CBSE Class 10 Hindi NCERT Solutions: पाठ 16 रवींद्र केलेवर

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

This chapter, 'रवींद्र केलेवर' from CBSE Class 10 Hindi (Course B), delves into profound philosophical concepts through engaging prose. The NCERT Solutions provided here aim to clarify the distinctions between pure ideals and practical approaches, using analogies like pure gold versus alloyed gold. It also explores the Japanese tea ceremony ('Cha-no-yu') as a practice that embodies tranquility and mindful living, contrasting with the hurried pace of modern life. The solutions meticulously answer questions about the essence of practical idealism, the characteristics of a traditional Japanese tea space, and the transformative experience of participating in a tea ceremony. Additionally, it examines leadership qualities through the example of Mahatma Gandhi. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the chapter's themes, understand complex ideas, and prepare effectively for their examinations by offering clear, step-by-step explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter16. रवींद्र केलेवर

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Course B) Chapter 16, 'रवींद्र केलेवर', focuses on understanding the balance between pure ideals and practical considerations in life. It explores the Japanese tea ceremony as a practice promoting peace and mindfulness. The solutions cover key concepts such as the definition of practical idealism, the comparison of pure ideals to gold and practicality to copper, and the serene atmosphere of the 'Cha-no-yu'. It also highlights Mahatma Gandhi's leadership through practical examples. This chapter encourages students to reflect on living in the present moment and maintaining peace amidst life's complexities.

Learning outcomes

  • Understand the difference between pure ideals and practical approaches.
  • Explain the concept of 'practical idealism'.
  • Describe the characteristics and significance of the Japanese tea ceremony ('Cha-no-yu').
  • Analyze the leadership qualities exemplified by Mahatma Gandhi.
  • Appreciate the importance of mindfulness and living in the present.
  • Interpret the symbolism used in the chapter, such as gold and copper.

Topics covered

Paper topics

  • Practical Idealism
  • Pure Ideals vs. Practicality
  • Japanese Tea Ceremony (Cha-no-yu)
  • Significance of Tranquility
  • Mindfulness and Living in the Present
  • Leadership Qualities
  • Mahatma Gandhi's Ideals
  • Symbolism of Gold and Copper
  • Contrast between Modern Life and Serene Practices

Important topics

  • Understanding Practical Idealism
  • The Essence of the Japanese Tea Ceremony
  • Living in the Present Moment
  • Mahatma Gandhi's Leadership Style
  • The Balance Between Ideals and Practicality

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
Solution: शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना इसलिए अलग होता है क्योंकि शुद्ध सोना पूरी तरह से मिलावट रहित होता है। दूसरी ओर, गिन्नी के सोने में थोड़ी मात्रा में ताँबा मिलाया जाता है। इस मिलावट के कारण गिन्नी का सोना शुद्ध सोने की तुलना में अधिक चमकदार और अधिक मजबूत होता है।

प्रश्न 2

प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
Solution: प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट (व्यावहारिक आदर्शवादी) उन व्यक्तियों को कहा जाता है जो अपने आदर्शों को केवल सैद्धांतिक रूप में नहीं रखते, बल्कि उन्हें वर्तमान समय की व्यावहारिकताओं और परिस्थितियों के अनुसार ढालकर प्रस्तुत करते हैं। आज के जटिल जीवन में केवल आदर्शों पर चलना कठिन है, इसलिए उन्हें व्यवहारिकता के साथ जोड़ना आवश्यक हो जाता है।

प्रश्न 3

पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
Solution: पाठ के संदर्भ में, शुद्ध आदर्श वह है जिसमें हानि या लाभ की कोई गुंजाइश नहीं होती। यह ऐसे आदर्श होते हैं जिन पर व्यावहारिकता हावी नहीं होती। शुद्ध आदर्श पूरे समाज की भलाई को ध्यान में रखते हैं और समाज के शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने में सक्षम होते हैं।

प्रश्न 4

लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
Solution: लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड का इंजन' लगने की बात इसलिए कही है क्योंकि जापानी लोग अपने देश की उन्नति और विकास की दौड़ में बहुत आगे हैं। वे अत्यधिक गतिशील हैं और लगातार प्रगति करने की होड़ में सबसे आगे बने रहने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न 5

जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
Solution: जापानी में चाय पीने की विधि को "चा-नो-यू" कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ "टी-सेरेमनी" (चाय समारोह) है। इस समारोह में चाय पिलाने वाले व्यक्ति को "चाजीन" कहा जाता है।

प्रश्न 6

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
Solution: जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वह स्थान पारंपरिक तरीके से सजाया जाता है। यह एक छोटा, प्राकृतिक ढंग से सुसज्जित स्थान होता है जहाँ केवल तीन लोग ही बैठकर चाय पी सकते हैं। इस स्थान की मुख्य विशेषता वहाँ का अत्यंत शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण है।

प्रश्न 7

शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
Solution: शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से इसलिए की गई है क्योंकि सोना अपनी शुद्धता में किसी भी प्रकार की मिलावट स्वीकार नहीं करता और अपने मूल स्वरूप में रहता है। व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से की गई है क्योंकि ताँबा सोने के साथ मिलकर उसे मजबूत तो बना देता है, लेकिन उसकी शुद्धता को कम कर देता है। इसी प्रकार, जीवन में व्यावहारिकता आदर्शों को अधिक मजबूत और क्रियान्वित करने योग्य बनाती है, परन्तु कभी-कभी यह आदर्शों की मूल शुद्धता को भी प्रभावित कर सकती है। फिर भी, जीवन में आदर्शों के साथ व्यावहारिकता का समावेश आवश्यक है ताकि आदर्श सुंदर और प्रभावी बन सकें।

