CBSE Class 10 Hindi NCERT Solutions: Balgobin Bhagat

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CBSE कक्षा 10 हिंदी के पाठ 11, रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित 'बाल्गोबिन भगत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान यहाँ प्रस्तुत हैं। ये समाधान बाल्गोबिन भगत के जीवन और चरित्र पर गहराई से प्रकाश डालते हैं, जो एक गृहस्थ होते हुए भी सच्चे साधु के सिद्धांतों का पालन करते थे। प्रश्नोत्तर में कबीर के आदर्शों के प्रति उनकी निष्ठा, उनके ईमानदार और स्पष्टवादी स्वभाव, भौतिक वस्तुओं से उनका अलगाव और उनकी गहरी आध्यात्मिक आस्था का अन्वेषण किया गया है। समाधानों में उनके विशिष्ट पहनावे, ग्रामीणों को चकित कर देने वाली उनकी अनुशासित दिनचर्या, उनके मनमोहक गायन और सामाजिक रीति-रिवाजों के प्रति उनके विद्रोह को भी शामिल किया गया है, जैसे कि पुत्र की मृत्यु और पुत्रवधू के पुनर्विवाह के प्रति उनका अपरंपरागत दृष्टिकोण। ये समाधान छात्रों को पाठ की बारीकियों को समझने और स्पष्ट व्याख्याओं तथा अंतर्दृष्टियों के माध्यम से अपनी परीक्षाओं की प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. रामवृझ बेनीपुरी - बालगोबिन भगत

Chapter summary

Chapter 11, 'Balgobin Bhagat' by Ramvriksh Benipuri, introduces the reader to a remarkable character who lives as a householder but adheres strictly to the principles of a saint. This NCERT Solutions set clarifies the key aspects of Balgobin Bhagat's life, including his adherence to Kabir's teachings, his integrity, his detachment, and his spiritual devotion. It explains why he was considered a saint despite his domestic life, his unique way of dealing with his son's death, and his progressive views on remarriage. The solutions also highlight his disciplined routine and his enchanting musical talent, providing a comprehensive understanding of his personality and his challenge to societal conventions.

Learning outcomes

  • Understand the character of Balgobin Bhagat as a householder with saintly qualities.
  • Analyze Balgobin Bhagat's adherence to Kabir's ideals and principles.
  • Explain the reasons behind Balgobin Bhagat being called a saint.
  • Describe Balgobin Bhagat's distinctive personality, attire, and daily routine.
  • Identify and discuss Balgobin Bhagat's unconventional approach to social norms and traditions.
  • Appreciate the significance of Balgobin Bhagat's singing and its impact on others.

Topics covered

Paper topics

  • Character sketch of Balgobin Bhagat
  • Balgobin Bhagat's adherence to Kabir's ideals
  • Saintly qualities of a householder
  • Balgobin Bhagat's honesty and integrity
  • Detachment from material possessions
  • Balgobin Bhagat's spiritual beliefs
  • Balgobin Bhagat's daily routine and discipline
  • Balgobin Bhagat's singing
  • Balgobin Bhagat's unconventional views on death
  • Balgobin Bhagat's stance on remarriage
  • Social norms and traditions
  • Ramvriksh Benipuri's writing style

Important topics

  • Balgobin Bhagat's saintly qualities despite being a householder
  • His adherence to Kabir's principles
  • His unconventional response to his son's death
  • His progressive views on remarriage
  • His disciplined daily routine and singing

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?
Solution:

बालगोबिन भगत एक गृहस्थ होते हुए भी साधु के समान गुण रखते थे, जिसके कारण उन्हें साधु कहा जाता था। उनकी ये विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

  1. कबीर के आदर्शों का पालन: वे कबीर के अनुयायी थे और उनके बताए आदर्शों पर चलते थे। वे कबीर के ही गीत गाते थे और उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारते थे।
  2. ईमानदारी और खरा व्यवहार: भगत कभी झूठ नहीं बोलते थे और उनका व्यवहार अत्यंत सीधा और सच्चा था। वे किसी से भी स्पष्ट रूप से बात करते थे और किसी भी प्रकार के छल-कपट से दूर रहते थे।
  3. अस्पर्शता का सिद्धांत: वे किसी की भी वस्तु को बिना अनुमति के छूते या इस्तेमाल नहीं करते थे। यह उनके आत्म-अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान को दर्शाता था।
  4. भौतिकता से विरक्ति: उनके खेत में जो भी उपज होती, उसका एक हिस्सा वे कबीर मठ में चढ़ाते थे और प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से अपना जीवन यापन करते थे। यह उनकी भौतिक सुख-सुविधाओं से अनासक्ति को प्रदर्शित करता था।
  5. लालच का अभाव: उनमें किसी भी प्रकार का लालच नहीं था। उन्होंने अपना सब कुछ ईश्वर को समर्पित कर दिया था, जिससे वे एक सच्चे साधु के समान प्रतीत होते थे।

