्थ का विश्लेषण करें।
  • मूर्तिकार द्वारा नाक खोजने के विभिन्न प्रयासों और उनकी विफलता पर विचार करें।
  • समकालीन पत्रकारिता पर लेखक के विचारों को समझें और अपने विचार बनाएं।
  • पाठ में प्रयुक्त व्यंग्य और आलोचनात्मक भाषा को पहचानें।

Practice MCQs

Q1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर चिंता किस मानसिकता को दर्शाती है?

Q2. रानी एलिजाबेथ के दर्ज़ी की मुख्य परेशानी क्या थी?

Q3. नई दिल्ली का कायापलट करने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए?

Q4. जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या किया?

Q5. पाठ के अनुसार, आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे आदि का वर्णन कैसा है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 कृतिका के अध्याय 2 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 2, 'जॉर्ज पंचम की नाक', मुख्य रूप से सरकारी तंत्र की औपनिवेशिक मानसिकता, राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता और समकालीन पत्रकारिता के सतहीपन पर केंद्रित है।

जॉर्ज पंचम की नाक का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

जॉर्ज पंचम की नाक का प्रतीकात्मक अर्थ उस औपनिवेशिक सत्ता और उसके प्रतीकों के प्रति सरकारी तंत्र के अंधानुकरण और चाटुकारिता को दर्शाता है, भले ही वह सत्ता अब भारत पर शासन न करती हो।

रानी एलिजाबेथ की यात्रा के लिए सरकारी तंत्र इतना चिंतित क्यों था?

सरकारी तंत्र रानी एलिजाबेथ की यात्रा को अपनी औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेष के रूप में देखता था और उनकी यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की कमी (जैसे जॉर्ज पंचम की नाक का न होना) को अपनी प्रतिष्ठा पर ठेस मानता था।

पाठ में पत्रकारिता की किस प्रवृत्ति की आलोचना की गई है?

पाठ में उस पत्रकारिता की आलोचना की गई है जो राष्ट्रहित के बजाय चर्चित हस्तियों के पहनावे, खान-पान और व्यक्तिगत जीवन जैसे सतही मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिससे युवा पीढ़ी भ्रमित होती है।

मूर्तिकार के अंतिम प्रयास का क्या परिणाम हुआ?

मूर्तिकार जॉर्ज पंचम की नाक के लिए कोई उपयुक्त पत्थर या नाक नहीं खोज सका, जिसके बाद अंततः जिंदा इंसान की नाक लगाने का परामर्श दिया गया, जो व्यवस्था की निरर्थकता और संवेदनहीनता को दर्शाता है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के मुख्य बिंदुओं, पात्रों के इरादों और आलोचनात्मक विश्लेषण को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलेगी।

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