प्रश्न 8

चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
Solution: चाजीन ने टी-सेरेमनी से संबंधित सभी क्रियाओं को अत्यंत गरिमापूर्ण और सहज ढंग से पूरा किया। इसमें पर्णकुटी में अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी को व्यवस्थित करना, दूसरे कमरे से चाय के बर्तन लाना, उन्हें तौलिए से सावधानीपूर्वक पोंछना और अंत में बर्तनों में चाय डालना जैसी सभी क्रियाएँ शामिल थीं। इन सभी क्रियाओं को बड़े ही आराम, सलीके और सहजता के साथ संपन्न किया गया।

प्रश्न 9

'टी-सेरेमनी' में कितने आदिमयों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
Solution: 'टी-सेरेमनी' में केवल तीन ही व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाता था। इसका मुख्य कारण यह था कि वहाँ शांति और एकाग्रता का माहौल बना रहे। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि व्यक्ति भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ पल अकेले या शांत वातावरण में बिता सके और वर्तमान क्षण का अनुभव कर सके। अधिक लोगों के आने से शांति भंग होकर अशांति का माहौल बन सकता था।

प्रश्न 10

चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
Solution: चाय पीने के बाद लेखक ने अपने भीतर एक गहरा परिवर्तन महसूस किया। उन्हें लगा जैसे उनके दिमाग की गति बहुत धीमी हो गई हो, और धीरे-धीरे वह पूरी तरह शांत हो गया हो। उन्हें कमरे में पसरे सन्नाटे की आवाज़ें भी सुनाई देने लगीं। ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे अनंतकाल से जी रहे हों, और वे भूतकाल या भविष्य की चिंता से मुक्त होकर पूरी तरह वर्तमान क्षण में जी रहे हों।

प्रश्न 11

गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।
Solution: महात्मा गांधी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी, जिसे उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों से समझा जा सकता है। उन्होंने अपने सभी आंदोलनों, जैसे 'भारत छोड़ो आंदोलन', 'सत्याग्रह', 'असहयोग आंदोलन', और 'दांडी मार्च', को व्यावहारिकता के धरातल पर आदर्शों के साथ जोड़कर चलाया। सत्य और अहिंसा को अपने मुख्य हथियार बनाकर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य जैसी शक्तिशाली सत्ता का सामना किया। उनके नेतृत्व में लाखों भारतीयों ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया और देशवासियों को उनके नेतृत्व को स्वीकार करने में गर्व का अनुभव होता था। यह उनकी नेतृत्व क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है।

Common mistakes

  • Confusing pure ideals with impracticality.
  • Underestimating the importance of practicality in achieving ideals.
  • Misinterpreting the purpose of the Japanese tea ceremony.
  • Failing to connect abstract concepts to real-life examples like Gandhi's leadership.

Revision tips

  • Focus on the analogies used (gold vs. copper) to understand the core concepts.
  • Pay close attention to the description of the 'Cha-no-yu' and its associated feelings.
  • Analyze the examples of Mahatma Gandhi's leadership to see practical idealism in action.
  • Reflect on how the chapter's themes relate to your own life and the modern world.

Practice MCQs

Q1. शुद्ध सोना और गिन्नी के सोने में मुख्य अंतर क्या है?

Q2. प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहा जाता है?

Q3. पाठ के अनुसार, शुद्ध आदर्श की तुलना किससे की गई है?

Q4. जापानी चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

Q5. टी-सेरेमनी में शांति बनाए रखने के लिए कितने लोगों को प्रवेश दिया जाता था?

Frequently asked questions

यह पाठ 'रवींद्र केलेवर' किस बारे में है?

यह पाठ 'रवींद्र केलेवर' आदर्शों और व्यावहारिकता के बीच संतुलन, जापानी चाय समारोह ('चा-नो-यू') के माध्यम से शांति और वर्तमान में जीने के महत्व, और महात्मा गांधी के नेतृत्व जैसे विषयों पर केंद्रित है।

शुद्ध आदर्श और व्यावहारिकता की तुलना सोने और तांबे से क्यों की गई है?

शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से की गई है क्योंकि वह अपने आप में पूर्ण होता है। व्यावहारिकता की तुलना तांबे से की गई है, जो सोने को मजबूत तो बनाता है पर उसकी शुद्धता कम कर देता है। इसी तरह, व्यावहारिकता आदर्शों को व्यवहारिक बनाती है पर कभी-कभी उनकी शुद्धता को भी प्रभावित कर सकती है।

जापानी चाय समारोह ('चा-नो-यू') का क्या महत्व है?

जापानी चाय समारोह ('चा-नो-यू') एक ऐसी विधि है जो शांति, गरिमा और वर्तमान क्षण में जीने का अनुभव कराती है। यह भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ पल सुकून के बिताने का अवसर प्रदान करती है।

लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड का इंजन' लगने की बात क्यों कही?

लेखक ने यह बात इसलिए कही क्योंकि जापानी लोग उन्नति और विकास की दौड़ में बहुत तेज हैं और वे हमेशा आगे रहने का प्रयास करते हैं।

महात्मा गांधी के नेतृत्व के बारे में पाठ क्या बताता है?

पाठ बताता है कि महात्मा गांधी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों को व्यावहारिकता के साथ जोड़कर अपने आंदोलनों को सफल बनाया, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य का सामना किया जा सका।

चाय पीने के बाद लेखक ने क्या महसूस किया?

चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उनके दिमाग की गति धीमी हो गई है, मानो वे वर्तमान क्षण में जी रहे हों और भूत-भविष्य की चिंता से मुक्त हों।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.