प्रश्न 2

भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?
Solution:

बालगोबिन भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि उसके पति (भगत के बेटे) की मृत्यु के बाद, वह भगत के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी। उसे इस बात की चिंता थी कि यदि वह भी चली गई, तो भगत के लिए भोजन कौन बनाएगा और यदि वे बीमार पड़ गए तो उनकी देखभाल कौन करेगा। उसके जाने के बाद भगत की देखरेख करने वाला कोई नहीं बचता, इसलिए वह उनकी सेवा और साथ में रहना चाहती थी।

प्रश्न 3

भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?
Solution:

अपने बेटे की मृत्यु पर बालगोबिन भगत ने सामान्य लोगों की तरह शोक मनाने के बजाय, अपनी भावनाओं को एक अलग और आध्यात्मिक तरीके से व्यक्त किया। उन्होंने अपने पुत्र के पार्थिव शरीर को एक चटाई पर लिटाकर सफेद चादर से ढक दिया। इसके बाद, वे कबीर के भक्ति गीत गाकर आत्मा और परमात्मा के मिलन का उत्सव मनाने लगे। उनका मानना था कि आत्मा परमात्मा के पास ऐसे चली गई है जैसे कोई विरहिणी अपने प्रियतम से मिल गई हो। इस मिलन से बढ़कर कोई आनंद नहीं हो सकता। इस प्रकार, उन्होंने शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता के सिद्धांत को व्यक्त करते हुए अपनी गहरी आस्था का प्रदर्शन किया।

प्रश्न 4

भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।
Solution:

व्यक्तित्व: बालगोबिन भगत एक गृहस्थ होते हुए भी अत्यंत सादगी, सरलता और पवित्रता का जीवन जीते थे। उनका आचरण इतना आदर्शपूर्ण था कि वे मन से सच्चे संन्यासी लगते थे। वे किसी को भी अपने काम से कष्ट नहीं देना चाहते थे और बिना अनुमति के किसी की वस्तु को हाथ नहीं लगाते थे। वे हमेशा सच बोलते थे और खरा व्यवहार रखते थे। वे कबीर के आदर्शों का पूरी निष्ठा से पालन करते थे। उनका गायन इतना मधुर और प्रभावशाली था कि कबीर के पद उनके कंठ से सजीव हो उठते थे। आत्मा-परमात्मा पर उनका अटूट विश्वास था। अपने पुत्र की मृत्यु के उपरांत श्राद्ध की अवधि पूरी होते ही उन्होंने अपनी पुत्रवधू को उसके पिता के घर भेजकर उसका दूसरा विवाह करने का आदेश दिया, जो उनके वैराग्यपूर्ण और निःस्वार्थ व्यक्तित्व का प्रमाण है।

वेशभूषा: भगत मँझोले कद के गोरे-चिट्टे व्यक्ति थे, जिनकी उम्र साठ वर्ष से अधिक रही होगी। उनके बाल पक चुके थे, लेकिन वे लंबी दाढ़ी या जटाएँ नहीं रखते थे। उनका चेहरा हमेशा सफेद बालों से दमकता रहता था। वे बहुत कम कपड़े पहनते थे; कमर में केवल एक लंगोटी और सिर पर कबीरपंथियों की तरह कनफटी टोपी। ठंड के मौसम में वे ऊपर से एक काली कमली ओढ़ लेते थे। उनके माथे पर हमेशा रामानंदी चंदन का टीका लगा रहता था, जो नाक के सिरे तक आता था। गले में वे तुलसी की जड़ों से बनी एक बेडौल माला पहनते थे।

प्रश्न 5

बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
Solution:

बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण इसलिए थी क्योंकि वे जीवन के सिद्धांतों और आदर्शों का अत्यंत गहराई से पालन करते थे और उन्हें अपने आचरण में उतारते थे। अपनी वृद्धावस्था के बावजूद, उनमें गजब की स्फूर्ति थी। वे कड़ाके की सर्दी में भी, भादों की आधी रात में, भोर में सबसे पहले उठकर गाँव से दो मील दूर बहती गंगा नदी में स्नान करने जाते थे। वे अकेले ही अपने खेत में खेती करते थे और इस दौरान कबीर के गीतों में पूरी तरह तल्लीन रहते थे। विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी दिनचर्या में कभी कोई बदलाव नहीं आता था। एक वृद्ध व्यक्ति की अपने कार्यों के प्रति यह सजगता, निष्ठा और लगाव देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे।

प्रश्न 6

पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।
Solution:

