कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 11, 'सीताराम सेकसरिया: डायरी का एक पन्ना' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाधान 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में हुए राष्ट्रीय झंडा दिवस के ऐतिहासिक आयोजन पर केंद्रित है, जब स्वतंत्रता की भावना को दर्शाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गईं। समाधानों में उस दिन की निराली प्रकृति, पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस के बीच अंतर, जुलूस के टूटने के कारण, घायलों की तस्वीरें लेने का उद्देश्य, और स्त्री समाज की महत्वपूर्ण भूमिका जैसे विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आम लोगों के साहस और देश के प्रति उनके समर्पण को समझने में मदद करते हैं, तथा परीक्षा की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में कार्य करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 11, 'सीताराम सेकसरिया: डायरी का एक पन्ना' के ये NCERT समाधान 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में हुए राष्ट्रीय झंडा दिवस के आयोजन का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करते हैं। समाधानों में उस दिन की विशेष तैयारियों, निषेधाज्ञा के बावजूद लोगों की भागीदारी, पुलिस और कौंसिल के नोटिस के बीच टकराव, जुलूस के दौरान हुई घटनाओं और स्त्री समाज की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। यह पाठ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति और साहस के प्रदर्शन को दर्शाता है।

Learning outcomes

  • 26 जनवरी 1931 के दिन की ऐतिहासिक महत्वता को समझना।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सरकारी निषेधाज्ञाओं और जनता के प्रतिरोध के बीच के अंतर को पहचानना।
  • जुलूसों और सभाओं में स्त्री समाज की भागीदारी के महत्व का विश्लेषण करना।
  • देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना को व्यक्त करने के विभिन्न तरीकों को समझना।
  • पाठ में वर्णित घटनाओं के ऐतिहासिक संदर्भ का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • 26 जनवरी 1931 का राष्ट्रीय झंडा दिवस
  • कोलकाता में स्वतंत्रता संग्राम की तैयारियां
  • पुलिस कमिश्नर का नोटिस
  • कौंसिल का नोटिस
  • जुलूस और उसका टूटना
  • सुभाष चंद्र बोस की गिरफ्तारी
  • स्त्री समाज की भूमिका
  • अंग्रेजी सरकार का दमन
  • देशभक्ति और साहस
  • कानून भंग करने का औचित्य
  • अपूर्व घटना का वर्णन
  • डायरी लेखन का महत्व

Important topics

  • 26 जनवरी 1931 का राष्ट्रीय झंडा दिवस
  • पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस का अंतर
  • जुलूस का टूटना और उसके कारण
  • स्त्री समाज की सक्रिय भागीदारी
  • कानून भंग करने का औचित्य और उसका महत्व
  • अपूर्व घटना के रूप में दिन का वर्णन

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Questions and Solutions

1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई?

26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई?
Solution: 26 जनवरी 1931 के दिन को यादगार बनाने के लिए कोलकाता के निवासियों ने व्यापक तैयारियां की थीं। लोगों ने अपने घरों को खूबसूरती से सजाया, पूरे शहर में राष्ट्रीय झंडे फहराए, और कुछ लोगों ने तो अपने घरों को ऐसे सजाया मानो स्वतंत्रता प्राप्त हो ही गई हो। शाम को मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराने और एक बड़ी सभा का आयोजन करने की भी योजना थी, जिससे यह दिन इतिहास में दर्ज हो सके।

2. "आज जो बात थी वह निराली थी" - किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।

"आज जो बात थी वह निराली थी" - किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
Solution: यह कथन इस बात से स्पष्ट होता है कि 26 जनवरी का दिन अपने आप में असाधारण था क्योंकि कोलकातावासी इसे विशेष बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, सैकड़ों लोग दोपहर तीन बजे से ही पार्क में इकट्ठा होने लगे थे। स्त्रियाँ भी जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही थीं। लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूम रहे थे और जगह-जगह राष्ट्रीय झंडे फहरा रहे थे, जो उस दिन की निराली भावना को दर्शा रहा था।

3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?

पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
Solution: पुलिस कमिश्नर के नोटिस में यह कहा गया था कि कुछ विशेष धाराओं के तहत सभा आयोजित करना या उसमें भाग लेना गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वालों को दोषी ठहराया जाएगा। यह सरकार द्वारा जनता पर भय थोपने का प्रयास था। इसके विपरीत, कौंसिल के नोटिस में यह घोषणा की गई थी कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह नोटिस सरकार के आदेशों को खुला आमंत्रण और चुनौती दे रहा था, जो पहले कभी नहीं देखा गया था।

4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
Solution: धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस इसलिए टूट गया क्योंकि पुलिस ने जनता पर लाठियाँ बरसाना शुरू कर दिया था, जिससे कई लोग घायल हो गए थे। इसी बीच, सुभाष बाबू को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन घटनाओं के कारण जुलूस में अव्यवस्था फैल गई और वह आगे नहीं बढ़ सका।

5. डॉ. दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।

डॉ. दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
Solution: डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों की फोटो खिंचवाने की मुख्य वजह यह थी कि वे अंग्रेजी सरकार के इस अमानवीय और क्रूर कृत्य को पूरे देश के सामने लाना चाहते थे। इन तस्वीरों को समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाकर वे यह दिखाना चाहते थे कि कैसे सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार कर रही है, ताकि देशवासी प्रेरित हों और अंग्रेजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में अधिक संख्या में भाग लें।

6. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
Solution: सुभाष चंद्र बोस के जुलूस में स्त्री समाज ने अत्यंत महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई थी। स्त्रियों ने अपने-अपने तरीकों से जुलूस निकाला और उसका नेतृत्व किया। जानकी देवी और मदालसा बजाज जैसी प्रमुख महिलाओं ने जुलूस का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने झंडोत्सव में पहुँचकर मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणा पत्र पढ़ा। लगभग 105 स्त्रियों ने पुलिस के सामने अपनी गिरफ्तारी दी और अंग्रेजों के अत्याचार का बहादुरी से सामना किया, जो उनकी अदम्य भावना को दर्शाता है।

7. जुलूस के लाल बाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

जुलूस के लाल बाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
Solution: जब जुलूस लाल बाजार पहुँचा, तो पुलिस ने तुरंत ही जुलूस पर लाठियाँ बरसाना शुरू कर दिया। इस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए। सुभाष बाबू को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया और मदालसा बजाज को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकार, लाल बाजार में जुलूस के पहुँचने पर पुलिसिया दमन के कारण लोगों की दशा अत्यंत गंभीर हो गई, जिसमें कई लोग घायल हुए और गिरफ्तार हुए।

8. 'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Solution: यहाँ पर पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू किए गए उस कानून को भंग करने की बात कही गई है, जिसके अनुसार किसी भी प्रकार की सभा आयोजित करने या उसमें भाग लेने की मनाही थी। पाठ के संदर्भ में, यह कानून भंग करना अत्यंत आवश्यक था। यदि ऐसा न किया जाता तो स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा नहीं मिलता और अंग्रेजों के दमनकारी शासन के खिलाफ विरोध कमजोर पड़ जाता। इस कानून को भंग करके जनता ने अपनी देशभक्ति का परिचय दिया और अंग्रेजों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि यह देश भारतीयों का है।

9. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।

बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: मेरे विचार से यह दिन अपूर्व इसलिए था क्योंकि इससे पहले कोलकाता में इतने बड़े पैमाने पर और इतने खुले तौर पर राष्ट्रीय झंडा दिवस का आयोजन नहीं किया गया था। सरकार द्वारा लगाए गए निषेधाज्ञाओं और दमनकारी उपायों के बावजूद, जनता का उत्साह और भागीदारी अभूतपूर्व थी। विशेष रूप से, स्त्रियों का इतनी बड़ी संख्या में जुलूस में शामिल होना, नेतृत्व करना और गिरफ्तारी देना, इस दिन को और भी असाधारण बनाता है। यह दिन स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जनता की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

10. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।

आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।
Solution: इस कथन का आशय यह है कि 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में हुई घटनाएँ अत्यंत असाधारण थीं। इससे पहले, यह माना जाता था कि बंगाल या कोलकाता के लोग स्वतंत्रता संग्राम में उतना सक्रिय योगदान नहीं दे रहे हैं, जो उनके लिए एक कलंक की बात थी। परंतु, इस दिन के आयोजन ने, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और सरकार को चुनौती दी, इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया और कोलकातावासियों के देशभक्तिपूर्ण कार्यों से उस कलंक को धो दिया।

Common mistakes

  • सरकारी नोटिस और कौंसिल के नोटिस के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से न समझ पाना।
  • जुलूस के टूटने के कारणों का अधूरा विश्लेषण करना।
  • स्त्री समाज की भूमिका को कम आंकना या अनदेखा करना।
  • कानून भंग करने के औचित्य पर केवल व्यक्तिगत विचार व्यक्त करना, पाठ के संदर्भ को छोड़ देना।

Revision tips

  • 26 जनवरी 1931 की घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से याद करें।
  • पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस के बीच के मुख्य अंतरों को सूचीबद्ध करें।
  • पाठ में महिलाओं की भूमिका से संबंधित वाक्यों को विशेष रूप से रेखांकित करें।
  • जुलूस के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं (जैसे लाठीचार्ज, गिरफ्तारी) और उनके परिणामों को समझें।
  • पाठ के मुख्य पात्रों और उनकी भूमिकाओं को पहचानें।

Practice MCQs

Q1. 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्रीय झंडा दिवस मनाने के लिए क्या विशेष तैयारी की गई थी?

Q2. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में मुख्य अंतर क्या था?

Q3. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

Q4. डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों की फोटो उतरवाने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q5. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श पुस्तक) के लिए है, विशेष रूप से पाठ 11 'सीताराम सेकसरिया: डायरी का एक पन्ना' पर आधारित।

इस पाठ में किस ऐतिहासिक घटना का वर्णन है?

इस पाठ में 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में मनाए गए राष्ट्रीय झंडा दिवस का वर्णन है, जब स्वतंत्रता की घोषणा के लिए एक बड़ा जुलूस निकाला गया था।

समाधानों में किन मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है?

समाधानों में उस दिन की तैयारियों, पुलिस के प्रतिबंधों, जनता के प्रतिरोध, सुभाष चंद्र बोस की गिरफ्तारी, घायलों की स्थिति और विशेष रूप से स्त्री समाज की भूमिका जैसे पहलुओं को समझाया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?

हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में छात्रों की मदद करते हैं।

पाठ में 'अपूर्व' शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?

पाठ में 'अपूर्व' शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में इतने बड़े स्तर पर, सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद, स्वतंत्रता की घोषणा के लिए जुलूस निकालना और स्त्रियों की बड़ी संख्या में भागीदारी एक अभूतपूर्व घटना थी।

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