कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 14 - एक कहानी यह भी

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी क्षितिज पुस्तक के पाठ 14, 'एक कहानी यह भी' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के उन पहलुओं पर प्रकाश डालता है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया, विशेष रूप से उनके पिता और शिक्षिका शीला अग्रवाल के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधानों में लेखिका के पिता द्वारा रसोई को 'भटियारखाना' कहने के कारण, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी, और उनके पिता के साथ वैचारिक मतभेदों की पड़ताल की गई है। यह पाठ उस समय के सामाजिक परिदृश्य और महिलाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. मन्नु भंड़ारी - एक कहानी यह भी

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के पाठ 14 'एक कहानी यह भी' के ये NCERT समाधान लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं। इसमें उनके पिता और शिक्षिका शीला अग्रवाल के व्यक्तित्व पर पड़ने वाले प्रभाव, पिता द्वारा रसोई को 'भटियारखाना' कहने के पीछे के कारणों, और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका का विश्लेषण शामिल है। समाधान लेखिका और उनके पिता के बीच वैचारिक मतभेदों को भी स्पष्ट करते हैं, साथ ही उस समय के सामाजिक माहौल और लड़कियों की सीमित भूमिका पर भी प्रकाश डालते हैं।

Learning outcomes

  • लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर पड़े प्रभावों को समझना।
  • पिता द्वारा रसोई को 'भटियारखाना' कहने के पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
  • स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका की भूमिका को पहचानना।
  • लेखिका और उनके पिता के बीच वैचारिक मतभेदों को समझना।
  • बदलते सामाजिक परिदृश्य में लड़कियों की स्थिति का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखिका का व्यक्तित्व विकास
  • पिता का प्रभाव
  • शिक्षिका शीला अग्रवाल का योगदान
  • रसोई का 'भटियारखाना' के रूप में चित्रण
  • स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी
  • वैचारिक मतभेद
  • सामाजिक परिदृश्य
  • लड़कियों की शिक्षा और स्वतंत्रता
  • पड़ोस कल्चर का महत्व

Important topics

  • लेखिका के व्यक्तित्व पर पिता और शिक्षिका का प्रभाव
  • स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका की भूमिका
  • लेखिका और पिता के बीच वैचारिक मतभेद
  • रसोई को 'भटियारखाना' कहने का अर्थ
  • बदलते सामाजिक परिदृश्य में लड़कियों की स्थिति

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?

लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?
Solution: लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर मुख्य रूप से दो व्यक्तियों का गहरा प्रभाव पड़ा:
  1. पिता का प्रभाव: लेखिका के पिता का प्रभाव अप्रत्यक्ष था। बचपन में रंग-रूप को लेकर हीन भावना से ग्रस्त होने के कारण, जहाँ उनके पिता बड़ी बहन सुशीला को अधिक महत्व देते थे, वहीं उन्होंने लेखिका में देशप्रेम की भावना भी जागृत की। हालाँकि, वे अपनी उपलब्धियों पर कभी भी अपने पिता के समान विश्वास नहीं कर पाईं।
  2. शिक्षिका शीला अग्रवाल का प्रभाव: लेखिका की शिक्षिका शीला अग्रवाल ने उनके व्यक्तित्व को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जोशीले भाषणों ने लेखिका के खोए हुए आत्मविश्वास को पुनः स्थापित किया। साथ ही, शीला अग्रवाल ने लेखिका की देशप्रेम की भावना को सही दिशा और अभिव्यक्ति का माध्यम प्रदान किया, जिससे वह स्वतंत्रता आंदोलन में खुलकर भाग लेने लगीं। उन्होंने लेखिका को अच्छे साहित्य का चयन करके पढ़ने की कला भी सिखाई।

प्रश्न 2. इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?

इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?
Solution: लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर संबोधित किया क्योंकि उनका मानना था कि रसोई का काम लड़कियों की क्षमता और प्रतिभा को सीमित कर देता है। 'भटियारखाना' शब्द भट्टी (चूल्हा) से जुड़ा है, जहाँ प्रतिभाशाली लोग नहीं जाते। पिता के अनुसार, रसोई के काम में लग जाने से लड़कियाँ केवल पकाने-खाने तक ही सीमित रह जाती हैं और अपनी वास्तविक प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पातीं। इस प्रकार, वह इसे लड़कियों की प्रतिभा के क्षय का स्थान मानते थे।

प्रश्न 3. वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?

वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?
Solution: वह घटना कॉलेज से संबंधित थी। एक बार कॉलेज के प्रिंसिपल ने लेखिका के पिताजी को पत्र लिखकर बुलाया और लेखिका की गतिविधियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का कारण पूछा। यह सुनकर लेखिका बहुत भयभीत हो गई। जब पिताजी प्रिंसिपल से मिले और उन्हें लेखिका की गतिविधियों का असली कारण पता चला, तो उन्होंने अपनी बेटी से कोई शिकायत नहीं की, बल्कि यह कहकर उसकी प्रशंसा की कि यह समय की माँग है। पिताजी के इस अप्रत्याशित व्यवहार परिवर्तन को देखकर लेखिका को अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हो पाया।

प्रश्न 4. लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।

लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: लेखिका मन्नू भंडारी और उनके पिता के बीच कई बातों पर वैचारिक मतभेद थे:
  1. देशभक्ति की सीमा: पिताजी चाहते थे कि लेखिका देश के प्रति जागरूक हो, लेकिन उनकी देशभक्ति एक निश्चित सीमा तक ही सीमित रहे। लेखिका का स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेना, भाषण देना, नारे लगवाना और लड़कों के साथ सड़कों पर घूमना उन्हें पसंद नहीं था।
  2. स्त्रियों का दायरा: यद्यपि पिताजी स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी नहीं थे, फिर भी वे स्त्रियों का दायरा घर की चारदीवारी के भीतर ही सीमित रखना चाहते थे। इसके विपरीत, लेखिका खुले विचारों वाली थीं और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती थीं।
  3. विवाह: पिताजी अपनी बेटी का विवाह जल्दी कर देना चाहते थे, जबकि लेखिका अपनी शिक्षा और जीवन की अन्य आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती थीं। उन्होंने पिताजी की इच्छा के विरुद्ध जाकर अपनी पसंद से विवाह किया।
  4. माँ के प्रति पिता का व्यवहार: लेखिका के पिता का अपनी पत्नी (लेखिका की माँ) के प्रति व्यवहार अच्छा नहीं था। अपनी माँ के प्रति पिता के इस दुर्व्यवहार को लेखिका ज्यादती मानती थीं और इससे असहमत थीं।

प्रश्न 5. इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।

इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
Solution: 1942 से 1947 का समय भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण और जोशीला दौर था। इस दौरान देश का युवा वर्ग पूरे उत्साह के साथ आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा था। लेखिका मन्नू भंडारी भी इस राष्ट्रीय चेतना से अछूती नहीं रहीं और उन्होंने इस आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अपने पिता की इच्छाओं के विरुद्ध जाकर सड़कों पर घूम-घूमकर नारेबाजी की, हड़तालों और जलूसों में भाग लिया। उन्होंने अपने भाषणों, उत्साह और संगठन क्षमता के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रकार, वह उस दौर के युवाओं की देशभक्ति और सक्रियता का प्रतीक बनीं।

प्रश्न 6. लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।

लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
Solution: लेखिका के समय में, लड़कियों को खेलने और पढ़ने की आजादी तो थी, लेकिन यह आजादी अक्सर घर की चारदीवारी या पिता द्वारा निर्धारित सीमाओं तक ही सीमित रहती थी। आज के समय में स्थितियाँ काफी हद तक बदल गई हैं। आज लड़कियाँ न केवल गिल्ली-डंडा और पतंग उड़ाने जैसे पारंपरिक खेल खेलती हैं, बल्कि वे क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस जैसे प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। माता-पिता और समाज भी उन्हें इन खेलों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। महिलाएँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं। हालाँकि, यह भी सच है कि आज भी कुछ ऐसे सामाजिक वर्ग या परिवार मौजूद हैं जहाँ लड़कियों की स्वतंत्रता और भागीदारी को लेकर पुरानी सोच कायम है, लेकिन समग्र रूप से स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

प्रश्न 7. मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्राय: 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।

मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्राय: 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।
Solution: आस-पड़ोस मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो भावनात्मक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। यह सच है कि महानगरों में रहने वाले लोग अक्सर 'पड़ोस कल्चर' या पड़ोस की संस्कृति से वंचित रह जाते हैं। इसके कई कारण हैं:
  1. समय का अभाव: महानगरों में पुरुष और महिलाएँ दोनों ही अक्सर नौकरी या व्यवसाय के कारण घर से बाहर अधिक समय व्यतीत करते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में उनके पास पड़ोसियों से मिलने-जुलने या बातचीत करने का समय नहीं होता।
  2. आत्म-केंद्रितता: आधुनिक जीवनशैली और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण लोग अधिक आत्म-केंद्रित हो गए हैं। उनका सामाजिक दायरा सिमट गया है और वे अपने निजी जीवन में अधिक व्यस्त रहते हैं।
  3. बढ़ती दूरी: लोग अपने पड़ोसियों के सुख-दुःख में कम ही शामिल हो पाते हैं। त्योहारों या विशेष अवसरों पर भी साथ मिलकर मनाने की परंपरा कम होती जा रही है।
इस प्रकार, महानगरों की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती सामाजिक प्राथमिकताओं के कारण पड़ोस के साथ जुड़ाव और अपनापन कम होता जा रहा है, जिससे 'पड़ोस कल्चर' लगभग लुप्तप्राय हो गया है।

Common mistakes

  • लेखिका के पिता के प्रभाव को केवल नकारात्मक रूप में देखना।
  • स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका की भूमिका को कम आंकना।
  • रसोई को 'भटियारखाना' कहने के पीछे के सामाजिक संदर्भ को नजरअंदाज करना।
  • वर्तमान और अतीत की सामाजिक स्थितियों की तुलना में अति-सरलीकरण करना।

Revision tips

  • लेखिका के पिता और शिक्षिका शीला अग्रवाल के प्रभाव को अलग-अलग सूचीबद्ध करें।
  • स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका की सक्रिय भागीदारी के उदाहरणों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • 'भटियारखाना' शब्द के प्रतीकात्मक अर्थ को समझें।
  • लेखिका और उनके पिता के बीच हुए वैचारिक मतभेदों के मुख्य बिंदुओं को नोट करें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन दो व्यक्तियों का विशेष प्रभाव पड़ा?

Q2. लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया?

Q3. कॉलेज से आए पत्र के बाद लेखिका के पिता का व्यवहार कैसा था?

Q4. लेखिका की अपने पिता से किस बात पर वैचारिक टकराहट होती थी?

Q5. 1942-47 के स्वतंत्रता आंदोलन में लेखिका की क्या भूमिका थी?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के पाठ 'एक कहानी यह भी' में मुख्य रूप से क्या बताया गया है?

इस पाठ में लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के उन पहलुओं का वर्णन है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया, जैसे उनके पिता और शिक्षिका का प्रभाव, और स्वाधीनता आंदोलन में उनकी भागीदारी।

लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' क्यों कहा?

पिता का मानना था कि रसोई के काम में लगी लड़कियों की क्षमता और प्रतिभा पकाने-खाने तक ही सीमित रह जाती है और उनकी प्रतिभा का उचित उपयोग नहीं हो पाता।

स्वाधीनता आंदोलन में मन्नू भंडारी की क्या भूमिका थी?

मन्नू भंडारी ने स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें भाषण देना, नारेबाजी करना, हड़तालें और जुलूसों में शामिल होना शामिल था।

क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ वैसी ही हैं जैसी लेखिका के समय में थीं?

नहीं, आज लड़कियों के लिए स्थितियाँ काफी बदल गई हैं। वे खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अधिक स्वतंत्रता और अवसर प्राप्त कर रही हैं, हालांकि कुछ सामाजिक बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

महानगरों में 'पड़ोस कल्चर' क्यों लुप्त हो रहा है?

महानगरों में लोग कामकाज में व्यस्त रहते हैं, समय का अभाव होता है, और वे अधिक आत्म-केंद्रित हो गए हैं, जिसके कारण पड़ोसियों से मेलजोल कम हो गया है।

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