बालगोबिन भगत के गायन में एक विशेष प्रकार का आकर्षण और जादू था। उनकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  1. सजीव प्रस्तुति: कबीर के पद उनके कंठ से ऐसे निकलते थे मानो वे स्वयं सजीव हो उठे हों। उनकी आवाज़ में एक अलौकिक मिठास थी।
  2. श्रवणीयता: जब वे खेतों में गाते थे, तो स्त्रियों के होंठ भी अनजाने ही उनके सुरों को गुनगुनाने लगते थे।
  3. वातावरण पर प्रभाव: गर्मियों की तपती शामों में भी उनके गीत वातावरण में शीतलता भर देते थे।
  4. जादुई प्रभाव: उनके गीतों में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने की अद्भुत क्षमता थी। संध्या समय जब वे अपनी मंडली के साथ गाने बैठते, तो उनकी मंडली उनके पदों को दोहराती थी।
  5. भावनात्मक जुड़ाव: भगत के स्वर के आरोह के साथ श्रोताओं का मन भी ऊपर उठता चला जाता था। लोग अपने तन-मन की सुध-बुध खोकर संगीत की स्वर-लहरी में पूरी तरह तल्लीन हो जाते थे।

प्रश्न 7

कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।
Solution:

बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों को नहीं मानते थे। पाठ में ऐसे कई मार्मिक प्रसंग हैं जो इस बात को स्पष्ट करते हैं:

  1. पुत्र की मृत्यु पर उत्सव: जब भगत के इकलौते पुत्र की मृत्यु हुई, तो उन्होंने सामान्य लोगों की तरह शोक मनाने के बजाय, इसे आत्मा का परमात्मा से मिलन मानकर कबीर के पद गाए और उत्सव मनाया। यह उस समय की सामाजिक मान्यता के बिल्कुल विपरीत था, जहाँ मृत्यु को दुखद घटना माना जाता था।
  2. दाह संस्कार: उन्होंने अपने पुत्र का दाह संस्कार सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपनी पुत्रवधू से ही दाह संस्कार संपन्न कराया, जो उस समय की पितृसत्तात्मक समाज की मान्यताओं को चुनौती देता था।
  3. विधवा पुनर्विवाह: पुत्र की मृत्यु के बाद, उन्होंने अपनी पुत्रवधू को उसके पिता के घर भेज दिया और आदेश दिया कि उसकी दूसरी शादी कर दी जाए। उस समय समाज में विधवा विवाह का प्रचलन न के बराबर था, और भगत का यह निर्णय सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध एक साहसिक कदम था।
  4. भिक्षावृत्ति का विरोध: वे अन्य साधुओं की तरह भिक्षा माँगकर खाने के विरोधी थे। वे स्वयं खेती करके अपनी आजीविका कमाते थे, जो उनकी आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान को दर्शाता था।
  5. स्पष्टवादिता और व्यवहार: वे किसी की वस्तु को बिना पूछे इस्तेमाल न करने और सीधी बात करने जैसे सिद्धांतों पर चलते थे, जो उस समय के सामाजिक व्यवहार से भिन्न हो सकता था।

Common mistakes

  • Confusing Balgobin Bhagat's householder status with a lack of saintly qualities.
  • Misinterpreting his detachment as indifference or lack of emotion.
  • Overlooking the specific social norms he challenged.
  • Failing to connect his actions to the principles of Kabir.

Revision tips

  • Focus on the specific qualities that made Balgobin Bhagat a saintly figure.
  • Note down the examples of his defiance of social customs.
  • Pay attention to the descriptions of his daily routine and singing.
  • Relate his actions to the teachings of Kabir mentioned in the chapter.

Practice MCQs

Q1. बालगोबिन भगत को गृहस्थ होते हुए भी साधु क्यों कहा जाता था?

Q2. बालगोबिन भगत अपनी पुत्रवधू को उसके पिता के घर क्यों भेज रहे थे?

Q3. बेटे की मृत्यु पर बालगोबिन भगत ने कैसा व्यवहार किया?

Q4. बालगोबिन भगत की वेशभूषा का मुख्य अंग क्या था?

Q5. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के लिए अचरज का कारण क्यों थी?

Frequently asked questions

Who is Balgobin Bhagat?

Balgobin Bhagat is the central character of Chapter 11 of Class 10 Hindi NCERT, written by Ramvriksh Benipuri. He is depicted as a householder who lives a simple life but strictly follows the principles of a saint.

Why was Balgobin Bhagat considered a saint?

He was considered a saint because he lived by the ideals of Kabir, was honest, had integrity, was detached from material possessions, and followed a disciplined spiritual life, despite being a householder.

How did Balgobin Bhagat react to his son's death?

Instead of mourning, Balgobin Bhagat celebrated his son's death as a union of the soul with the divine, singing devotional songs and maintaining his usual routine.

What was Balgobin Bhagat's view on remarriage?

He believed in social reform and, after his son's death, insisted that his daughter-in-law remarry to avoid widowhood and loneliness.

What made Balgobin Bhagat's daily routine remarkable?

His remarkable routine involved waking up very early, even in harsh weather, to bathe in the river and then diligently working in his fields while engrossed in singing.

What is the main lesson from Balgobin Bhagat's life?

The main lesson is that one can lead a life of integrity, discipline, and spiritual devotion while fulfilling worldly responsibilities, and that true sainthood lies in actions and principles, not just renunciation.

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